बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की के साथ यौन हिंसा और मारपीट, वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई
जमुई के मड़वा पहाड़ के पास नाबालिग लड़की के साथ यौन हिंसा का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने दो मुख्य अभियुक्तों और तीन नाबालिगों को पकड़ा है।
Quick Look
बिहार के जमुई में मड़वा पहाड़ के पास एक नाबालिग लड़की के साथ यौन हिंसा और उसके दोस्त के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ। पुलिस ने दो मुख्य अभियुक्तों और तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया है, जबकि इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
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Why It Matters
बिहार के जमुई में मड़वा पहाड़ के पास 19 सितंबर को एक नाबालिग लड़की के साथ यौन हिंसा और उसके दोस्त के साथ मारपीट की गई थी, जिसका वीडियो 21 सितंबर को वायरल हुआ था।
बिहार के जमुई शहर से क़रीब 10 किलोमीटर दूर मड़वा पहाड़ के आसपास सन्नाटा है.
महंगी एसयूवी गाड़ियों पर राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले पत्रकार, अपनी मोटर साइकिल पर लोकल यू-ट्यूबर और कभी-कभार कुछ स्थानीय नेताओं का यहाँ आना-जाना लगा हुआ है.
मड़वा पहाड़ के इर्द गिर्द बसे लोग हर किसी को शक और उत्सुकता की मिली-जुली नज़रों से देखते हैं.
स्थानीय लोगों से जब पत्रकार पूछते हैं कि क्या हुआ था, तो लगभग हर कोई थोड़ा अनमने ढंग से जवाब देता है कि 'मुझे कुछ नहीं मालूम'.
लेकिन सवाल पूछने और जवाब देने वाले को मालूम है कि किस घटना के बारे में बात हो रही है.
वो जानते हैं कि बात उस वीडियो की हो रही है, जिसमें युवकों के एक समूह ने मड़वा पहाड़ के पास एक नाबालिग़ लड़की के साथ यौन हिंसा और उसके नाबालिग़ दोस्त के साथ मारपीट की थी.
ये वीडियो वायरल होने के बाद भी जमुई पुलिस की कोई पेट्रोलिंग गाड़ी इलाक़े में दूर-दूर तक नहीं दिखती.
जमुई पुलिस ने इस मामले में तीन नाबालिग़ लड़कों को निरुद्ध किया है और अब तक दो अभियुक्तों हरेराम यादव और नंदन यादव की गिरफ़्तारी की है.
कुछ अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
21 सितंबर की देर रात सोशल मीडिया पर जमुई के मड़वा पहाड़ के ठीक नीचे बनी रोड पर हुई घटना का एक वीडियो वायरल हुआ था.
वीडियो में एक नाबालिग़ लड़की के साथ कुछ युवक यौन हिंसा करते नज़र आ रहे हैं.
वीडियो में नाबालिग़ लड़की का दोस्त, जो ख़ुद भी नाबालिग़ है, वो लगातार उसे बचाने की कोशिश कर रहा है लेकिन युवक उसके साथ भी मारपीट कर रहे हैं.
जमुई के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विश्वजीत दयाल के मुताबिक़, "हमारे संज्ञान में ये वीडियो 22 सितंबर की सुबह आया. वीडियो फुटेज के आधार पर नाबालिग़ छात्रा की पहचान की गई और उसका स्टेटमेंट रिकॉर्ड किया गया. नाबालिग़ छात्रा के पिता ने आवेदन दिया, जिसके आधार पर एफ़आईआर हुई. बाद में एक एसआईटी का गठन किया गया और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी हुई."
पुलिस ने जो टाइमलाइन शेयर की है, उसके मुताबिक़ 19 सितंबर की शाम 6.25 बजे छात्रा अपने एक दोस्त के साथ स्कूटी पर घूमने निकली थी. तकरीबन 20 मिनट बाद जब छात्रा और उसका दोस्त मड़वा पहाड़ पर फोटो खींच रहे थे, तभी सात-आठ की संख्या में स्थानीय युवक आए और उन्होंने छात्रा के साथ यौन हिंसा की.
इस घटना के बाद छात्रा अपने घर गई, लेकिन उन्होंने इस घटना का ज़िक्र किसी से नहीं किया.
20 सितंबर की रात लड़की ने ये बात अपने पिता को बताई.
लड़की के पिता ने बीबीसी हिन्दी से फ़ोन पर बात की.
उन्होंने बताया कि बच्ची अभी ठीक है. पिता ने कहा, "बच्ची ने डरते-डरते ये बात 20 सितंबर की रात को बताई थी. बाद में पुलिस ने स्टेटमेंट लिया और एफ़आईआर हुई."
वो कहते हैं, "हमें सुरक्षा चाहिए उन लोगों से. हम चाहते हैं कि अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले. मेरी बच्ची काली शर्ट पहनकर गई थी. मैंने पुलिस को बताया है कि वो काले रंग की शर्ट पहनकर गई थी जिसे इन लोगों ने खींच कर खोल दिया."
