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Backट्रंप ने ज्ञानेश कुमार का ज़िक्र कर भारत की चुनाव व्यवस्था पर क्या कहा?
ट्रंप ने ज्ञानेश कुमार का ज़िक्र कर भारत की चुनाव व्यवस्था पर क्या कहा?
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BBC हिंदी17 hours agoPolitics3 min readIndia

ट्रंप ने ज्ञानेश कुमार का ज़िक्र कर भारत की चुनाव व्यवस्था पर क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का हवाला देते हुए अमेरिका में वोटिंग के नियमों में बदलाव की मांग दोहराई है।

Quick Look

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चुनाव सिस्टम और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का ज़िक्र करते हुए अमेरिका में 'सेव अमेरिका एक्ट' पास करने और वैध फोटो आईडी की अनिवार्यता की वकालत की है।

AI-generated summary

Why It Matters

ट्रंप ने अमेरिका में वोटिंग के नियमों को कड़ा करने के लिए भारत की चुनाव प्रणाली का उदाहरण दिया है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चुनाव सिस्टम का ज़िक्र करते हुए अमेरिका में वोटिंग के नियमों में बदलाव की अपनी मांग दोहराई है。

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का ज़िक्र करते हुए अमेरिका में भी भारत की तर्ज पर चुनाव कराने की वकालत की。

उन्होंने भारत में वोट डालने के लिए वेलिड फ़ोटो आईडी की अनिवार्यता का भी ज़िक्र किया。

ट्रंप ने भारत के 2024 के लोकसभा चुनाव का आंकड़ा दिया और संकेत दिया कि अमेरिका में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए रिपब्लिकन पार्टी के पेश किए गए सेव अमेरिका एक्ट को जल्द पास होना चाहिए。

डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछा था-आप अमेरिका में वैध फोटो पहचान पत्र के बिना चुनाव कैसे करा सकते हैं? भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ मतदाता थे। इनमें से 1% से भी कम लोगों ने डाक से वोट किया और हर मतदाता के पास एक वैध फोटो पहचान पत्र होना ज़रूरी था। हमें अब सेव अमेरिका एक्ट पास करना होगा।"

ट्रंप और उनके समर्थकों का तर्क है कि चुनाव में मतदाता की पहचान और नागरिकता की सख्त जांच से चुनाव ज्यादा सुरक्षित होंगे और अवैध मतदान की आशंका कम होगी。

विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं और संगठनों का तर्क अलग है। उनका कहना है कि फोटो आईडी और नागरिकता के दस्तावेज़ की अनिवार्यता से उन योग्य मतदाताओं के लिए वोट डालना मुश्किल हो सकता है जिनके पास ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं हैं。

यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका में इस साल मिडटर्म चुनाव होने हैं। 2026 के मिडटर्म चुनाव 3 नवंबर को होंगे। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की करीब एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होगा।

मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं और इनमें राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल के लिए संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी का बहुमत रहेगा।

इस लिहाज से सेव अमेरिका एक्ट को लेकर बहस सिर्फ़ चुनावी प्रक्रिया के नियमों तक सीमित नहीं है। यह 2026 के मिडटर्म चुनावों से पहले अमेरिका में वोटिंग के नियमों और मतदाता पहचान को लेकर चल रही बड़ी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा भी है。

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी कांग्रेस पर 'सेव अमेरिका एक्ट' पारित करने के लिए दबाव बढ़ा रहे हैं। यहां 'सेव' का मतलब है 'सेफ़गार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलटी एक्ट'।

इस क़ानून के तहत वोट डालने के लिए लोगों को पहचान पत्र और अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण देना होगा। हालांकि, इसे सीनेट में अब तक पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया है।

ट्रंप इस क़ानून को पारित करना एक "राष्ट्रीय आपातकाल" मानते हैं।

पिछले साल रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व वाली कुछ राज्यों की सरकारों ने भी नागरिकता के प्रमाण से जुड़े अपने-अपने विधेयक लाने शुरू कर दिए।

डेमोक्रेट्स का कहना है कि 'सेव क़ानून' उन मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित कर देगा, जो वोट देने के योग्य हैं। वहीं, रिपब्लिकन का कहना है कि मतदाता धोखाधड़ी रोकने के लिए यह क़ानून ज़रूरी है।

'सेव एक्ट' के तहत अमेरिकियों को वोटर के तौर पर रजिस्टर करते समय यह साबित करना होगा कि वे अमेरिकी नागरिक हैं। इसके अलावा, वोट डालने से पहले वैध फोटो पहचान पत्र दिखाना भी अनिवार्य होगा।

अमेरिका में भारत की तरह पूरे देश में एक जैसा वोटर आईडी नियम नहीं है।

संघीय क़ानून के तहत राष्ट्रीय चुनाव में वोट डालने वाला व्यक्ति अमेरिकी नागरिक होना चाहिए, लेकिन नागरिकता का अनिवार्य प्रमाण देना ज़रूरी नहीं है। प्रस्तावित क़ानून में इसे अनिवार्य करने की बात कही गई है।

वहां चुनाव मुख्य रूप से राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के स्तर पर संचालित होते हैं। इसलिए वोट डालने के लिए पहचान पत्र की ज़रूरत भी राज्य के हिसाब से बदलती है।

अमेरिकी सरकार की वेबसाइट के मुताबिक, कुछ राज्यों में मतदान केंद्र पर फोटो आईडी दिखानी होती है। इनमें ड्राइविंग लाइसेंस, राज्य सरकार का आईडी कार्ड या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज़ शामिल हो सकते हैं।

नेशनल कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ स्टेट लेजिस्लेटर्स यानी एनसीएसएल के मुताबिक 2026 में 36 राज्यों में मतदान केंद्र पर किसी न किसी तरह की पहचान दिखाने का नियम है, जबकि 14 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी में मतदाता की पहचान दूसरे तरीकों से सत्यापित की जाती है।

'सेव एक्ट' में उन लोगों के लिए भी एक प्रक्रिया तय करने का प्रावधान है, जिनके नाम बदल चुके हैं। उन्हें अपनी पहचान की पुष्टि के लिए अतिरिक्त दस्तावेज़ जमा करने होंगे।

इस प्रावधान को लेकर खास तौर पर उन लोगों के लिए चिंता जताई गई है, जिन्होंने शादी के बाद अपना नाम बदल लिया है।

उदारवादी विचारधारा वाले थिंक टैंक ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के सेंटर फॉर डेमोक्रेसी एंड सिविक एंगेजमेंट के मुताबिक, अनुमानित 2 करोड़ 10 लाख अमेरिकियों के पास अपनी नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज़ आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, 26 लाख लोगों के पास सरकार की ओर से जारी कोई भी फोटो पहचान पत्र नहीं है।

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • 2026 के मिडटर्म चुनाव 3 नवंबर को होंगे

    Very likely · Within months

Open Questions

  • क्या सेव अमेरिका एक्ट सीनेट में पारित हो पाएगा?
  • मिडटर्म चुनावों से पहले नियमों में क्या बदलाव होंगे?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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