
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठाए।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। यह मांग द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दो चुनाव आयुक्तों द्वारा आयोग के निर्णयों पर आपत्ति जताने का दावा किया गया है।
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द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार आयोग के निर्णयों पर आपत्ति दर्ज कराई है। राहुल गांधी ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में बुधवार को छपी एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के बाद लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को एक ख़ास प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.
राहुल गांधी ने इस दौरान दावा किया कि वो लगातार तीन सालों से सुबूत के साथ 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाते रहे हैं और अब दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया है.
कांग्रेस नेता ने इस दौरान फ़रवरी 2025 से लेकर अब तक उन प्रेस कॉन्फ़्रेंस और कार्यक्रमों का ज़िक्र किया जब-जब उन्होंने कथित 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाया था.
राहुल गांधी ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी अपनी लोकप्रियता के शिखर पर भी चुनाव हारीं लेकिन बीते कई चुनावों के बाद 'एंटी-इनकंबेंसी' जैसे ख़त्म सी हो गई है.
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा मांगते हुए कहा कि लोकतंत्र को बर्बाद नहीं होने देना है. साथ ही राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से मांग करते हुए कहा कि वो सरकार गवाह बन जाएं.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में क्या छपा था?
अंग्रेज़ी अख़बार की खोजी रिपोर्ट के छपने के बाद विपक्षी दल केंद्र की मोदी सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
अख़बार की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर '10 महीने में 14 बार आपत्ति' दर्ज कराई.
रिपोर्ट के मुताबिक़, "ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने, ख़ुद को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर दर्ज कराईं और 'अनधिकृत, गैरकानूनी' कदमों पर सवाल उठाए'."
चुनाव आयोग की भूमिका पर विपक्षी दल पहले से सवाल उठाते रहे हैं.
राहुल गांधी ने क्या-क्या सवाल खड़े किए?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि हरियाणा, छत्तीसगढ़, यूपी, जैसे राज्यों में हमेशा चुनावों के बाद सरकारें बदलती थीं लेकिन अचानक चुनावों में एंटी-इनकंबेंसी ही ख़त्म हो गई.
उन्होंने कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूं और मैंने 50 से ज़्यादा साल एक राजनीतिक परिवार में बिताए हैं. लोकतांत्रिक माहौल में काम करने वाला कोई भी राजनीतिक नेता ऐसा बयान नहीं दे सकता. क्योंकि भारत में 'एंटी-इनकंबेंसी' (मौजूदा सरकार के ख़िलाफ़ नाराज़गी) नाम की एक बुनियादी ताक़त होती है, जो बहुत तेज़ी से किसी भी सरकार का विरोध करने लगती है और यह किसी को नहीं बख़्शती."
"इंदिरा गांधी जी बांग्लादेश युद्ध जीतती हैं, अपनी लोकप्रियता के शिखर पर होती हैं, और फिर अचानक, एक-दो साल के भीतर ही ज़बरदस्त एंटी-इनकंबेंसी और भारी दबाव का सामना करना पड़ता है."
"एक के बाद एक, कई नेताओं के साथ ठीक यही होता है. ऐसा कांग्रेस नेताओं के साथ होता है, क्षेत्रीय पार्टियों के साथ होता है, लेकिन किसी वजह से, नरेंद्र मोदी के साथ ऐसा कभी नहीं होता. अमित शाह के साथ ऐसा नहीं होता, बीजेपी के साथ ऐसा नहीं होता."
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, "हिंदुस्तान की सबसे बड़ी पॉलिटिकल फ़ोर्स कहां गायब हो गई है. इसके हम जवाब ढूंढ रहे थे और आख़िर हमें इसका जवाब मिला. वोट हमारे देश की बुनियाद है. वोट जिसे चुनाव आयोग सुरक्षित रखता है. इसे संविधान से ताक़त मिलती है. अगर वोट तबाह हो रहे हैं तो हमारा संविधान तबाह होगा."
"इसकी कोई ताक़त नहीं रहेगी, इसका कोई काम नहीं रहेगा. अगर संविधान तबाह होता है तो हमारे क़ानून ख़त्म हो जाएंगे और संस्थानों का कोई मतलब नहीं रहेगा. ये हमारे वोट पर हमला है. ये हर नागरिक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है. हम लगातार कह रहे हैं कि वोट के साथ कोई न कोई दिक्कत है. चुनाव आयोग इसको सुरक्षित रखता है."
'वोट चोरी, क़ानून चोरी और फिर संस्थान चोरी'
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा मांगते हुए कहा, "कृपया समझें कि यहां क्या हो रहा है. आपने जो किया है, वह भारतीय राष्ट्र के ख़िलाफ़ एक काम है. यह चुनाव में कोई छोटी-मोटी धांधली नहीं है. यह भारत के संविधान पर हमला है, यह हमारे देश के कानूनी ढांचे पर हमला है, और आप ही वह व्यक्ति थे जिन्हें यह सुनिश्चित करना था कि वोट सुरक्षित रहें."
"हम भारत में लोकतंत्र को ख़त्म नहीं होने देंगे. और जो लोग इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें सज़ा ज़रूर मिलेगी- आज नहीं तो कल या परसों. उन्हें सज़ा मिलेगी ही. ज्ञानेश कुमार को अपनी मौजूदा स्थिति के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और उन्हें सरकारी गवाह बन जाना चाहिए."
राहुल गांधी ने पीएम मोदी, अमित शाह और गौतम अदाणी समेत सात लोगों की तस्वीरों को दिखाते हुए कहा कि ये लोकतंत्र को तबाह करने वाले लोग हैं और भारतीय चुनावों में 100 फ़ीसदी धांधली हो रही है.
"दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार सवाल उठाए हैं. मैंने लगातार ये सवाल उठाए लेकिन अब दो चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए हैं. ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने चुना है. अब दो चुनाव आयुक्त कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार हमारे वोटिंग सिस्टम को हो रहे नुक़सान के लिए ज्ञानेश कुमार ज़िम्मेदार हैं. वोट चोरी के बाद क़ानून चोरी होती है और फिर संस्था चोरी होती है. अगर वोट चुरा लिया गया है और संसद में बैठा कोई सांसद कोई भी क़ानून बनाता है तो ये अवैध है."
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक टाइमलाइन भी इस दौरान दिखाई जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने कब-कब चुनाव आयोग में गड़बड़ियों और 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाया था.
राहुल गांधी ने ये भी कहा कि उन्होंने अपनी असहमति का नोट ज्ञानेश कुमार के चयन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया था लेकिन उन्होंने ज्ञानेश कुमार को चुना.
"दबाव संस्थान पर बढ़ रहा है और हमें लगातार अंदर से ख़बरें मिल रही हैं."

