
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक उज़्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौरे पर हैं, जहां वह एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से संभावित मुलाक़ात कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक सीमा विवाद और भू-राजनीतिक तनाव के बीच संबंधों को सुधारने का संकेत दे सकती है।
AI-generated summary
भारत 2017 से एससीओ का सक्रिय सदस्य है। पिछले साल मोदी ने सात साल में पहली बार चीन का दौरा किया था, लेकिन सीमा विवाद के कारण संबंधों में केवल धीरे-धीरे सुधार हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है, जिससे चीन की आर्थिक और तकनीकी स्थिति मज़बूत हुई है।
प्रकाशित 12 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 7 मिनट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक उज़्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौरे पर हैं. वो शनिवार सुबह दिल्ली से उज़्बेकिस्तान के लिए रवाना हुए हैं.
प्रधानमंत्री मोदी 29 से 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे. इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे, जहां वह 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. यहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी मुलाक़ात हो सकती है.
पिछले साल पीएम मोदी ने सात साल में पहली बार चीन का दौरा किया था, लेकिन दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे ही सुधार हुआ है. हाल में सीमा से जुड़े एक विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच तीख़ी राजनयिक बयानबाज़ी भी हुई थी.
लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट का मानना है कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधर रहे हैं और आपसी आदान प्रदान का सिलसिला इसी बात का संकेत है.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 30 अगस्त से 3 सितंबर तक बिश्केक में एससीओ के शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और किर्गिस्तान और मिस्र की राजकीय यात्राएं करेंगे.
यह सम्मेलन एससीओ के 25 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है. भारत साल 2017 से एससीओ का सक्रिय सदस्य रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने रवाना होने से पहले एक्स पर लिखा, "अगले कुछ दिनों में उज़्बेकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य की यात्रा पर रहेंगे. कार्यक्रमों में शामिल हैं- ताशकंद में राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बातचीत, जिसका उद्देश्य भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दोस्ती को और मजबूत करना है."
उनके कार्यक्रम में ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओरिएंटल स्टडीज में शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र का दौरा भी शामिल है.
छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें
सबसे अधिक पढ़ी गईं
समाप्त
क्या पीएमी मोदी और राष्ट्रपति शी की मुलाक़ात होगी
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया
देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.
एपिसोड
समाप्त
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कहा जा रहा है कि एक बार फिर चीन, भारत और रूस के नेता एक मंच पर साथ दिखेंगे.
पिछले साल सितंबर में चीन के तियानजिन में हुए एससीओ सम्मेलन में तीनों नेताओं की गर्मजोशी भरी मुलाक़ात काफ़ी चर्चित रही थी.
उस समय कहा गया कि शी जिनपिंग और पीएम मोदी ऐसे समय पर मिले, जब वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ वॉर और एकतरफ़ा फ़ैसलों का सामना कर रहे थे.
इस मुलाक़ात को रिश्तों को संतुलित करने की सतर्क कोशिश के रूप में देखा गया.
अब फिर से एससीओ की बैठक है और दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाक़ात की अटकलें लगाई जा रही हैं.
भारत और चीन दुनिया के दो बड़े देश हैं और दोनों पड़ोसी भी हैं. ख़ास बात यह है कि चीन के साथ जहां भारत के बड़े कारोबारी संबंध हैं, वहीं सीमा विवाद की वजह से अक्सर यह संबंध सुर्खियों में होता है.
ऐसे में दोनों ही देशों के राष्ट्राध्यक्षों का एक मंच पर होना काफ़ी अहम माना जा रहा है. हालांकि इस दौरान दोनों नेताओं की आपसी मुलाक़ात के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है.
लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि भारत में हो रहे ब्रिक्स के अगले सम्मेलन से पहले दोनों नेताओं के बीच अलग से मुलाक़ात की प्रबल संभावना है.
साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के एसोसिएट प्रोफ़ेसर धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "मुझे लगता है कि एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की अलग से मुलाक़ात होनी चाहिए. जिस तरह की ख़बरें हैं कि शी जिनपिंग अगले महीने भारत में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं, तो ऐसी मुलाक़ात की संभावना बढ़ जाती है."
उनका कहना है, "अभी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी चीन की यात्रा पर थे और उनकी यात्रा कुल मिलाकर अच्छी रही है. दोनों देशों के बीच ज़ाहिर तौर पर सीमा विवाद ही सबसे अहम है, लेकिन डोभाल की यात्रा के बाद राजनीतिक तौर पर दोनों ही देशों की ओर से कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की गई है."
धनंजय त्रिपाठी के मुताबिक़, "दो बड़ी राजनीतिक हस्तियाँ एक साथ एससीओ बैठक में होंगी और मुझे कोई वजह नहीं दिखती है कि शी जिनपिंग और पीएम मोदी की मुलाक़ात वहां न हो."
भारत के लिए क्यों है अहम
मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात में दुनिया के कई देशों के रिश्ते नया आकार ले रहे हैं. यह स्थिति भारत और चीन के लिए भी समान रूप से काफ़ी अहम है.
ख़ासकर 28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका ने जब ईरान पर हमले किए, उसके बाद से कई देशों के अंतराष्ट्रीय संबंध और कई पुराने राजनीतिक समीकरण बदलते हुए दिख रहे हैं.
