आईआईटी दिल्ली: छात्र की आत्महत्या के बाद प्रदर्शन जारी, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
एमएससी फ़िज़िक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद आईआईटी दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी, प्रशासन ने जांच समिति गठित की
Quick Look
आईआईटी दिल्ली में एमएससी छात्र ऋषिकेश कुमार की कथित आत्महत्या के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी है। छात्र प्रशासनिक लापरवाही और मानसिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने जांच के लिए एक बाहरी समिति का गठन किया है।
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Why It Matters
ऋषिकेश कुमार ने जुलाई 2025 में आईआईटी दिल्ली में एमएससी फ़िज़िक्स में दाख़िला लिया था। मार्च 2026 से उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं।
भारत के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में से एक आईआईटी दिल्ली में एमएससी फ़िज़िक्स के एक छात्र की कथित आत्महत्या के बाद शुरू हुए प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी हैं.
मंगलवार देर रात तक सैकड़ों विद्यार्थी प्रदर्शन और नारेबाज़ी करते रहे. विद्यार्थियों ने आईआईटी कैंपस में कैंडल मार्च भी निकाला. बुधवार को भी विद्यार्थियों का प्रोटेस्ट जारी रहा.
आईआईटी प्रशासन ने बाहरी लोगों के कैंपस में दाख़िल होने पर रोक लगा दी है और मीडिया को भी कैंपस में दाख़िल नहीं होने दिया जा रहा है.
इसी बीच, कैंपस के कई हिस्सों में सुरक्षा सख़्त की गई है और सेमिनार हॉल में फ़ुल फ़ैकल्टी मीटिंग भी बुलाई गई.
विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद आईआईटी प्रशासन ने 31 साल के एमएससी फ़िज़िक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की कथित आत्महत्या के मामले की जांच के लिए एक पांच सदस्य बाहरी जांच समिति गठित की है और दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है.
आईआईटी प्रशासन के अभी तक के जवाबों से प्रदर्शनकारी स्टूडेंट संतुष्ट नहीं हैं.
आईआईटी दिल्ली प्रशासन के जवाब से असंतुष्ट विद्यार्थियों ने 24 अगस्त की देर रात हुई बैठक में प्रशासन के रुख़ को "अपर्याप्त और टालमटोल वाला" बताया है.
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने एक बयान जारी कर ऋषिकेश की मौत को केवल उनकी मेडिकल हिस्ट्री तक सीमित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि उनके परिवार, दोस्तों और सहपाठियों ने प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता के जो आरोप लगाए हैं उनकी भी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए.
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने बाहरी जांच समिति के गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसकी अध्यक्षता किसी रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश से कराने और विद्यार्थी प्रतिनिधियों के नाम प्रदर्शनकारियों द्वारा सामूहिक रूप से तय किए जाने की मांग की है.
इसके अलावा विद्यार्थियों ने ऋषिकेश के परिवार के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवज़े की मांग को दोहराया है.
प्रदर्शनकारी छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मौजूदा प्रोटोकॉल को सार्वजनिक करने, एसोसिएट डीन स्टूडेंट वेलफ़ेयर प्रोफ़ेसर श्रीदेवी के इस्तीफ़े और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के ख़िलाफ़ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई की गारंटी न होने की मांग दोहराई है.
मूल रूप से बिहार के रहने वाले 31 साल के ऋषिकेश कुमार ने जुलाई 2025 में आईआईटी दिल्ली में एमएससी फ़िज़िक्स में दाख़िला लिया था.
आईआईटी दिल्ली के मुताबिक़, मार्च 2026 में उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगी थीं. कुमार ने 22 अगस्त को आईआईटी परिसर में ही कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी.
दिल्ली पुलिस ने अब अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर जांच शुरू की है.
आईआईटी डायरेक्टर के प्रदर्शनकारी स्टूडेंट को लिखे ईमेल के मुताबिक़, "मार्च 2026 में ऋषिकेश को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं और संस्थान के काउंसलर और मनोवैज्ञानिक ने उन्हें लगातार अभिभावकीय निगरानी में रहने की सलाह दी थी."
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का आरोप है कि ऋषिकेश कुमार को संस्थान की तरफ़ से पर्याप्त सहायता नहीं मिली और उन्हें दोबारा से हॉस्टल भी नहीं दिया गया था.
आईआईटी निदेशक प्रोफ़ेर रंगन बानर्जी का कहना है कि समिति ऋषिकेश की मौत तक पहुंचने वाली परिस्थितियों की जांच करेगी और दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी.
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
जांच समिति द्वारा दो सप्ताह में रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
Likely · Within weeks
Open Questions
- क्या संस्थान ने छात्र को पर्याप्त मानसिक सहायता प्रदान की थी?
- जांच समिति का नया अध्यक्ष कौन होगा?