21 सितंबर को दर्ज एफ़आईआर में बीएनएस की धारा 74,76,3(5) और पॉक्सो एक्ट की धारा 8/12 लगाई गई है.
पॉक्सो एक्ट की धारा 8/12 बच्चों के ख़िलाफ़ यौन हमले से संबंधित है.
साथ ही जमुई पुलिस ने साइबर थाने में इस वीडियो को शेयर करने को लेकर 120 सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल पर एफ़आईआर की है. साथ ही पुलिस ने आम लोगों से वीडियो शेयर नहीं करने की अपील की है.
इस मामले में पुलिस ने तीन नाबालिग़ लड़कों को 21 सितंबर को यानी एफ़आईआर दर्ज होने के बाद निरुद्ध किया था. जबकि दो मुख्य अभियुक्तों हरेराम यादव और नंदन यादव की गिरफ़्तारी 22 सितंबर की सुबह हुई.
ये दोनों ही मड़वा पहाड़ से कुछ दूरी पर स्थित प्रतापपुर गाँव के रहने वाले हैं.
एसपी विश्वजीत दयाल के मुताबिक़, "नंदन यादव को गिरफ़्तार करने के लिए घेराबंदी की गई जिसमें उसने गोली चला दी. पुलिस ने आत्मरक्षार्थ फ़ायरिंग की जिसमें नंदन यादव को गोली लगी. नंदन यादव के पिता गनौरी यादव को भी गिरफ़्तार किया गया है. गनौरी यादव पर साल 2003 में हुई हत्या के मामले में केस दर्ज है."
जमुई पुलिस ने बताया है कि ये दोनों ही अवैध शराब और बालू के कारोबार में लिप्त हैं. इन लोगों का अन्य आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है.
पुलिस 22 सितंबर को गिरफ़्तारी की बात कर रही है, लेकिन प्रतापपुर गाँव में नंदन और हरेराम यादव के पड़ोसी बताते हैं कि पुलिस उन्हें 21 सितंबर की रात 12 बजे के क़रीब ही उठा ले गई थी.
इस गिरफ़्तारी के बाद बीबीसी की टीम जब 23 सितंबर की सुबह इन दोनों अभियुक्तों के घर गई थी. नंदन यादव के घर पर ताला लगा था, जबकि हरेराम यादव के घर पर उनके दादा-दादी ही मिले, जिन्होंने बातचीत करने से इनकार कर दिया.
इन गिरफ़्तारियों के बाद गाँव में ख़ास तौर पर यादव टोला में बहुत नाराज़गी है.
नंदन के पड़ोसी अरविंद कुमार यादव बीबीसी से कहते हैं, "नंदन तो यहाँ रहता भी नहीं था. वो तो 10 दिन पहले अपने माता-पिता से मिलने आया था. पुलिस कह रही है कि वो शराब का व्यापार करता था लेकिन वो तो यहाँ रहता भी नहीं था. वो माँ बाप को देखने आया और यहाँ फँस गया. उसने कोई वीडियो भी नहीं बनाया था. दूसरे ने वीडियो बनाकर उसे फँसा दिया."
वहीं स्थानीय सीमा देवी कहती हैं, "उसको फँसा दिया गया है और क्या लड़की रात में पहाड़ पर कोचिंग पढ़ने गई थी. वो रात में वहाँ फोटो क्यों खिंचा रही थी ?"
ये पूछने पर कि क्या फोटो खिंचाने जाने पर या रात हो जाने पर किसी को लड़की के साथ बदसलूकी करने का अधिकार मिल जाता है? इस सवाल पर सोनी देवी स्वीकार करती हैं कि लड़की के साथ बदसलूकी ग़लत बात है.
गाँव के इस हिस्से में यानी यादव टोला में ज्यादातर महिलाएँ और पुरुष बार-बार यही कहते हैं कि 'लड़की की ही ग़लती थी.'
लेकिन गाँव के ही दूसरे हिस्से में जाने पर ग्रामीण इस पूरी घटना को ग़लत ठहराते हैं.
स्थानीय निवासी समता कहती हैं, "लोगों को ये समझना चाहिए कि जो आज किसी दूसरे की लड़की के साथ हुआ, वो मेरी लड़की के साथ भी हो सकता है."
वहीं गाँव के ही शाहिद अंसारी कहते हैं, "कोई लड़का-लड़की घूम रहे हैं उसमें दखल देने वाले हम लोग कौन होते हैं. कोई क्या पहनेगा, मैं क्या पहनूँगा ये भी तय करना किसी का अधिकार नहीं है."
बीबीसी ने इस मामले में निरुद्ध किए गए दो नाबालिग़ों के परिजनों से भी बात की.
इनमें से एक ने कहा, "कोई माता–पिता अपने बच्चों से नहीं कहता कि ऐसा ग़लत काम जाकर करो. मेरी भी बच्ची है. अगर उसके साथ कुछ बुरा होगा, तो मुझे भी बुरा लगेगा. मैं मज़दूरी करता हूँ और मुझे मालूम नहीं रहता कि मेरा बेटा क्या करता है. वो तो पढ़ाई करता है. पुलिस उसे पकड़ कर ले गई है. मुझे ये नहीं मालूम कि मेरे बेटे ने कोई ग़लत काम किया है या नहीं?"
