
दिल्ली एम्स में 15 साल की तन्वी की मौत के बाद परिजनों ने 13 साल तक सर्जरी न करने और तारीख़ें देने का गंभीर आरोप लगाया है।
राजस्थान के कोटा की 15 वर्षीय तन्वी की दिल्ली एम्स में दिल की बीमारी के इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एम्स ने 13 साल तक सर्जरी नहीं की और केवल तारीख़ें दीं, जबकि एम्स का कहना है कि सर्जरी संभव नहीं थी।
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तन्वी का इलाज 2012 से दिल्ली एम्स में चल रहा था और उसे दिल में छेद की समस्या थी।
"दिन, महीने, साल बीतते गए लेकिन मेरी बच्ची का ऑपरेशन नहीं हो पाया. 31 अगस्त की देर रात साढ़े तीन बजे मेरी बेटी ने मेरे सामने दम तोड़ दिया."
15 साल की तन्वी की दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मौत हो गई, उसके दिल में छेद था. उनके मम्मी-पापा का आरोप है कि एम्स ने 13 सालों में भी उनकी बेटी की सर्जरी नहीं की, उन्हें तारीख़ पर तारीख़ दी जाती रही.
उनका आरोप है कि एम्स में साल 2012 से बेटी का इलाज चल रहा था, कई बार उन्हें अस्पताल से सर्जरी कराने का आश्वासन मिला, एक बार रुपये भी जमा करवाए और फिर सर्जरी टाल दी गई.
एम्स, दिल्ली ने दो सितंबर को एक बयान जारी कर कहा कि मीडिया रिपोर्टों के आधार पर मामले को गंभीरता से लेते हुए एक जांच कमेटी बनाई गई है.
साथ ही, एम्स ने कहा कि "मरीज तन्वी की कई बार गहन जांचें गईं और यह निष्कर्ष निकला था कि सर्जरी संभव ही नहीं है, इसलिए मेडिकल मैनेजमेंट और रेग्युलर फॉलोअप की सलाह दी गई थी."
तन्वी के पिता मुकेश कुमार ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात की.
उन्होंने दावा किया, "एम्स वाले ऑपरेशन के लिए हां भी कर रहे थे इसलिए हम उनके भरोसे रहे."
यह पूछने पर कि एम्स के अलावा कहीं और भी क्या बेटी के इलाज के लिए प्रयास किए थे? उन्होंने कहा, "साल 2013 में हमने दिल्ली के एक निजी अस्पताल में तन्वी की जांचें कराईं थी. लेकिन, उन्होंने तीन ऑपरेशन और बहुत खर्चा बताया था. इसलिए हम एम्स के भरोसे रहे."
उनका कहना है कि इस सब से परेशान होकर उन्होंने 2016 में सर्जरी की गुहार लगाते हुए पहली शिक़ायत प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थी. और केंद्रीय चिकित्सा मंत्री जेपी नड्डा को भी मेल किया मगर हर जगह से निराशा हाथ लगी.
मुकेश ने कहा है कि वे जल्द ही एम्स के ख़िलाफ़ केस दर्ज करवाएंगे.
तन्वी जब दो साल की थीं, तब से चल रहा था एम्स में इलाज
तन्वी का परिवार राजस्थान में कोटा के गुमानपुरा इलाके का रहने वाला है. पिता मुकेश कुमार परियानी और मां भाविका परियानी अपनी बच्ची का इलाज दिल्ली के एम्स में करा रहे थे.
मुकेश एक कपड़े की दुकान में सेल्स मैन हैं, पत्नी भाविका गृहणी हैं. उनके दो बच्चे हैं जिसमें तन्वी छोटी थीं. उनका बड़ा बेटा जयपुर के एक कॉलेज से बीटेक कर रहा है.
भाविका अपनी बेटी तन्वी को याद कर लगातार रो रही हैं.
तन्वी की मां अपने घर के जिस कमरे में हमसे बात कर रही थीं, उसके ठीक पीछे तन्वी का स्टडी टेबल है, जिसके सामने की दीवार पर लिखा हुआ था, "आई कैन एंड आई विल" (मैं कर सकती हूं, और मैं करके रहूँगी).
मुकेश बताते हैं कि तन्वी क़रीब दो साल की थीं, तब उसकी तबीयत खराब हुई. उसी दौरान 15 अगस्त, 2012 को कोटा में हुई एक जांच में पता चला कि बच्ची के दिल में छेद है.
वह कहती हैं कि बेटी के बेहतर इलाज के लिए स्थानीय डॉक्टर ने एम्स जाने की सलाह दी.
उन्होंने कहा, "मैं पहली बार साल 2012 में बेटी को दिल्ली एम्स लेकर गया. फिर इलाज चलता रहा. 2013 में जांचें हुईं और फिर साल 2014 में सर्जरी की बात कही गई और इसलिए हमने पैसे भी जमा कराए, बाकी जांच की प्रक्रिया भी हुई. मगर फिर इसे टाल दिया गया."
मुकेश ने एम्स में सवा लाख रुपये जमा करवाने की स्लिप भी दिखाई.
मुकेश दावा करते हैं, "फिर साल 2015 में दो सितंबर को ऑपरेशन करने के लिए तारीख़ दी गई. मैं बेटी को ऑपरेशन के लिए लेकर गया तो उन्होंने ऑपरेशन टाल दिया. फिर सोलह दिसंबर को तन्वी को भर्ती किया और फिर ऑपरेशन टाल दिया."
