तरुण तेजपाल को रेप केस में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने सुनाई 10 साल की सज़ा
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने तरुण तेजपाल को 2013 के रेप मामले में बरी किए जाने के फ़ैसले को रद्द करते हुए 10 साल की सज़ा सुनाई है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 'तहलका' मैगज़ीन के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को 2013 के रेप मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल जेल की सज़ा सुनाई है। सेशन कोर्ट के 2021 के बरी करने के फ़ैसले को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
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Why It Matters
नवंबर 2013 में गोवा के एक होटल में एक युवा महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर यौन हमले का आरोप लगाया था। सेशन कोर्ट ने 2021 में उन्हें बरी कर दिया था जिसे अब हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
प्रकाशित 6 अगस्त 2026
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बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को रेप केस में 'तहलका' मैगज़ीन के एडिटर-इन-चीफ़ रहे तरुण तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल जेल की सज़ा सुनाई.
नवंबर 2013 में तरुण तेजपाल के ख़िलाफ रेप का मामला दर्ज किया गया था. सेशन कोर्ट से साल 2021 में तेजपाल को बरी किए जाने के फ़ैसले को अब हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है.
लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस डॉ नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसंदेकर की डिवीज़न बेंच ने गोवा सरकार की ओर से दाख़िल अपील को मंज़ूर करते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया.
सज़ा सुनाए जाने से पहले मीडिया से बातचीत में तरुण तेजपाल ने कहा है कि वो इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.
उन्होंने कहा कि तहलका मैगज़ीन की वजह से उनसे राजनीतिक प्रतिशोध लिया जा रहा है.
उन्होंने कहा, "ट्रायल कोर्ट में साढ़े सात साल केस लड़कर हम लोग बरी हुए थे. अब ये लोग फिर पीछे पड़ गए हैं. इनके साथ जो भी लोग हैं वो उन्हें बरी कर देते हैं और इनके ख़िलाफ़ जिन्होंने कभी भी पत्रकारिता की हो वो उनके पीछे पड़े रहते हैं."
फ़ैसला सुनाए जाने के समय तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद थे.
यह अपील सीआईडी की ओर से दायर की गई थी. मामले में राज्य सरकार की तरफ़ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने पक्ष रखा.
बेंच ने क्या कहा
बार एंड बेंच के अनुसार, अदालत ने कहा, "हमने निचली अदालत के फ़ैसले और आदेश को रद्द कर दिया है और तेजपाल को दोषी ठहराया है. हमने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ़) और (के), 354ए और 354बी के तहत दोषी ठहराया है."
धारा 354ए यौन उत्पीड़न को अपराध मानती है. इसमें अवांछित शारीरिक संपर्क, यौन संबंध बनाने के स्पष्ट संकेत, या सेक्सुअल फे़वर शामिल हो सकते हैं.
धारा 354बी किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला करने या आपराधिक मंशा से बल प्रयोग करने को अपराध मानती है.
लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस गोखले ने कहा, "हम आज दोपहर 2.30 बजे सज़ा की अवधि पर आदेश सुनाएंगे. तब तक तेजपाल को हिरासत में नहीं लिया जाएगा क्योंकि वह ज़मानत पर बाहर हैं."
तेजपाल की ओर से उनके वकील ने कहा, "लेकिन मेरे पास ऊपरी अदालत में अपील करने का अधिकार है. अगर ऊपरी अदालत कहेगी कि मुझे आत्मसमर्पण करना चाहिए, तो मैं आत्मसमर्पण कर दूंगा. अगर वह कहेगी कि मुझे ज़मानत मिलनी चाहिए, तो मैं वही करूंगा. मुझे जेल भेजकर उस अधिकार को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए."
वकील ने कहा कि वो (तेजपाल) कभी फरार नहीं हुए. उन्होंने अदालत के आदेशों का पालन किया है. उनका पासपोर्ट अब भी सरकारी अधिकारियों के पास है. बरी होने के बावजूद उन्होंने अब तक अपना पासपोर्ट वापस नहीं लिया है. इसलिए कृपया इस तथ्य पर भी ध्यान दें कि गिरफ़्तारी के बाद से वह अब तक कभी विदेश नहीं गए.
