पाकिस्तान क्रिकेट: टीम का खराब प्रदर्शन और बोर्ड के फैसलों पर उठते सवाल
इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान टीम की नाकामी और पीसीबी के विवादास्पद फैसलों के बीच कप्तान बाबर आजम की भूमिका पर बहस तेज
Quick Look
इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। पीसीबी द्वारा कोचों की बर्खास्तगी और खिलाड़ियों को वापस बुलाने के फैसलों पर कप्तान बाबर आजम की अनभिज्ञता ने बोर्ड की कार्यप्रणाली और नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Why It Matters
पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी के कार्यकाल में टीम ने 17 में से केवल 5 टेस्ट जीते हैं। टीम आईसीसी चैंपियनशिप में 9वें स्थान पर है।
ऐसा महसूस हो रहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट अभी तक उस तूफ़ान के असर से नहीं निकल पाई है, जिसने पिछले दिनों उसे बुरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सीरीज़ का आख़िरी टेस्ट एजबेस्टन में जारी है, लेकिन पाकिस्तान टीम ने जिस अंदाज़ में इसकी शुरुआत की है, वह यह बताने के लिए काफ़ी है कि हालात अच्छे नहीं हैं.
क्योंकि पहले ही दिन उसकी पहली पारी सिर्फ़ 133 रनों पर सिमट गई और उसमें भी लंच से पहले ही उसके सात विकेट बिखर चुके थे.
पाकिस्तानी टीम के प्रदर्शन पर आगे चलकर बात करते हैं, लेकिन इस समय पाकिस्तान क्रिकेट के सामने जो हालात हैं, उसका जायज़ा लेना बहुत ज़रूरी है.
क्योंकि जिस अंदाज़ से दौरे के बीच ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान टीम के हेड कोच सरफ़राज़ अहमद और बॉलिंग कोच उमर गुल को बर्ख़ास्त कर दिया और सात खिलाड़ियों को वापस भेजकर सात दूसरे खिलाड़ियों को इंग्लैंड रवाना किया, उससे पूरी दुनिया में पाकिस्तान क्रिकेट की वाहवाही नहीं, बल्कि जग हंसाई हुई.
यहां कुछ बातें ऐसी हुई हैं, जिनका ज़िक्र ज़रूरी है. पहली बात तो यह कि ये बेहद अहम फ़ैसले किसके थे?
एजबेस्टन टेस्ट से एक दिन पहले जब बाबर आज़म से सवाल हुआ कि क्या आप इन फ़ैसलों में शामिल थे, तो उन्होंने साफ़ इनकार कर दिया और साफ़ कह दिया कि उन्हें भी इन फ़ैसलों का बाद में पता चला. वो ख़ुद भी इस पर हैरान थे.
बाबर आज़म ने यह कहकर भी अपना दामन बचाने की कोशिश की कि इस फ़ैसले के बारे में आप पीसीबी से बात करें, वह आपको ज़्यादा बेहतर सटीक बता सकेगा, बल्कि यहां तक भी कह दिया कि बोर्ड ने जो भी फ़ैसला किया है, वह सोच-समझकर किया होगा.
यहां यह सवाल पैदा होता है कि इतने बड़े फ़ैसले हो गए और कप्तान तक इस सिलसिले में बेख़बर रहा. इससे तो यही ज़ाहिर होता है कि कप्तान को ख़ुद उसका बोर्ड अहमियत देने के लिए तैयार नहीं था और उनकी जानकारी में लाए बिना इतने अहम फ़ैसले कर लिए गए.
लेकिन यहां कप्तान बाबर आज़म भी ख़ुद को पूरी तरह ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते, क्योंकि जब उन्हें यह पता चला होगा कि उनकी टीम के सात खिलाड़ियों को बीच में ही वापस भेजा जा रहा है, तो उन्होंने कप्तान की हैसियत से अपनी अथॉरिटी क्यों नहीं दिखाई?
क्या उन्होंने बोर्ड से पूछा कि इन फ़ैसलों की वजह क्या है? या उन्होंने ख़ामोश रहने में ही भलाई समझी. यहां टिप्पणीकार और विश्लेषक बाबर आज़म को एक कमज़ोर कप्तान क़रार दे रहे हैं.
