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रात्को म्लादिच का निधन: बोस्निया का 'क़साई' 84 वर्ष की आयु में मरा
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रात्को म्लादिच का निधन: बोस्निया का 'क़साई' 84 वर्ष की आयु में मरा

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बोस्नियाई सर्ब सेना के पूर्व कमांडर रात्को म्लादिच का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें 'बोस्निया का क़साई' कहा जाता था और वे स्रेब्रेनित्सा जनसंहार सहित युद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए थे। हेग में उनके मुकदमे की सुनवाई के दौरान उन्होंने पीड़ितों के परिवारों को अंगूठा दिखाया था।

AI-generated summary

Why It Matters

रात्को म्लादिच बोस्नियाई सर्ब सेना के कमांडर थे और उन्होंने 1990 के दशक में यूगोस्लाविया के विघटन के दौरान बोस्निया में जातीय सफाए का नेतृत्व किया। उनका नेतृत्व सारायेवो की लंबी घेराबंदी और स्रेब्रेनित्सा में 8,000 पुरुषों और लड़कों के हत्याकांड में देखा गया।

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Author, सैम वुडहाउस

प्रकाशित 4 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 13 मिनट

रात्को म्लादिच का 84 साल की उम्र में निधन हुआ है. बैल जैसी मज़बूत गर्दन वाले रात्को म्लादिच को "बोस्निया का क़साई" कहा जाता था.

1990 के दशक में जब यूगोस्लाविया टूट रहा था तब उन्होंने बोस्नियाई सर्ब सेना के कमांडर के रूप में "जातीय सफ़ाए" के एक क्रूर अभियान का नेतृत्व किया.

रात्को म्लादिच इसे ग्रेटर सर्बिया के 'ऐतिहासिक भाग्य' को पूरा करने के मौक़े के रूप में देखते थे.

इस दौरान हज़ारों पुरुषों , महिलाओं और बच्चों का क़त्ल-ए-आम हुआ.

ग्रेटर सर्बिया एक ऐसा लक्ष्य था जिसे रात्को म्लादिच ने एकनिष्ठ दृढ़ संकल्प और सोची-समझी क्रूरता के साथ हासिल करने की कोशिश की.

यही वजह है कि वे हिटलर के थर्ड राइक के बाद से यूरोप में हुए इस सबसे ख़ूनी अत्याचार के ज़िम्मेदार बन गए.

लेकिन उनकी कट्टरता ने उन्हें अपने लोगों का नायक बना दिया. म्लादिच ने सर्ब लोगों को बताया कि उनके मुस्लिम पड़ोसी "सर्बों को सूली पर चढ़ाने, ज़िंदा जलाने, क्रूस पर चढ़ाने और उनकी आंखें निकालने" की योजना बना रहे हैं.

उन्होंने सारायेवो की लंबी और ख़ूनी घेराबंदी का नेतृत्व किया. इस दौरान बमबारी और स्नाइपरों की गोलीबारी और हमलों में रोज़ाना लोग मारे गए और घायल हुए.

जब उनकी सेना ने संयुक्त राष्ट्र निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र स्रेब्रेनित्सा पर क़ब्ज़ा कर लिया, तो उन्होंने वहां के लोगों की सुरक्षा का आश्वासन दिया. बाद में, 8,000 पुरुषों और युवाओं को अज्ञात क़ब्रों में दफ़ना दिया गया.

उन्होंने और उनके राजनीतिक समकक्ष राडोवन कराडज़िक ने नरसंहारों और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों से बोस्निया को तहस-नहस कर दिया.

लेकिन मज़बूत कद-काठी वाले वॉर लॉर्ड म्लादिच को इसका कोई अफ़सोस नहीं था. उन्होंने हेग में अपने मुक़दमे की सुनवाई के दौरान पीड़ितों के परिजनों को मुस्कुराते हुए अंगूठा दिखाया.

उन्होंने कथित तौर पर कहा था, "सीमाएँ ख़ून से खींची जाती हैं और राज्यों को क़ब्रों से चिह्नित किया जाता है."

यूगोस्लाविया में पले-बढ़े

रात्को म्लादिच का जन्म 12 मार्च 1942 को सारायेवो के पास एक छोटे से पहाड़ी गांव में हुआ था. यह उस समय जर्मन-नियंत्रित स्वतंत्र क्रोएशिया राज्य का हिस्सा था.

हालांकि म्लादिच हमेशा ख़ुद को एक साल छोटा बताते थे.

