
विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मेमोरेंडम सौंपकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और ईवीएम हटाने की मांग की है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है।
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विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेसिव रिवीज़न (एसआईआर) प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए गए फैसलों पर विवाद खड़ा हुआ था।
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात के बाद उनका धन्यवाद किया है.
राहुल गांधी ने कहा, "हमने राष्ट्रपति को मेमोरेंडम दिया और कहा कि अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने देश के लोकतंत्र को ख़त्म करने का षड्यंत्र रचा. मुझे लग रहा था कि राष्ट्रपति कहेंगी कि चुनाव चोरी नहीं होता है. लेकिन राष्ट्रपति ने हमारी बातें सुनीं. उन्होंने हमारी बातों को नकारा नहीं. हम हैरान रह गए. उन्होंने ऐसा नहीं कहा कि भारत में चुनाव चोरी नहीं हो रहे हैं."
इससे पहले विपक्षी सांसदों ने बैठक की और राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च किया.
विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग किया है. उनका कहना है कि स्पेशल इंटेसिव रिवीज़न (एसआईआर) के ज़रिए देश में मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे हैं और वोट चोरी की जा रही है. उन्होंने ज्ञानेश कुमार और बीजेपी के बीच मिलीभगत का भी आरोप लगाया है.
हालांकि, चुनाव आयोग विपक्षी दलों के इन आरोपों को लगातार ख़ारिज कर रहा है. आयोग का कहना है कि एसआईआर के ज़रिए मतदाता सूची में उन लोगों के रिकॉर्ड अपडेट किए जा रहे हैं, जो अपना पता बदलकर दूसरी जगह चले गए हैं या जिनकी मौत हो चुकी है.
वहीं बीजेपी आरोप लगा रही है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग को बदनाम करके देश के लोकतंत्र को कमज़ोर कर रहे हैं.
राहुल गांधी ने कहा- 'सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे'
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति भवन से बाहर आकर कहा, "हमें चुनाव चोरी के सबूत देने हैं. मैंने कहा कि पूरा देश जानता है कि चुनाव चोरी हो रही है."
उन्होंने कहा, "हमने राष्ट्रपति से कहा कि नरेंद्र मोदी वोट चोरी के आर्किटेक्ट हैं और अमित शाह और ज्ञानेश कुमार इसे अंजाम देने वाले हैं. राष्ट्रपति ने हमारी बातों को ध्यान से सुना."
राहुल गांधी ने कहा, "इससे पहले जब हम मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने गए थे, तो हमें हिरासत में लिया गया और पीटा गया. अब हम राष्ट्रपति के पास गए हैं. सोमवार को हम यही मेमोरेंडम लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. हम सभी रास्ते अपनाएंगे."
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "हम राष्ट्रपति को वोट चोरी के बारे में बताने गए थे. ज्ञानेश कुमार की वजह से यह सब हो रहा है. हमने ईवीएम हटाने और बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है."
खड़गे ने कहा, "उन्होंने वोट चोरी के सबूत मांगे हैं. हम वे सबूत इकट्ठा कर रहे हैं. उन्होंने हमारी बात ध्यान से सुनी और कहा कि संबंधित लोगों से बात करके फ़ैसला लेंगी."
विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल थीं.
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ने कहा है कि 'मैं जांच कराऊंगी. मुझे सबूत चाहिए.' हमने और राहुल जी ने कहा कि हम सबूत सौंपेंगे. देश बहुत ज़्यादा चिंतित है और आप इसकी संरक्षक हैं. इस लिहाज़ से कृपया इस पर ध्यान दें, ताकि देश का लोकतंत्र बचा रहे."
विपक्ष का प्रदर्शन जारी
इंडिया गठबंधन के सांसदों ने शुक्रवार शाम संसद के सेंट्रल हॉल में बैठक की. बैठक के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च निकाला.
इससे पहले 6 अक्तूबर को सांसदों ने 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' निकाला था. इसके बाद 7 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जाते समय उन्हें रास्ते में रोक दिया गया था.
वहीं, 8 अक्तूबर को विपक्षी सांसदों ने कनॉट प्लेस से राजघाट तक मार्च निकाला था.
दरअसल, अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एसआईआर से जुड़े कई फ़ैसले लिए थे.
चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट पर सफ़ाई दी थी, लेकिन इससे विपक्षी दलों का विरोध ख़त्म नहीं हुआ.
राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं. हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद यह मुद्दा सियासी तौर पर और गरमा गया.
विपक्षी दलों के अलावा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह ख़त्म करने की मांग की है.
सीजेपी अपनी मांगों को लेकर शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाली है. हालांकि, पुलिस ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी है.
सीजेपी का प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि देशभर में उसके 10 हज़ार समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है.
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया कि हिरासत में लिए गए लोगों में पार्टी के समर्थकों के अलावा अलग-अलग छात्र, किसान और दलित संगठनों के सदस्य और राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी शामिल हैं.
उन्होंने लिखा, "यह इमरजेंसी है."
आशुतोष रांका की पोस्ट साझा करते हुए सीजेपी के सह-संस्थापक सौरव दास ने भी एक्स पर लिखा, "भारत में इमरजेंसी लगा दी गई है."
दरअसल, सीजेपी ने 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है.
AI outlook — possibilities, not facts
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