
रूस के दो नागरिकों ने यूक्रेन की ख़ुफ़िया एजेंसी जीयूआर के लिए गुप्त रूप से काम करने का दावा किया है। उन्होंने रूस के भीतर सैन्य ठिकानों और वरिष्ठ अधिकारियों पर नज़र रखने वाली कार्रवाइयों में अपनी भूमिका बताई है।
AI-generated summary
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की शुरुआत के बाद से रूस के भीतर गुप्त कार्रवाइयों और राजनीतिक हत्याओं की खबरें आती रही हैं।
रूस के दो नागरिकों ने यूक्रेन की ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए गुप्त रूप से काम करने का दावा किया है।
उन्होंने उन कार्रवाइयों के बारे में भी बताया है, जिनमें उनके मुताबिक़ रूस के भीतर सैन्य ठिकानों, सैन्य उपकरणों और सैन्यकर्मियों को निशाना बनाया गया था।
इनमें से एक व्यक्ति को हम इवान कह रहे हैं।
इवान का दावा है कि रूस में रहते हुए उसने यूक्रेन के उन ड्रोन हमलों में भूमिका निभाई, जिनमें रूस के रणनीतिक बमवर्षक विमानों और हथियार बनाने वाली फ़ैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया था।
इवान बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की एक डॉक्यूमेंट्री में दिखाई देते हैं। ये डॉक्यूमेंट्री रूस के भीतर गुप्त रूप से ऐसी कार्रवाइयां करने वाले लोगों के बारे में है।
रूस के सैन्य अधिकारियों पर रखी जाती है नज़र
यह डॉक्यूमेंट्री स्वतंत्र पोलिश पत्रकार मार्सिन मामोन ने बनाई है।
डॉक्यूमेंट्री में एक और व्यक्ति भी हैं, जिन्हें हम फ़ोमा कह रहे हैं। फ़ोमा रूस के रहने वाले हैं, लेकिन इस समय पोलैंड में निर्वासन में रह रहे हैं।
फ़ोमा का कहना है कि वह रूस में गुप्त रूप से काम करने वाले स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क चलाते हैं।
उनके मुताबिक़, इस नेटवर्क के लोग रूस के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर नज़र रखते हैं। ये ऐसे अधिकारी होते हैं, जिन्हें यूक्रेन की सैन्य ख़ुफ़िया एजेंसी जीयूआर निशाना बनाने पर विचार कर रही होती है।
हालांकि, फ़ोमा इस बात पर ज़ोर देते हैं कि उनके लोग ख़ुद किसी हमले में शामिल नहीं होते।
फ़ोमा ने यह भी नहीं बताया कि उनके लोग किन अधिकारियों पर नज़र रख रहे थे।
लेकिन पिछले साल दिसंबर में मॉस्को में लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ानिल सरवारोव की हत्या के बाद उन्होंने माना कि उन्होंने जनरल के बारे में जानकारी यूक्रेन को दी थी।
रूस में ऐसी गुप्त कार्रवाइयां करने वाले समूहों के बारे में पहले भी मीडिया में ख़बरें आती रही हैं। लेकिन इवान जैसे किसी ऐसे व्यक्ति तक पहुंचना बहुत मुश्किल है, जो रूस में रहकर काम कर रहे हों और अपनी कथित गतिविधियों के बारे में बता रहे हों।
जीयूआर ने पुष्टि की है कि इवान और फ़ोमा, दोनों उनके लिए काम करते हैं।
लेकिन एजेंसी ने यह भी माना है कि उसे पूरी जानकारी मालूम नहीं हो सकती।
युद्ध शुरू होने के बाद रूस में कई राजनीतिक हत्याएं
यूक्रेन की ख़ुफ़िया एजेंसी जीयूआर में जिस अधिकारी के संपर्क में इवान रहता है, उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें इवान पर पूरा भरोसा है। इस पर उन्होंने कहा, "मुझे अपने अलावा किसी पर भरोसा नहीं है।"
जीयूआर, इवान और फ़ोमा इस बात को लेकर बहुत सावधान हैं कि वे कितनी जानकारी साझा करते हैं।
इस वजह से उन कार्रवाइयों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना संभव नहीं है, जिनमें शामिल होने का ये दोनों दावा करते हैं।
हालांकि, इवान और फ़ोमा जिन व्यापक तरीक़ों के बारे में बताते हैं, उन्हें यूक्रेन के अधिकारी स्वीकार कर चुके हैं।
यूक्रेन की सरकार रूस के भीतर मिलकर किए जाने वाले ड्रोन हमलों की अपनी रणनीति के बारे में बता चुकी है।
यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों में जायज़ ठिकानों को निशाना बनाया जाता है। सरकार ने यह भी माना है कि ऐसी कार्रवाइयों के लिए गुप्त एजेंटों का इस्तेमाल किया जाता है।
वैसे, युद्ध शुरू होने के बाद से रूस में कई राजनीतिक हत्याएं भी हुई हैं।
यूक्रेन की नीति है कि वह ख़ास लोगों को निशाना बनाकर किए गए हमलों में अपनी भूमिका न तो आधिकारिक रूप से स्वीकार करता है और न ही उनकी ज़िम्मेदारी लेता है।
हालांकि, यूक्रेन के एक ख़ुफ़िया अधिकारी ने पहले बीबीसी से माना था कि दिसंबर 2024 में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ़्टिनेंट जनरल इगोर किरिलोव की हत्या के पीछे यूक्रेन था।
यूक्रेन के लिए कितने रूसी काम कर रहे हैं?