इस दौरान जंग के असर समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और ख़ास कर तेल और ग़ैसी की सप्लाई से लेकर उनकी कीमतों पर इसका असर देखा गया है.
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ ने अंतरराष्ट्रीय कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है.
ऐसे में चीन एक मज़बूत देश के तौर पर उभरा है. आर्थिक ताक़त से लेकर तकनीक और एआई जैसे क्षेत्र में चीन ने दुनियाभर में स्थिति काफ़ी मज़बूत बनाई है.
धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में जो बदलाव हो रहे हैं उसमें भारत जैसे बड़े देश को अपने हितों को सुरक्षित करने के लिए मल्टीएलाइनमेंट स्ट्रेटजी अपनानी पड़ेगी. उसमें चीन का जो उदय हुआ है, जिसे आज आप दरकिनार नहीं कर सकते."
उनका कहना है, "मौजूदा हालत में भारत को अमेरिका ही नहीं चीन से भी अपने संबंध ठीक करने होंगे और इसके लिए पीएम मोदी का बैठक में शामिल होना बड़े संकेत देता है. चीन के साथ हमारे कारोबारी संंबंध अच्छे हैं, लेकिन हमें राजनीतिक संबंध भी अच्छे करने होंगे."
शी जिनपिंग भारत आएंगे?
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ शामिल हो सकते हैं.
एजेंसी ने तीन सूत्रों के हवाले से जानकारी दी थी. अगर ऐसा होता है तो यह सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी और दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच संबंधों में सुधार का एक और संकेत माना जाएगा.
रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत 12 और 13 सितंबर को इस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है. इसमें शी की मौजूदगी पर ब्रिक्स के एजेंडे से ज़्यादा इस बात को लेकर नज़र रहेगी कि यह 2020 में सीमा पर हुई घातक झड़पों के बाद बीजिंग और नई दिल्ली के बीच संबंधों को स्थिर करने की कोशिशों के बारे में क्या संकेत देती है.
इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक भारतीय सूत्र ने रॉयटर्स को बताया, "चीनी अधिकारी होटल और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देने में जुटे हैं."
दो अन्य भारतीय सूत्रों ने कहा कि शी के साथ क़रीब 400 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल आने की संभावना है. 2019 में पिछली बार आए प्रतिनिधिमंडल में 200 से कम अधिकारी थे.
सूत्रों ने कहा कि दोनों देशों के अधिकारी शिखर सम्मेलन के दौरान लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मतभेदों को संभालते हुए आपसी संपर्क बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं.
शंघाई सहयोग संगठन क्यों है महत्वपूर्ण
शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की स्थापना वर्ष 2001 में चीन, रूस और सोवियत संघ का हिस्सा रहे चार मध्य एशियाई देशों कज़ाख़स्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने मिलकर थी.
इसका उदय रूस, चीन और इन मध्य एशियाई देशों के बीच वर्ष 1996 में सीमा को लेकर हुए एक समझौते के साथ हुआ था. इसे 'शंघाई फ़ाइव' समझौता कहा गया.
चीन के सुझाव पर इस समझौते का विस्तार, क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया.
सदस्य देशों के बीच व्यापार और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए, संगठन की भूमिका भी बढ़ाने की बात की गई.
ये वो दौर था जब सोवियत संघ में टूट के नकारात्मक नतीजों और अव्यवस्थाओं के बारे में पूरी दुनिया में चिंता जताई जा रही थी.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
AI outlook — possibilities, not facts
शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे
Likely · Within months
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर बातचीत बढ़ेगी
Possible · Within weeks
A Haitian gang released 13 hostages — seven women and six children — from a group of 50 kidnapped during a violent August 23 attack on the farming community of Kenscoff near Port-au-Prince. Unicef assisted in securing their release, noting the victims included three children under two, a seven-year-old, and two teenage girls. The attack killed at least 47 people and was led by gang leader Izo 2, who had threatened to execute hostages if police engaged his forces. UN data shows over 260 killed and 200 homes destroyed in Kenscoff over two months in early 2025, with 3,000 displaced and ongoing attacks involving rape, kidnapping, and arson.
Prime Minister Narendra Modi has arrived in Uzbekistan for a two-day state visit to strengthen strategic ties. Following his stay in Tashkent, he will travel to Bishkek, Kyrgyzstan, to attend the 26th Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit.
Former South Africa captain Faf du Plessis joined Indian cricket legends Sachin Tendulkar and Irfan Pathan in expressing solidarity with Nepal after deadly floods. India has dispatched 57.6 tonnes of relief material and a specialized rescue team to assist.

नेपाल के रसुवागढ़ी में बाढ़ के कारण कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले करीब 1,000 लोगों से संपर्क टूट गया है। अपर त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग में 400 से अधिक लोगों के फंसे होने की आशंका है। बचाव कार्य के लिए सेना और हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।
A father from Thane is awaiting information on his son, Abhishek Ghone, who went missing during flash floods in central Nepal. Despite unofficial AI-based location tracking suggesting a safe zone, the family continues to seek verified updates from authorities.
A sudden flash flood caused by a glacial ice and bedrock collapse in Nepal's Rasuwa district killed hundreds, destroyed settlements, and left foreign nationals unaccounted for as rescue efforts continue.