
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, दिल्ली में भारी सुरक्षा बल तैनात
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में दिल्ली में बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला जा रहा है, जहाँ भारी पुलिस तैनाती और बैरिकेड्स देखने को मिले हैं।
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विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और वोटर लिस्ट अपडेट प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाल रहे हैं.
ग्राउंड पर मौजूद बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के नेता एक बस में सवार होकर बाराखंबा मेट्रो स्टेशन के बाहर पहुंच गए हैं. यहाँ कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, लेफ्ट दलों के कार्यकर्ताओं और सैकड़ों की संख्या में स्टूडेंट्स मौजूद हैं.
दिलनवाज़ पाशा के मुताबिक, बाराखंबा मेट्रो स्टेशन से मंडी हाउस की ओर जाने वाले रास्ते पर दूर-दूर तक सिर्फ़ लोग ही लोग नज़र आ रहे हैं. आगे पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए हैं. इन बैरिकेड्स पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव देखने को मिल सकता है.
कांग्रेस और विपक्ष के कई सांसद भी राहुल गांधी के साथ मौजूद हैं.
इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया है.
पिछले दो दिनों में क्या-क्या हुआ?
10 अक्तूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया था. इसे देखते हुए दिल्ली में भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और किसी भी प्रदर्शनकारी को जंतर-मंतर तक पहुँचने नहीं दिया गया.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पहुँचते ही विमान से हिरासत में ले लिया गया.
वहीं, शनिवार दोपहर को मशहूर अर्थशास्त्री ज्याँ द्रेज़ भी जंतर-मंतर के पास पहुँचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहाँ धरने पर नहीं बैठने दिया.
इसके अलावा, शनिवार को प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुँचने से रोकने के लिए 45 मेट्रो स्टेशन भी बंद किए गए.
दिनभर की कार्रवाई के बावजूद शाम तक कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शनकारी दिखाई देते रहे. वे छोटे-छोटे समूहों में पहुँच रहे थे और पुलिस के आने पर वहाँ से हट जा रहे थे.
लेकिन इस प्रदर्शन का असर सिर्फ़ प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं रहा.
अस्पतालों से लौट रहे बुज़ुर्गों, महिलाओं और बच्चों को घर जाने के लिए बसें और ऑटो नहीं मिल रहे थे.
सीजेपी ने रविवार को भी जंतर-मंतर पहुँचने का आह्वान किया था.
हालाँकि, पुलिस दूसरे दिन भी मुस्तैद थी. रविवार को भी शनिवार जैसा ही नज़ारा देखने को मिला. पुलिस ने किसी भी प्रदर्शनकारी को जंतर-मंतर पहुँचने नहीं दिया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को सात हज़ार प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के बाद रिहा कर दिया गया था. वहीं, रविवार को भी सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया.
लगातार दूसरे दिन, रविवार को भी सेंट्रल दिल्ली के बड़े हिस्से में सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई थी. कार्यालय, दुकानें और रेस्तरां बंद थे, जबकि इंटरनेट सेवाओं पर भी पाबंदियाँ लगाई गई थीं.
प्रदर्शनकारी लगातार दूसरे दिन भी इस इलाके में लौटे, लेकिन उनकी संख्या सुरक्षा बलों के मुकाबले काफी कम थी.
लोग विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
इस विवाद की जड़ देशभर में वोटर लिस्ट को अपडेट करने की एक व्यापक प्रक्रिया है. चुनाव आयोग का कहना है कि यह मृत, दोहरे नाम वाले और अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाने के लिए की जाने वाली एक नियमित प्रक्रिया है.
अब तक मतदाता सूचियों से कम-से-कम 13 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं.
कई राज्यों में यह प्रक्रिया विवादों से घिरी रही है. हज़ार लोगों ने आरोप लगाया है कि उनके नाम ग़लती से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.
सीजेपी और विपक्षी दलों का आरोप है कि वोटर लिस्ट को अपडेट करने के तरीके में ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में काम कर रहे हैं.
हालांकि, चुनाव आयोग और बीजेपी ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में ख़बर छपी कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर '10 महीने में 14 बार आपत्ति' दर्ज कराई.
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, "ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने, ख़ुद को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर दर्ज कराईं और 'अनधिकृत, गैरकानूनी' कदमों पर सवाल उठाए."
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सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और प्रदर्शन जारी रहेगा
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