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Backभारत के मुख्य न्यायाधीश ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मुद्दे को भावनात्मक रूप से न लेने को कहा
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मुद्दे को भावनात्मक रूप से न लेने को कहा
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BBC हिंदी5/25/2026Politics4 min readIndia

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मुद्दे को भावनात्मक रूप से न लेने को कहा

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भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' पर दायर याचिका पर कहा कि इसे भावनात्मक रूप से न लें। यह आंदोलन जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने ऑनलाइन सक्रियता की आड़ में व्यवस्था पर हमला करने वाले युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी।

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प्रकाशित 3 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को एक याचिकाकर्ता से कहा कि वह 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मुद्दे को इतना भावनात्मक रूप से न लें.'

एक वकील ने इस संबंध मेंं दायर जनहित याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की गुज़ारिश की थी.

लाइव लॉ के मुताबिक़ अधिवक्ता एनके गोस्वामी ने दलील दी कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के कॉकरोच वाले बयान पर दिए गए स्पष्टीकरण के बावजूद 'एक विकृत और दुर्भावनापूर्ण नैरेटिव' लगातार जारी है.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने वकील से कहा, "इसे इतना भावनात्मक रूप से मत लीजिए."

मुख्य न्यायधीश ने कहा कि फ़िलहाल इस केस को सुनने की तात्कालिक कोई ज़रूरत नहीं है और समय आने पर इसकी सुनवाई की जाएगी.

'कॉकरोच जनता पार्टी' एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन है, जो जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद उभरा. इसमें मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि ऑनलाइन सक्रियता की आड़ में व्यवस्था पर हमला करने वाले बेरोज़गार युवाओं को 'कॉकरोच' जैसा माना जा सकता है.

बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री रखने वाले व्यक्तियों की ओर था, ना कि सभी युवाओं के लिए.

जस्टिस सूर्यकांत के इसी बयान के बाद अभिजीत दीपके नाम के शख़्स ने सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' की घोषणा की. देखते ही देखते उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर फॉलोअर्स की बाढ़ आ गई. इंस्टाग्राम पर उन्होंने कुछ ही घंटों में बीजेपी, कांग्रेस और देश के अन्य दलों को पीछे छोड़ दिया. बाद में एक्स पर उनके अकाउंट को निलंबित कर दिया गया था जिसके कुछ घंटों बाद वो नए अकाउंट के साथ एक्स पर आ गए.

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जस्टिस सूर्यकांत के बयान के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) चर्चा के केंद्र में आ गई थी.

इंटरनेट पर इसके नाम से वेबसाइट बन चुकी है और इंस्टाग्राम पर इसके दो करोड़ 30 लाख फ़ॉलोअर्स हो चुके हैं और बताया जा रहा है कि दो लाख से अधिक लोगों ने वेबसाइट पर इसकी सदस्यता के लिए ख़ुद को रजिस्टर्ड किया है.

कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट पर इसके संस्थापक और संयोजक की जानकारी दी गई है और उनका नाम अभिजीत दीपके है.

अभिजीत दीपके से बीबीसी न्यूज़ मराठी ने विस्तार से बात की है जिसमें उन्होंने बताया है कि इस तरह का सोशल मीडिया कैंपेन उन्होंने किस वजह से शुरू किया.

इस तरह के सोशल मीडिया कैंपेन का आइडिया कहां से आया? इस सवाल पर अभिजीत दीपके कहते हैं, "मैं ट्विटर (अब एक्स) पर सीजेई (भारत के मुख्य न्यायाधीश) का बयान देख रहा था जहां पर वो सिस्टम की आलोचना करने और राय देने के लिए देश के युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से कर रहे थे."

"मैंने इसे बेहद हास्यास्पद समझा क्योंकि सीजेआई को देश के संविधान का संरक्षक माना जाता है. वो संविधान जो हर किसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आज़ादी देता है. अब एक ऐसा शख़्स जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए है, वो कैसे युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से कर सकता है."

क्या कह रहे हैं लोग

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''मैं कॉकरोच जनता पार्टी के तेज़ी से उभरने को लेकर बेहद उत्सुक हूं. इसने जिसने सिर्फ़ पांच दिनों में ही इंस्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं,''

उन्होंने लिखा, ''मैं युवाओं की निराशा को समझता हूं और यह भी देख पा रहा हूं कि वे इससे क्यों जुड़ाव महसूस कर रहे हैं. यही वजह है कि एक्स पर इस अकाउंट को रोका जाना बेहद नुक़सानदेह और समझदारी से परे है.''

