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भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार मोर्चे पर तैनात किए, सिपरी की रिपोर्ट
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BBC हिंदी6/10/2026Defense6 min readIndia

भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार मोर्चे पर तैनात किए, सिपरी की रिपोर्ट

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सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 12 परमाणु हथियार मोर्चे पर तैनात किए हैं, जबकि 178 स्टोरेज में हैं। यह पहली बार है जब भारत ने शांतिकाल में ऐसी तैनाती की है, जिसे रक्षा विश्लेषक एक बड़ा बदलाव मान रहे हैं।

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Author, शिवांगी जायसवाल

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित 7 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

स्वीडन के एक अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र थिंकटैंक 'सिपरी' यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत ने पहली बार इस साल की शुरुआत में 12 परमाणु हथियारों को मोर्चे पर तैनात किया है.

हालांकि, 12 परमाणु हथियारों की तैनाती को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

8 जून को जारी सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में 178 परमाणु हथियार स्टोर में रखे हैं जो ज़रूरत पड़ने पर इस्तेमाल हो सकते हैं. वहीं, 12 परमाणु हथियारों को तैनात किया गया है. यानी भारत के पास कुल 190 परमाणु हथियार हैं. पिछले साल यह संख्या 180 थी और सभी स्टोरेज में थे.

पत्रकार और रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी शांतिकाल में हुई इस तैनाती को चौंकाने वाला मानते हैं.

उनका अनुमान है, "इन एटमी हथियारों को दो परमाणु पनडुब्बियों में तैनात किया गया है जो पूरी तैयारी के साथ पेट्रोलिंग करती हैं."

बीते साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष देखने को मिला था.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2025 और 2026 दोनों में ही पाकिस्तान ने कोई परमाणु हथियार तैनात नहीं किया है.

पाकिस्तान ने फ़िलहाल अपने परमाणु हथियारों को नहीं बढ़ाया है, उसके पास अभी 170 परमाणु हथियार हैं.

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यह रिपोर्ट बताती है कि युद्ध क्षेत्रों के बाहर भी अब देश, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयारी करने के लिए मॉडर्न साइबर जासूसी के तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी शांतिकाल में भविष्य के संघर्ष की तैयारी तेज़ हो गई है.

वॉरहेड्स तैनात करके भारत ने क्या रणनीति बदली है?

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इस मामले में रक्षा मामलों के विशेषज्ञ राहुल बेदी का कहना है कि भारत इस सिद्धांत पर चलता है कि वह पहले हमला नहीं करेगा.

वो इस सिद्धांत का मतलब समझाते हुए कहते हैं, "इसका मतलब होता है कि वॉरहेड (परमाणु हथियार) और मिसाइल (परमाणु हथियार को चलाने वाला हिस्सा), दोनों को अलग रखा जाता है."

"उनकी लोकेशन भी अलग होती है. फिर जब कोई इमरजेंसी होती है तो इनको एक साथ जोड़ा जाता है. इसीलिए न्यूक्लियर वैपन की तैनाती बड़ी गंभीर बात है."

पत्रकार और रक्षा विश्लेषक बेदी दावा करते हैं, "मेरा अनुमान है कि भारत ने अपनी दो न्यूक्लियर सबमरीन्स (पनडुब्बियों) में इन 12 वॉरहेड्स (परमाणु हथियारों) को तैनात किया है. ये महीनों तक पेट्रोलिंग पर रहती हैं और लंबी अवधि तक पेट्रोलिंग की क्षमता रखती हैं."

हालांकि, उनके इस दावे की पुष्टि बीबीसी नहीं करता है.

न्यूक्लियर सबमरीन (परमाणु पनडुब्बी) एक अत्याधुनिक युद्धपोत है जो पानी के भीतर चलती है और इसे ऊर्जा देने के लिए एक छोटे परमाणु रिएक्टर का उपयोग किया जाता है.

इसे सामान्य पनडुब्बियों की तरह ईंधन भरने या ऑक्सीजन के लिए बार-बार सतह पर आने की आवश्यकता नहीं होती है.

