
ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और तेल की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया
सोना और चांदी की कीमतें एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। कॉमेक्स पर सोना 7.26 फीसदी गिरकर 3,884.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी में 19.1 फीसदी की गिरावट आई। भारत में एमसीएक्स पर सोना 7.16 फीसदी गिरकर 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और तेल की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।
AI-generated summary
सोना और चांदी की कीमतें लगातार दूसरे महीने नकारात्मक रिटर्न दर्ज कर रही हैं। जनवरी में 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद से सोने की कीमत में 30 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
महंगे मेटल्स की चमक पिछले महीने फीकी रही। शुक्रवार को सोने की क़ीमतें एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं, जबकि चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम की क़ीमतों में भारी गिरावट आई।
ये तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड के दायरे में पहुँच गईं।
यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ख़र्च से पर्याप्त रिटर्न मिलने को लेकर चिंताओं के बीच टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
सोने और चांदी, दोनों में लगातार दूसरे महीने नकारात्मक रिटर्न दर्ज किया गया। कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई बढ़ने की आशंका और अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चिंताओं ने क़ीमती धातुओं के बाज़ार पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाई।
डीएचएफ कैपिटल के बास कूइजमैन ने एक नोट में कहा है, "मौद्रिक नीति सख़्त होने की उम्मीदों का दबाव उन एसेट्स पर बना हुआ है, जिनसे कोई ब्याज या नियमित आय नहीं मिलती।"
उन्होंने कहा, "तेल की क़ीमतों में मज़बूती से महंगाई लंबे समय तक ऊंची बने रहने की चिंताएं बढ़ रही हैं, जिससे दबाव और गहरा हो रहा है।"
तेल की क़ीमतों में गिरावट से सोने पर दबाव कम हो सकता है। वहीं, सप्लाई चेन में और अड़चन आने या अमेरिका में अक्तूबर महीने के रोज़गार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहने पर सख़्त मौद्रिक नीति की संभावना और मज़बूत हो सकती है। इससे सोने की क़ीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
अक्तूबर के अंत तक कॉमेक्स पर सोने की क़ीमत 7.26 फ़ीसदी गिरकर 3,884.9 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। वहीं, कॉमेक्स पर चांदी की क़ीमत में पिछले महीने 19.1 फ़ीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 49.13 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई।
वैश्विक बाज़ारों के रुझान के अनुरूप घरेलू बाज़ारों में भी क़ीमती धातुओं की क़ीमतें निचले स्तर पर बंद हुईं। एमसीएक्स पर सोने की क़ीमत 7.16 फ़ीसदी गिरकर 1,38,419 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गई। वहीं, चांदी की क़ीमत में 20 फ़ीसदी की भारी गिरावट आई और यह 1,78,900 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
30 अक्तूबर को कॉमेक्स पर सोने की क़ीमत गिरकर एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गई और 4,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से काफ़ी नीचे बंद हुई।
यह कमज़ोरी का एक बड़ा संकेत है, क्योंकि सोने की कीमत 3,900 डॉलर के पिछले सपोर्ट स्तर को भी तोड़ चुकी है।
अब कॉमेक्स पर सोने की कीमत 3,650-3,750 डॉलर के अगले सपोर्ट स्तर तक गिर सकती है। सोने के कमज़ोर रुझान को बदलने के लिए क़ीमत को 4,550 डॉलर के ऊपरी स्तर को पार करना होगा।
पिछले महीने कॉमेक्स पर चांदी की कीमत में भी कमज़ोरी रही और यह 54 डॉलर के सपोर्ट स्तर से नीचे आ गई। इस अहम सपोर्ट स्तर के टूटने के बाद क़ीमतों में और गिरावट आई और शुक्रवार को यह 48.9 डॉलर के निचले स्तर तक पहुँच गई।
कहा जा रहा है कि छोटी अवधि में चांदी का रुझान नकारात्मक बना हुआ है और इसकी क़ीमत गिरकर 42-43 डॉलर के दायरे में आ सकती है। इस नकारात्मक रुझान को ख़त्म करने के लिए चांदी की कीमत को 55 डॉलर के रेजिस्टेंस स्तर को पार करना होगा।
जनवरी में 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद से सोने की कीमत में 30 फ़ीसदी की गिरावट आ चुकी है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''इसकी वजह यह आशंका है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी. फ़िलहाल एशिया में मांग कमज़ोर रहने से भी सोने की क़ीमतों पर दबाव है. हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि जब भी सोने की कीमत 4,000 डॉलर से नीचे जाती है, तो केंद्रीय बैंकों की ओर से इसकी ख़रीदारी आमतौर पर बढ़ने लगती है.''
