
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों और पत्रकारों ने पुलिस पर मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पत्रकारों ने हिरासत के दौरान पुलिस पर मारपीट, दुर्व्यवहार और डराने के आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों ने चोटों के निशान भी दिखाए हैं, जबकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है।
AI-generated summary
प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर जवाबदेही की माँग को लेकर हो रहे हैं। दिल्ली में धारा 163 लागू की गई है।
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्र-छात्राओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर मारपीट, दुर्व्यवहार और डराने की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने शरीर पर चोटों के निशान भी दिखाए हैं। इन सबके बावजूद वे प्रदर्शन में लगातार शामिल हो रहे हैं। बीबीसी हिन्दी ने कुछ ऐसे ही स्टूडेंट और कार्यकर्ताओं से बात की है। बीबीसी ने इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस का पक्ष जानने की भी कोशिश की है। हमें अब तक उनका कोई जवाब नहीं मिला है।
शरण्या दिल्ली के आंबेडकर विश्वविद्यालय में मास्टर्स की छात्रा और स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफ़आई) की सदस्य हैं। 11 अक्तूबर को प्रदर्शन में शामिल हुईं शरण्या को अब भी हिरासत के दौरान हुए अनुभव याद हैं। शरण्या के मुताबिक़, पुलिसकर्मियों ने उन्हें धक्का देकर बस में चढ़ाया। इस दौरान उनका पैर बस के दरवाज़े में फँस गया। शरण्या ने आरोप लगाया कि महिला पुलिसकर्मियों ने उनके कपड़े ऊपर खींचे और पुरुष कमांडो ने उन्हें बस में धकेलने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि बस में न रोशनी थी और न पर्याप्त हवा। उनके मुताबिक़, पुलिसकर्मियों ने उनके बाल भी खींचे।
शरण्या को प्रदर्शन के दिन सुबह क़रीब 11 बजे हिरासत में लिया गया था। उन्होंने बताया कि उन्हें नांगलोई के एक हिरासत केंद्र में रखा गया और देर रात घर जाने दिया गया। उनके आरोप के मुताबिक़, वहाँ खाने-पीने और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ नहीं थीं।
एसएफ़आई की दिल्ली अध्यक्ष और डेवलपमेंट स्टडीज़ की छात्रा नादिया को 10 अक्तूबर को हिरासत में लिया गया था। वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही थीं। जब हम नादिया से मिले, तो उनके शरीर पर चोटों के निशान थे। इसके बावजूद वह 12 अक्तूबर को इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन में शामिल हुईं। नादिया ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने उनके बाल खींचे और उन्हें चुटकी काटकर चोट पहुँचाई। उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मी उनका फ़ोन छीनने की कोशिश कर रहे थे और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई। नादिया का आरोप है कि इस दौरान उनका गला दबाने की कोशिश भी हुई। इस अनुभव से वह गहरे मानसिक तनाव में रहीं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि वह प्रदर्शन जारी रखेंगी।
दिल्ली में पीएचडी कर रहे नोएल 10 अक्तूबर को हुए प्रदर्शन में भगत सिंह के पोस्टर के साथ शामिल हुए थे। नोएल ने बताया कि उन्हें एक नारंगी रंग की डीटीसी बस में बैठाया गया। उनके मुताबिक़, वह क़रीब तीन घंटे तक बस में रहे और इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें बार-बार थप्पड़ मारे। उन्होंने कहा कि बस में वह अकेले थे और उन्हें अपनी सुरक्षा का डर था।
कार्यकर्ता अर्जुन 11 अक्तूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके सीने और गुप्तांगों पर लात मारी और बार-बार मुक्के मारे। अर्जुन का दावा है कि बस में कुछ नाबालिग भी थे। उन्हें चोटें आईं और कुछ का फ़्रैक्चर भी हुआ।
10 और 11 अक्तूबर को प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) के मुताबिक़, इन दो दिनों में दिल्ली, अहमदाबाद और पुणे में कम से कम 37 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया।
ये प्रदर्शन 2 अक्तूबर को शुरू हुए थे। दिल्ली पुलिस ने 10 अक्तूबर के लिए नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। नई दिल्ली इलाक़े में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 भी लागू की गई है।
11 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को ग़ैरक़ानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन अब भी जारी हैं।
AI outlook — possibilities, not facts
प्रदर्शनकारियों द्वारा कानूनी कार्रवाई या जवाबदेही की मांग जारी रहेगी।
Likely · Within weeks

While banning Jantar Mantar, Delhi Police has declared Burari Maidan, Ramlila Maidan and CBD Maidan as new protest sites. Local residents have raised concerns about traffic jams, mobility issues and the impact on everyday life, while some believe the protests may have less political impact by being away from Parliament.

YouTuber Dhruv Rathi talks about his recent detention, his demand for reforms in the Election Commission and his Indian citizenship in an interview with BBC. He said that his support is not for any party but for the issues.

YouTuber Dhruv Rathi, in an interview with BBC, talked about being stopped by police on the day of CJP protest at Jantar Mantar, demand for resignation of Chief Election Commissioner and other issues.
A group of Indian citizens affiliated with Harvard University raised concerns over a campaign against India's constitutional institutions and the alleged unauthorized use of Harvard's name in political discourse.
Cockroach Janta Party founder Abhijeet Dipke dared PM Narendra Modi to officially declare an Emergency after two colleagues were sent to judicial custody for unfurling the Tricolour near Jantar Mantar.

Delhi Police has removed Jantar Mantar from the list of protest sites and declared Ramlila Maidan, Burari and CBD Ground as new protest sites. Ramlila Maidan has a capacity of 50,000 people and its one day booking is available for Rs 1.21 lakh. This ground has witnessed many historical events from the freedom struggle to Anna Hazare's movement.