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رجوعमंगलयान से जुड़ी साड़ी के अमेरिका के एक बड़े म्यूज़ियम की शान बनने की कहानी
मंगलयान से जुड़ी साड़ी के अमेरिका के एक बड़े म्यूज़ियम की शान बनने की कहानी
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BBC हिंदी13‏/6‏/2026علوم4 د قراءةIndia

मंगलयान से जुड़ी साड़ी के अमेरिका के एक बड़े म्यूज़ियम की शान बनने की कहानी

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भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक नंदिनी हरिनाथ की वह रेशमी साड़ी, जिसे उन्होंने मंगलयान मिशन के लॉन्च के दिन पहना था, अब अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित स्मिथसोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूज़ियम में प्रदर्शित की गई है। यह साड़ी भारत के सफल मंगल अभियान और महिला वैज्ञानिकों की भूमिका का प्रतीक है।

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भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक नंदिनी हरिनाथ अपने जीवन के सबसे ख़ास दिनों में से एक दिन को याद करते हुए बताती हैं कि उस दिन वो लाल और नीले रंग की चमकदार रेशमी साड़ी पहनकर दफ्तर पहुंची थीं.

अब वही साड़ी अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित स्मिथसोनियन के नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूज़ियम में खास जगह पर प्रदर्शित की गई है.

नंदिनी भारत के पहले मंगल अभियान 'मंगलयान' में डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर थीं. यह साड़ी उन्होंने 1 दिसंबर 2013 को पहनी थी.

नंदिनी को जो साड़ियां अपने पिता से गिफ्ट में मिलीं, वो उनके लिए बेहद खास हैं. इन्हीं में से किसी साड़ी को वो अक्सर किसी बड़े अवसर या भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी का प्रतिनिधित्व करने के समय पहनती रही हैं.

अब वो दिन सामने था, जब अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकालकर मंगल की ओर करीब 300 दिनों की यात्रा पर भेजना था. इस बड़े और खास दिन के लिए भी नंदिनी ने अपने पिता की दी हुई साड़ी को चुना. उस दिन नंदिनी और इसरो के अन्य वैज्ञानिक कंट्रोल रूम में मौजूद थे.

2016 में दिए एक इंटरव्यू में नंदिनी ने कहा था, "वह करो या मरो जैसा पल था. मिशन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया उसी दिन होनी थी. हमें तय करना था कि अंतरिक्ष यान कब जाएगा, कैसे जाएगा और किस दिशा में जाएगा. मिशन की सफलता इस बात पर निर्भर थी कि हम उस दिन क्या करते हैं."

24 सितंबर 2014 को मंगलयान सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंच गया. इसके साथ ही भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया.

उसी दिन नंदिनी और अन्य महिला वैज्ञानिकों की चर्चा दुनिया भर में होने लगी. इसकी वजह इसरो में साड़ी पहने महिलाओं के जश्न मनाते हुए एक तस्वीर थी, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी. इस तस्वीर ने उस धारणा को चुनौती दी कि भारत में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सिर्फ पुरुषों का वर्चस्व है.

बाद में इसरो ने साफ किया कि तस्वीर में दिख रही महिलाएं प्रशासनिक कर्मचारी थीं. हालांकि संस्था ने यह भी बताया कि कई महिला वैज्ञानिक इस मिशन का हिस्सा थीं और उस समय कंट्रोल रूम में मौजूद थीं.

'प्रभावशाली तस्वीर'

स्मिथसोनियन संग्रहालय में अंतरिक्ष इतिहास के क्यूरेटर मैट शिंडेल ने बीबीसी से कहा कि उन्हें वह तस्वीर बहुत प्रभावशाली लगी.

उन्होंने कहा, "मुझे लगा कि इस महत्वपूर्ण मिशन में प्रमुख भूमिका निभाने वाली इन 'रॉकेट वुमन' की कहानी लोगों को बताई जानी चाहिए."

2020 में शिंडेल ने नंदिनी को ईमेल किया. इसके बाद दोनों ने इस पर बात करनी शुरू की कि कौन-सी चीज़ भारत के मंगल मिशन और उसमें नंदिनी की भूमिका का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व कर सकती है.

