
गिर सोमनाथ ज़िले के वलादर गांव में शेरों और तेंदुओं की बढ़ती आवाजाही से ग्रामीण दहशत में हैं।
गुजरात के वलादर गांव में शेरों और तेंदुओं की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों का जीवन संकट में है। हाल ही में एक व्यक्ति की मौत और पशुओं के शिकार की घटनाओं ने स्थानीय लोगों में डर पैदा कर दिया है, जिससे उनकी दैनिक दिनचर्या और खेती प्रभावित हो रही है।
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वलादर गांव गिर के जंगल की सीमा पर स्थित है, जिसके कारण यहां शेरों और तेंदुओं की आवाजाही सामान्य है। हाल के वर्षों में यह आवाजाही गांव की गलियों तक बढ़ गई है।
गुरुवार, 22 अक्तूबर की सुबह गिर सोमनाथ ज़िले के कोडीनार तालुका के वलादर गांव में गोबरभाई गोहिल के घर के बाहर एक मरा हुआ बछड़ा पड़ा था.
उसकी गर्दन पर गहरे घाव थे और वहां जमा हुआ ख़ून साफ़ दिखाई दे रहा था.
गोबरभाई की पत्नी लाखुबेन ने बताया कि एक शेरनी ने बछड़े को पकड़ रखा था, जिसे उन्होंने शोर मचाकर भगाया.
पेशे से किसान गोबरभाई बताते हैं कि 21 अक्तूबर की रात क़रीब 11 बजे एक शेरनी अपने दो बच्चों के साथ उनके घर के पास आ गई थी.
इससे 10 दिन पहले, 12 अक्तूबर की रात भी एक शेरनी इसी तरह वलादर गांव में आ गई थी. उसने 30 साल के महेश राठौड़ पर हमला किया और उनकी जान ले ली.
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि महेश राठौड़ गांव के पीछे झाड़ियों से घिरे अपने घर के बाहर सो रहे थे.
बाद में वन विभाग ने कम उम्र की एक शेरनी को पकड़कर पिंजरे में बंद कर दिया, लेकिन वलादर के लोगों का कहना है कि इसके बाद भी गांव की गलियों में हर रात शेरों का आना जारी है.
21 अक्तूबर की शाम क़रीब पौने आठ बजे वलादर के चौक में किसान परेशभाई कांजीभाई कयाडा ने बताया कि शेरों की वजह से गांव की हालत बहुत ख़राब है. गांव की 80 फ़ीसदी ज़मीन पर बाग़ हैं और बाक़ी 20 फ़ीसदी ज़मीन पर गन्ने जैसी फ़सलें उगाई जाती हैं, जिससे खेतों में काम करना असुरक्षित हो गया है.
लगभग दो हज़ार की आबादी वाला वलादर गांव शिंगोडा और सोमात नदी के बीच स्थित है. गांव में मौजूद खाखरा और अभागा जैसी झाड़ियां शेरों के रहने के लिए अच्छी जगह साबित होती हैं.
पशुपालक विपुल वंश ने बताया कि हर साल उनकी कई बकरियां शेरों और तेंदुओं का शिकार बन जाती हैं. उन्होंने अपनी दीवार की ऊंचाई बढ़ाने के लिए जाल का उपयोग किया, लेकिन तेंदुआ उसे भी पार कर गया.
किसान गीताबेन मकवाणा कहती हैं कि महिलाओं के लिए ख़तरा दोगुना है क्योंकि वे बिना पुरुष के खेत पर काम करने नहीं जा सकतीं.
जीतुभाई सोलंकी बताते हैं कि पिछले पांच-सात वर्षों से शेर ज़्यादा संख्या में गांव की गलियों में घूमने लगे हैं. साल 2024 में 45 पशुओं का शिकार हुआ था.
गिर पश्चिम वन विभाग के उप वन संरक्षक प्रशांत तोमर ने बताया कि राज्य सरकार ने महेश राठौड़ के उत्तराधिकारियों को 10 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया है और हमलावर शेरनी को पिंजरे में बंद कर दिया गया है.
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