यह पता लगाना मुश्किल है कि रूस के कितने नागरिक यूक्रेन के लिए इस तरह का काम कर रहे हैं।
फ़ोमा का दावा है कि ऐसे लोगों की संख्या करीब 300 से 500 के बीच है। हालांकि, इसकी पुष्टि करना संभव नहीं है।
इवान और फ़ोमा कहते हैं कि वे केवल यूक्रेन में रूस की लड़ाई के ख़िलाफ़ नहीं हैं। वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार का भी विरोध करते हैं।
उनका मानना है कि पुतिन का राजनीतिक भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि युद्ध का नतीजा क्या होता है।
इवान कहते हैं, "इस समय मुझे लगता है कि अगर वे युद्ध हार जाते हैं, तो पुतिन की सरकार गिर सकती है।"
"अपनी कार्रवाइयों के ज़रिए हम इस प्रक्रिया को तेज़ करने की कोशिश कर रहे हैं।"
इवान ने मार्सिन मामोन को बताया कि उनके काम में सैन्य ठिकानों पर नज़र रखना भी शामिल था।
वह ड्रोन के हिस्सों को छिपाने के लिए जगह भी तलाशते थे। यह सब रूस के सैन्य ठिकानों और उपकरणों पर संभावित हमलों की तैयारी के लिए किया जाता था।
इवान ने कहा, "जब ड्रोन के इन हिस्सों को आपस में जोड़ा जाता है, तो यह एक बहुत ताक़तवर हथियार बन जाता है।"
"यह एक ही हमले में ऐसी चीज़ को तबाह कर सकता है, जिसकी क़ीमत कई करोड़ डॉलर हो।"
इवान ने मामोन को एक वीडियो भेजा। इसमें वह कथित तौर पर रूस के एक सैन्य हवाई अड्डे के पास विस्फोटक छिपाते दिखाई दे रहे थे।
अगर वह पकड़े जाते, तो उन पर आतंकवाद का आरोप लगता और उसे कई दशकों के लिए जेल भेजा जा सकता था।
फ़ोमा का नेटवर्क कैसे काम करता है?
फ़ोमा का काम इवान से अलग है।
वह रूस से बाहर रहकर अपने स्वयंसेवकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देते हैं। मार्सिन मामोन ने उन्हें ऐसा ही एक प्रशिक्षण देते हुए देखा।
इस दौरान फ़ोमा अपने स्वयंसेवकों को बता रहे थे कि जिस वरिष्ठ सैन्य अधिकारी पर नज़र रखने के लिए कहा गया है, उनका पीछा कैसे करना है।
फ़ोमा ने अपने स्वयंसेवकों से कहा, "आपको मेरी या मेरे किसी साथी की ओर से एक फ़ाइल मिलेगी। इसमें उस व्यक्ति का नाम होगा, जिस पर नज़र रखनी है।"
"फ़ाइल में उनकी तस्वीर, निजी जानकारी, जन्म की तारीख़, उम्र और हुलिया दिया होगा। अगर उनके पास कार है, तो उसकी जानकारी भी उसमें होगी।"
"जब आप उस व्यक्ति के पास जाएं, तो अपने साथ फ़ोन न ले जाएं।"
फ़ोमा का कहना है कि वह कभी रूस के ताक़तवर और प्रभावशाली वर्ग का हिस्सा थे।
इसलिए उसके पास कुछ ख़ास संपर्क हैं, जिनसे उसे लगातार अंदरूनी जानकारी मिलती रहती हैं।
फ़ोमा ने अपने लैपटॉप पर मामोन को दिखाया कि वह सैन्य ठिकानों और लोगों की जगहों को नक़्शे पर कैसे दर्ज करते हैं।
उन्होंने कहा, "यह जानकारी का एक संग्रह है। इसमें सामान रखने वाले गोदामों और सैन्य इकाइयों की जगह दी गई है।"
"इसमें ये भी है कि जनरल कहां रहते हैं और यूक्रेन पर बमबारी करने वाले रणनीतिक बमवर्षक विमानों के पायलट कहां रहते हैं।"
"किसी व्यवस्था को तोड़ने के लिए आपको यह समझना पड़ता है कि वह काम कैसे करती है। इसके बाद आप उसकी कमज़ोर जगहों को निशाना बना सकते हैं।"
फ़ोमा ने बताया कि उसके नेटवर्क में करीब 36 लोग हैं।
ये लोग रूस, यूक्रेन और यूरोप के दूसरे देशों में रहते हैं।
रूस से बाहर मौजूद लोग सामान पहुंचाने और दूसरे इंतज़ाम करने में मदद करते हैं।
