
पूर्व सीडीएस ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के परमाणु प्रतिष्ठान के पास ड्रोन का गिरना अनजाने में हुआ था, न कि जानबूझकर किया गया हमला।
भारत के पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने स्वीकार किया कि मई 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान एक भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन पाकिस्तान के किराना हिल्स के पास गिरा था। उन्होंने इसे तकनीकी खराबी के कारण अनजाने में हुई घटना बताया।
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मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच 88 घंटे का सैन्य संघर्ष हुआ था, जिसे ऑपरेशन सिंदूर कहा गया।
भारत के पूर्व चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई एक लोइटरिंग म्यूनिशन पाकिस्तान के सरगोधा के पास स्थित किराना हिल्स इलाक़े में गिरी होगी, जहाँ परमाणु हथियार से जुड़ी उसकी सुविधाएं मौजूद हैं.
लॉइटरिंग म्यूनिशन वन-वे विस्फोटक ड्रोन होता है, जो किसी लक्ष्य के ऊपर या उसके पास उड़ सकता है, उसकी तलाश कर सकता है या उसके मिलने का इंतज़ार कर सकता है. इसके बाद जानबूझकर उससे टकराकर विस्फोट कर देता है. इसे आम तौर पर सुसाइड ड्रोन भी कहा जाता है.
आरएसएस से जुड़े थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के घटनाक्रम पर आयोजित 'विमर्श' कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा था कि हमलों से पहले भारत ने रडार की तलाश के लिए सरगोधा के आसपास कई सुसाइड ड्रोन भेजे थे.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया ब्रीफिंग में तत्कालीन एयर ऑपरेशंस के महानिदेशक एयर मार्शल ए.के. भारती ने पिछले साल 12 मई को कहा था कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के किराना हिल्स में स्थित परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया था. उस समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल के जवाब में एयर मार्शल भारती ने कहा था, "हमें यह बताने के लिए धन्यवाद कि किराना हिल्स में कोई परमाणु प्रतिष्ठान है. हमें इसके बारे में जानकारी नहीं थी. हमने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया है, वहाँ जो भी मौजूद है, उस पर भी नहीं."
जनरल चौहान ने समझाया कि इन सुसाइड ड्रोन की उड़ान क्षमता क़रीब दो घंटे की थी. अगर इस अवधि के भीतर उन्हें कोई लक्ष्य नहीं मिलता, तो वे अंततः नीचे गिर जाते हैं और कहीं न कहीं जाकर टकरा जाते हैं. जनरल चौहान ने किराना हिल्स में लोइटरिंग म्यूनिशन के गिरने की आशंका का ज़िक्र करते हुए कहा, "वह आकर उन पहाड़ियों में से किसी एक से टकराया होगा."
थिंक टैंक कार्नेगी एन्डॉमेंट फोर इंटरनेशनल पीस में न्यूक्लियर पॉलिसी प्रोग्राम के सीनियर फेलो अंकित पांडा कहते हैं कि भारत के पूर्व चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान की हालिया टिप्पणियां मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संकट के एक अहम अनसुलझे घटनाक्रम पर कुछ स्पष्टता देती हैं. पांडा का तर्क है कि अगर ऐसा हुआ था, तो यह संभवतः अनजाने में हुआ हमला था, लेकिन यह परमाणु संघर्ष की दिशा में अनजाने में बढ़ने के गंभीर जोखिम को दिखाता है.
रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "मेरे मन में भी कल से यही सवाल चल रहा है. मुझे नहीं लगता है कि इससे भारत की छवि मज़बूत होगी. यह बात जनरल चौहान ने आरएसएस से जुड़े थिंक टैंक में कही है. ज़ाहिर है कि यह डोमस्टिक कंजंप्शन के लिए है."
जनरल चौहान ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ऑपरेशनल सफलता हालात को ठीक से समझने से हासिल हुई. उन्होंने सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर नेटवर्किंग का श्रेय दिया और कहा कि सशस्त्र बलों को अभियान की योजना बनाने की पूरी स्वतंत्रता दी गई थी.
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