''युवाओं के पास अपनी भावनाएं व्यक्त करने का एक मंच होना चाहिए, इसलिए सीजेपी का अकाउंट बंद करने के बजाय उसे चलने दिया जाना चाहिए. लोकतंत्र में असहमति, हास्य, व्यंग्य और यहां तक कि नाराज़गी व्यक्त करने के लिए भी जगह होनी चाहिए.''

राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने बीबीसी से एक इंटरव्यू में कहा, "यह जो 'कॉकरोच जनता पार्टी' सोशल मीडिया पर एक मीम की तरह शुरू हुई, यह केवल हँसी-मजाक या गुस्सा नहीं है. देश के भीतर नीचे से एक सुगबुगाहट और छटपटाहट है क्योंकि व्यवस्था के बने-बनाए रास्ते और दरवाज़े बंद हो गए हैं. मजाक या चुटकुला हमेशा किसी न किसी गहरे दर्द से जुड़ा होता है, इसलिए हम इसका विश्लेषण मज़ाक में नहीं कर सकते. सरकार द्वारा इसे बैन करना एक गंभीर बदलाव की शुरुआत हो सकता है."

सीपीआईएमएल लिबरेशन ने एक्स पर पोस्ट कर कॉकरोच जनता पार्टी का बचाव किया है.

पार्टी ने एक्स पर लिखा, "क्या मोदी सरकार को लगता है कि कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स को ब्लॉक करके वह जेनज़ी को रोक सकती है?"

"क्या होगा अगर कॉकरोच जनता पार्टी, बीजेपी और नमो के हैंडल्स के ख़िलाफ़ 'अनफॉलो कैंपेन' शुरू कर दे? एक्स को इंटरनेट की आज़ादी का सम्मान करना चाहिए और बिना किसी देरी के कॉकरोच जनता पार्टी के हैंडल को बहाल करना चाहिए."

तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने भी कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स हैंडल पर रोक लगाने पर प्रतिक्रिया दी, ''ये फासीवाद है. लोकतंत्र नहीं. हमारी सरकार इस देश के युवाओं से इतनी डरी हुई है कि वह एक वर्चुअल ऑनलाइन आंदोलन तक को बर्दाश्त नहीं कर पा रही. प्लीज़ इस बात को समझिए कि विपक्ष में रहते हुए हमें हर दिन किस तरह की परिस्थितियों और दबावों का सामना करना पड़ता है.''

शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा, ''सोशल मीडिया पर बनी सीजेपी जैसी एक कल्पनात्मक सोच का जेन ज़ी की कल्पना और भावनाओं पर छा जाना इस बात का दुखद संकेत है कि युवाओं ने मौजूदा विपक्षी दलों से उम्मीद खोनी शुरू कर दी है''.

'' साफ़ है कि बीजेपी के खिलाफ नाराज़गी मौजूद है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोटर स्थापित विपक्षी पार्टियों के बजाय एक नई काल्पनिक पार्टी पर भरोसा जताना ज़्यादा पसंद कर रहे हैं.''

लेकिन वहीं एम नागेश्वर राव नाम के एक सोशल मीडिया यूज़र ने लिखा, कि कॉकरोच जनता पार्टी को देशविरोधी ताक़ते हवा दे रही हैं.

नेहा सिंह नाम की यूज़र ने लिखा, "कॉकरोच जनता पार्टी से दरअसल बीजेपी को ही फ़ायदा होगा, क्योंकि इससे जुड़ने वाले ज़्यादातर वो लोग हैं जो एंटी बीजेपी हैं और कांग्रेस और आप जैसी पार्टियों को सपोर्ट करते रहे हैं. लेकिन अब वो इन विपक्षी पार्टियों से निराश हो चले हैं तो वो सीजेपी को सपोर्ट कर रहे हैं. अगर ये पार्टी चुनाव लड़ती है तो कई एंटी बीजेपी इसको वोट देंगे. लेकिन बीजेपी का कोर वोटर तो कहीं जाने वाला नहीं है. ऐसे में विपक्षी वोट बंटेगा और फ़ायदा बीजेपी को होगा."

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This article was originally published by BBC हिंदी.
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