Backजंतर-मंतर नहीं अब ये हैं दिल्ली में प्रोटेस्ट करने की नई जगहें, स्थानीय लोग क्या बोले?
जंतर-मंतर नहीं अब ये हैं दिल्ली में प्रोटेस्ट करने की नई जगहें, स्थानीय लोग क्या बोले?
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जंतर-मंतर नहीं अब ये हैं दिल्ली में प्रोटेस्ट करने की नई जगहें, स्थानीय लोग क्या बोले?

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दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रतिबंध लगाते हुए बुराड़ी मैदान, रामलीला मैदान और सीबीडी मैदान को नए प्रदर्शन स्थल के रूप में घोषित किया है। स्थानीय निवासियों ने ट्रैफ़िक जाम, आवाजाही में कठिनाई और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर की चिंता जताई है, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि संसद से दूर होने पर प्रदर्शनों का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है।

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Why It Matters

जंतर-मantar लगभग 33 साल तक देश के कई बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है। संसद भवन से लगभग दो किलोमीटर की दूरी इसे किसी भी आंदोलन के लिहाज़ से अहम बना देती है। दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के लिए तीन नई जगहें तय की हैं: रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान।

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दर्जनों भैंसें, जगह-जगह पड़ी खंडित मूर्तियां और दूर-दूर तक फैला खाली मैदान. दिल्ली के बुराड़ी मैदान में पहुंचने पर सबसे पहले यही नज़ारा दिखता है.

दिल्ली के जिस जंतर-मंतर पर कभी किसानों, स्टूडेंट्स, युवाओं, पहलवानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आंदोलन किया, वहां अब प्रदर्शन की इजाज़त नहीं होगी.

दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के लिए तीन नई जगहें तय की हैं. रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान.

यह फ़ैसला ऐसे वक़्त आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग कर रहे हैं.

सीजेपी ने इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर भी जंतर-मंतर पर आंदोलन किया था.

जुलाई में प्रधान के इस्तीफ़े के बाद पार्टी ने अपना आंदोलन वापस ले लिया था.

जंतर-मंतर क़रीब 33 साल तक देश के कई बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है. संसद भवन से क़रीब दो किलोमीटर की दूरी इसे किसी भी आंदोलन के लिहाज़ से अहम बना देती है.

लेकिन अब सवाल है कि नई जगहें प्रदर्शनकारियों के लिए कितनी सुविधाजनक हैं. क्या वहां तक पहुंचना आसान होगा? और इन मैदानों के आसपास रहने वाले लोगों की ज़िंदगी पर इसका क्या असर पड़ेगा?

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इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए हम तीनों मैदानों तक पहुंचे.

बुराड़ी मैदान: जगह बड़ी, लेकिन ट्रैफ़िक की चिंता

दिल्ली के उत्तरी छोर पर स्थित बुराड़ी मैदान को निरंकारी मैदान भी कहा जाता है. यह संसद भवन से क़रीब 20 किलोमीटर दूर है.

मैदान के कुछ हिस्सों में लंबी-लंबी घास उगी थी और पानी जमा था. कुछ हिस्से साफ़ भी थे.

बुराड़ी मेट्रो स्टेशन यहां से क़रीब डेढ़ किलोमीटर दूर है, जबकि मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन की दूरी लगभग ढाई से तीन किलोमीटर है.

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकारियों ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया कि मैदान को प्रदर्शन स्थल में बदलने का आदेश मिलने के बाद फ़िलहाल इसकी बुकिंग स्वीकार नहीं की जा रही है. प्राधिकरण इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का इंतज़ार कर रहा है.

अधिकारियों के मुताबिक़, मैदान का क्षेत्रफल क़रीब 2.10 लाख वर्ग मीटर है. यहां संत निरंकारी समुदाय के बड़े कार्यक्रम होते रहे हैं. एसओपी जारी होने के बाद प्रदर्शन के लिए मैदान के इस्तेमाल की शर्तें स्पष्ट होंगी.

लेकिन स्थानीय लोगों की चिंता मैदान से ज़्यादा यहां तक पहुंचने वाले रास्तों को लेकर है.

बुराड़ी नाथूपुरा के आरडब्ल्यूए प्रधान राजेश कुमार श्रीवास्तव कहते हैं, "बुराड़ी को नया जंतर-मंतर बनाने से यहां के स्थानीय लोगों को काफ़ी तकलीफ़ होगी. यहां पहले ही इतना ट्रैफ़िक है. संत निरंकारी बाबा के तीन दिन के कार्यक्रम के दौरान ही इतना जाम लगता था. अब अगर आए दिन प्रदर्शन चलते रहे तो हमारा यहां रहना मुश्किल हो जाएगा."