राहुल बेदी का कहना है कि भारत के न्यूक्लियर डिटरेंस (परमाणु प्रतिरोध) को समझकर ही हम भारत के इस कदम के महत्व को समझ सकते हैं.

वह बताते हैं कि भारत अपने ऊपर होने वाले किसी संभावित परमाणु हमले के लिए तीन तरीक़ों का प्रयोग करता है.

"पहला- एयर डिलीवरी, दूसरा- लैंड बेस्ड्स और तीसरा सबमरीन बेस्ड."

वह कहते हैं कि ये जो तीसरा तरीका है, यह सबसे सुरक्षित लेकिन मारक न्यूक्लियर डिटरेंस है क्योंकि समंदर में परमाणु पनडुब्बियों का पता लगाना बेहद मुश्किल है.

राहुल बेदी बताते हैं, "अमेरिका, रूस, चीन जैसे बड़े परमाणु देश भी इसी तरह पनडुब्बियों में अपने वॉरहेड्स तैनात रखकर पेट्रोलिंग कराते हैं. ठीक यही तरीका अब भारत ने अपनाया है. ये एक बड़ा बदलाव है."

उनका कहना है कि पी5 कहे जाने वाले इन देशों में पनडुब्बी पूरी तरह लोडेड होकर पेट्रोलिंग करती हैं, वे खाली हाथ पेट्रोलिंग नहीं करतीं. ऐसा लगता है कि भारत भी उनकी तरह ही पेट्रोलिंग के इस तरीके को अपना रहा है.

वो कहते हैं कि यह स्टैंडर्ड प्रोसीजर है, "ये सबमरीन लोडेड होती हैं, इसलिए अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत ने जो 12 वॉरहेड्स तैनात किए हैं, वे भी पूरी तरह लोडेड होंगे."

उनसे पूछा गया कि शांतिकाल में भारत ने ये तैनाती की है, मगर भारत सरकार लगातार यह भी कहती है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' जारी है, तो क्या भारत की रणनीति को इससे जोड़कर देखा जा सकता है?

इस पर वह कहते हैं, "यह कहना तो मुश्किल है कि ये सब, ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा है या ऑपरेशन सिंदूर- 2.0 का, मगर अब भारत बड़ी परमाणु शक्तियों की तरह ही समुद्री पेट्रोलिंग कर रहा है."

विस्फोटक ईंधन बनाने में भारत-इसराइल एक ही राह पर

सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत ने अपने परमाणु हथियारों की संख्या को तो तेज़ी से बढ़ाया है. साथ ही भारत अपने परमाणु हथियारों के ईंधन (फिसाइल मैटेरियल) को तेज़ी से बना रहा है.

अहम बात यह है कि इसे बनाने के लिए भारत, यूरेनियम संवर्धन के बजाय प्लूटोनियम का ज़्यादा इस्तेमाल कर रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक़, इसराइल भी ऐसा ही कर रहा है. जबकि पाकिस्तान, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने अपने परमाणु हथियारों के लिए दोनों तरह के विस्फोटक ईंधन का इस्तेमाल किया है.

राहुल बेदी का कहना है कि प्लूटोनियम से परमाणु हथियारों के लिए ईंधन बनाना एक गैर-परंपरागत तरीका है.

इसका इस्तेमाल कच्चे माल की उपलब्धता आदि पर निर्भर करता है. उनकी जानकारी के हिसाब से भारत के पास यूरेनियम संवर्धन और प्लूटोनियम दोनों से ईंधन बनाने की क्षमता है.

साथ ही वो इसराइल को लेकर कहते हैं, "ऐसा माना जाता है कि इसराइल भी एक परमाणु क्षमता संपन्न देश है मगर उसने सार्वजनिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं की है."

चीन तक पहुंच वाले हथियारों पर फ़ोकस, रक्षा ख़रीद बढ़ी

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का हथियार आधुनिकीकरण कार्यक्रम अब लंबी दूरी के ऐसे हथियार विकसित करने पर केंद्रित है, जो चीन के पूरे क्षेत्र में स्थित लक्ष्यों तक पहुंचने में सक्षम हो.

