आप ने कांग्रेस और बीजेपी पर मिलीभगत का आरोप लगाया, राहुल गांधी के प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ा
संजय सिंह और आतिशी की टिप्पणियों पर कांग्रेस, बीजेपी और सोशल मीडिया से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं; जंतर-मंतर पर सीजेपी और सोनम वांगचुक के आंदोलन की भी तुलना की गई।
En resumen
आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर बीजेपी के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया और राहुल गांधी के प्रदर्शन की तुलना सीजेपी व सोनम वांगचुक के आंदोलन से की। इस पर कांग्रेस, बीजेपी और कई टिप्पणीकारों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
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Por qué importa
यह लेख आप, कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव पर केंद्रित है। इसमें राहुल गांधी के प्रदर्शन, जंतर-मंतर पर सीजेपी और सोनम वांगचुक के आंदोलन, और 2013 के दिल्ली राजनीतिक घटनाक्रम का संदर्भ दिया गया है।
आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने मंगलवार को कांग्रेस पर बीजेपी के साथ मिलकर खेल खेलने का आरोप लगाया.
आप नेताओं का कहना है कि मोदी की सरकार ने राहुल गांधी के नेतृत्व में उनके आधिकारिक आवास के बाहर हुए प्रदर्शन पर तो तुरंत प्रतिक्रिया दी, लेकिन जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कई सप्ताह तक चले आंदोलन की लगातार अनदेखी करती रही.
आम आदमी पार्टी कांग्रेस का विरोध करके ही बनी थी और दिल्ली में उसने कांग्रेस को ही सत्ता से बेदखल किया था. लेकिन अरविंद केजरीवाल पहली बार 2013 में दिल्ली के मुख्यमंत्री कांग्रेस के समर्थन से ही बने थे.
2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिला था. आम आदमी पार्टी को 28, बीजेपी को 31 और कांग्रेस को आठ सीटों पर जीत मिली. आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से गठबंधन किया और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने थे.
लेकिन आम आदमी पार्टी को अब लग रहा है कि कांग्रेस-बीजेपी में कुछ खेल चल रहा है.
आप के विरोध की आलोचना
आप सांसद संजय सिंह ने एक्स पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सीजेपी के आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए राहुल गांधी को धरने पर बैठाया.
संजय सिंह की इस टिप्पणी की सोशल मीडिया पर काफ़ी आलोचना हो रही है. जाने-माने गीतकार स्वानंद किरकिरे ने लिखा, ''जैसा कि आपने आज ही कहा था, संसद उनके नाम नहीं की गई है, वैसे ही यह धरना भी किसी के नाम नहीं किया हुआ है. आंदोलन बच्चों का है. आप भी साथ खड़े हो जाइए. किसने रोका है? यहाँ भी लड़िए वहाँ भी और चिंता मत कीजिए. हम उन बच्चों के लिए नहीं लड़ रहे वो हमारे लिए लड़ रहे हैं.''
टीएमसी सांसद कीर्ति आज़ाद ने तो यहाँ तक कह दिया, "संजय सिंह आपसे ये उम्मीद नहीं थी. हमारी दोस्ती शर्मसार कर दी आपने."
वहीं दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता और आप की वरिष्ठ नेता आतिशी सिंह ने भी दोनों आंदोलनों की तुलना करते हुए लिखा कि सरकार ने एक महीने तक चले सीजेपी और वांगचुक के आंदोलन के दौरान बातचीत से इनकार किया, लेकिन राहुल गांधी के प्रदर्शन के एक घंटे के भीतर कांग्रेस से संवाद शुरू कर दिया.
एक अन्य पोस्ट में आतिशी ने कहा कि जिस दिल्ली पुलिस ने सोमवार के संसद मार्च के दौरान सीजेपी के प्रदर्शनकारियों को 100 मीटर भी आगे नहीं बढ़ने दिया, उसी पुलिस ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री आवास तक पहुँचने दिया. उन्होंने इसे इस बात का सबूत बताया कि कांग्रेस और बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.
आम आदमी पार्टी राहुल गांधी के धरने का विरोध क्यों कर रही है. पंजाब यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर आशुतोष कुमार कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल ख़ुद को दिल्ली का नहीं बल्कि देश का नेता मानते हैं और उन्हें चुनौती राहुल गांधी से मिलेगी, ऐसे में राहुल का विरोध करना बहुत चौंकाता नहीं है.
प्रोफ़ेसर आशुतोष कुमार कहते हैं, ''केजरीवाल जब 2014 में मोदी के ख़िलाफ़ बनारस से चुनाव लड़ने गए थे तो यही संदेश देना था कि मोदी को वही चुनौती दे सकते हैं. लेकिन अरविंद को समझना चाहिए कि विपक्ष बँटा तो फ़ायदा उन्हें भी नहीं होगा. ''
आम आदमी पार्टी को दिखी 'मिलीभगत'
आतिशी की इस पोस्ट को कांग्रेस के पूर्व नेता संजय झा ने आड़े हाथों लिया. उन्होंने एक्स पर जवाब में लिखा, ''आम आदमी पार्टी की यह बेहद घटिया और ओछी पोस्ट शायद इस पार्टी को लेकर मेरी सबसे बड़ी आशंका को सही साबित करती है कि यह हमेशा एक उभरती हुई स्टार्ट-अप पार्टी बनकर ही रह जाएगी. यह टिप्पणी बेहद अनुचित है. इससे गहरी निराशा हुई.''
कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता श्रीनिवास बी.वी. ने संजय सिंह के आरोपों पर पलटवार करते हुए लिखा, "इतना क्यों तिलमिला रहे हो? यह ट्वीट मालवीय ने लिखा है या चड्ढा ने?" उनका इशारा बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय और आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा की ओर था.