शिंडेल ने कहा, "मैंने उनसे पूछा कि वह कौन-सी चीज़ संग्रहालय को देने के लिए तैयार होंगी. आखिरकार हमने उस साड़ी पर सहमति बनाई, जो उन्होंने उस दिन पहनी थी जब मंगलयान पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकला था."

अमेरिका के प्रतिष्ठित संग्रहालय में पहुंची भारतीय साड़ी अपने साथ एक छोटी-सी सीख भी लेकर आई. इसे प्रदर्शित करने के लिए वस्त्र विशेषज्ञ बेथ नाइट ने यूट्यूब पर साड़ी पहनने के वीडियो देखे और फिर उसे पुतले पर सजाया.

शिंडेल का कहना है कि यह साड़ी उनके संग्रह में मौजूद उन अन्य ऐतिहासिक कपड़ों जैसी है, जिन्हें किसी महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन के दौरान ग्राउंड कंट्रोल में पहना गया था.

उदाहरण के तौर पर नासा के फ्लाइट कंट्रोल प्रमुख जीन क्रांज़ की वह जैकेट, जिसे उन्होंने 1970 में अपोलो-13 मिशन के दौरान पहना था.

हर हफ्ते हज़ारों लोग स्मिथसोनियन संग्रहालय देखने आते हैं. संग्रहालय के पास भारत से जुड़ी कई वस्तुएं भी हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश भारतीय वायु सेना या विमानन कंपनियों से संबंधित हैं.

संग्रहालय में एक चांदी की स्मृति-थाली भी रखी हुई है. इसे इसरो ने साइंस फिक्शन लेखक आर्थर सी. क्लार्क को उनके 90वें जन्मदिन पर 2007 में भेंट किया था.

शिंडेल कहते हैं, "हमारे अंतरग्रहीय विज्ञान संग्रह के लिए भारत से जुटाई गई यह पहली चीज़ है. साथ ही यह हमारे संग्रह की पहली साड़ी भी है."

साड़ी को इसलिए चुना गया

यह साड़ी एयर एंड स्पेस म्यूज़ियम की 'फ्यूचर्स इन स्पेस' गैलरी में प्रदर्शित की गई है. यहां खिलौनों, खेलों और फ़िल्मी पोस्टरों समेत कई वस्तुएं रखी गई हैं.

साड़ी को उस मशहूर नीली टी-शर्ट के बगल में रखा गया है, जिसे 1983 के स्पेस शटल मिशन में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सैली राइड ने पहना था. उसी मिशन के साथ वह अंतरिक्ष में जाने वालीं पहली अमेरिकी महिला बनी थीं.

शिंडेल कहते हैं कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को अंतरिक्ष में हाल के वर्षों में हुई उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ना है.

उन्होंने कहा, "अंतरिक्ष को लेकर हमारे सामने कई सवाल हैं. यह प्रदर्शनी लोगों को ऐसे महत्वपूर्ण सवालों पर सोचने के लिए प्रेरित करती है कि अंतरिक्ष में कौन जाएगा, इसका फैसला कौन करता है? हम अंतरिक्ष में क्यों जाते हैं? और वहां पहुंचकर क्या करेंगे?"

उनके अनुसार यह प्रदर्शनी ख़ासतौर पर इस सवाल पर केंद्रित है कि इंसान अंतरिक्ष में क्यों जाना चाहता है. यहां प्रदर्शित वस्तुएं उन प्रेरणाओं और कारणों को दर्शाती हैं, जो अंतरिक्ष अभियानों के पीछे काम करते हैं.

वह कहते हैं कि नंदिनी की साड़ी दो तरह की प्रेरणाओं का प्रतिनिधित्व करती है. पहली, यह भारत के पहले मंगल मिशन और देश के सफल अंतरिक्ष कार्यक्रम पर राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है.

दूसरा यह कि नंदिनी की व्यक्तिगत कहानी प्रेरणादायक है, क्योंकि उनकी सफलता और अधिक महिलाओं को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर सकती है.

शिंडेल के अनुसार साड़ी को इसलिए भी चुना गया क्योंकि इसका सांस्कृतिक महत्व है और इसे आसानी से पहचाना जा सकता है.

प्रदर्शनी में आने वाले लोग टचस्क्रीन की मदद से इसे लेकर और अन्य प्रदर्शित वस्तुओं के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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