दिल्ली: एंटी सीजेपी प्रदर्शनकारियों ने सीजेपी समर्थकों के साथ मार-पीट की, पुलिस पर कोई कार्रवाई ना करने का आरोप
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दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने व्यापक धरपकड़ की। नेहा बोरा, अभिजीत दीपके और मनीष सिसोदिया समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम हैं।
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Why It Matters
कॉकरोच जनता पार्टी चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े की मांग कर रही है।
दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों और एंटी सीजेपी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की बात सामने आई है.
बीबीसी संवाददाता विष्णुकांत तिवारी ने बताया कि सीजेपी और एंटी सीजेपी कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए. सीजेपी विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सीजेपी सपोर्टर्स के साथ धक्का-मुक्की की, उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया.
इस दौरान पुलिस ने एंटी सीजेपी प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की. जब बीबीसी ने पुलिस से इस बारे में पूछना चाहा तो मौक़े पर मौजूद पुलिस के जवानों ने कोई जवाब नहीं दिया.
बीबीसी से बात करते हुए एक सीजेपी प्रदर्शनकारी ने कहा, "वो लोग हमारे ख़िलाफ़ भद्दी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. हिंसक नारे लगा रहे हैं. हमें पीट रहे हैं और पुलिस उन्हें कुछ नहीं कर रही है. ये कैसा दोहरा रवैया है. हमें तो पुलिस रोक रही है. आगे नहीं बढ़ने दे रही है और उन लोगों को खुली छूट है."
सीजेपी और कई वाम संगठनों के कॉल पर राजधानी दिल्ली में 10 अक्तूबर, शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है.
इस बीच सीपीआईएमएल ने दावा किया है कि आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली के मैदान गढ़ी डिटेंशन सेंटर ले जाया गया है.
सीपीआईएमएल के दिल्ली स्टेट कमेटी मेंबर एडवोकेट सूर्य प्रकाश ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "नेहा और आइसा कार्यकर्ता निरमा के फ़ोन उनसे ले लिये गए हैं. उन्हें अलग कमरे में रखा गया है."
उन्होंने मांग की कि नेहा और उनकी साथी से वकीलों को मिलने दिया जाए.
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने तीनों नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास की सुरक्षा को लेकर चिंता ज़ाहिर की है. तीनों को शनिवार को दिल्ली पहुंचते ही विमान से ही हिरासत में ले लिया गया.
सीजेपी ने एक्स हैंडल पर लिखा, "तीनों नेताओं की सुरक्षा को लेकर हम बेहद चिंतित हैं. दिल्ली पुलिस को इस तरह की जानकारी प्रेस में लीक करने के बजाय अभिजीत के परिवार और वकीलों को उनसे बात करने की अनुमति देनी चाहिए और उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए."
सीजेपी ने समाचार एजेंसी एएनआई की उस ख़बर का हवाला दिया जिसमें दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी है.
इस ख़बर के अनुसार, "अब यह फैसला उन्हें करना है कि वह हिरासत में रहते हुए अपना विरोध जारी रखना चाहते हैं या अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वापस जाना चाहते हैं."
इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग के लिए सीजेपी का घोषित प्रदर्शन स्थल जंतर मंतर था लेकिन नेहा बोरा समर्थकों समेत पुलिस को चकमा देकर दिल्ली हाट पहुंचकर प्रदर्शन करती दिखीं.
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के अनुसार, नेहा बोरा के साथ योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, दीपांकर भट्टाचार्य को सफ़दरजंग फ़्लाईओवर से हिरासत में लिया गया.
हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने एक्स पर पोस्ट किया, "मैं हिरासत में हूं. आंदोलन नहीं. लोग अभी सफ़दरजंग फ़्लाईओवर पर जुट रहे हैं. अगर पहुंच सकते हैं, तो पहुंचिए. अगर आपको रोका जाए, तो वहीं बैठ जाइए और डटे रहिए. हमें हिरासत में लिया गया है. लेकिन इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.
"मेरे साथी जेन ज़ी, यह हमारा 1942 है. उनकी जेलों में हममें से कुछ लोग तो समा सकते हैं, लेकिन हम सब नहीं. आज हममें से किसी को भी जहां रोका जाए, वहीं बैठकर शुरुआत कर दें. हर नुक्कड़ जंतर-मंतर बन जाएगा."
मार्च निकालने से पहले उन्होंने लोगों से दिल्ली हाट आने की अपील की थी और कहा था कि अब यही जंतर-मंतर होगा.
