कॉकरोच जनता पार्टी के 'संसद मार्च' के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप और विवाद
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दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं, जिसमें कई लोग घायल हुए. राहुल गांधी ने एक पीड़ित छात्र को पेश कर कार्रवाई की मांग की, जबकि दिल्ली पुलिस ने आरोपों को गलत बताया. सीआरपीएफ़ ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं.
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20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के 'संसद मार्च' के दौरान जंतर मंतर पर हुए लाठीचार्ज और सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, जिसके बाद पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे.
कॉकरोच जनता पार्टी के 'संसद मार्च' के दौरान सोमवार को जंतर मंतर और आसपास के इलाकों में हुए लाठीचार्ज और सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए.
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की हिंसा में उसके कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं.
इसी घटना में गंभीर रूप से घायल हुई 21 साल की एक स्टूडेंट दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में भर्ती हैं. इन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन दो दिन पहले उससे हटाया गया. मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक उन्हें होश आ गया है और हालत स्थिर है, लेकिन अब भी क्रिटिकल केयर की ज़रूरत है.
इन सभी ख़बरों के बीच कुछ प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लग रहे थे.
राहुल गांधी ने उठाया मुद्दा
शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी साहिल नाम के युवक को मीडिया के सामने प्रस्तुत किया.
उन्होंने कहा, "20 जुलाई को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे 19 वर्षीय साहिल के चेहरे पर दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया."
"साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं, लेकिन अपने परिवार का सहारा बनने के लिए वे पार्ट-टाइम कार भी चलाते हैं. वे ख़ुद 2025 में एसएससी दिल्ली कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के पीड़ित रहे हैं."
राहुल गांधी ने कहा, "हम साहिल के साथ हैं. हम जवाबदेही की मांग कर रहे हर छात्र के साथ हैं. मोदी जी, अपने इस पाप के लिए देश के बच्चों से माफ़ी मांगिए, इसके ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई कीजिए और धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त कीजिए."
क्या होती है पैलेट गन?
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने 20 जुलाई की रात एक्स पर एक घायल का वीडियो पोस्ट किया.
उन्होंने लिखा, 'दिल्ली पुलिस की गुंडागर्दी! शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया.'
सौरव दास को जवाब देते हुए डीसीपी (नई दिल्ली) ने एक्स पर जवाब दिया और लिखा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिसबलों द्वारा पैलेट गन इस्तेमाल करने से जुड़ी ख़बरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं.'
'आम लोगों को ऐसा कंटेंट शेयर या सर्कुलेट ना करने की सलाह दी जाती है, जो वेरिफ़ाइड नहीं हैं. कोई भी चीज़ पोस्ट करने या जानकारी फॉरवर्ड करने से पहले ऑफिशियल सोर्स से फैक्ट को वेरिफ़ाई कर लें.'
लेकिन अब मीडिया में ख़बरें आ रही हैं कि सोमवार को जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ था. और दिल्ली के अस्पतालों में कम से कम तीन ऐसे लोग भर्ती हैं, जिनका पैलेट गन से मिले ज़ख़्मों का इलाज चल रहा है.
लेकिन ये पैलेट गन होती क्या है और इसे लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है?
दुनिया भर में पुलिस और सेना, गुस्साई भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो गैर-घातक तरीके इस्तेमाल करती है, उनमें पैलेट गन भी शामिल हैं. दूसरे उपायों में आंसू गैस के गोले, पानी की बौंछार, पेपर स्प्रे और टेज़र गन आदि शामिल हैं.
पैलेट गन असल में एयर-पावर्ड हथियार होता है, जो छोटे-छोटे मेटल या प्लास्टिक प्रोजेक्टाइल शूट करता है. कुछ दफ़ा सुरक्षाकर्मी इन्हें भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं. आम तौर पर ये स्पोर्ट्स और पेस्ट कंट्रोल में काम आती हैं.
पैलेट गन आम तौर पर तीन किस्मों की होती हैं.
पहली एयर पिस्टल. ये ऐसी हैंडगन होती हैं, जिसमें स्प्रिंग, गैस या कार्बन डाइऑक्साइड इस्तेमाल होती है और इन्हें टारगेट प्रैक्टिस के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
दूसरी एयर राइफ़ल. ये लंबे बैरल वाली गन होती हैं, जिनमें एक्योरेसी बेहतर होती है और ये स्मॉल गेम हंटिंग या दूसरे स्पोर्ट में काम आती हैं.
और तीसरी होती हैं क्राउड कंट्रोल शॉटगन. ये 12 गेज के पंप एक्शन वेपन होते हैं, जिन्हें सिक्योरिटी फोर्स इस्तेमाल करती हैं. इनमें मल्टिपल स्मॉल पेलेट से पैक कार्टरेज फायर किए जाते हैं.
ये नियमित फायरआर्म से इस तरह अलग होती हैं कि इनमें गनपाउडर एक्सप्लोज़न के बजाय कम्प्रेस्ड एयर इस्तेमाल होती है.