वहीं एक अन्य नाबालिग़ के पिता ने बीबीसी से कहा, "मेरे बेटे ने बताया कि 19 सितंबर की शाम को पहाड़ के पास शोर मचना शुरू हुआ, तो वो वहाँ गया था. वो तो क्रिकेट खेल रहा था. 21 तारीख़ को जब वो अपना एग्जाम देकर लौट रहा था तो पुलिस उसे पकड़ ले गई. उसकी मम्मी उसे मिली है. मेरी तो मुलाक़ात भी नहीं हुई है."
स्थानीय लोगों ने बातचीत में ये भी दावा किया कि लड़कियों और महिलाओं के साथ हिंसा की ये पहली घटना नहीं थी.
मड़वा पहाड़ स्थानीय लोगों के लिए घूमने-फिरने की जगह है.
जमुई शहर से बमुश्किल कुछ किलोमीटर दूर ये पहाड़ स्थित है, जिसके कारण जमुई शहर से भी लोग यहाँ घूमने आते हैं. पहाड़ियों से घिरे जमुई ज़िले की सीमा बिहार के लखीसराय ज़िले से लगती है.
मड़वा पहाड़ से बमुश्किल एक किलोमीटर दूर किऊल नदी बहती है. इस नदी पर बने पुल के ज़रिए लखीसराय ज़िले की सीमा में दाखिल हुआ जा सकता है. उनके बच्चों के स्कूल, कोचिंग सब जमुई ज़िले की सीमा में ही पड़ते हैं, जिसका रास्ता मड़वा पहाड़ के पास से होकर ही गुजरता है.
लखीसराय ज़िले में जाने पर सबसे पहली बसावट कुंदर टोला नाम की जगह है.
इस टोले के लोगों ने बीबीसी से कहा कि मड़वा पहाड़ के आसपास अपराध की घटनाएँ घटती रहती हैं और बच्चियों–महिलाओं के साथ हिंसा होना आम बात है.
इस टोले की शांति देवी बीबीसी से बताती हैं, "हमारा रास्ता ही वही है. बहू हो, बेटी हो-ये लोग सबसे सामने (इस मामले के अभियुक्त) सबके साथ छेड़खानी करते हैं और गंदी-गंदी बातें करते हैं. मेरी बहू को कुछ दिन पहले इन लोगों ने रोका था और लड़की का रास्ता मोटरसाइकिल लगाकर रोक दिया था. ये लोग हर बार ऐसा करते थे लेकिन इस बार वीडियो वायरल हो गया और इन लोगों का मामला सामने आ गया."
दशरथ राम ने तो अपनी नातिन की पढ़ाई ही छुड़वा दी. वो बताते हैं, "वो बीए में पढ़ती थी लेकिन ये लोग रोज़ छेड़छाड़ करते थे. अब रोज़ तो कोई देखेगा नहीं. कोचिंग जाती थी जहाँ देर–सबेर हो ही जाती थी. जब ज़्यादा होने लगा, तो मैंने पढ़ाई ही छुड़वा दी."
प्रतापपुर गाँव के पास रहने वाली एक छात्रा ने कहा, "जब हम लोग और हमारे माता-पिता सुरक्षित ही महसूस नहीं करेंगे, तो हमारे माता पिता हमें बाहर पढ़ने कैसे भेजेंगे."
इस घटना के सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने क़ानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को एक बार फ़िर से घेरा है.
उन्होंने कहा, "बिहार में लड़कियाँ सुरक्षित नहीं है. चाहे दिन हो या रात, चाहे स्कूल हो या सड़क हो या हॉस्टल हो, घर के अंदर हो या घर के बाहर हो."
वहीं जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस घटना को 'छिटपुट' कहा.
उन्होंने कहा, "आज कोई भी छिटपुट घटना घटती है तो सरकार उसको लेकर संवेदनशील है. लेकिन 2005 से पहले का लालू राज याद करिए कि कैसा बिहार था. कोई घर से बाहर नहीं निकलता था."
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बीती 22 सितंबर को एक निजी कार्यक्रम में दिया बयान भी विवादित है जिसमें उन्होंने कहा था, "आजकल रील ही बन रहा है. मैं बार-बार कहता हूँ अपराधियों को कि मेरी पुलिस को चैलेंज क्यों करते हो? चैलेंज करोगे तो 24 घंटे के अंदर जवाब मिलेगा ही. आजकल रील बनाने के चक्कर में मारा जा रहा है. आज की जो घटना है आपने देखा होगा, उसने अगर रील ना बनाया होता तो पकड़ाता क्या? इसलिए रील बनाने के चक्कर में कितने लोग मारे जाएँगे?"
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
पुलिस इस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आगे की कार्रवाई जारी रखेगी।
Very likely · Within days
Open Questions
- वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने शुरुआती दिनों में गश्त क्यों नहीं बढ़ाई?
- क्या इस मामले में अन्य आरोपी भी शामिल हैं?






