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Geriपटना: ख़ान सर कोचिंग विवाद में रौशन सर को ज़मानत, भाई की मौत का आरोप
पटना: ख़ान सर कोचिंग विवाद में रौशन सर को ज़मानत, भाई की मौत का आरोप
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BBC हिंदी16.06.2026Siyaset10 dk okumaIndia

पटना: ख़ान सर कोचिंग विवाद में रौशन सर को ज़मानत, भाई की मौत का आरोप

Hızlı Bakış

ज्ञान बिन्दु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद को पटना सिविल कोर्ट से ज़मानत मिली. उन पर 'ख़ान सर' की कोचिंग पर हमला करवाने का आरोप था. ज़मानत से एक दिन पहले उनके भाई की नेपाल में संदिग्ध मौत हुई.

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Author, सीटू तिवारी

पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना

प्रकाशित 4 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 9 मिनट

फ़ैज़ल ख़ान उर्फ़ 'ख़ान सर' की कोचिंग विवाद मामले में रौशन आनंद उर्फ़ 'रौशन सर' को पटना सिविल कोर्ट से ज़मानत मिल गई है.

रौशन आनंद ज्ञान बिन्दु कोचिंग के निदेशक हैं और बीती 2 जून को 'ख़ान सर' की कोचिंग केजीएस (ख़ान ग्लोबल स्टडीज़) पर हमला करवाने के आरोप को लेकर जेल में थे.

रौशन आनंद के वकील रमाकांत शर्मा ने बताया, "रौशन आनंद घटनास्थल पर नहीं थे. पुलिस ने 4 जून को जो एफ़आईआर की है, उसमें 'ख़ान सर' के कहने पर उनके बॉडीगार्ड ने फ़ायरिंग की थी. इस फ़ायरिंग में कोई नुक़सान नहीं हुआ था. कोर्ट ने ज़मानत देते हुए कहा है कि दो टीचर में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए. दो संस्थान इस तरह से न लड़ें कि आपराधिक कृत्य में संलग्न हो जाएं. वो गुरू की तरह व्यवहार करें."

सोमवार को ज़मानत मिलने से एक दिन पहले, यानी रविवार को रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल के एक होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. प्रिंस यादव भी इस मामले में नामजद थे.

'ख़ान सर' की लोकप्रियता के बीच ये सवाल उठता है कि आख़िर रौशन आनंद कौन हैं?

'रौशन सर' का क्रेज़ छात्रों के बीच इतना क्यों है कि उनके समर्थन में छात्र कई बार पटना में प्रोटेस्ट मार्च निकाल चुके हैं?

बिहार में प्रतियोगी कोचिंग में पढ़ने वाले स्टूडेंट अपने टीचर्स को लेकर इतने पज़ेसिव क्यों हैं?

सहरसा के रौशनः खेत बेचकर परिवार ने पढ़ाया

रौशन आनंद मूल रूप से सहरसा के धमसैना गांव के रहने वाले हैं. वह किसान परिवार से हैं. उनका शुरुआती जीवन आर्थिक तंगी में बीता.

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अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में रौशन आनंद ने कई मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू दिया है.

इसके मुताबिक़, रौशन आनंद पढ़ने में तेज़ थे. उनकी मां चाहती थी कि वह इंजीनियर बनें. साल 2009 में वह पटना आए लेकिन यहां की पढ़ाई से वह संतुष्ट नहीं हुए तो कोटा चले गए. वहां पढ़ाई करके उन्होंने इंजीनियरिंग की परीक्षा पास की जिसके बाद उनका दाख़िला साल 2012 में बीआईटी मेसरा में हो गया.

रौशन आनंद के पिता खेत बेचकर उनको इंजीनियरिंग पढ़ा रहे थे.

लेकिन आर्थिक तंगी इस क़दर थी कि रौशन को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी. रौशन पटना वापस लौटे और बिहार पुलिस की तैयारी शुरू की.

उन्होंने लिखित परीक्षा को पास कर लिया लेकिन शारीरिक परीक्षा पास नहीं कर पाए. बाद में उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग की भी परीक्षा दी लेकिन यहां वह इंटरव्यू में असफल रहे.

रौशन आनंद बताते हैं, "इसके बाद मैंने ट्यूशन पढ़ाया, जिस लॉज में रहते थे उसके बच्चों को पढ़ा देते थे ताकि मुझको एक वक़्त का खाना मिल जाए. घर वाले नाराज़ थे कि मैं सब कुछ अपने मन का कर रहा हूं. जब मेरे पढ़ाए छात्र सफल होने लगे तो उन्हीं लोगों ने मुझे कोचिंग खोलने के लिए प्रेरित किया."