वहीं, चांदी को तेज़ी से एक ऐसी कमोडिटी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी क़ीमत इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर निर्भर करती है. रॉयटर्स के मुताबिक़ एचएसबीसी ने कहा है कि चांदी की इंडस्ट्री और जूलरी के लिए मांग घट रही है. बैंक को उम्मीद है कि 2027 में चांदी की औसत कीमत 64 डॉलर प्रति औंस रहेगी, जबकि इस साल के लिए उसका औसत अनुमान 71 डॉलर प्रति औंस है.
फ़िलहाल एक औंस सोना ख़रीदने के लिए 79 औंस चांदी की ज़रूरत है. यह 11 महीनों का सबसे ऊंचा अनुपात है. जनवरी में, जब चांदी की क़ीमत 122 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, तब एक औंस सोना ख़रीदने के लिए 46 औंस चांदी की ज़रूरत थी.
रॉयटर्स ने लिखा है, ''ऐतिहासिक नज़रिए से देखें तो सोने के मुक़ाबले चांदी की क़ीमत में अभी और गिरावट की गुंजाइश है. कंसल्टेंसी फर्म मेटल्स फोकस के मुताबिक़, 2020 से 2025 के बीच सोने और चांदी का यह अनुपात औसतन 82 रहा था.''
सोने और चांदी की भविष्य की राह कैसी हो सकती है?
वित्तीय मामलों की शोध संस्थान सही के हेड ऑफ रिसर्च गौरव अरोड़ा ने द लाइव मिंट से कहा कि अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाओं ने सोने की क़ीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है।
अरोड़ा के मुताबिक़ अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने अक्तूबर में ब्याज दरों को 3.75-4 फ़ीसदी के दायरे में स्थिर रखा था, लेकिन समिति के दो सदस्यों ने दरें बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया था. वहीं, बाज़ार दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की आशंका को ध्यान में रखकर चलने लगा है.
अरोड़ा ने कहा, ''पिछले एक महीने में एमसीएक्स पर सोने के वायदा भाव में लगातार गिरावट देखी गई है. फ़िलहाल 1,38,250 रुपये प्रति 10 ग्राम इसका तत्काल सपोर्ट स्तर है. अगर क़ीमत इस स्तर से नीचे जाती है, तो बिकवाली का एक और दौर शुरू हो सकता है. चांदी की क़ीमतों में आमतौर पर ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. इसके लिए 1,78,800 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर तत्काल सपोर्ट लेवल है.''
अरोड़ा के मुताबिक, ''हालिया गिरावट के बावजूद व्यापक रुझान अब भी कमज़ोर बना हुआ है. ऐसे में धनतेरस के आसपास एकमुश्त ख़रीदारी करने के बजाय दो या तीन किस्तों में सोना ख़रीदना बेहतर रणनीति हो सकती है. उन्होंने यह भी सलाह दी कि चांदी में निवेश का हिस्सा सोने के मुक़ाबले कम रखा जाए, क्योंकि इसकी क़ीमतों में ज़्यादा उतार-चढ़ाव होता है.''
एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च वंदना भारती का मानना है कि क़ीमती धातुओं की क़ीमतों में तेज़ गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ख़रीदारी का अवसर पैदा कर सकती है।
उन्होंने ऐसे पिछले मौक़ों का ज़िक्र किया, जब नक़दी की ज़रूरत के चलते बाजार में बिकवाली के बाद फिजिकल गोल्ड की मांग में तेज़ बढ़ोतरी हुई थी. 1970 के दशक में सोने की क़ीमत 1970 में 40 डॉलर प्रति औंस से नीचे थी, जो जनवरी 1980 तक बढ़कर करीब 850 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई थी.
इसी तरह, 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान जब निवेशकों को नक़दी जुटाने के लिए अपनी संपत्तियां बेचनी पड़ीं, तब सोने की क़ीमत शुरुआत में गिरकर क़रीब 700 डॉलर प्रति औंस रह गई थी. हालांकि, इसके बाद इसमें तेजी आई और अगस्त 2011 तक यह 1,917 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच गया.
