'ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो': राहुल गांधी बोले- 'ये देशद्रोह है, मोदी, शाह हों या ज्ञानेश, किसी को नहीं बख़्शेंगे'
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद से निर्वाचन आयोग तक मार्च किया। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद उन्होंने सड़क पर धरना दिया।
Quick Look
राहुल और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक के सांसदों ने वोट चोरी और मतदाता सूची के एसआईआर के विरोध में संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च निकाला। पुलिस द्वारा रोके जाने पर सांसदों ने सड़क पर धरना दिया।
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Why It Matters
विपक्षी दलों ने मतदाता सूचियों के एसआईआर में अनियमितताओं और कथित वोट चोरी के खिलाफ मार्च निकाला।
'ज्ञानेश इट्स डन ब्रो': राहुल गांधी बोले- चुनाव आयुक्त हमसे मिल क्यों नहीं रहे हैं?
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा निर्वाचन आयोग मुख्यालय पहुँचने के लिए आकाशवाणी भवन परिसर में दाखिल हो गए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, राहुल और प्रियंका पुलिस के रोके जाने के बावजूद वहाँ दाखिल हो गए.
राहुल गांधी ने कहा, "300 से ज़्यादा विपक्षी सांसद आज संसद से चुनाव आयोग तक मार्च कर चुनाव आयुक्तों से मिलने पहुंचे. हम करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं. चुनाव आयुक्त हमसे मुलाक़ात क्यों नहीं कर रहे हैं? पुलिस हमें रोक क्यों रही है और धमका क्यों रही है?"
इससे पहले इंडिया ब्लॉक के नेता चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे, जिसे पुलिस ने रोक दिया था.
सांसद संसद से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे.
विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने मंगलवार को कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर के विरोध में संसद से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च शुरू किया था.
यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच निकाला गया.
लेकिन इन सांसदों को नीति आयोग कार्यालय के सामने रोक दिया गया है.
यह जगह नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच स्थित उस मार्ग पर है, जो निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर जाता है.
आगे जाने से रोके जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया.
विपक्षी सांसदों के हाथों में आरएसएस की वर्दी में ज्ञानेश कुमार को दर्शाने वाले कटआउट थे.
उन्होंने "बीजेपी ही मुख्य चुनाव आयुक्त है", "वोट चोर, गद्दी छोड़" और "लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है" जैसे नारे लगाए.
राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "ज्ञानेश, ज्ञानेश इट्स डन ब्रो. अब इस्तीफ़ा देने का समय है."
मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पर रोक दिया. इसके बाद सांसदों ने वहीं धरना दिया.
यह विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के एक दिन बाद हुआ, जिसमें अदालत ने कहा था कि उसने फ़ॉर्म 6 के किसी भी संशोधन को मंज़ूरी नहीं दी है.
विपक्ष मतदाता सूचियों के एसआईआर में अनियमितताओं का आरोप लगा रहा है.
दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों के दौरान बेईमानी से काम किया.
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने "पूरी तरह बेख़ौफ़ तरीक़े से खेल खेला.
उन्होंने चंडीगढ़ मेयर चुनाव विवाद का ज़िक्र करते हुए कहा, "चंडीगढ़ का खेल कौन भूल सकता है?"
मार्च को देखते हुए संसद और निर्वाचन आयोग मुख्यालय के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग की गई थी.
सांसदों के पहुँचने से काफ़ी पहले ही इलाक़े में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई थी.
आकाशवाणी और निर्वाचन आयोग मुख्यालय के आसपास रैपिड एक्शन फ़ोर्स (आरएएफ़) के जवानों की भारी मौजूदगी देखी गई.
इंडिया ब्लॉक के नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिलना चाहते हैं.
विरोध प्रदर्शन का आह्वान 30 सितंबर को 19 विपक्षी दलों की बैठक के बाद किया गया था.
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 10 अक्तूबर को जंतर मंतर से विरोध प्रदर्शन का एलान किया है.
सोमवार को सीजेपी ने इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित प्रदर्शन का स्वागत किया था.
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