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अंकिता भंडारी केस फिर चर्चा में क्यों? जानिए 8 बड़े सवाल और उनके जवाब
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अंकिता भंडारी केस फिर चर्चा में क्यों? जानिए 8 बड़े सवाल और उनके जवाब

अंकिता भंडारी के माता-पिता सीबीआई जांच पूरी होने तक बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।

Quick Look

अंकिता भंडारी की न्याय की मांग को लेकर इंडिया गेट पर बैठे माता-पिता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। वे सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति रोकने की मांग कर रहे हैं।

AI-generated summary

Why It Matters

अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी और मुख्य आरोपियों को मई 2025 में दोषी ठहराया गया था।

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अपनी बेटी के लिए इंसाफ़ की मांग लेकर इंडिया गेट पर धरने पर बैठे अंकिता भंडारी के माता-पिता को पुलिस गुरुवार को तड़के हिरासत में ले लिया.

अंकिता भंडारी के माता-पिता का कहना है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए.

इससे पहले बीबीसी न्यूज हिन्दी से बातचीत में अंकित भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने पांच मांगें रखी थीं.

इस घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड का अंकित भंडारी मर्डर केस एक बार चर्चा में हैं. आइए जानते हैं कौन थीं अंकिता भंडारी और उनकी हत्या को लेकर बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम पर क्यों सवाल उठ रहे हैं.

1. कौन थीं अंकिता भंडारी?

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला थाना क्षेत्र और चीला के बीच मौजूद वंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी करती थीं.

18 सितंबर 2022 को अंकिता के लापता होने की ख़बर मिली थी. 24 तारीख़ को सवेरे चीला नहर से अंकिता का शव बरामद किया गया था.

रिज़ॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और असिस्टेंट मैनेजर अंकित गुप्ता को गिरफ़्तार किया गया.

तीनों ने उन्हें नहर में धकेलने की बात कबूल की और मई 2025 में तीनों को दोषी ठहराया गया.

इस मामले के सामने आने के बाद उत्तराखंड में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए. मामला राजनीतिक रूप से भी विवादास्पद हो गया, क्योंकि तीन दोषियों में से एक पुलकित आर्य तत्कालीन बीजेपी नेता विनोद आर्य का बेटा है.

अंकिता की हत्या का मामला सामने आने के बाद विनोद आर्य को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.

2. मामले में सज़ा पाने वाले कौन हैं?

पुलिस के अनुसार 19 वर्षीय अंकिता की हत्या रिज़ॉर्ट संचालक और भाजपा नेता और पूर्व राज्यमंत्री विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य, रिज़ॉर्ट मैनेजर सौरभ भास्कर और एक अन्य कर्मी अंकित ने की थी.

पुलकित के भाई अंकित भी उत्तराखंड में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष थे, जिन्हें यह मामला सामने आने के बाद इस पद से हटा दिया गया था.

पुलिस का कहना था कि अंकिता को 'अनैतिक कार्य' के लिए मजबूर किया जा रहा था और जब अंकिता ने इस बारे में दूसरों को बताने की धमकी दी तो उनकी हत्या कर दी गई.

इस हत्याकांड में मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को मई 2025 में दोषी ठहराया गया और अब वे जेल में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे हैं.

3. वीआईपी एंगल क्या है?

द हिंदू ने अपने सहयोगी प्रकाशन फ्रंटलाइन की एक रिपोर्ट का हवाला दिया है, जिसमें एक ऐसे 'वीआईपी' की मौजूदगी का ज़िक्र किया गया है, जिसे अंकिता कथित तौर पर 'विशेष सेवाएं' देने के लिए मजबूर की जा रही थीं.

रिपोर्ट में तत्कालीन डीआईजी पी. रेणुका देवी के हवाले से बताया गया कि रिज़ॉर्ट में वीआईपी मेहमानों के लिए एक 'प्रेसिडेंशियल सुइट' था.

जनवरी 2026 की द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की साथी अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने आरोप लगाया था कि इस मामले में 'वीआईपी' बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता थे.

फ्रंटलाइन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत से इस बात की पुष्टि होती थी कि पुलकित आर्य अंकिता पर देह व्यापार के लिए दबाव डाल रहा था.

4. दुष्यंत गौतम का नाम क्यों चर्चा में?

अंकिता भंडारी के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी की हत्या के लिए जिम्मेदार असली लोगों को बचाया जा रहा है.

बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम अंकिता भंडारी के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में कथित वीआईपी के तौर पर बार-बार उठाया है.

गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के ख़िलाफ़ मानहानि की कार्यवाही शुरू की. बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रहे गौतम उत्तराखंड में पार्टी के प्रभारी भी रह चुके हैं.

12 अक्तूबर को उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया.

अंकिता भंडारी के माता-पिता मांग कर रहे हैं कि कथित 'वीआईपी गेस्ट' की जांच पूरी होने तक सिक्किम के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति पर रोक लगाई जाए.

कांग्रेस ने दावा किया है कि गौतम को बचाने के मक़सद से उनकी नियुक्ति की गई है.

पार्टी का तर्क है कि राज्यपाल पद पर रहते हुए किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती.

5. दुष्यंत गौतम ने किस साज़िश का आरोप लगाया?

गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के ख़िलाफ़ मानहानि की कार्यवाही शुरू की है. गौतम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हुए एफ़आईआर भी दर्ज कराई है.

देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, दुष्यंत गौतम ने आरोप लगाया है कि हरिद्वार के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर उनके ख़िलाफ़ सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा है.

याचिका में दुष्यंत गौतम ने अदालत से मांग की है कि उनके ख़िलाफ़ आपत्तिजनक कंटेंट के प्रसार पर रोक लगाई जाए और "सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट हटाने के निर्देश दिए जाएँ और भविष्य में इस तरह के आरोपों पर स्थायी रोक लगाई जाए."

दुष्यंत गौतम ने यह भी कहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की पूरी जांच, चार्जशीट और अदालत की कार्यवाही में कहीं भी उनका नाम सामने नहीं आया है.

उन्होंने अपनी एफ़आईआर में कांग्रेस पार्टी पर भी आरोप लगाए हैं.

6. अंकिता के माता-पिता क्या चाहते हैं?

अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से ख़ास बातचीत में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के फ़ैसले पर गहरा दुख और निराशा जताई थी.

उन्होंने बताया था कि इस फैसले की खबर सुनकर उनका पूरा परिवार रातभर सो नहीं सका और बेहद व्यथित रहा.

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के सहयोगी पत्रकार आसिफ़ अली से बातचीत में अंकिता के पिता ने पांच प्रमुख मांगें रखी थीं-

1. अंकिता मामले में सीबीआई की पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त जज की सीधी निगरानी में कराई जाए.

2. यमकेश्वर की विधायक रेनू बिष्ट से पूछताछ की जाए और घटना के दौरान, 22 से 23 सितंबर को, उनके फोन की कॉल डिटेल की जांच की जाए. साथ ही, यह पता लगाया जाए कि वनंतरा रिसॉर्ट को ध्वस्त करने का आदेश किसने दिया था.

3. मामले में उर्मिला सनावर और उनके पति के औपचारिक बयान दर्ज किए जाएं और सुरेश राठौर का नार्को टेस्ट कराया जाए.

4. 18 सितंबर से 24 सितंबर 2022 के बीच अजय कुमार और दुष्यंत कुमार गौतम के फोन की लोकेशन और पूरी कॉल डिटेल की जांच की जाए.

5. अभियुक्त पुलकित आर्य के फोन की 18 और 19 सितंबर की कॉल डिटेल की बारीकी से जांच की जाए, ताकि पता चल सके कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में था.

7. जांच से जुड़े अधिकारी ने क्या कहा था

इस मामले की जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शेखर सुयाल ने कहा था कि इस मामले में 'किसी वीआईपी' की कोई भूमिका नहीं थी.

अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था. सुयाल उस वक़्त पौड़ी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे और एसआईटी के सदस्य भी थे.

उन्होंने मीडिया से कहा था, "18 से 22 सितंबर, 2022 के बीच रिसॉर्ट में ठहरने या बुकिंग कराने वाले हर व्यक्ति की हर पहलू से जांच की गई, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिली कि कोई व्यक्ति वास्तव में 'वीआईपी' था."

8. जांच पर सीएम धामी ने क्या कहा था?

इस मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर उत्तराखंड में कई जगहों पर आंदोलन होते रहे हैं.

हालांकि उत्तराखंड सरकार ने कहा था कि राज्य की बेटी अंकिता को न्याय दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और इस दिशा में सरकार ने पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ काम किया है.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • माता-पिता द्वारा उठाई गई मांगों पर कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया जारी रहेगी

    Likely · Within weeks

Open Questions

  • क्या कथित वीआईपी की जांच के लिए कोई नया आयोग बनेगा?
  • माता-पिता की पांच मांगों पर सरकार क्या कदम उठाएगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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