ऐतिहासिक सर्जरी: गर्भ में पल रहे बच्चे की जन्मजात बीमारी को डॉक्टरों ने ठीक किया
लंदन के एक दंपत्ति के बच्चे थियो का अमेरिका में सफल ऑपरेशन, गैस्ट्रोस्कीसिस जैसी गंभीर समस्या का हुआ इलाज
L'essentiel
लंदन के थियो सैवेज का अमेरिका के टेक्सास चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में गर्भ के भीतर सफल ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों ने कीहोल सर्जरी के जरिए गैस्ट्रोस्कीसिस नामक गंभीर जन्मजात समस्या को ठीक किया, जिससे बच्चे की आंतें पेट के बाहर विकसित हो रही थीं।
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गैस्ट्रोस्कीसिस एक जन्मजात समस्या है जिसमें बच्चे की आंतें पेट के बाहर विकसित होती हैं। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और इसके लिए अक्सर जन्म के बाद कई सर्जरी की आवश्यकता होती है।
एक महिला के गर्भ में की गई एक नई और ऐतिहासिक सर्जरी की मदद से डॉक्टरों ने एक अजन्मे बच्चे की जन्मजात समस्या को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया.
लंदन की रहने वाली मैसी सैवेज का ऑपरेशन अमेरिका में किया गया था. उस समय वह 26 हफ़्ते की गर्भवती थीं.
उनके बेटे थियो को गैस्ट्रोस्कीसिस नाम की बीमारी थी. इसमें बच्चे की नाभि ठीक तरह से विकसित नहीं हो पाती और उसकी आंतें पेट के बाहर ही बढ़ने लगती हैं.
डॉक्टरों ने मां के गर्भाशय का एक हिस्सा सावधानी से बाहर निकाला. फिर कीहोल सर्जरी (छोटे चीरे वाली सर्जरी) की मदद से बच्चे के अंगों को धीरे-धीरे उसके पेट के अंदर वापस पहुंचा दिया.
थियो अब पाँच महीने का है और स्वस्थ तरीक़े से बड़ा हो रहा है.
थियो की मां 29 साल की मैसी और उनके पिता 36 वर्षीय जोश फ्रेंच, दोनों ही पेशे से शिक्षक हैं. उनका कहना है कि वे इस ऐतिहासिक सर्जरी की सफलता से राहत महसूस कर रहे हैं.
मैसी ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, "वह (बेटा) एक छोटा सा चमत्कार है, है न?"
लेकिन वे दोनों जानते हैं कि हालात बहुत अलग हो सकते थे.
यह गंभीर जन्मजात समस्या ब्रिटेन में हर साल 3,000 शिशुओं में से एक पर असर करती है. दुनिया भर में गैस्ट्रोस्चिसिस की गंभीरता क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होती है.
उच्च और मध्यम आय वाले देशों के अध्ययनों की 2025 की वैश्विक समीक्षा के अनुसार, दक्षिण अमेरिका में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं.
वहीं, कम आय वाले देशों के बारे में आँकड़े बहुत सीमित हैं.
सबसे अच्छे हालात में भी ऐसे बच्चों को कई हफ़्तों तक आईसीयू में रखना पड़ सकता है. उन्हें नली या नस (आईवी) के ज़रिए पोषण देना पड़ता है और सुधारात्मक सर्जरी भी करनी पड़ सकती है.
थियो जैसे जटिल मामलों में स्थिति और ज़्यादा गंभीर होती है. ऐसे बच्चों को छह महीने तक एनआईसीयू में रहना पड़ सकता है.
उन्हें कई सर्जरी करानी पड़ सकती हैं. साथ ही, दो साल तक नस (आईवी) के ज़रिए पोषण देना पड़ सकता है और कुछ मामलों में आंत का ट्रांसप्लांट तक कराने की ज़रूरत पड़ सकती है.
सबसे बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ मिलने के बावजूद, ऐसे हर 10 बच्चों में से एक की मौत हो जाती है.
थियो के माता-पिता को शुरू में ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि उनके अजन्मे बच्चे के साथ कोई समस्या है.
जोश ने कहा, "20 सप्ताह के स्कैन के लिए जाते हुए हम बस अपने बच्चे की तस्वीर देखने के लिए उत्साहित थे. उस समय हमें नहीं पता था कि वह बेटा है."
जोश ने कहा कि थियो को गैस्ट्रोस्चिसिस होने का पता चलना उनके लिए एक सदमा और बेहद डरावना अनुभव था.
गर्भावस्था के 24वें हफ़्ते में लंदन के ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टर मैसी और जोश को बता रहे थे कि थियो के जीवन के पहले छह महीने कैसे बीत सकते हैं.
हालांकि, जब डॉक्टरों को पता चला कि भ्रूण थियो को गैस्ट्रोस्कीसिस के सबसे गंभीर रूप की बीमारी है, तो उन्होंने दंपति को अमेरिका के ह्यूस्टन के टेक्सास चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में रेफ़र कर दिया.
वहां भ्रूण और बाल शल्य चिकित्सकों की एक टीम इस पर काम कर रही थी. इस टीम का नेतृत्व डॉ. माइकल बेलफ़ोर्ट कर रहे थे.
यह टीम जन्म से पहले ही जटिल गैस्ट्रोस्कीसिस को ठीक करने के लिए दुनिया के अपने तरह के पहले क्लिनिकल ट्रायल का संचालन कर रही थी.
इस ट्रायल के प्रमुख डॉ. बेलफ़ोर्ट इससे पहले भी गर्भ में पल रहे स्पाइना बिफिडा से पीड़ित बच्चों पर इसी तरह की सर्जरी की अगुवाई कर चुके थे.