वे उन लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों और इंटरनेट पर मौजूद जानकारी का भी पता लगाते हैं, जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है।
फ़ोमा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिन लोगों पर नज़र रखनी होती है, उनके नाम जीयूआर सुझाता है।
लेकिन वह और उसकी टीम अपने स्तर पर भी यह जांच करते हैं कि उस व्यक्ति को सैन्य अपराधी माना जाना चाहिए या नहीं।
फ़ोमा ने कहा, "आम तौर पर हम भी उस व्यक्ति से जुड़ी जानकारी की जांच करते हैं।"
"इसके बाद ही हम तय करते हैं कि उस पर काम करना है या नहीं।"
फ़ोमा अपनी टीम की कार्रवाइयों को सही मानते हैं।
उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि जो लोग पुतिन और रूस की ओर से यूक्रेन में भयानक काम कर रहे हैं, वे समझें कि उन्हें इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी।"
'मैं चाहता हूं कि वे डरें'
फ़ोमा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वह यूक्रेन को केवल जानकारी देते हैं। उनका नेटवर्क ख़ुद किसी की हत्या नहीं करता।
दिसंबर 2025 में जनरल सरवारोव की हत्या के बाद फ़ोमा ने मामोन को एक संदेश भेजा था।
इसमें उसने लिखा, "उन पर नज़र रखने में काफ़ी मेहनत लगी।"
"वह कभी अपनी प्रेमिका और कभी अपने साथी के साथ रहते थे। वह अपने निशान छिपाते थे और लगातार अपना कार्यक्रम बदलते रहते थे।"
हालांकि, फ़ोमा ने इस कार्रवाई से पहले मामोन या बीबीसी के साथ इसकी कोई योजना साझा नहीं की थी।
रूस की सबसे बड़ी सैन्य ड्रोन फ़ैक्ट्री पर हमला
इवान अपने काम के बारे में बहुत कम जानकारी देते हैं।
किसी घटना के बाद भी वह उससे जुड़ी बातें बताने से बचते थे।
फ़ोमा ने इवान के बारे में अपने स्तर पर जानकारी जुटाई।
उन्होंने यूक्रेन और रूस में मौजूद सैन्य ख़ुफ़िया सूत्रों से बात की।
इसके बाद फ़ोमा को लगा कि इवान पिछले साल जून में रूस की सबसे बड़ी सैन्य ड्रोन फ़ैक्ट्री पर हमला करने की योजना में शामिल रहा होगा।
ये फ़ैक्ट्री येलाबुगा में है।
इस घटना में एक व्यक्ति के मारे जाने की ख़बर थी।
इवान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसी कार्रवाइयों में हमेशा आम लोगों को नुक़सान पहुंचने से बचाने की कोशिश की जाती है।
लेकिन ये कार्रवाइयां इवान के लिए भी बहुत ख़तरनाक रही हैं।
उन्होंने कहा, "सबसे गंभीर घटना उस समय हुई, जब मेरी कार को सुरक्षा जांच के लिए रोका गया और मेरे पास हाथ से बनाए गए विस्फोटक थे।"
"जोखिम बहुत ज़्यादा था। लेकिन जैसा कि आप देख सकते हैं, वे मुझे पकड़ नहीं पाए।"
इंटरनेट पर अपने निशान नहीं छोड़ते
इवान ने बताया कि किसी के पकड़े जाने या पूरी व्यवस्था का राज़ खुलने का ख़तरा कम करने के लिए इस काम का कोई एक साफ़ संगठनात्मक तरीक़ा नहीं है।
उन्होंने कहा कि वह जिन दूसरे लोगों के साथ काम करता हैं, उनसे वह कभी नहीं मिले। वह उनकी पहचान भी नहीं जानते।
फ़ोमा भी अपने लोगों के लिए यही नियम अपनाते हैं।
उन्होंने कहा, "जैसे ही आप लोगों को समूहों या साझा ऑनलाइन चैट में इकट्ठा करना शुरू करते हैं और इंटरनेट पर अपने निशान छोड़ते हैं, इस बात की बहुत अधिक आशंका होती है कि पूरे समूह को जल्दी गिरफ़्तार कर लिया जाएगा या ख़त्म कर दिया जाएगा।"
