नेपाल में बाढ़ के बाद सेना और निजी हेलिकॉप्टरों ने 4,000 से अधिक लोगों को बचाया
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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि बाढ़ के तुरंत बाद सेना का पहला हेलिकॉप्टर रेस्क्यू के लिए रवाना हुआ। एक हफ्ते में सेना और निजी हेलिकॉप्टरों की सैकड़ों उड़ानों से 4,000 से अधिक लोगों को हवाई मार्ग से बचाया गया। पायलटों ने संकीर्ण घाटी में हेलिकॉप्टर ट्रैफ़िक का प्रबंधन करते हुए राहत, बचाव और शवों की निकासी का काम किया।
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Why It Matters
नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों की सड़कें नष्ट कर दीं, जिससे सड़क संपर्क टूट गया और हवाई मार्ग से ही बचाव कार्य संभव हो सका।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुधवार को संसद में बताया कि अचानक आई बाढ़ के तुरंत बाद नेपाली सेना का पहला हेलिकॉप्टर रेस्क्यू के लिए रवाना हो गया था.
बाढ़ प्रभावित इलाकों में मची अफरातफरी के बीच, नेपाल सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत ने कहा कि सरकार को बाढ़ से हुए नुकसान की सही स्थिति की पहली जानकारी हेलिकॉप्टर के जरिए मिली.
बस्नेत ने बीबीसी से कहा "पहले दिन हमारे चार हेलिकॉप्टर तुरंत उड़ान भरने लगे. एक एमआई-17 हेलिकॉप्टर 20 डॉक्टरों की टीम को लेकर गया और सुबह 11:30 बजे वहां एक मेडिकल बेस बनाया गया."
उन्होंने कहा, "नेपाल में इतने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान पहले कभी नहीं चलाया गया. इतने छोटे हवाई क्षेत्र में एयर बेस बनाकर इस तरह का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन पहली बार चलाया गया."
मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गृह मंत्री सुधन गुरूंग ने कहा कि यह "संभवतः नेपाल में अब तक चलाया गया सबसे बड़ा अभियान होगा."
इस बीच, एक हफ़्ते के दौरान सेना और प्राइवेट हेलिकॉप्टरों की सैकड़ों उड़ानों के ज़रिए 4,000 से ज़्यादा लोगों को हवाई मार्ग से बचाया गया है. सेना ने बताया है कि अकेले उसके नेतृत्व में 717 उड़ानें संचालित की गईं.
बताया गया है कि बचाव अभियान में अलग-अलग समय पर निजी क्षेत्र के करीब दो दर्जन हेलिकॉप्टरों और सेना के सात हेलिकॉप्टरों ने हिस्सा लिया.
गंभीर हालात में उम्मीद जगाते हेलिकॉप्टर
रासुवा के मुख्य जिला अधिकारी नरेंद्र परियार के मुताबिक, बाढ़ वाले दिन दोपहर से पहले ही कई इलाकों की सड़कें पूरी तरह कट गई थीं और वहां सड़क संपर्क टूट गया था.
परियार ने बीबीसी को बताया, "उसके बाद, सभी की एकमात्र उम्मीद हेलीकॉप्टर ही थे. शुरुआत में ऐसी बहुत कम जगहें थीं, जहां हेलिकॉप्टर उतर सकते थे. लेकिन इससे कई लोगों को उम्मीद मिली. उन्हें लगा कि इस मुश्किल में उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा."
रेस्क्यू सिस्टम में एक ही जगह से तालमेल बनाए रखने और किसी तरह की उलझन से बचने के लिए, नेपाल सेना की कमान में हेलिकॉप्टर तैनात करने का फैसला किया गया.
कैलाश हेलिकॉप्टर के कैप्टन मणिराज लामा ने बीबीसी से कहा, "हमने नुवाकोट बैरक के आसपास बार-बार उड़ान भरी,"
"नीचे का नज़ारा बेहद डरावना था. हेलिकॉप्टरों के लिए भी यह एक असामान्य स्थिति थी. एक छोटी-सी घाटी में एक साथ कई हेलिकॉप्टर उड़ रहे थे. जरूरत के हिसाब से कभी हम अकेले उड़ते थे, तो कभी दो हेलिकॉप्टर साथ उड़ते थे."
शुरुआती दिनों में हेलिकॉप्टरों का मुख्य काम लोगों को बचाना और सुरक्षाकर्मियों व राहत-बचाव दलों को पहुंचाना था. लेकिन अब उनका इस्तेमाल शवों को निकालने से लेकर राहत सामग्री पहुंचाने तक, हर तरह के काम में किया जा रहा है.
पायलटों का कहना है कि हाल के दिनों में जैसे-जैसे शव सड़ने लगे हैं. उनसे होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से बचने के लिए उन्हें हेलिकॉप्टर से जुड़ी एक रस्सी, जिसे 'लॉन्गलाइन' कहते हैं, से लटकाकर निकाला जा रहा है.
लामा ने कहा कि शुरुआती दिनों में एक साथ बहुत ज्यादा लोगों के फंसे होने के कारण सबसे ज्यादा खतरे में पड़े लोगों को प्राथमिकता देना सबसे मुश्किल काम था.
उन्होंने कहा, "लोगों की भावनाओं और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ऐसे हालात में काम करना बेहद मुश्किल है."