ज्ञान बिन्दु कोचिंग जो 'दरोगा फ़ैक्ट्री' बन गई

साल 2017 में पटना के मुसल्लहपुर हाट के किसान कोल्ड स्टोरेज कैंपस के एक छोटे से कमरे में रौशन आनंद ने ज्ञान बिन्दु कोचिंग की शुरुआत की. इस कोचिंग में तकरीबन 40 बच्चे बैठ सकते हैं. आज कोचिंग का वह छोटा सा कमरा, ज्ञान बिन्दु लाइब्रेरी में तब्दील हो गया है.

रौशन आनंद बताते हैं, "इस कमरे के लिए एक लाख रुपये देने थे. ये मुझे मेरे दोस्त ने ब्याज पर दिलवाए थे. उस कोचिंग में एक खिड़की थी जिसके पास से गुज़रते हुए छात्र मेरे पढ़ाने के ढंग को देखते थे. किसान कोल्ड स्टोरेज में उस वक्त 20 से ज़्यादा कोचिंग थी और मेरे पढ़ाने के सरल ढंग को स्टूडेंट बहुत पसंद करते थे."

ज्ञान बिन्दु कोचिंग में काम करने वाले नीतीश कुमार बीबीसी से बताते हैं, "बाद में रौशन सर ने एक और कोचिंग किसान कोल्ड स्टोरेज में ही खोली. फिर बाद में पटना में दो अन्य जगह कोचिंग खोली. एक-एक बैच में हज़ारों बच्चे पढ़ते हैं."

ज्ञान बिन्दु कोचिंग एसएससी, रेलवे, बैंकिंग आदि सेवाओं की तैयारी करवाती है लेकिन ये कोचिंग छात्रों के बीच 'दरोगा फ़ैक्ट्री' के तौर पर मशहूर है.

छात्रों के बीच 'रौशन सर' के नाम से लोकप्रिय रौशन आनंद दावा करते रहे हैं, "हमारी कोचिंग से बड़ी संख्या में बिहार दरोगा का रिज़ल्ट आता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि मैनें ख़ुद चार बार बिहार दरोगा परीक्षा पास की है लेकिन इंटरव्यू में छंट गया हूं. मुझे मालूम है कि छात्र कहां ग़लती कर सकते हैं?"

ऑनलाइन लो फ़ीस मॉडल

बीती 2 जून को ख़ान ग्लोबल स्टडीज़ पर एफ़आईआर के बाद 'ख़ान सर' ने मीडिया से कहा, "हमारी कोचिंग की फ़ीस कम है, इसको बढ़ाने के लिए ज्ञान बिन्दु के लोगों ने फ़ायरिंग करवाई है."

'ख़ान सर' के इस दावे पर ज्ञान बिन्दु में पढ़ाने वाले टीचर वरुण कुमार कहते हैं, "इस मामले में फ़ीस की कोई बात ही नहीं है. ज्ञान बिन्दु की फ़ीस तो ख़ान सर की फ़ीस से भी कम है."

बिहार के कोचिंग कारोबार में दरअसल लो फ़ीस मॉडल बहुत महत्वपूर्ण हो गया है. 'ख़ान सर' और 'रौशन सर' दोनों के ही फ़ीस स्ट्रक्चर को देखें तो ये लो फ़ीस मॉडल हैं. ज्ञान बिन्दु की वेबसाइट देखें तो 99 रुपये में जनरल स्टडीज़ का फुल लेंथ टेस्ट ऑनलाइन और ऑफ़लाइन है. इसी तरह बॉयोलॉजी का फांउडेशन बैच 499 रुपये, डेली टेस्ट सिरीज़ 149 रुपये, दरोगा बैच 2,999 रुपये आदि में उपलब्ध है.

ख़ान ग्लोबल स्टडीज़ में भी बिहार पुलिस चालक गतिमान बैच 249 रुपये में, बिहार दरोगा क्रैश कोर्स 199 रुपये, सिविल कोर्ट पियुन 399 रुपये, जीके डेली टेस्ट 99 रुपये आदि में उपलब्ध है.

बिहार के छात्रों के बीच लोकप्रिय होने की वजह क्या ये लो फ़ीस मॉडल है?

इस सवाल पर यथार्थ कोचिंग के संचालक रजनीश झा बीबीसी से कहते हैं, "कोविड के बाद ऑनलाइन कोर्सेज़ की डिमांड बढ़ी है. इनकी लागत न के बराबर है, जिसके चलते टीचर्स कम फ़ीस लेकर बच्चों को मॉडल पेपर या कोर्स बेच रहे हैं."

रजनीश कहते हैं कि इन दोनों ही टीचर की लोकप्रियता ग्रुप सी और डी की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच सबसे ज़्यादा है.