स्थानीय निवासी संजय राय बताते हैं कि बुराड़ी की आबादी क़रीब 10 से 12 लाख है और यहां की सड़कों पर पहले से दबाव है.

राय कहते हैं, "हम सामान्य दिनों में ही ट्रैफ़िक में फंस जाते हैं. अब यहां रोज़ धरना होगा तो हम काम पर कैसे जाएंगे? संसद का सत्र रोज़ नहीं होता, लेकिन हम लोग रोज़ काम पर जाते हैं."

संजय कहते हैं कि उन्हें प्रदर्शन से परेशानी नहीं है, लेकिन सरकार को स्थानीय लोगों की आवाजाही के लिए रास्ता सुनिश्चित करना चाहिए.

कुछ दुकानदारों को यह भी आशंका है कि अगर प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंध लागू हुए, तो उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है.

रामलीला मैदान: संसद के क़रीब, लेकिन बुकिंग महंगी

रामलीला मैदान संसद भवन से क़रीब चार किलोमीटर और जंतर-मंतर से लगभग तीन किलोमीटर दूर है. तीनों प्रस्तावित स्थलों में यह संसद के सबसे क़रीब है.

इस मैदान का राजनीतिक इतिहास लंबा है. 1975 में जयप्रकाश नारायण की रैली और 2011 में अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में हुआ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन यहां के अहम आंदोलनों में से एक हैं.

इस मैदान की देखरेख दिल्ली नगर निगम करता है. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन यहां से लगभग एक किलोमीटर के दायरे में हैं. तुर्कमान गेट भी नज़दीकी बस स्टॉप में शामिल है.

जब हम इस मैदान में पहुंचे तो यहां रामलीला की तैयारियां चल रही थीं. टेंट लगाए जा रहे थे और खाने-पीने की दुकानों के स्टॉल तैयार हो रहे थे. मैदान के एक हिस्से में झूले भी लगे थे.

हालांकि, प्रदर्शन स्थल के तौर पर इसके इस्तेमाल में दो बड़ी चुनौतियां हैं. बुकिंग का ख़र्च और तारीख़ों की उपलब्धता.

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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्टों के मुताबिक़, 2026 में मैदान की सिर्फ़ तीन तारीख़ें उपलब्ध थीं. ये तारीख़ें 29, 30 और 31 दिसंबर थीं.

एक दिन की बुकिंग का शुरुआती ख़र्च टैक्स और सिक्योरिटी डिपॉज़िट मिलाकर क़रीब 1.21 लाख रुपये है. इसमें 55 हज़ार रुपये का रिफ़ंडेबल सिक्योरिटी डिपॉज़िट भी शामिल है.

यहां मैदान के पास हमें स्टूडेंट चंचल मिलीं. उन्हें लगता है कि प्रदर्शनकारियों को संसद से दूर भेजने से उनकी आवाज़ का असर कम हो सकता है.

चंचल कहती हैं, "जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से मीडिया, नेताओं और आम जनता का ध्यान जल्दी जाता था. इन जगहों तक पहुंचना भी मुश्किल है. बुराड़ी तो दिल्ली के बाहरी हिस्से में है."

चंचल यह भी कहती हैं कि एक महिला के तौर पर उन्हें दूर स्थित प्रदर्शन स्थल पर जाने से पहले अपनी सुरक्षा और परिवार की अनुमति के बारे में सोचना पड़ेगा.

वहीं, रामलीला मैदान के पास एक दफ़्तर में काम करने वाले अंकुर आनंद को कामकाज बाधित होने की चिंता है. उनका कहना है कि अगर प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बाधित होती हैं या आवाजाही पर प्रतिबंध लगता है, तो आसपास के दफ़्तरों के काम पर असर पड़ सकता है.

मैदान के आसपास थोक बाज़ार और कारोबारी इलाक़े हैं. स्थानीय लोगों को आशंका है कि बार-बार होने वाले बड़े प्रदर्शनों से कारोबार, ख़रीदारी और यातायात प्रभावित हो सकते हैं.

सीबीडी मैदान: पूर्वी दिल्ली में विरोध की नई जगह

पूर्वी दिल्ली के शाहदरा में स्थित सीबीडी मैदान संसद भवन से क़रीब 13 किलोमीटर दूर है. लगभग 12 एकड़ में फैले इस मैदान की देखरेख डीडीए करता है.