ये मॉडीफाइड पंप-एक्शन हथियार कार्टरेज फ़ायर करते हैं, जिनमें छोटे-छोटे लेड, मेटल या रबड़ के पेलेट होते हैं. इम्पैक्ट होने पर ये तेज़ी से बिखरते हैं और गंभीर चोटें पहुंचा सकते हैं. यहां तक कि अगर पेलेट गन की चपेट में आने से आंखों की रोशनी तक जा सकती है.
ये 500 गज तक की कम दूरी पर असरदार होती हैं, लेकिन अगर बहुत पास से चलाई जाएं तो जानलेवा हो सकती हैं, ख़ासकर तब जब आंख जैसे संवेदनशील अंगों पर चोट लगे. पैलेट, शरीर के soft tissues में घुस सकते हैं.
इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट दी है, जिसमें कहा गया है कि सीआरपीएफ़ ने ये पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं कि 20 जुलाई को कब क्या हुआ था.
साथ ही ये जांच भी की जा रही है क्या उसकी रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ़) के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया?
आरएएफ़, सीआरपीएफ़ की स्पेशलाइज़ यूनिट है, जिसका गठन साल 1992 में दंगों से निपटने के लिए किया गया था.
पैलेट गन से ज़ख़्मी लोग
20 जुलाई को हुए प्रदर्शन और सुरक्षाकर्मियों के एक्शन के बाद पैलेट गन से ज़ख़्मी होने वाले तीन लोगों की जानकारी सामने आई है.
अस्पताल में भर्ती 25 साल के इरशाद शेख़ गुरुग्राम में काम करते हैं, 19 साल के साहिल लोचब दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट हैं और तीसरे व्यक्ति 28 साल के आउटलुक मैगज़ीन के साथ काम करने वाले पत्रकार हैं.
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पैलेट गन के इस्तेमाल से साफ़ इनकार किया है, लेकिन पैलेट गन और शॉक बेटन रैपिड एक्शन फोर्स के गियर का हिस्सा है.
सीआरपीएफ़ की इस इकाई के सुरक्षाकर्मी 20 जुलाई को पुलिसकर्मियों के साथ तैनात थे, और इस समय भी जंतर मंतर पर उनकी तैनाती देखी जा सकती है.
द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को पालिका बाज़ार के पास इरशाद को RAF के एक अधिकारी ने मारा था. उनके दोस्त ने बताया कि उनके चेहरे और पूरे शरीर पर लगभग 30-40 चोटें आई हैं. इनमें से चार चोटें, जिनमें गर्दन पर लगी चोट भी शामिल है, काफ़ी गहरी थीं, जिसके कारण उनकी सर्जरी करनी पड़ी.
द हिंदू की एक और रिपोर्ट के मुताबिक पैलेट गन का इस्तेमाल आख़िरी बार पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर खनौरी और शंभू बॉर्डर पर 2024 के किसान आंदोलन के दौरान किया गया था.
हालांकि पुलिस ने तब पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था, लेकिन किसान नेताओं का आरोप था कि कई लोग घायल हुए थे.
साल 2023 में, जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इन गन का इस्तेमाल किया गया था, जिससे लोगों में भारी गुस्सा फैल गया था.
इससे पहले, जम्मू-कश्मीर में 2016 के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था, जिससे कई लोगों को गंभीर चोटें आई थीं.
साहिल लोचब का क्या हाल है?
दिल्ली में पैलेट गन की चपेट में आए दूसरे शख़्स का नाम है साहिल लोचब. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती साहिल लोचब को बताया गया है कि उनकी दाईं आँख की रोशनी जा सकती है. मंगलवार को उनकी सर्जरी हुई थी.
एम्स के एक सीनियर अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि लोचब के शरीर के दाहिने हिस्से में "पैलेट की चोटें" हैं. अधिकारी ने कहा, "मरीज़ की हालत अभी स्थिर है और उन्हें दर्द कम करने वाली दवाएँ दी जा रही हैं. जहाँ तक उनकी आँखों की रोशनी जाने की बात है, तो अभी उनका इलाज चल रहा है और इस स्टेज पर किसी नतीजे पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी. उन्हें हर संभव बेहतर इलाज दिया जा रहा है."
दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग के छात्र लोचब ने कहा कि वह 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन में इसलिए शामिल हुए क्योंकि वह 2024 में दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने के बाद "निराश" थे, यह परीक्षा पेपर लीक होने के कारण रद्द कर दी गई थी.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पैलेट लगने से घायल तीसरे व्यक्ति 'आउटलुक' के पत्रकार हैं. सफदरजंग अस्पताल की 22 जुलाई की मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें जंतर-मंतर पर पैलेट गन से हुए हमले में चोटें आई हैं.
ما الذي يجب مراقبته
توقعات الذكاء الاصطناعي — احتمالات وليست حقائق
सीआरपीएफ़ 20 जुलाई की घटना की जांच करेगी कि क्या रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया.
مرجح جداً · خلال أسابيع
أسئلة مفتوحة
- क्या दिल्ली पुलिस या सीआरपीएफ़ ने वास्तव में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया?
- पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए कौन जिम्मेदार है?
- घायलों की पूरी स्थिति क्या है और उन्हें कब तक ठीक होने की उम्मीद है?



