ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट: हिरासत में ली गईं नेहा बोरा रिहा, महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा के आरोप को लेकर सीजेपी का प्रदर्शन
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग और महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन हिंसा के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन। आइसा नेता नेहा बोरा और आप नेता सौरभ भारद्वाज सहित कई कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा।
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Why It Matters
प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्णयों और महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन हिंसा के विरोध में हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने वाला है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और एसआईआर के ख़िलाफ़ दिल्ली में आम लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने रविवार को इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक 'सिटिज़न्स मार्च' निकाला.
इसके साथ ही सीजेपी और अन्य संगठनों के लोग शनिवार को महिला पत्रकारों और प्रदर्शकारियों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा के मामले में भी दिल्ली पुलिस के अधिकारी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने पर जुटे.
इन दोनों मामलों में लेकर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हुए. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगा दिए हैं और इलाक़े में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.
वामपंथी छात्र संगठन आइसा ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि उसकी नेता नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
आइसा ने आरोप लगाया, "पुलिस उन्हें एक अनधिकृत वाहन में ले गई है, जिसमें एक भी महिला पुलिस कॉन्स्टेबल मौजूद नहीं है. हम नहीं जानते हैं कि उन्हें कहाँ लेकर जा रहे हैं. उनके बारे में हमारे पास कोई जानकारी नहीं है."
आइसा ने शाम को एक पोस्ट में बताया, "नेहा बोरा को नरेला इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन से रिहा कर दिया गया है. उनके पास उनका फ़ोन और बैग नहीं है. हम उनकी सुरक्षा और मदद के लिए वकीलों की एक टीम पुलिस थाने भेज रहे हैं."
इस बीच लाइव लॉ और बार एंड बेंच ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट कल यानी सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ याचिका की सुनवाई करेगा.
लाइव लॉ के मुताबिक़, यह याचिका एसआईआर के मुद्दे पर ज्ञानेश कुमार के उन फ़ैसलों को लेकर डाली गई है जो उन्होंने कथित तौर पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिया थे.
इस याचिका में एसआईआर से जुड़े 14 फ़ैसलों को वापस लेने की मांग की गई है. साथ ही ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करने और एसआईआर से जुड़े फ़ैसलों की एसआईटी से जांच कराने की मांग की गई है.
लाइव लॉ के मुताबिक़ इस याचिका की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच करेगी.
मौक़े पर मौजूद बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य ने बताया कि प्रदर्शनों को देखते हुए संसद मार्ग थाने के बाहर बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग लगा दी गई और पुलिस बलों की भारी तैनाती की गई.
दिव्या आर्य ने बताया कि 3 अक्तूबर को नेहा बोरा और आइसा के प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों और एक महिला प्रदर्शनकारी पर यौन हमले को लेकर दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ शिकायत को कवर करने के लिए बड़ी संख्या में पत्रकार भी मौक़े पर मौजूद दिखे.
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इस मामले में दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ शिकायत को एफ़आईआर में तब्दील किया जाए.
दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान दो महिला पत्रकारों और एक प्रदर्शनकारी युवती ने एक पुलिस अधिकारी और पुलिस कर्मियों पर यौन हमले के आरोप लगाए हैं.
एक महिला पत्रकार का आरोप है कि आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के दौरान एसीपी विवेक भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा और उन्हें धक्का देकर वहां से चले गए.
रविवार को संसद मार्ग थाने पहुंचीं एक महिला प्रदर्शनकारी मेहविश अली ने कहा, "ये सरकारी संपत्ति है, पुलिस स्टेशन है. यहां हर कोई जा सकता है. यहां अपराधी भी जा सकते हैं. आप और हम भी जा सकते हैं, लेकिन बैरिकेड्स देखिए. इसे पूरी छावनी बना रखी है."
इस मामले में सीपीएम नेता वृंदा करात भी संसद मार्ग थाने पहुंचीं. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हमलोगों ने संघर्ष कर के क़ानून बदला, लेकिन यौन हिंसा के मामले की ये हालत बना दी है और अपने एसीपी को बचाने के लिए क़ानून की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं."
इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और पार्टी की सदस्य रत्ना सिंह संसद मार्ग थाने पहुंचे. उनके साथ सीपीआईएम नेता वृंदा करात भी मौजूद थीं.
सौरव दास ने कहा, "आज सीजेपी की तरफ़ से मैं और रत्ना सिंह यौन हिंसा की शिकार हुई महिलाओं के समर्थन में आए हैं. दिल्ली पुलिस जिस बर्बरता के साथ युवाओं को हिरासत में ले रही है और उनके साथ मारपीट कर रही है, पूरा देश देख रहा है. दिल्ली पुलिस को शर्म आनी चाहिए."
वहीं सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में कहा, "क़ानन स्पष्ट तौर पर कहता है कि अगर कोई महिला रेप या यौन हिंसा के मामले में केस दर्ज कराने के लिए आई है तो यह पुलिस की ड्यूटी है वह बिना जांच के तुरंत एफ़आईआर दर्ज करे. तो यह क़ानून इनके (पुलिसवालों) लिए क्यों बदल रहा है."
कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "हमारी टीम यौन हिंसा का शिकार महिला के साथ पुलिस स्टेशन के अंदर गई और उनसे एसीपी के ख़िलाफ़ छेड़छाड़ के मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा, लेकिन दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि क्राइम ब्रांच की जांच जारी है."
दूसरी तरफ इंडिया गेट से जंतर-मंतर के बीच सिटीज़न मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. इनमें से कई लोगों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज भी महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन हिंसा के मामले को लेकर प्रदर्शन में पहुंचे. इस दौरान पुलिस ने उन्हें उनके कई सहयोगियों के साथ हिरासत में ले लिया.
सौरभ भारद्वाज ने कहा, "महिला पत्रकारों के साथ जब ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो आम लोगों के बारे में आप सोच सकते हैं. एसीपी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर होनी चाहिए."
सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर एक्स पर एक पोस्ट में ख़ुद के बारे में कहा, "सिटीज़न मार्च के दौरान आज भी निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर की ओर जाते हुए पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया. यह केवल एक दिन का प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो ज्ञानेश कुमार के हटने तक जारी रहेगा."
योगेंद्र यादव ने नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने पर आरोप लगाया कि नेहा को जिस कार में ले जाया गया, उसमें एक भी महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी.
एनएसयूआई ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "वोट चोरों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे एनएसयूआई के हमारे साथियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है. लेकिन एनएसयूआई के साथियों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता. लोकतंत्र और वोट की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा."
एनएसयूआई ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में आरोप लगाया, "वोट चोरी और ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे हमारे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया. इस कार्रवाई में हमारे एक साथी के पैर में गंभीर चोट आई है."
What to Watch
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई
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Open Questions
- क्या दिल्ली पुलिस एसीपी विवेक भगत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करेगी?
- सुप्रीम कोर्ट ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर क्या फैसला लेगा?