अगर ये फ़ैसले अनुशासन की वजह से थे तो बात समझ में आती है, जैसा कि मीडिया में दो खिलाड़ियों मोहम्मद रिज़वान और इमाम-उल-हक़ के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक जांच की बातें सामने आई हैं. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी एक मीडिया रिलीज़ में इन जांचों की पुष्टि की है.
हालांकि इससे पहले पीसीबी के चेयरमैन मोहसिन नक़वी ने भी हेड कोच की बर्ख़ास्तगी और सात खिलाड़ियों को वापस बुलाने के फ़ैसले को सही क़रार देते हुए कहा था कि इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सरफ़राज़ अहमद को हटाकर पाकिस्तान टीम के व्हाइट बॉल हेड कोच माइक हेसन को टेस्ट टीम की भी ज़िम्मेदारी सौंपी है. जब उनसे सात खिलाड़ियों को वापस वतन भेजे जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने भी यह कहकर अपना दामन बचा लिया कि वह इन फ़ैसलों में शामिल नहीं थे.
सवाल यह पैदा होता है कि कप्तान और हेड कोच यह कह रहे हैं कि इन फ़ैसलों में वे शामिल नहीं थे, तो फिर ये फ़ैसले किसने किए? यहां एक नाम का ज़िक्र ज़रूरी है और वह है आक़िब जावेद, जो इस समय टीम से जुड़े हर छोटे-बड़े फ़ैसले में सबसे अहम समझे जाते हैं.
यह आक़िब जावेद ही हैं, जो टीवी पर बैठकर यह कहते हैं कि हेडिंग्ले टेस्ट में टीम की हार के बाद हेड कोच सरफ़राज़ अहमद को पैग़ाम भिजवाया गया था कि वह लॉर्ड्स टेस्ट में कुछ बदलाव करें, लेकिन वे नहीं हुए.
पाकिस्तान टीम क्यों नाकाम रही? इंग्लैंड के इस दौरे में और इससे पहले भी इस बात का ख़ूब शोर मचाया गया कि पाकिस्तान की बॉलिंग तेज़ रफ़्तार गेंदबाज़ों से ख़ाली है, लेकिन हक़ीक़त इसके बिल्कुल उलट है. असल मसला बॉलिंग नहीं, बैटिंग है, जिसने पाकिस्तान टीम को किसी भी पारी में दो सौ रन तक नहीं पहुंचने दिया है.
हेडिंग्ले और लॉर्ड्स की चार पारियों और एजबेस्टन की पहली पारी पर नज़र डालें तो सिर्फ़ एक बार पाकिस्तान टीम 50 ओवर खेल पाई है. बाबर आज़म यह बात तो याद दिला रहे हैं कि वेस्टइंडीज़ में वह प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़ रहे थे, लेकिन यह बात भी भूलने वाली नहीं है कि वह दिसंबर 2022 के बाद से टेस्ट सेंचुरी स्कोर करने में कामयाब नहीं हो सके हैं.
एक तरफ़ टीम की मैदान में बेहद मायूस करने वाली प्रदर्शन और दूसरी तरफ़ मैदान से बाहर के विवाद भी पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के जेसन गिलेस्पी का भी ज़िक्र हो जाए, जो पाकिस्तान क्रिकेट टीम के रेड बॉल हेड कोच थे, लेकिन सिर्फ़ आठ महीने इस पद पर रहने के बाद इस्तीफ़ा देकर चले गए और अब वह लगातार पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को निशाना बना रहे हैं.
4 फ़रवरी 2024 में जब मोहसिन नक़वी पीसीबी के चेयरमैन बने तबसे लेकर अब तक पाकिस्तान क्रिकेट टीम 17 में से सिर्फ़ 5 टेस्ट मैच जीते हैं और 12 हारे हैं. इसके अलावा आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप के दोनों चक्रों में वह 9वें नंबर पर है.
Open Questions
- टीम चयन और बर्खास्तगी के वास्तविक निर्णयकर्ता कौन हैं?
- बाबर आजम की कप्तानी का भविष्य क्या होगा?