मैदान के पास विकास मार्ग है, जो पूर्वी दिल्ली को आईटीओ के रास्ते मध्य दिल्ली से जोड़ता है. इसके आसपास दुकानें और रिहायशी इलाक़े हैं.

जब हम मैदान पहुंचे, वहां रामलीला के आयोजन चल रहे थे. मैदान पहले से ही बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होता रहा है.

लेकिन आसपास रहने वाले कुछ लोगों को चिंता है कि अगर यहां नियमित रूप से प्रदर्शन होने लगे, तो उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी बदल सकती है.

41 वर्षीय संजय बचपन से इस इलाक़े में रह रहे हैं. उनके लिए मैदान सिर्फ़ एक खुली जगह नहीं, बल्कि दोस्तों के साथ वक़्त बिताने और क्रिकेट खेलने का ठिकाना है. सुबह लोग यहां टहलने भी आते हैं.

वह कहते हैं, "सोसाइटी से निकलकर यह एक ऐसी जगह है, जहां हम लोग कुछ देर साथ रहकर समय गुज़ारते हैं. अगर यह भी प्रदर्शन स्थल बन गया तो हम सबका एक साथ मिलना बंद हो जाएगा."

संजय को यह चिंता भी है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बड़ी तैनाती या झड़पों की स्थिति बनी, तो आसपास रहने वाले बच्चों पर उसका असर पड़ सकता है.

दिल्ली विश्वविद्यालय की स्टूडेंट अदिति, जो मैदान के पास रहती हैं, इस फ़ैसले को अलग नज़र से देखती हैं.

उनका कहना है कि सेंट्रल दिल्ली में बड़े प्रदर्शनों और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण यातायात और मेट्रो सेवाएं प्रभावित होती हैं. इससे दूर-दराज़ के इलाक़ों से कॉलेज आने वाले स्टूडेंट्स को परेशानी होती है.

अदिति के मुताबिक़, बड़े मैदानों में प्रदर्शन आयोजित करने से सेंट्रल दिल्ली पर दबाव कम हो सकता है.

हालांकि, ईशा की राय इससे अलग है. उनका मानना है कि संसद के क़रीब होने पर प्रदर्शनों का राजनीतिक असर ज़्यादा होता है.

वह कहती हैं, "प्रदर्शन का मक़सद संसद तक अपनी आवाज़ पहुंचाना है. अगर प्रदर्शन दूर हो जाएंगे तो लोगों का ध्यान भी कम हो सकता है.

जगह बदली, तो क्या आवाज़ का असर भी बदलेगा?

तीनों मैदानों तक पहुंचने के बाद एक बात साफ़ दिखती है. इन जगहों पर बड़े आयोजनों के लिए पर्याप्त जगह हो सकती है, लेकिन इनके आसपास रहने वाले लोगों की ज़रूरतें और चिंताएं अलग-अलग हैं.

बुराड़ी में लोगों को ट्रैफ़िक जाम और सीमित रास्तों की चिंता है. रामलीला मैदान के आसपास कारोबार और दफ़्तरों पर असर पड़ने की आशंका है. वहीं, सीबीडी मैदान के पास रहने वाले कुछ लोग अपनी खुली जगह और रोज़मर्रा की आवाजाही को लेकर चिंतित हैं.

और क्या इन मैदानों के आसपास रहने वाले लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और विरोध करने के अधिकार के बीच कोई संतुलन बन पाता है.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • बुराड़ी मैदान में प्रदर्शनों के दौरान ट्रैफ़िक जाम बढ़ेगा और स्थानीय निवासी आवाजाही में कठिनाई महसूस करेंगे।

    Likely · Within weeks

  • रामलीला मैदान की बुकिंग लागत और तारीख़ों की सीमित उपलब्धता के कारण बड़े प्रदर्शनों के आयोजन में बाधा आएगी।

    Likely · Within months

  • सीबीडी मैदान के पास रहने वाले निवासी नियमित प्रदर्शनों के कारण अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियों जैसे टहलना और क्रिकेट खेलना बंद कर देंगे।

    Possible · Within months

Open Questions

  • क्या नए प्रदर्शन स्थलों पर बुकिंग प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी?
  • क्या स्थानीय लोगों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्ते प्रदान किए जाएंगे?
  • क्या प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन को बाधित करेगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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