क्या है पूरा मामला
गोवा पुलिस ने लगभग तीन हज़ार पन्नों का आरोपपत्र दायर किया था. जिसमें तेजपाल पर "ग़लत तरीक़े से नियंत्रण, ग़लत तरीक़े से बंधक बनाने, यौन उत्पीड़न, हमला, पद का दुरुपयोग करके यौन शोषण" जैसे आरोप लगाए गए हैं.
तरुण तेजपाल ने सभी आरोपों से इनकार किया था और ख़ुद को बेकसूर बताया था.
अभियोजन पक्ष ने 156 गवाहों की सूची सामने रखी थी, लेकिन आख़िर में लगभग 70 की जिरह की गई.
नवंबर 2013 में गोवा के एक फ़ाइव स्टार होटल में 'तहलका' मैगज़ीन का कार्यक्रम था. इसी कार्यक्रम के दौरान एक युवा महिला सहकर्मी ने (भारतीय क़ानून के तहत जिनका नाम ज़ाहिर नहीं किया जा सकता) तरुण तेजपाल पर होटल की एक लिफ़्ट के अंदर उन पर यौन हमला करने का आरोप लगाया.
तेजपाल ने शुरू में कहा कि उनसे 'फ़ैसला करने में ग़लती हुई' और 'उन्होंने हालात का ग़लत अर्थ समझा' जिसकी वजह से 'ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई.'
लेकिन मामला बढ़ने पर उन्होंने एक बयान जारी कर अधिकारियों से कहा कि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए 'ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई ज़्यादा सही तरीक़े से सामने आ सके.'
जब ये मामला सामने आया उस वक़्त दिल्ली की एक महिला के बर्बर गैंगरेप और हत्या के बाद भारत में यौन हिंसा के प्रति रवैये के बारे में बहस छिड़ी हुई थी.
आलोचकों ने जेंडर असमानता और स्त्री-द्वेष पर कहानियां करने वाले 'तहलका' पर पाखंडी होने और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया.
महिला समूहों और एबीवीपी, बीजेपी युवा मोर्चा के सदस्यों ने तरुण तेजपाल के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया.
उन्हें 30 नवंबर 2013 को गिरफ़्तार कर लिया गया था और सात महीने बाद जुलाई में जेल से रिहा कर दिया गया.
बाद में वो अपने ख़िलाफ़ लगे आरोपों को ख़ारिज कराने के लिए गोवा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गए लेकिन उस समय कामयाब नहीं हो सके.
तरुण तेजपाल कौन हैं?
भारत के सबसे प्रसिद्ध पत्रकारों में से एक तरुण तेजपाल ने देश के कुछ जाने-माने अख़बारों और पत्रिकाओं में दशकों काम करने बाद साल 2000 'तहलका' पत्रिका शुरू की थी.
'तहलका' ने बहुत कम वक़्त में बेहतरीन खोजी पत्रकारिता करने के लिए नाम कमाया और भारतीय पत्रकारिता की कुछ सबसे बड़ी ख़बरें ब्रेक कीं.
स्टिंग ऑपरेशन 'तहलका' की ख़ासियत थी. 'तहलका' के रिपोर्टर अपनी पहचान बदलकर छिपे कैमरों से आम ज़िंदगी में भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम करते थे.
'तहलका' पत्रिका ने सबसे ज़्यादा नाम 2001 में अपने 'ऑपरेशन वेस्ट एंड' के लिए कमाया.
रिपोर्टरों ने ख़ुद को हथियारों के डीलर के तौर पर पेश किया, घूस और वेश्याओं के ऑफर दिए और सेना के अधिकारियों, नौकरशाहों और यहां तक कि सत्ताधारी बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष को फर्ज़ी हथियारों की बड़ी डील कराने के लिए घूस लेते हुए हिडेन कैमरे में क़ैद किया.
ये सब सामने आने पर भारत की तत्कालीन सरकार बचती नज़र आई और तेजपाल की लोकप्रियता बढ़ गई.
What to Watch
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तरुण तेजपाल इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
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Open Questions
- सुप्रीम कोर्ट में अपील का क्या परिणाम होगा?
- तरुण तेजपाल को आत्मसमर्पण कब करना होगा?