वह कहते हैं, "आप देखिए कि बिहार में छात्रों का कोई आंदोलन होता है तो ये टीचर मुखर होकर बच्चों के सेंटीमेंट या उनमें जो गुस्सा है उसको कैश करने की कोशिश करते हैं. आरआरबी, बीपीएससी आंदोलन इसके उदाहरण हैं. यह बिहार में संभव हो पाता है क्योंकि यहां दिल्ली या प्रयागराज की तरह स्टूडेंट लीडर सक्रिय नहीं है. अगर स्टूडेंट लीडर सक्रिय होते तो ख़ान या रौशन सर को यह स्पेस नहीं मिल पाता."

'ख़ान सर ने मेरे भाई की हत्या करवाई'

रौशन आनंद की गिरफ़्तारी होने के बाद से ही छात्रों ने इसके विरोध में कई बार पटना में प्रदर्शन किया था.

सोमवार को ज़मानत मिलने के बाद रौशन आनंद ने मीडिया से कहा, "फ़ैज़ल ख़ान ने मेरे भाई की हत्या करवाई है. मैं बाहर था तो हत्या क्यों नहीं हुई? मेरे जेल जाते ही मेरे भाई की हत्या करवा दी गई."

दरअसल रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव का शव बीते रविवार को नेपाल के एक होटल में मिला था.

सोशल मीडिया पर प्रिंस यादव के कथित मृत शरीर की जो तस्वीर वायरल हो रही है उसमें उनकी आंखों के ऊपर चोट के निशान हैं. ख़ान कोचिंग विवाद मामले में प्रिंस यादव भी नामजद अभियुक्त थे.

प्रिंस यादव के साथ होटल में रुके उनके दोस्त अंकित कुमार ने कहा है, "प्रिंस को पहले से ही मानसिक बीमारी थी. उसकी दवाई भी चलती थी. इधर कई दिनों में वह सो नहीं पा रहा था. लेकिन उसने दवाई लेना स्टार्ट कर दिया था और सोना शुरू कर दिया था. इस बीच उसकी सांस तेज़ चलने लगी. हम लोग उसे हॉस्पिटल ले गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया."

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, नेपाल पुलिस मौत के कारणों की जांच कर रही है. लेकिन इस मृत्यु के बाद 'ख़ान सर' ने एक वीडियो मैसेज जारी किया है. उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

'ख़ान सर' ने इस वीडियो में कहा है, "मुझे पहले लगा यह फ़ेक न्यूज़ है. अटकलों पर मत जाएं, यह बहुत संवेदनशील मामला है. पुलिस अपना आधिकारिक बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करे. इस मामले में किसी तीसरे आदमी की साज़िश है."

'बुलेट देंगे, थार देंगे, डबल स्टार भी देंगे'

रौशन आनंद बीते साल बिहार में दरोगा बहाली का रिज़ल्ट आने पर सफल छात्रों को बुलेट जैसी महंगी बाइक देने को लेकर ख़बरों में आए थे.

रौशन आनंद ने उस वक़्त कहा था, "हमारे संस्थान ने घोषणा की थी कि टॉप बीस में आने वाले स्टूडेंट को बुलेट देंगे. मेरे संस्थान का बच्चा टॉप करेगा तो उसे थार भी देंगे. हम बुलेट भी देंगे, थार भी देंगे और डबल स्टार भी देंगे. दूसरे संस्थान के गणमान्य शिक्षक हमारा मज़ाक उड़ा रहे थे."

रौशन आनंद ने जिस 'दूसरे गण्यमान्य शिक्षक' का ज़िक्र किया, कथित तौर पर वो 'ख़ान सर' ही थे.

'ख़ान सर' और 'रौशन सर' का विवाद नया नहीं है.

इन दोनों ही कोचिंग में क्रेडिट वार और बिहार में कोचिंग कारोबार पर वर्चस्व के लिए विवाद होता रहता है.

कुछ माह पहले फ़ॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के टॉपर अभिषेक पटेल को लेकर दोनों कोचिंग ने अपना दावा पेश किया था.

रौशन आनंद का कहना था कि यह स्टूडेंट उनकी कोचिंग का है, लेकिन ख़ान ग्लोबल स्टडीज़ उसे अपने स्टूडेंट के तौर पर पेश कर रही है. हालांकि अभिषेक पटेल ने रौशन आनंद के दावों को ख़ारिज किया था.

बीती 2 जून को हुआ विवाद बिहार सिपाही बहाली में सफल हुए छात्रों की संख्या और पोस्टर लगाने को लेकर था.

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बिहार में नई कोचिंग नियमावली बनाने की बात कही है.

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Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

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