राहुल गांधी विपक्षी नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, 'वोट चोरी' को लेकर दाख़िल की याचिका
राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला, पुलिस ने मंडी हाउस के पास रोका।
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में मार्च निकाला। मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों के बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मंडी हाउस के पास रोक लिया।
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विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाने और अनियमितताओं का आरोप लगा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह मृत और दोहरे नाम हटाने की नियमित प्रक्रिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जा रहे विपक्ष के नेताओं को पुलिस ने बीच में मंडी हाउस के पास रोक लिया.
बीबीसी संवादताता विष्णुकांत तिवारी के अनुसार, कुछ देर तक सड़क पर बैठने के बाद प्रदर्शनकारी शाम छह बजे के क़रीब वापस लौटने लगे हैं.
इस मार्च में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और आइसा की छात्र नेता नेहा बोरा समेत विपक्ष के कई नेता शामिल हैं.
इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की गई है.
लाइव लॉ और बार एंड बेंच के अनुसार, इसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं.
याचिका दाखिल करने वालों में राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव समेत 11 लोग शामिल हैं.
इससे पहले बीबीसी संवाददाता दिगावल्ली पवन ने बताया, जहां मार्च को रोका गया है, वहां पुलिस ने सड़क पर भारी बैरिकेडिंग की है. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं.
मंडी हाउस के पास राहुल गांधी के काफ़िले को रोके जाने के बाद तनाव बढ़ गया और पुलिस प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने की कोशिश करने लगी.
इसी बीच भगवान दास रोड पर पुलिस प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू कर दिया. इस इलाक़े में पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 163 के लागू होने की घोषणा की है.
बीबीसी संवाददाता शुभांगी मिश्रा के अनुसार, जब रोका गया तो प्रदर्शनकारियों की भीड़ सड़क पर ही बैठ गई.
इससे पहले ग्राउंड पर मौजूद बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के नेता एक बस में सवार होकर बाराखंबा मेट्रो स्टेशन के बाहर पहुंचे और फिर मार्च में शामिल हुए.
मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, लेफ्ट दलों के कार्यकर्ताओं और सैकड़ों की संख्या में स्टूडेंट्स मौजूद थे.
दिलनवाज़ पाशा के मुताबिक, जब मार्च शुरू हुआ तो बाराखंबा मेट्रो स्टेशन से मंडी हाउस की ओर जाने वाले रास्ते पर दूर-दूर तक सिर्फ़ लोग ही लोग नज़र आ रहे थे.
बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट के बीच क़रीब 2 किलोमीटर की दूरी है. प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ याचिका दाखिल करने जा रहे हैं. वे ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
मार्च से पहले राहुल गांधी ने मीडिया से कहा कि यह अलग-अलग विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ एक ही प्रदर्शन है.
ग़ौरतलब है कि इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया है.
इस मार्च में वकीलों को भी शामिल होने जाते हुए देखा गया है.
रायटर्स ने प्रोटेस्ट मार्च का वीडिया जारी किया है जिसमें भारी संख्या में लोग मंडी हाउस और सुप्रीम कोर्ट के बीच जमा हुए दिख रहे हैं.
भीड़ में कई लोग कांग्रेस का झंडा लिए हुए हैं और ढोल नगाड़े भी सुनाई दे रहे हैं.
पैदल मार्च करते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी एक खुली गाड़ी पर दिखे, जिस पर विपक्ष के कई नेता मौजूद थे.
मौके पर मौजूद बीबीसी संवाददात जुगल पुरोहित के अनुसार, कई दिनों से प्रदर्शनकारी कहीं इकट्ठा होने की कोशिश कर रहे थे लेकिन सोमवार को कनॉट प्लेस के क़रीब बारखंभा के पास भारी संख्या में लोग पहुंचे.
उनके मुताबिक़, मार्च शुरू होने से पहले भारी संख्या में विपक्षी दलों के कार्यकर्ता, प्रदर्शनकारी, छात्र और वकीलों समेत तमाम संगठनों के लोग मौजूद थे.
यहां से एक बस में राहुल गांधी समेत तमाम विपक्ष के बड़े नेता बैठकर सुप्रीम कोर्ट की ओर जाना शुरू किया. उनकी कोशिश है कि सुप्रीम कोर्ट में एक मेमोरेंडम सौंपा जाए. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और चुनाव प्रक्रिया में सुधार के बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं.
इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च में सोमवार को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी शमिल हुए.
उन्होंने कहा, "आंदोलन और धरना-प्रदर्शन जारी रहेंगे. लोकतंत्र को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है. भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है. वे हमेशा सत्ता में बने रहना चाहते हैं."
धरना स्थल बदलने के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा, "अगर सरकार लोकतंत्र को मज़बूत करना चाहती है तो उसे विरोध प्रदर्शनों के लिए और जगहें उपलब्ध करानी चाहिए. प्रदर्शन स्थल बदल देने से सरकार की कथित गलतियां छिप नहीं सकतीं."
वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक्स पर लिखा, "हम सिर्फ़ एक शांतिपूर्ण मार्च निकालना चाहते हैं, लेकिन इस पर पाबंदियां लगा दी गई हैं. हाल ही में मेट्रो, ट्रेन और इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं, जिससे आम लोग प्रभावित हुए."
"यह पहले से ही लगाया गया एक व्यापक प्रतिबंध था. अगर कोई तोड़फोड़ हुई होती तो हम समझ सकते थे, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया है. दरअसल, आप डरे हुए हैं. संविधान हमें विरोध करने का अधिकार देता है."
इस विवाद की जड़ देशभर में वोटर लिस्ट को अपडेट करने की एक व्यापक प्रक्रिया है. चुनाव आयोग का कहना है कि यह मृत, दोहरे नाम वाले और अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाने के लिए की जाने वाली एक नियमित प्रक्रिया है.
अब तक मतदाता सूचियों से कम-से-कम 13 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं.
कई राज्यों में यह प्रक्रिया विवादों से घिरी रही है. हज़ार लोगों ने आरोप लगाया है कि उनके नाम ग़लती से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.
सीजेपी और विपक्षी दलों का आरोप है कि वोटर लिस्ट को अपडेट करने के तरीके में ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में काम कर रहे हैं.
हालांकि, चुनाव आयोग और बीजेपी ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में ख़बर छपी कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर '10 महीने में 14 बार आपत्ति' दर्ज कराई.
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, "ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने, ख़ुद को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर दर्ज कराईं और 'अनधिकृत, गैरकानूनी' कदमों पर सवाल उठाए."
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