जंतर मंतर से लेकर बिहार तक, स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ हुई पुलिस की कार्रवाई पर उठते सवाल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई और बिहार में पुलिस की भूमिका पर सवाल
نظرة سريعة
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और बिहार में छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवालों पर चर्चा। बीबीसी ने पैलेट गन के इस्तेमाल की पुष्टि की, जबकि दिल्ली पुलिस ने इनकार किया।
ملخص مُنشأ بالذكاء الاصطناعي
لماذا يهم
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान जिन बातों पर सबसे ज़्यादा बहस हुई, उनमें से एक है प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई।
लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के अलावा प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने के भी कई वीडियो सामने आए।
वहीं बीबीसी पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े कम से कम चार मामलों की पुष्टि कर पाया है जबकि दिल्ली पुलिस ने इससे इनकार किया है। जंतर-मंतर पर निगरानी के लिए लगाए गए सर्विलांस वैन और चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक ने भी नई चर्चा छेड़ दी।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर सामने आए एक अन्य वीडियो में बिहार पुलिस का एक सिपाही छात्र प्रदर्शनकारियों की ओर एके-47 ताने दिखाई दिया।
ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या छात्रों पर किया गया ऐसा बल प्रयोग ज़रूरी था? किसी लोकतंत्र में पुलिस बल प्रयोग की सीमा क्या होनी चाहिए? कौन तय करेगा कि बल प्रयोग ज़रूरी था या नहीं?
द लेंस के इस एपिसोड में ऐसे सभी सवालों पर चर्चा की गई। इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए रिटायर्ड आईपीएस और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक विभूति नारायण राय और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह।
नोट: द लेंस का ये एपिसोड गुरुवार 06 अगस्त को रिकॉर्ड किया गया है।
प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर, सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः आशीष जैन
أسئلة مفتوحة
- छात्रों पर बल प्रयोग कितना ज़रूरी था?
- पुलिस बल प्रयोग की सीमा क्या होनी चाहिए?