ऐसा ही रुझान मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान बाजार में आई गिरावट के समय भी देखने को मिला. नक़दी जुटाने की होड़ के बीच सोने की क़ीमत गिरकर करीब 1,472 डॉलर प्रति औंस रह गई थी. लेकिन बाद में निवेशकों ने फिजिकल सोने और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ़) में अपना निवेश बढ़ाया, जिससे क़ीमतों में तेज रिकवरी आई.
भारती ने कहा कि इन उदाहरणों से पता चलता है कि नक़दी के दबाव में आने वाली गिरावट के दौरान कीमती धातुओं में लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले ख़रीदार सक्रिय हो सकते हैं.
भारती निवेशकों के लिहाज से सोने की हालिया गिरावट को धीरे-धीरे ख़रीदारी करने के संभावित अवसर के रूप में देखती हैं. फिलहाल घरेलू बाजार में सोने की क़ीमत करीब 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम है.
उनका अनुमान है कि केंद्रीय बैंकों की ख़रीदारी, एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव और महंगाई से बचाव के साधन के रूप में सोने की भूमिका के चलते 2027 तक घरेलू बाज़ार में सोने की कीमत 1.65 लाख से 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है. हालांकि, यह केवल एक अनुमान है और इसकी कोई गारंटी नहीं है.
कॉमेक्स, एमसीएक्स और फ़्यूचर रेट क्या होते हैं?
कॉमेक्स अमेरिका का एक प्रमुख बाज़ार है, जहाँ सोने और चांदी के कॉन्ट्रैक्ट की ख़रीद-बिक्री होती है. वहीं फ़्यूचर रेट्स यानी वायदा भाव वह क़ीमत होती है, जिस पर आज किसी कॉन्ट्रैक्ट के तहत भविष्य के किसी महीने में डिलीवरी के लिए सौदा तय किया जाता है.
इसका मतलब यह नहीं है कि उस समय सोने या चांदी की क़ीमत निश्चित रूप से इतनी ही होगी. कॉमेक्स के गोल्ड फ्यूचर्स को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क़ीमतों के एक प्रमुख मानक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
कॉमेक्स को एक संगठित थोक बाज़ार के रूप में समझा जा सकता है, न कि किसी जूलरी की दुकान के रूप में. यह सीएमई ग्रुप के एक्सचेंज कारोबार का हिस्सा है, जहाँ सोने और चांदी जैसी धातुओं के स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट में कारोबार होते हैं.
'गोल्ड फ्यूचर्स रेट' यानी वायदा भाव का क्या मतलब है?
एक काल्पनिक उदाहरण लेते हैं. दिसंबर में गोल्ड फ्यूचर्स 4,000 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहे हैं. इसका मतलब है कि ट्रेडर्स फ़िलहाल दिसंबर से जुड़े स्टैंडर्ड गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट को इस क़ीमत पर ख़रीद या बेच सकते हैं.
इसका यह मतलब नहीं है कि दिसंबर में सोने की क़ीमत निश्चित रूप से 4,000 डॉलर ही होगी. इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. कोई ख़रीदार और आपूर्तिकर्ता आज यह तय करते हैं कि भविष्य में सामान की आपूर्ति किस क़ीमत पर होगी. वे लेन-देन की क़ीमत तय करते हैं, न कि यह भविष्यवाणी करते हैं कि बाज़ार में हर जगह यही क़ीमत होगी.
भारत में सोने की ख़बरों में कॉमेक्स का ज़िक्र क्यों होता है? कॉमेक्स अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के लिए एक प्रमुख मानक उपलब्ध कराता है, जबकि एमसीएक्स भारत का एक्सचेंज है, जहाँ सोने और चांदी के वायदा कारोबार होते हैं.
कॉमेक्स पर डॉलर में दिखाई जाने वाली क़ीमत, भारत में जूलरी की खुदरा क़ीमत या एमसीएक्स पर रुपये में दिखाई जाने वाली क़ीमत के समान नहीं होती.
कॉमेक्स और फ़्यूचर रेट में फ़र्क़
कॉमेक्स एक बाज़ार है जबकि वायदा भाव (फ़्यूचर रेट) उस बाज़ार में बताई जाने वाली क़ीमत है. इसे सब्जी मंडी के उदाहरण से समझें. मंडी एक बाज़ार है, जबकि 30 रुपये प्रति किलो सब्ज़ी की क़ीमत है. इसी तरह, कॉमेक्स एक एक्सचेंज है, जबकि "दिसंबर में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस" एक वायदा भाव है.
एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) और कॉमेक्स (कमोडिटी एक्सचेंज इंक) में क्या फ़र्क़ है?
एमसीएक्स और कॉमेक्स दोनों ही ऐसे बाज़ार हैं, जहाँ सोने और चांदी जैसी कमोडिटी का कारोबार होता है. इनके बीच सबसे आसान अंतर यह है कि एमसीएक्स भारत में है और इन धातुओं की क़ीमत रुपये में बताता है, जबकि कॉमेक्स अमेरिका में है और क़ीमत डॉलर में बताता है. दोनों पर वायदा कॉन्ट्रैक्ट (फ़्यूचर कॉन्टैक्ट) का कारोबार होता है.
मान लीजिए आप ये दो काल्पनिक ख़बरें देखते हैं- कॉमेक्स पर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस पर है और एमसीएक्स पर सोना 1,20,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है. ये दो अलग-अलग बाजारों में सोने की कीमतें हैं, जिन्हें अलग-अलग मुद्रा और वजन की इकाइयों में बताया गया है.
आप इन दोनों संख्याओं की सीधे तुलना नहीं कर सकते. इसे ऐसे समझें जैसे डॉलर प्रति गैलन में पेट्रोल की क़ीमत की तुलना रुपये प्रति लीटर में पेट्रोल की कीमत से करना. इसके अलावा, वायदा कीमतों की तुलना करते समय यह भी देखना चाहिए कि दोनों कॉन्ट्रैक्ट की डिलीवरी का महीना एक ही है या नहीं.
दोनों बाज़ार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि दोनों में क़ीमतों में बिल्कुल समान प्रतिशत से उतार-चढ़ाव हो. भारत में सोने की क़ीमतें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की क़ीमतों के साथ-साथ रुपये और डॉलर की एक्सचेंज रेट और घरेलू बाज़ार के अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की क़ीमत बढ़ती है, तो आमतौर पर एमसीएक्स पर भी सोने की क़ीमत बढ़ने का दबाव रहेगा.
कॉमेक्स से आपको अंतरराष्ट्रीय सोने की क़ीमत का पता चलता है, जबकि एमसीएक्स से भारतीय वायदा बाज़ार की कीमत का. इनमें से कोई भी कीमत जूलर्स की ओर से ग्राहकों को दी जाने वाली अंतिम क़ीमत के समान नहीं होती.
AI outlook — possibilities, not facts
सोने की कीमत 3,650-3,750 डॉलर के अगले सपोर्ट स्तर तक गिर सकती है
Possible · Within weeks
चांदी की कीमत गिरकर 42-43 डॉलर के दायरे में आ सकती है
Possible · Within weeks
2027 तक घरेलू बाजार में सोने की कीमत 1.65 लाख से 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है
Possible · Within months
Somil Mehta of Mirae Asset ShareKhan recommends buying Adani Green, DLF, Hindalco, and BPCL on November 3, 2026, with specific entry ranges, stop losses, and targets based on technical chart patterns.
Bloomberg reports Disney is considering cutting thousands of jobs and has asked some managers to target 20 percent in annual cost savings, potentially through job eliminations and other expense reductions. CEO Josh D'Amaro plans to redirect savings into film, television, technology, theme parks, and cruises. The company has already announced major job reductions in April and July, followed by hundreds of layoffs in September affecting HR and IT teams.
Adani Group is negotiating a $1.5 billion offshore loan through its AdaniConneX joint venture with EdgeConneX to finance data center expansion, with lenders including DBS, First Abu Dhabi Bank, and MUFG. The group plans $100 billion in digital infrastructure investment by 2035, while Reliance plans up to $110 billion in AI infrastructure over seven years.
Finance Minister Nirmala Sitharaman stated the government will consider foreign investor concerns regarding India's capital gains tax structure, following reports that SEBI recommended tax relief ahead of the upcoming Union Budget.
China is tightening export controls on tunnel-boring machines and specialised construction equipment, citing potential military and civilian dual-use applications. The move threatens to impact India's infrastructure projects, particularly along the disputed Himalayan border, and raises concerns over maintenance and procurement.
John Paul DeJoria, co-founder of John Paul Mitchell Systems and Patrón, reflects on his journey from two periods of homelessness to billionaire status, emphasizing his commitment to philanthropy through the Giving Pledge and his personal foundation.