उनके साथ सीपीआई-एमएल के जनरल सेक्रट्री दीपांकर भट्टाचार्य, सीनियर वकील प्रशांत भूषण और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी मौजूद थे.
इससे पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने से पहले कॉकरोच जनता पार्टी के तीन शीर्ष नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया.
नेहा बोरा पिछले कुछ महीनों के प्रदर्शनों के दौरान कई बार पुलिस से आमना-सामना कर चुकी हैं. जबकि दीपके के सामने ये पहला मौका था जब पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन से पहले ही हिरासत में ले लिया गया.
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया और गोपाल राय को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.
शनिवार सुबह, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली आते वक़्त विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया.
हिरासत में लिए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने सीजेपी के एक्स हैंडल पर एक वीडियो अपलोड करके कहा कि आंदोलन का नेतृत्व अब अजिंक्य शिंदे करेंगे.
सीजेपी मुंबई से फ्लाइट से दिल्ली आ रहे थे. लेकिन दिल्ली में विमान के उतरने के तुरंत बाद विमान के भीतर से ही दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
इससे पहले लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी और सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह को हिरासत में लिया गया था.
इस बीच, मध्य दिल्ली में जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को चुन-चुनकर हिरासत में लिया जा रहा है और बसों में भरकर ले जाया जा रहा है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन को रोकने के लिए हर तरफ़ पुलिस बलों का पहरा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ दिल्ली में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के 25 हज़ार जवानों को तैनात किया गया है.
साथ ही दिल्ली के अंदर 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है. जंतर-मंतर और इससे चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट बंद कर दिया गया है.
देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली आने वाली 245 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है.
समाचार एजेंसी एएनआई और आईएएनएस की ओर से शेयर किए गए वीडियो में दिल्ली पुलिस सड़कों पर कीलें बिछाती दिख रही है.
कीलें लगाने पर पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने लिखा है, ''मोदी सरकार ने किसान आंदोलन वाली नुकीली कीलें जनता के स्वागत में आज फिर दिल्ली की सड़कों पर बिछा दी हैं.''
सीजेपी ने वामपंथी छात्र संगठनों, किसान संगठनों और अन्य समूहों के साथ मिलकर शनिवार को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.
ये संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
इनका कहना है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, जिसकी वजह से 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं.
लोगों को हिरासत में लिए जाने की ख़बरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने एक्स पर लिखा, '' सरकार अपने ही नागरिकों से जंग लड़ रही है.''
लीगल मामलों की न्यूज़ वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए.
यह अवमानना याचिका गृह मंत्रालय के सचिव आईएएस गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त आईपीएस अनुराग कुमार और डीएमआरसी की अध्यक्ष आईएएस डी. थारा के ख़िलाफ़ दायर की गई है.
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि बिना किसी उचित कारण के ट्रेन सेवाएं रद्द की जा रही हैं.
याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों की ओर से अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने के कारण दिल्ली में जनजीवन ठप हो गया है.
सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की 120 से ज़्यादा कंपनियों के तैनात रहने की उम्मीद है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ रणनीतिक रूप से अहम जगहों पर जवानों को तैनात किया गया है.
सुरक्षा तैयारियों और इमरजेंसी हालातों में कार्रवाई की व्यवस्था का आकलन करने के लिए कई जगहों पर मॉक ड्रिल की गईं.
नई दिल्ली ज़िले को निगरानी के लिए 20 ज़ोन में बांटा गया है. इनकी निगरानी संयुक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त स्तर के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं.
अलग-अलग इकाइयों के प्रमुख विशेष पुलिस आयुक्त भी घटनाक्रम पर कड़ी नज़र रख रहे हैं.
संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने शुक्रवार को कहा कि 10 अक्तूबर को होने वाले प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को दिया गया था. यानी प्रस्तावित प्रदर्शन से महज़ तीन दिन पहले, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कम से कम 10 दिन पहले सूचना देना ज़रूरी है.
'मोदी हार मान चुके हैं'
अभिजीत दीपके ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, "मुझे हैरानी होती है कि प्रधानमंत्री इस देश के युवाओं और जनता से इतने डरे हुए क्यों हैं. सभी रेलवे सेवाएं और मेट्रो स्टेशन बंद करने की क्या ज़रूरत थी? उन्होंने इंटरनेट बंद कर दिया और सड़कें रोक दी हैं."
दीपके से पूछा गया कि दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर क्या उनकी गिरफ़्तारी हो सकती है?