जन्म के दो साल बाद म्लादिच के पिता टीटो के पक्षधरों के लिए नाज़ी समर्थित क्रोएशियाई राष्ट्रवादियों के ख़िलाफ़ लड़ते हुए मारे गए.

म्लादिच दूसरे विश्व युद्ध के बाद नवगठित यूगोस्लाविया में पले-बढ़े. एक टिनस्मिथ के रूप में थोड़े समय के प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सैन्य करियर को चुना.

उन्होंने 1965 में ऑफिसर स्कूल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की.

अपने आप को एक महत्वाकांक्षी और सक्षम सैनिक साबित होते हुए वे तेज़ी से रैंकों में ऊपर उठे और मैसेडोनिया और कोसोवो में सेना इकाइयों की कमान संभाली.

1980 में टीटो की मौत यूगोस्लाविया के अंत की शुरुआत थी. यूगोस्लाविया हमेशा से ही विरोधी गुटों, प्रतिस्पर्धी राष्ट्रवादियों और सुलगती नफ़रत का एक अस्थिर संघ रहा था.

जून 1991 में क्रोएशिया ने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी. फिर से नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश में म्लादिच को युगोस्लाव सेना के साथ भेजा गया.

म्लादिच ने अपनी बेशर्म बहादुरी के लिए ख्याति अर्जित की. वे हमेशा अग्रिम मोर्चे की खाइयों में मौजूद रहते थे और बारूदी सुरंगों को हटाने के अभियानों का ख़ुद नेतृत्व करते थे.

म्लादिच के सैनिक उन्हें बहुत प्यार करते थे, यहां तक की उनकी भक्ति धार्मिक स्तर तक पहुंच गई थी.

जब युद्ध बोस्निया में पहुंचा तो उनकी सेना ने वर्दी बदल ली और टूटकर अलग हुए स्वघोषित रिपब्लिका सर्पस्का के लिए समर्थन की घोषणा कर दी.

बोस्निया की मुस्लिम आबादी को उन्होंने विदेशी हमलावर की तरह देखा. ये मुसलमान उस्मानिया तुर्कों के क़ब्ज़े का नतीजा थे.

सबसे लंबी घेराबंदी

म्लादिच इसे ऐतिहासिक अन्याय मानते थे और इसे ठीक करना अपना अधिकार मानते थे. उन्होंने घुसपैठियों को बाहर निकालने और फिर अपने सपनों के जातीय रूप से शुद्ध राष्ट्र का निर्माण करने की क़सम खाई

और फिर बोस्निया की राजधानी सारायेवो की घेराबंदी शुरू हुई. इसकी रक्षा सर्ब, क्रोएट और बोस्नियाई (बोस्नियाई मुस्लिम) लोगों की एक अव्यवस्थित बहुजातीय सेना कर रही थी.

म्लादिच के सैनिकों ने आसपास की पहाड़ियों पर मोर्चाबंदी की और यह घेराबंदी 1,425 दिनों तक चली.

आधुनिक युद्धों के क्रूर इतिहास में यह किसी शहर की सबसे लंबी घेराबंदी थी.

22 जुलाई 1993 को लगभग 4,000 गोले सारायेवो की डरी हुई आबादी पर बरसाए गए.

जब तक ये क्रूर घेराबंदी ख़त्म हुई शहर के 13 हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके थे. शहर की हर इमारत या तो ख़त्म हो गई थी या बर्बाद हो गई थी.

'मुस्लिम इलाक़ों को निशाना बनाओ'

सारायेवो के आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में पुरुषों को या तो मार डाला गया या जेल शिविरों में भेज दिया गया. हज़ारों महिलाओं के साथ बेरहमी से बलात्कार किया गया.

जनरल म्लादिच के मुख्यालय से जारी एक संदेश में उनका रुख़ स्पष्ट नज़र आता है. उसमें लिखा था, "जब तक मैं रुकने का आदेश न दूं, तब तक धीमी गति से गोलीबारी करते रहो."

"मुस्लिम इलाक़ों को निशाना बनाओ, वहां ज़्यादा सर्ब नहीं रहते. उन पर तब तक गोलाबारी करो जब तक वे पागलपन की कगार पर न पहुंच जाएं."

अपनी ताक़त के नशे में उन्होंने रेडियो के ज़रिए आदेश दिए. इन संदेशों को जानबूझकर बिना एनक्रिप्ट किए छोड़ दिया गया ताक़ि वे पकड़े जा सकें और फिर बाक़ी दुनिया में प्रसारित किए जाएं.

