ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन: नई दिल्ली घोषणापत्र और भारत की कूटनीतिक चुनौतियां
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद, आर्थिक संरक्षणवाद और मध्य-पूर्व संकट पर चर्चा हुई।
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भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन हुआ। इसमें व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग और मसूद पेज़ेश्कियान सहित कई वैश्विक नेताओं ने भाग लिया। घोषणापत्र में आतंकवाद की निंदा, आर्थिक संरक्षणवाद पर चिंता और मध्य-पूर्व में शांति की अपील की गई है।
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Why It Matters
ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित किया गया, जिसमें 21 देशों के परिवार ने भाग लिया। यह समूह वैश्विक आबादी के 50% और जीडीपी के 40% का प्रतिनिधित्व करता है।
भारत में आयोजित ब्रिक्स 2026 का समापन हो चुका है. इस शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनिपिंग और ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियान भी शामिल हुए.
वहीं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और मलेशिया के समेत अन्य देशों के नेताओं ने भी इसमें शिरकत की.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ से जहां दुनिया भर के कारोबार में उथल-पुथल मची हुई है, वहीं ईरान पर इसराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले के बाद से मध्य-पूर्व संघर्ष के दौर से गुज़र रहा है.
इससे जहां वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है, वहीं तेल और गैस की क़ीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. ऐसे समय में दुनिया की तक़रीबन आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं के एक मंच पर होना ही काफ़ी अहम है.
साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "अगर आप नई दिल्ली घोषणापत्र पर गौर करें तो इसका मुख्य संदेश यही है कि आप (दुनिया के अन्य देश) ग्लोबल साउथ को दरकिनार नहीं कर सकते."
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सदस्य देशों और साझेदार राष्ट्रों की व्यापक भागीदारी ब्रिक्स की बढ़ती प्रासंगिकता, खुलेपन और समावेशी स्वरूप का प्रमाण है.
उन्होंने कहा, "ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है, अब दुनिया हमसे ठोस परिणामों की अपेक्षा करती है."
भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मेरा मानना है कि यह कुल मिलाकर सफल आयोजन रहा है. संयुक्त राष्ट्र अब कमज़ोर पड़ चुका है और यह प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहा है. ऐसे में ब्रिक्स अब आगे बढ़ रहा है."
नई दिल्ली में चल रहे 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में शनिवार को जारी संयुक्त घोषणापत्र में तीन अहम मुद्दों का ज़िक्र किया गया. इसमें आतंकवाद के हर रूप की कड़ी आलोचना की गई. ब्रिक्स ने आतंकवाद, इसकी आर्थिक मदद, सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना दिए जाने के ख़फ़ मिलकर कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता दोहराई.
45 पन्नों और 140 बिन्दुओं के नई दिल्ली घोषणापत्र में "22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले" की निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी.
ब्रिक्स घोषणापत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी टैरिफ़ का नाम नहीं लिया गया है लेकिन कहा गया है कि कई देशों को 'अन्यायपूर्ण और एकतरफ़ा संरक्षणवादी कदमों' से नुकसान हो रहा है.
ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियान ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की. नई दिल्ली घोषणापत्र में मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव पर "गहरी चिंता" जताई गई है. समूह ने दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया, जिसमें 1967 की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य सीमाओं के भीतर एक संप्रभु और स्वतंत्र फ़लस्तीन राज्य की बात की गई है.
Open Questions
- भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का दीर्घकालिक समाधान क्या होगा?
- ब्रिक्स घोषणापत्र का वास्तविक आर्थिक प्रभाव क्या होगा?