विशेषज्ञ राहुल बेदी कहते हैं कि यह भारत के लंबे समय से चल रहे कार्यक्रम का हिस्सा है. दोनों देशों के बीच पहले हुई झड़प के बाद भारत ने इस ओर ध्यान देना शुरू कर दिया था.

सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत अपने हथियारों की डिलीवरी सिस्टम को तेज़ी से अपग्रेड कर रहा है. दुनिया एक नई परमाणु प्रतियोगिता के दौर में पहुंच रही है.

उधर, चीन, पाकिस्तान, अमेरिका और रूस में भी हथियारों का अपग्रेडेशन चल रहा है.

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल भारत ने सेना पर 92.1 अरब डॉलर खर्चे, जिससे वह सबसे अधिक रक्षा खर्च के मामले में पांचवां देश बन गया. यह साल 2024 की तुलना में 8.9 प्रतिशत ज़्यादा था.

साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने बड़े पैमाने पर रक्षा हथियार ख़रीदे हैं. साल 2021 से 2025 के दौरान भारत ने दुनिया के 8.2 फीसदी रक्षा हथियार खरीदे. इसके साथ ही वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आयातक बन गया है.

एक जानकारी यह भी सामने आई है कि पड़ोसी पाकिस्तान ने भी हथियार ख़रीद बढ़ाई है.

यूक्रेन के अलावा, सऊदी अरब और क़तर ने भी खूब हथियार खरीदे हैं. इन सभी देशों ने संयुक्त रूप से दुनिया की 35% रक्षा ख़रीद की है.

भारत के रक्षा आयात पर राहुल बेदी चिंता जताते हैं कि बाहर से रक्षा खरीद की जगह घरेलू स्तर पर ही ज़्यादा निर्माण के बारे में सोचना होगा.

साथ ही वो जोड़ते हैं कि हाल में भारत ने इस ओर कुछ क़दम भी बढ़ाए हैं.

अभी दुनिया में 4 हज़ार वॉरहेड तैनात

रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ़ भारत ही नहीं, परमाणु क्षमता वाले दुनिया के कुछ और देशों ने भी अपने परमाणु हथियारों को तैनात कर रखा है.

इस साल (2026) की शुरुआत में भारत समेत नौ देशों के पास संयुक्त रूप से लगभग 12,187 परमाणु हथियार होने की जानकारी है.

इन देशों में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इसराइल शामिल हैं.

ऐसे 12 हज़ार से कुछ ज़्यादा परमाणु हथियारों में से करीब 4,012 परमाणु हथियारों को सैन्य बलों के साथ तैनात किया गया है.

पहले के मुक़ाबले परमाणु हथियार घटे

सिपरी का कहना है कि पारदर्शिता की कमी के कारण यह जानना मुश्किल होता जा रहा है कि किस देश के पास कितने हथियार हैं.

पिछले कुछ सालों में देशों ने अपने परमाणु हथियारों को लेकर और ज़्यादा गोपनीयता बरतनी शुरू कर दी है.

इसकी एक वजह हथियार नियंत्रण समझौतों का कमज़ोर होना है, जिसमें इन हथियारों के सौदों की जानकारी साझा करने का नियम शामिल है. ऐसा ही एक समझौता साल 2010 में हुआ था जिसका मक़सद रणनीतिक हथियारों को सीमित करने से जुड़ा था.

सबसे बड़ी परमाणु ताक़त हैं अमेरिका-रूस

अमेरिका-रूस के पास संयुक्त रूप से दुनिया के 86 प्रतिशत परमाणु हथियार हैं.

चीन के पास 600 परमाणु हथियार थे जो बढ़कर 620 हो गए हैं.

भारत रक्षा ख़रीद के मामले में दूसरे नंबर पर है, रक्षा बजट के मामले में 5वें पर.

स्रोत - सिपरी, ईयरबुक 2026

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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