म्लादिच के सैनिक एक ब्लॉक को घेरे हुए थे तब उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, "उनके भेजे उड़ा दो."

वो अपनै सैनिकों से इस तरह आदेश का पालन करने कहते थे मानों ये आदेश भगवान ने दिए हों.

बेटी ने की आत्महत्या

म्लादिच के दो बच्चे और पत्नी बेलग्रेड में सुरक्षित थे जिनसे मिलने के लिए वो सप्ताहांत में जाते थे.

वे बोर्ड गेम खेलते थे और बातचीत में जानबूझकर राजनीति से परहेज़ करते थे. लेकिन उनकी 23 वर्षीय बेटी एना को एक युवा डॉक्टर और मानवाधिकार कार्यकर्ता से प्यार हो गया था.

डॉक्टर ने म्लादिच की बेटी को एक अंतिम चेतावनी दी, या तो अपने पिता को छोड़ दो या फिर कभी मुझसे मत मिलना.

प्यार के सपनों और पारिवारिक बंधनों के बीच फंसी एना ने अपने पिता की पसंदीदा बंदूक को उसके डिस्प्ले केस से निकाला. कुछ ही पलों बाद, उसने ट्रिगर दबा दिया.

म्लादिच को बेटी की आत्महत्या से उबरने में काफ़ी संघर्ष करना पड़ा. वे इस त्रासदी के लिए ख़ुद को छोड़कर बाक़ी सभी को ज़िम्मेदार मानते थे.

और फिर, 1995 में नेटो का धैर्य टूट गया.

नेटो ने सारायेवो के आसपास म्लादिच के ठिकानों पर लड़ाकू विमानों और क्रूज़ मिसाइलों से हमले किए. इन हमलों में से अधिकतर विनाशकारी प्रभावशाली थे.

नेटो की कार्रवाई से सारायेवो की घेराबंदी तो टूट गई लेकिन म्लादिच का नस्लीय सफ़ाए का ख़ूनी अभियान अभी ख़त्म नहीं हुआ था.

उस गर्म मौसम में, हज़ारों बोस्नियाई नागरिक पूर्वी बोस्निया के एक छोटे से पहाड़ी शहर सेब्रेनित्सा में एकत्रित हुए थे.

वे संयुक्त राष्ट्र के संरक्षण में थे, जिसने इसे "सुरक्षित क्षेत्र" घोषित किया था.

बोस्नियाई सर्ब सैनिकों ने उन पर भारी गोले और रॉकेट बरसाए. पांच दिन बाद, म्लादिच टीवी कैमरा क्रू से घिरे हुए शहर में दाखिल हुए.

शहर के मुख्य चौराहे पर म्लादिच ने बच्चों को मिठाई बांटी, उनके सिर पर हाथ फेरा और उन्हें भरोसा दिलाया कि सब ठीक हो जाएगा. लेकिन बच्चे झांसे में नहीं आए.

मर्दों को गोलियां मारी गईं, महिलाओं का रेप किया गया और इस दौरान गिने-चुने डच शांति सैनिक कुछ नहीं कर पाए.

और इसके बाद यूरोप की ज़मीन पर दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे जघन्य अपराध हुआ.

जो भी बोस्नियाई पुरुष म्लादिच के सैनिकों को मिला उसे पकड़ लिया गया, दूरदराज़ की जगहों पर उन्हें ले जाया गया और मार दिया गया. ये बड़े पैमाने पर हुई हत्याएं थीं.

महज़ कुछ ही दिनों में 8,000 पुरुषों और लड़कों की आंखों पर पट्टी बांधकर गोली मार दी गई. उनमें से कुछ की उम्र सिर्फ़ बारह साल मात्र थी, जबकि मारे गए कई लोग ऐसे भी थे जो सत्तर साल की उम्र को भी पार कर चुके थे. बच्चे, बूढ़ों और जवानों किसी को नहीं छोड़ा गया.

मारे गए उन सभी को बेरहमी से सामूहिक, अज्ञात कब्रों में धकेल दिया गया था.

यह एक जनसंहार था

यूरोपीय इतिहास का एक काला अध्याय और संयुक्त राष्ट्र का सबसे बुरा दौर.

यह एक ऐसा अपराध था जिसके पीछे उच्च स्तर की संगठित योजना थी.

लोगों को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा का वादा किया गया था और यह सब उसकी नाक के नीचे ही हुआ.

बाद में, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने लिखा कि इस जनसंहार की ज़िम्मेदारी "सबसे पहले और मुख्य रूप से उन लोगों की है जिन्होंने इसकी योजना बनाई और इसे अंजाम दिया".