'इस काम के लिए रूस में बहुत कम लोग बचे हैं'
इवान ने कहा कि रूस में अब ऐसे बहुत कम लोग बचे हैं, जो इस तरह का काम कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, "विचारधारा के आधार पर काम करने वाले ज़्यादातर लोग या तो देश छोड़ चुके हैं या जेल में हैं।"
बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक़, रूस में रहकर ऐसी कार्रवाइयों में शामिल कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे किस काम का हिस्सा बन रहे हैं।
मिसाल के तौर पर, कुछ ट्रक ड्राइवरों को यह मालूम नहीं होता कि वे जिस सामान को लेकर जा रहे हैं, उसके साथ छेड़छाड़ की गई है।
कुछ दूसरे लोग पैसे लेकर ऐसा काम करते हैं।
लेकिन इवान का कहना है कि वह अपनी विचारधारा के कारण यह काम कर रहा है। वह पहले राजनीतिक विपक्ष का सदस्य था।
इस कारण उम्मीद की जाती है कि रूस के अधिकारी उसकी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखते होंगे।
इसलिए यह हैरान करने वाली बात थी कि वह कई बार रूस से बाहर निकलने और फिर वापस लौटने में कामयाब रहा।
यूक्रेन इवान पर भरोसा कैसे करता है?
मार्सिन मामोन ने इवान को अपने साथ जॉर्जिया के रेगिस्तानी इलाक़े में चलने के लिए तैयार किया। वहां दोनों खुलकर बात कर सकते थे।
मामोन ने इवान से पूछा कि यूक्रेन के अधिकारी उस पर भरोसा कैसे कर सकते हैं।
इससे कथित तौर पर यह दिखाया गया कि इवान उसके लिए काम करता है।
दोनों ने संकेतों वाली भाषा में बातचीत की और "स्कूल में मरम्मत" का ज़िक्र किया।
लेकिन बाद में इवान के संपर्क अधिकारी ने माना कि वह इस संभावना को पूरी तरह ख़ारिज नहीं कर सकता कि इवान अपनी मर्ज़ी से या दबाव में रूस के लिए भी काम कर रहा हो।
फ़ोमा का मानना है कि इवान का आसानी से यात्रा कर पाना अपने आप में उस पर शक करने की वजह नहीं है।
उसने मामोन से कहा, "देश की व्यवस्था में हर तरह की कमज़ोरियां हैं।"
"अगर आप उनके बारे में जानते हैं या केवल ख़ुशक़िस्मत हैं, तो आप उन रास्तों से निकल सकते हैं और उसी व्यवस्था में रह सकते हैं।"
"यह वैसा ही है, जैसे पनीर के टुकड़े में बने छेदों के बीच चूहा अपना रास्ता निकाल लेता है।"
'पुतिन हमेशा ज़िंदा नहीं रहेंगे.'
एक और बात अधिक अहम लगती है।
अगर इवान रूस की सुरक्षा एजेंसी एफ़एसबी के लिए भी जासूसी कर होता, तो इस बात की संभावना थी कि वह यूक्रेन के हमलों की योजनाओं से जुड़ी अपनी जानकारी रूसी एजेंसी को दे देता।
यूक्रेन के 100 से अधिक ड्रोन से किए गए एक बड़े और तबाही मचाने वाले हमले से एक साल से भी अधिक समय पहले इवान, मार्सिन मामोन को बता रहा था कि रूस के अलग-अलग सैन्य हवाई अड्डों पर मौजूद रणनीतिक बमवर्षक विमानों पर बड़ा हमला होने वाला है।
हालांकि, उसने कभी यह नहीं बताया कि हमला कब और कहां होगा।
मामोन ने इवान से पूछा कि वह इस काम के दबाव को कैसे सहता है।
इवान ने कहा, "डर हमेशा मौजूद रहता है। वह हर जगह मेरे साथ चलता है।"
"आप कुछ न भी कर रहे हों, तब भी डरे रहते हैं। यह रूस है।"
लेकिन इवान को उम्मीद थी कि आख़िरकार उसका जीवन बदलेगा।
और फिर इवान ने कहा, "पुतिन हमेशा ज़िंदा नहीं रहेंगे।"
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