मैसी को बताया गया कि उन्हें तुरंत टेक्सस जाना होगा. साथ ही, गर्भावस्था के बाकी अवधि के दौरान उन्हें वहीं रहना पड़ेगा. मैसी ने कहा, "यह एक बहुत बड़ा फ़ैसला था."
इस ट्रायल के तहत उन्हें पहले बेल्जियम के ल्यूवेन अस्पताल जाना पड़ा. वहां विशेषज्ञों ने मैसी के गर्भ के ज़रिये थियो के पेट की दीवार में बोटॉक्स का इंजेक्शन लगाया.
इसका मक़सद मांसपेशियों को ढीला करना था, ताकि सर्जरी करना आसान हो सके.
इसके बाद परिवार टेक्सस पहुंचा. नवंबर 2024 में, गर्भावस्था के 26वें हफ़्ते में यह ऑपरेशन किया गया.
जोश ने कहा कि सर्जरी के दौरान इंतज़ार करना उनके लिए बेहद पीड़ादायक था.
उन्होंने कहा, "उस दिन का हर पल इतना लंबा लग रहा था, जैसे पूरा एक हफ़्ता बीत गया हो."
"हम इंतज़ार कर रहे थे और हर चरण में ठीक-ठीक क्या हो रहा है, यह भी नहीं जानते थे."
सर्जरी के दौरान मैसी के गर्भाशय का एक हिस्सा सावधानी से बाहर निकाला गया, ताकि गर्भाशय और बच्चे की सही स्थिति बनाई जा सके.
इसके बाद गर्भ के भीतर मौजूद एम्नियोटिक लिक्विड को निकाला गया और उसकी जगह कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरी गई. इससे ऑपरेशन के लिए ज़्यादा जगह बन सकी.
फिर कीहोल सर्जरी की मदद से थियो के अंगों को धीरे-धीरे उसके पेट के अंदर वापस पहुंचाया गया. इसके बाद पेट को टांके लगाकर बंद कर दिया गया.
मैसी के पेट पर एक निशान रह गया, जो सी-सेक्शन के चीरे से लगभग दोगुना बड़ा था.
लेकिन दूसरी महिलाओं के मुक़ाबले उनकी स्थिति अलग थी. सी-सेक्शन के बाद जहां बच्चे का जन्म हो चुका होता है, वहीं मैसी को सर्जरी के बाद भी अगले 14 हफ़्तों तक अपने गर्भ में बच्चे को पालना था.
मैसी ने बताया कि थियो अक्सर गर्भ में लात मारता था. कई बार उसकी लात सर्जरी के निशान पर लगती थी, जिससे उन्हें दर्द होता था.
उन्होंने कहा, "यह मुश्किल दौर था और इससे उबरना आसान नहीं था, लेकिन मेहनत रंग लाई."
यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा. थियो गर्भ में पूरी अवधि तक सुरक्षित रहा और फ़रवरी में टेक्सस में सामान्य प्रसव के ज़रिए उसका जन्म हुआ.
टेक्सस चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के प्रमुख डॉ. माइकल बेलफ़ोर्ट ने कहा कि अब तक मिले नतीजों से वह और उनकी टीम बेहद ख़ुश है.
उन्होंने कहा, "मां और बच्चे, दोनों की स्थिति अच्छी रही. सर्जरी सही समय पर हुई और सबसे बड़ी बात यह रही कि भ्रूण की सर्जरी के दौरान या उसके बाद कोई जटिलता नहीं हुई. यह वाक़ई बेहद असाधारण उपलब्धि है."
अगर यह ट्रायल सफल साबित होता है, तो ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल में बाल शल्य चिकित्सा के प्रोफ़ेसर और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में स्टेम सेल और रीजेनरेड मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रोफ़ेसर पाओलो दे कोप्पी यह प्रक्रिया ब्रिटेन में शुरू कर सकते हैं.
उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि बहुत जल्द हम यह उपचार बड़ी संख्या में मरीज़ों को उपलब्ध करा सकेंगे."
डॉ. बेलफ़ोर्ट भी इस साझेदारी को लेकर उत्साहित हैं. उनका कहना है कि टेक्सस चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल और ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल की टीम मिलकर एक बेहद मज़बूत और प्रभावशाली समूह साबित होगी.
वहीं, डॉ. बेलफ़ोर्ट अब आगे की संभावनाओं पर भी नज़र रख रहे हैं.
उन्होंने कहा, "गर्भाशय के भीतर का हिस्सा अब नई चिकित्सा तकनीकों और सर्जरी के लिए एक नया क्षेत्र बन चुका है."
उन्होंने आगे कहा, "स्पाइना बिफिडा और गैस्ट्रोस्कीसिस तो सिर्फ़ दो उदाहरण हैं. मेरा मानना है कि भविष्य में हम गर्भ में ही कुछ हृदय संबंधी सर्जरी कर सकेंगे. इसके अलावा, फेफड़ों की कुछ सर्जरी भी गर्भ में रहते हुए की जा सकती हैं."
"जब हम वहां थे, तो देखभाल का स्तर अद्भुत था, और उन्होंने हमारे जीवन के एक बहुत ही दुखद समय को बहुत आसान बना दिया, और हमें यह छोटा सा बेटा मिल गया है - हम इससे ज़्यादा खुश नहीं हो सकते."
À surveiller
Perspective IA — des possibilités, pas des certitudes
ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल ब्रिटेन में इस प्रक्रिया को शुरू कर सकता है।
Probable · En quelques mois
Questions ouvertes
- क्या यह उपचार भविष्य में सभी प्रकार के गैस्ट्रोस्कीसिस के लिए मानक बनेगा?
- इस सर्जरी की दीर्घकालिक सफलता दर क्या है?

