
दिल्ली की एनआईए कोर्ट ने कथित म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए देश छोड़ने की अनुमति दी है। कांग्रेस ने इस रिहाई को अमेरिकी दबाव का परिणाम बताया है।
AI-generated summary
मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को मार्च 2026 में अवैध रूप से म्यांमार सीमा पार करने और ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। एनआईए तय समय में यूएपीए के तहत आरोप पत्र दाखिल करने में विफल रही, जिससे उन्हें डिफॉल्ट जमानत मिल गई।
दिल्ली की राउज़ एवेन्यू की विशेष एनआईए कोर्ट ने कथित म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में गिरफ़्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने देश लौटने की इजाज़त दे दी है।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, कोर्ट ने गुरुवार को सातों अभियुक्तों को कुछ शर्तों और औपचारिकताओं के तहत अपने मुल्क जाने की अनुमति दे दी।
गुरुवार को ही रात में मैथ्यू आरोन वैनडाइक को दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया और वो अपने देश रवाना हो गए।
क़ानूनी मामलों को कवर करने वाले पोर्टल बार एंड बेंच के मुताबिक़, विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने 24 सितंबर को यह आदेश तब दिया, जब 18 सितंबर को ही सभी सात अभियुक्तों को डिफ़ॉल्ट ज़मानत मिल चुकी थी।
एनआईए तय समय में अपनी जांच पूरी करने और गैरक़ानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपपत्र दाखिल करने में नाकाम रही थी।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एनआईए ने मार्च 2026 में गिरफ़्तार किया था। यूक्रेनी नागरिकों के नाम हुर्बा पेट्रो, स्लिविएक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफ़ानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर हैं।
उनके ख़िलाफ़ यूएपीए की धारा 18 के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई थी। उन पर टेरर एक्टिविटीज़ को अंजाम देने की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया था।
18 सितंबर को जब अभियुक्तों को डिफॉल्ट ज़मानत दी गई तो मैथ्यू के वकील रोहित डांड्रियाल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उम्मीद जताई थी कि उनके क्लाइंट 'जल्द ही जेल से बाहर होंगे.'
वकील रोहित डांड्रियाल ने कहा था, "अदालत ने साफ़ तौर पर कहा कि अब मेरे मुवक्किल को ज़मानत पाने का अधिकार है, क्योंकि वह 180 दिनों से ज़्यादा समय से जेल में बंद हैं. यूएपीए मामले में एनआईए ने आरोप पत्र दाख़िल नहीं किया है. इस एक्ट में 180 दिन में आरोप पत्र दाख़िल करना अनिवार्य है."
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़, कोर्ट ने अभियुक्तों को एक महीने की अवधि समाप्त होने के बाद भारत लौटने और 72 घंटे में कोर्ट को जानकारी देने का आदेश दिया है.
बार एंड बेंच के अनुसार, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक समेत सातों अभियुक्तों पर आरोप था कि वे वैध परमिट के बिना मिज़ोरम में दाख़िल हुए और फिर अवैध रूप से सीमा पार करके म्यांमार पहुंचे. वहां इस ग्रुप ने कथित तौर पर म्यांमार की सैन्य सरकार से लड़ रहे जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग दी.
शुरुआत में इस मामले में यूएपीए की धारा 18 के तहत केस दर्ज किया गया था. हालांकि, एनआई ने मामले में दाख़िल पहली चार्जशीट में सिर्फ़ इमिग्रेशन और फ़ॉरेनर्स एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का ज़िक्र किया. बाद में एनआईए ने स्पष्ट किया कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ टेरर से जुड़े आरोप नहीं हटाए गए हैं.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अभियुक्तों की रिहाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर अमेरिकी दबाव का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "एक व्यक्ति अपनी टीम के साथ पर्यटक बनकर हमारे देश आता है. वह मिज़ोरम से म्यांमार की सीमा पार करता है, वहां उग्रवादियों को ट्रेनिंग देता है, वापस आता है और उसे गिरफ़्तार कर लिया जाता है. और अचानक उसे रिहा किया जा रहा है? सरेंडर मोदी से पूछिए, आप अमेरिका के सामने और कितना सरेंडर करेंगे?"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को एक्स पर एक लंबी पोस्ट में आरोप लगाया कि 23 से 26 मई के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री के भारत दौरे के समय भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी के सामने यह मुद्दा उठाया था.
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने विदेशी नागरिकों की रिहाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "भारत, हमेशा से एक सॉफ़्ट स्टेट रहा है. अमेरिकी गुप्त अभियान चलाने वाले मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी ड्रोन विशेषज्ञों को चुपचाप भारत छोड़ने की अनुमति देने का फ़ैसला किसी एक मामले में क़ानूनी फ़ैसले को पलटने तक सीमित नहीं है."
AI outlook — possibilities, not facts
अभियुक्तों को एक महीने बाद भारत लौटने के लिए कोर्ट में रिपोर्ट करना होगा।
Very likely · Within months
President Trump's recent social media endorsement of Pakistan PM Shehbaz Sharif and a trade truce with China have signaled a shift in US foreign policy, causing concern in New Delhi regarding the future of the US-India strategic partnership.
Opposition INDIA bloc parties will meet in New Delhi on September 30 to discuss the Election Commission's Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls, following reports of internal disagreements within the poll panel and demands for the CEC's resignation.
West Bengal CM Mamata Banerjee has demanded the resignation of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, alleging that the EC's electoral roll revision process was manipulated to favor the BJP. She also reported violence against TMC members during a rally in Serampore.
The Election Commission of India has clarified that all Special Intensive Revision (SIR) decisions were unanimous, following reports of internal discord. The body also introduced simplified verification procedures for voters and extended claim deadlines in Delhi and Maharashtra.
Karnataka minister Priyank Kharge criticized the BJP for defending the Election Commission after reports claimed election commissioners raised objections over electoral-roll procedures.
Union minister Prahlad Joshi criticized the opposition's protest against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar over the SIR controversy, stating there is no concrete proof of wrongdoing and that all ECI decisions were unanimous.