Leader of Opposition in Lok Sabha, Rahul Gandhi, in a press conference after the investigative report of The Indian Express, alleged that two Election Commissioners have lodged objections to the Election Commission's actions 14 times in 10 months and that votes are being stolen, due to which the Constitution and democracy are in danger. He sought the resignation of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar and appealed to him to become an approver. BJP spokesperson Sudhanshu Trivedi raised questions on Rahul Gandhi's political understanding.
Cockroach Janata Party founder Abhijeet Dipke demanded the resignation of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, accusing him of threatening Indian democracy amid controversies over electoral roll revisions.

Discussion has intensified in political and administrative circles on the disagreement and formal objections of Election Commissioners Vivek Joshi and Sukhbir Singh Sandhu with Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar.
According to Election Commission statements, BJP spent ₹286.99 crore on West Bengal elections alone, surpassing Congress' ₹248.55 crore total across four states and a Union territory.
Congress MP Priyanka Gandhi Vadra accused Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar of criminally tampering with electoral rolls by deleting 13 crore voter names, calling it treason and demanding prosecution, while the ECI and BJP defended the process as unanimous and democratic.

Following reports of differences of opinion between Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar and two election commissioners in the Election Commission, opposition leaders have demanded re-conduct of the assembly elections held in Maharashtra, West Bengal and Tamil Nadu. Uddhav Thackeray, Mamata Banerjee, Arvind Kejriwal and Rahul Gandhi have demanded action against the Chief Election Commissioner and alleged irregularities in the election process, while the Election Commission and BJP have rejected these allegations.