सिम्रिक एयर के कैप्टन बिमल शर्मा का कहना है कि उन्होंने हेलिकॉप्टरों के बचाव अभियान के दौरान आसमान में इतनी ज्यादा हलचल पहले कभी नहीं देखी.
शर्मा कहते हैं, "एवरेस्ट पर चढ़ाई के मौसम में भी काफ़ी भीड़-भाड़ होती है, लेकिन तब यह साफ़ होता है कि कहाँ जाना है और क्या करना है. यहाँ तो हमें जो कोऑर्डिनेट्स दिए गए थे, वे भी ठीक से मेल नहीं खाते थे. हमें आस-पास खोजना पड़ता है."
वे आगे कहते हैं, "कुछ जगहों पर जहां हमें उतरने के लिए कहा गया था, वहां उतरने की कोई जगह ही नहीं थी."
छोटी सी जगह में व्यस्त एयर ट्रैफ़िक
बीबीसी से बात करने वाले पायलट बिमल शर्मा और मनिराज लामा ने बताया कि उन्होंने चीन की सीमा और त्रिशूली के बीच कई बार ऐसी स्थिति में उड़ान भरी है, जहाँ एक साथ एक दर्जन से ज़्यादा हेलिकॉप्टर मौजूद थे.
बिमल कहते हैं, "इतनी संकरी घाटी में हेलिकॉप्टरों की संख्या काफी ज्यादा है. इसी वजह से हम पायलटों ने कुछ नियम बनाए हैं और एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं. जैसे, घाटी में उड़ते समय बाईं ओर रहना, आसपास उड़ रहे दूसरे हेलिकॉप्टरों को अपनी स्थिति बताना और आपस में सीधे संपर्क रखते हुए एक-दूसरे के बीच तय दूरी और ऊंचाई बनाए रखना."
नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (CAAN) के प्रवक्ता ज्ञानेंद्र भुल का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाके में कोई अलग हवाई अड्डा नहीं है, इसलिए हेलिकॉप्टरों ने काठमांडू के त्रिभुवन हवाई अड्डे से संपर्क किया और 'पायलट-टू-पायलट तालमेल के साथ वहां उड़ान भरी.
भुल कहते हैं, "उस 'अनकंट्रोल्ड' एयरस्पेस में, ज़मीन पर नज़र रखने, विज़िबिलिटी पर ध्यान देने और एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने की ज़िम्मेदारी पायलटों की होती थी. लेकिन ड्रोन भी चुनौती बन रहे हैं."
"फिलहाल वहां हेलिकॉप्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ड्रोन हैं. स्थिति बहुत गंभीर नहीं है, लेकिन ऐसा लगता है कि इसे संभालने की ज़रूरत है."
उनका कहना है कि तेजी से बदलती जलवायु में, चाहे कितना भी बेहतर तालमेल क्यों न हो, जोखिम हमेशा बना रहेगा.
लामा ने अपना अनुभव बताते हुए कहा, "हालांकि, जब सारा संपर्क टूट गया था, तो आसमान में उड़ते हेलिकॉप्टरों ने लोगों को मानसिक रूप से यह भरोसा दिलाया कि बचाव अभियान चल रहा है और वे देर-सबेर मुझे बचाने ज़रूर आएंगे."
"ऐसी उम्मीद भी इन आपदाओं में लोगों को संभालती है. इसलिए नेपाल जैसे जटिल भौगोलिक स्थिति वाले देश के लिए हेलिकॉप्टर किसी वरदान से कम नहीं हैं."
सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत का कहना है कि रासुवा-नुवाकोट जैसे संकरे एयरस्पेस और जटिल भौगोलिक बनावट वाले इलाकों में 'लाइट हेलिकॉप्टर' बहुत असरदार साबित हुए हैं.
अनुभवी पायलट की भूमिका
नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (CAAN) के प्रवक्ता ज्ञानेंद्र भुल ने कहा कि रासुवा में पायलटों ने पूरी सावधानी बरती और अपनी क्षमता और जिम्मेदारी का अच्छा प्रदर्शन किया.
उनके मुताबिक़, पर्यटन और पर्वतारोहण के मौसम में काठमांडू और लुकला जैसे हवाई अड्डों से रोज़ 150 से 200 हेलिकॉप्टर उड़ानें भरते हैं.
भुल ने कहा, "ये चार्टर्ड उड़ानें होती हैं. लेकिन आपदा के समय हमने इंसानियत को सबसे ऊपर रखा है. इसलिए बचाव कार्य में मदद के लिए कुछ नियमों में थोड़ी ढील दी गई है. हालांकि, उड़ान की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया."
इसी वजह से आपातकाल के समय हेलिकॉप्टर नेपाल में बचाव के सबसे असरदार साधनों में से एक साबित हो रहे हैं. नेपाल के मुश्किल पहाड़ी इलाक़ों और वहां के भूगोल को अच्छी तरह जानने वाले अनुभवी पायलट भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी रहेगा
Very likely · Within days
हेलिकॉप्टरों के उपयोग में नियमों में और ढील दी जा सकती है
Possible · Within weeks
Open Questions
- बाढ़ के कारण कुल कितने लोगों की मृत्यु हुई?
- बचाव अभियान की कुल लागत क्या थी?
- भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?