इसके बाद अमित मालवीय ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा, "यह अब बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रायोजित प्रदर्शन कभी छात्रों के लिए थे ही नहीं. किसी भी प्रभावित छात्र को मंच नहीं दिया गया. राजनीतिक प्रासंगिकता तलाश रहे विपक्षी नेता लगातार जंतर-मंतर पहुंचते रहे और अब कांग्रेस और आप इस आंदोलन का श्रेय लेने के लिए आपस में लड़ रहे हैं. छात्रों के साथ अगर कोई खड़ा है, तो वह केवल बीजेपी है."
आतिशी ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया ने राहुल गांधी के धरने को ख़ूब दिखाया लेकिन सीजेपी और वांगचुक के अनशन की अनदेखी कर रहा था.
आतिशी ने एक्स पर लिखा, ''जो गोदी मीडिया एक महीने से चल रहे सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को एक मिनट भी टीवी चैनल पर नहीं चला रहा था, अब राहुल गांधी के एक घंटे के प्रोटेस्ट को लाइव चला रहा है? इसका मतलब साफ़ है कि राहुल गांधी को टीवी पर दिखाने का निर्देश बीजेपी से आया है. गोदी मीडिया ने बीजेपी-कांग्रेस की मिलीभगत का राज़ खोल ही दिया!''
लेकिन आम आदमी पार्टी का यह रुख़ कई लोगों को पसंद नहीं आया. वरिष्ठ पत्रकार निखिल वाग्ले ने आतिशी को जवाब देते हुए लिखा है, ''कृपया यह बेमतलब की लड़ाई बंद कीजिए. हमें आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की आपसी खींचतान में कोई दिलचस्पी नहीं है. मुद्दा इससे कहीं ज़्यादा बड़ा और अहम है. युवाओं को किसी भी राजनीतिक दल की परवाह नहीं है. इस तरह की राजनीति करके आप सिर्फ़ मोदी और बीजेपी की मदद कर रही हैं.''
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का रिश्ता
दिल्ली में 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल क़समें खाते थे कि किसी को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में वो न तो कांग्रेस से और न ही बीजेपी से गठबंधन करेंगे. उन्होंने अपने बच्चों की क़सम खाई थी.
केजरीवाल ने कहा था, ''मैं अपने बच्चों की क़सम खाता हूँ. मैं न तो बीजेपी के साथ जाऊंगा और न ही कांग्रेस के साथ क्योंकि दिल्ली की जनता इन दोनों के ख़िलाफ़ आम आदमी पार्टी को वोट करेगी. बीजेपी और कांग्रेस आपस में गठबंधन कर सरकार बना सकते हैं क्योंकि दोनों पर्दे के पीछे एक ही हैं. मैं सत्ता का भूखा नहीं हूँ. हमलोग गठबंधन की सरकार नहीं बनाएंगे क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस के साथ रहकर हम भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं कर सकते. गठबंधन सरकार बनाने से अच्छा हम विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे.''
2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिला. आम आदमी पार्टी को 28, बीजेपी को 31 और कांग्रेस को आठ सीटों पर जीत मिली. आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से गठबंधन किया और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने. कांग्रेस से समर्थन लेकर सरकार बनाने के सवाल पर तब अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि वो दिल्ली की जनता से पूछेंगे.
आम आदमी पार्टी ने तब कहा था कि दिल्ली की जनता के साथ 280 बैठकें तय की गईं और पहले दो दिनों में 128 बैठकें हुईं. आम आदमी पार्टी ने कहा कि इन 128 में 110 बैठकों में लोगों ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए कहा है. आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से गठबंधन करने के लिए बेहद अपारदर्शी तरीक़े को ढाल बनाया और 28 सीटों की बदौलत सरकार बना ली.
आप के सोशल मीडिया के पूर्व रणनीतिकार अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक हैं. सीजेपी के आंदोलन पर कांग्रेस पार्टी दो सप्ताह से अधिक समय तक लगभग ख़ामोश रही. दीपके और सीजेपी के अन्य नेताओं ने पहले भी कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना की है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की साझा मांग के बावजूद उन्होंने कांग्रेस के समर्थन को न तो ख़ास तौर पर स्वीकार किया और न ही उसे आगे बढ़ाया.
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोनम वांगचुक के अनशन के दौरान उनसे मुलाक़ात नहीं की. इसे लेकर ख़ुद वांगचुक ने भी तंज कसा था, जबकि गुजरात कांग्रेस के नेता जिग्नेश मेवाणी ने राहुल गांधी का बचाव किया था. इस दौरान राहुल गांधी समानांतर रूप से पेपर लीक और नीट से जुड़े मुद्दों पर 'छात्रों की गूंज' अभियान चला रहे थे.
आख़िरकार 17 जुलाई को कांग्रेस सांसद और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे और सोनम वांगचुक से मुलाक़ात की. यह सीजेपी के आंदोलन में कांग्रेस की पहली आधिकारिक और सार्वजनिक भागीदारी मानी गई.
Qué observar
Perspectiva de IA — posibilidades, no hechos
आप, कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहने की संभावना है।
Probable · En días
राहुल गांधी, सीजेपी और सोनम वांगचुक के आंदोलनों की तुलना पर आगे भी राजनीतिक विवाद बने रह सकते हैं।
Posible · En días
Preguntas abiertas
- क्या कांग्रेस और आप के बीच यह टकराव आगे किसी औपचारिक राजनीतिक रणनीति में बदलेगा?
- सीजेपी और सोनम वांगचुक के आंदोलन पर कांग्रेस का रुख आगे क्या होगा?
- क्या राहुल गांधी के प्रदर्शन को लेकर बीजेपी और आप की आलोचना जारी रहेगी?