इस पर उन्होंने जवाब दिया, "अगर वे मुझे हिरासत में लेना या गिरफ़्तार करना चाहते हैं, करें. मैं इसके लिए तैयार हूं. इससे मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. यूएपीए लगा दें, एनएसए लगा दें. लेकिन हम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों तथा इस देश की लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ते रहेंगे."
शुक्रवार को उन्होंने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, ''यदि गिरफ़्तारी मेरी गिरफ़्तारी हो जाती है तो भी निष्पक्ष चुनाव के लिए लड़ाई जारी रहेगी.''
कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए मुंबई से दिल्ली रवाना हो चुके हैं.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, '' मोदी ने हमारे प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही हार मान ली है. प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर कार्रवाई और दिल्ली को बंद कर देना मज़बूती के नहीं, बल्कि इस बात के संकेत हैं कि एक नेता अपने ही लोगों से डरा हुआ है.''
सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया
अंग्रेज़ी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक़, कॉकरोच जनता पार्टी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की ओर से बुलाए गए विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में रातभर में कम से कम 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया. अब ये संख्या और भी बढ़ गई है.
दिल्ली पुलिस के एक सूत्र ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि शनिवार रात 12:30 बजे तक हिरासत में लिए गए लोगों में से क़रीब 250 दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी ज़िले से थे.
इनमें ख़ास तौर पर शाहीन बाग के आसपास के इलाक़ों के लोग शामिल थे. साल 2020 में सीएए विरोधी प्रदर्शनों का केंद्र शाहीन बाग ही था.
दिल्ली पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि 100 से अधिक लोगों को शाहदरा और पूर्वी दिल्ली ज़िले से हिरासत में लिया गया है. ये दोनों ज़िले उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, ये हिरासत एहतियातन की गई हैं. ऐसे लोगों की पहचान करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया है, जिनका पहले प्रदर्शनकारियों को जुटाने और 'ग़ैरक़ानूनी' स्थिति पैदा करने का इतिहास रहा है.
प्रदर्शन से पहले हर ज़िले में निर्धारित किए गए 13 प्रमुख हिरासत केंद्रों में इन लोगों को ले जाया जाएगा.
दिल्ली पुलिस ने पूरे शहर में बड़े पैमाने पर जवानों की तैनाती की है. कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं के शनिवार सुबह करीब 10:15 बजे राजधानी पहुंचने की संभावना है.
नई दिल्ली के नज़दीकी इलाक़ों, जैसे अशोक रोड और टॉल्स्टॉय रोड, से भी प्रवेश करना मुश्किल होगा. ये इलाक़े पैदल दूरी पर हैं, लेकिन इस मार्ग पर 10 बैरिकेड लगाए गए हैं और दर्जनों अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात हैं
शुक्रवार की रात से ही चाक-चौबंद तैयारी
जंतर-मंतर के आसपास पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को देखने पहुंचीं बीबीसी संवाददाता शुभ राणा के मुताबिक़ कि शुक्रवार रात करीब दस बजे प्रदर्शनकारी चार-पांच लोगों के छोटे-छोटे समूहों में जुटने लगे थे. रात बढ़ने के साथ इन समूहों में लोगों की संख्या बढ़ने लगे थे.
इंटरनेट कनेक्टिविटी में दिक़्क़तों की ख़बरों के बीच कुछ प्रदर्शनकारी तस्वीरें खींच रहे थे.
उन्होंने बताया, ''यहां अलग-अलग राज्यों से लोग आए थे. हमारी मुलाक़ात जेन ज़ी के एक ऐसे समूह से हुई, जिसने सीजेपी के प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था. एसएफ़आई के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने अपने ठहरने की जगह बदल दी है. उनका कहना था कि पुलिस प्रदर्शनकारियों की पहचान कर रही है और उन्हें घरों में नज़रबंद कर रही है.''
उन्होंने बताया, ''पुलिस लगातार बैरिकेड बढ़ाती रही और सड़कों के कई किलोमीटर लंबे हिस्से में पाबंदियां लगा दीं. पुलिस सतर्क नज़र आई और उसने हमारी फ़िल्मिंग और हिरासत में लिए गए लोगों से बात करने की कोशिशों पर रोक लगाई.''
''हमने हिरासत में लिए गए दर्जनों लोगों को ले जा रही दो बसें देखीं, लेकिन अधिकारियों ने उनकी संख्या की पुष्टि नहीं की.रात भर जामिया, जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसरों में सुरक्षा बढ़ाए जाने की ख़बरें आईं.''
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- हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या क्या है?
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