वह एम्स दिल्ली में साल 2012 से लेकर अब तक के इलाज के कागज़, ऑपरेशन के नाम पर एक बार 2013 में जमा किए सवा लाख रुपये की रसीद समेत कई डॉक्यूमेंट्स दिखाते हुए कहते हैं कि "खूब शिक़ायतें भी कीं लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई."
उन्होंने कोटा के सांसद और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से भी मिलकर निवेदन किया था और बेटी के दिल की सर्जरी एम्स दिल्ली में जल्द से जल्द करवाने की गुहार लगाी थी.
उनका यह भी दावा है कि ओम बिरला के पीए ने एम्स में फोन करके सर्जरी के लिए कहा भी था. मगर फिर भी ऑपरेशन नहीं हुआ.
हमने इन आरोपों को लेकर ईमेल के जरिए एम्स के डॉ. सचिन तलवार से उनका पक्ष पूछा जिसका कोई जवाब नहीं मिला है.
मुकेश कहते हैं कि इसके बाद से लगातार इस साल (2026) तक उन्हें तारीख़ें दी गईं, लेकिन बेटी का ऑपरेशन नहीं किया गया.
तन्वी की मां कहती हैं कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उनकी बेटी की हालत ठीक थी लेकिन फिर अचानक ये (तन्वी की मौत) हो गया.
हालांकि एम्स ने जारी बयान में तन्वी की मौत का कारण हाइपोक्सिक स्पेल के बाद कार्डियक अरेस्ट होना बताया गया. यानी शरीर में ऑक्सीजन की गंभीर कमी के बाद हृदय गति रुक गई.
वो कहती हैं, "मैं एक उम्मीद से गई थी कि वहां अच्छे डॉक्टर्स हैं लेकिन देखिए हमारे साथ क्या हुआ. हमें निराशा ही मिली."
मुकेश कहते हैं कि बेटी की मौत के बाद मैंने 112 नंबर पर पुलिस में शिकायत की थी.
वह कहते हैं, "उस दौरान मैं और मेरी पत्नी ही अस्पताल में थे. हम घबरा गए थे और अपनी बेटी का शव लेना था इसलिए पोस्टमॉर्टम करवा कर शव ले आए. मुझे एम्स दिल्ली पर कोई भरोसा नहीं है."
वह कहते हैं कि उन्हें एफ़आईआर कराने का समय नहीं मिला लेकिन अब वो एफ़आईआर कराएंगे.
मुकेश और उनकी पत्नी कहते हैं, "हमारी बेटी तो अब लौट कर नहीं आ सकती है. लेकिन, दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए. हमारी बेटी की मौत नहीं बल्कि हत्या हुई है, दोषियों को सज़ा मिलना ही हमें न्याय मिलना होगा."
एम्स की ओर से जांच के लिए कमेटी गठन की घोषणा को लेकर मुकेश का कहना है कि कमेटी बनाने से कुछ नहीं होता है, ये सिर्फ़ लीपापोती का जरिया है.
वह कहते हैं कि अगर उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाएगी तो बहुत कुछ सामने आएगा.
दिल्ली एम्स ने क्या कहा है?
एम्स की ओर से जारी बयान के मुताबिक़, "तन्वी को 24 अगस्त को तबीयत बिगड़ने पर एम्स में एडमिट करवाया गया था, इस बार हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना का मूल्यांकन किया जा रहा था. और 31 अगस्त और एक सितंबर की मध्य रात्रि करीब तीन बजे उनकी हालत गंभीर हो गई. एक सितंबर की सुबह पांच बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया."
बयान में बताया गया कि तन्वी को रात में अचानक बहुत ज़्यादा थकान और कमजोरी महसूस होने लगी. इसके बाद उन्हें गंभीर सायनोसिस (शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण त्वचा का नीला पड़ना) हो गया और ऑक्सीजन सैचुरेशन घटकर लगभग 48 प्रतिशत रह गया.
ऑक्सीजन सपोर्ट दिए जाने के बाद भी गंभीर हाइपॉक्सिक स्पेल बना रहा, जिसके कारण हृदय गति रुक गई.
बयान में कहा गया है कि तत्काल और लगातार किए गए पुनर्जीवन (रेससिटेशन) प्रयासों के बावजूद, बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी रही और सुबह पांच बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया.
एम्स ने यह भी बताया है कि, "तन्वी पहली बार 10 अक्तूबर, 2012 को एम्स की कार्डियोलॉजी ओपीडी में इलाज के लिए लाई गई थीं."
जांच में वीएसडी (दिल में छेद) के साथ पलमोनरी एट्रिशिया पाया गया.
साल 2013 में तन्वी की हार्ट सर्जरी की संभावना का विस्तृत मूल्यांकन किया गया, जिसमें सीटी एंजियोग्राफ़ी, कार्डियक कैथीटेरा इजेशन जैसी जांचें शामिल थीं.
एम्स के मुताबिक़, "तन्वी के दिल की जटिल बनावट और बीमारी की गंभीरता को देखते हुए, बाद में किए गए मूल्यांकन से 2017 में यह निष्कर्ष निकला गया कि उस समय सुधारात्मक सर्जरी संभव नहीं थी."
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मुकेश कुमार एम्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे
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