हालांकि, उन्होंने आगे यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने "निष्पक्षता के दर्शन पर आधारित निर्णय संबंधी गंभीर गलतियां की हैं."

म्लादिच पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया गया था.

अमेरिका ने उसकी गिरफ्तारी में सहायक जानकारी देने वाले को 50 लाख डॉलर का इनाम देने की पेशकश की.

एक साल बाद, बोस्नियाई राष्ट्रपति बिलजाना प्लासिक ने अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकते हुए उसे पद से बर्ख़ास्त कर दिया.

लेकिन हेग में उन पर मुक़दमा चलने में 14 साल लग गए.

वह बेलग्रेड लौट आए और उन्हें राष्ट्रपति स्लोबोदान मिलोसेविच का समर्थन और संरक्षण मिलता रहा.

म्लादिच खुलेआम जीवन जीते थे. वे दोस्तों के साथ हिरण का शिकार करते थे, आलीशान रेस्तरां में खाना खाते थे और यहां तक कि फुटबॉल मैच भी देखने जाते थे.

वह अपने देशवासियों के एक बड़े समूह के लिए नायक बने रहे, जिन्होंने उनमें सर्बियाई युद्ध भावना और अपने राष्ट्र के अतीत के गौरव की झलक देखी.

वे म्लादिच को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के हवाले न करने के लिए दृढ़ संकल्पित थे.

राष्ट्रपति ने तो म्लादिच की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए एक सैन्य बल भी गठित किया था.

69 साल की आयु में आए हाथ

मामला तब और पेचीदा होने लगा जब अक्तूबर 2000 में स्लोबोदान मिलोसेविच को ही गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में उन्हें हेग भेज दिया गया.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति का असर दिखने लगा था और भगोड़ों को संरक्षण देने की वजह से सर्बिया यूरोपीय संघ में दाख़िल नहीं हो पा रहा था.

जब स्लोबोदान को गिरफ़्तार किया गया, उसी रात म्लादिच भाग गए. उन्हें अपने देश में सुरक्षा की गारंटी नहीं थी.

म्लादिच ने अगला दशक एक सुरक्षित ठिकाने से दूसरे सुरक्षित ठिकाने भागने में गुज़ारा. शुरुआत में उसके पास वफ़ादार अंगरक्षक थे, बाद में वे कम होते गए थे उनके परिवार ने उनकी सुरक्षा की.

जुलाई 2008 में, उनके पूर्व राजनीतिक सहयोगी, राडोवन कराडज़िक को बेलग्रेड में एक बस से गिरफ़्तार कर लिया गया. वे अब लंबी दाढ़ी वाले एक आध्यात्मिक चिकित्सक हैं.

दरअसल, सर्बिया की नई सरकार ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के साथ औपचारिक सहयोग स्थापित किया था और कराडज़िक को उसके हवाले कर दिया था.

इसके बाद जनरल म्लादिच की बारी थी. तीन साल बाद, म्लादिच भी मिल गए.

म्लादिच के बच्चों का पीछा करते हुए पुलिस एक सुनसान जर्जर फार्महाउस तक पहुंची. पुलिसकर्मी बिना किसी स्पष्ट कारण के अकेले आंगन में खड़े थे.

म्लादिच के पास उनसे मिलने की हिम्मत नहीं थी, वो खिड़की से सब देख रहे थे. जब सुरक्षा बल भीतर गए तो उन्हें 69 साल का एक बेतरतीब आदमी मिला जिसे कई बार स्ट्रोक आ चुका था.

मुक़दमे की सुनवाई में ही चार साल लग गए.

अदालत 500 दिनों से अधिक समय तक चली. इस दौरान लगभग 600 गवाहों के बयान सुने गए और लगभग 10,000 साक्ष्यों की जांच की गई.

उचित क़ानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया. हालांकि फैसले को लेकर कुछ ही लोगों को संदेह था.

रात्को म्लादिच को सेब्रेनित्सा जनसंहार से ठीक पहले अपनी सेना को आदेश देते हुए दिखाया गया था.

उन्हें जनसंहार, मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और "युद्ध के रीति-रिवाजों" के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया था.

वह मुस्कुराते हुए और कैमरों की ओर अंगूठा दिखाते हुए अदालत में दाखिल हुए लेकिन फैसले पर वह ग़ुस्से से भड़क उठे.

म्लादिच चिल्लाए कि यह सब झूठ है. उन्हें ज़बरदस्ती अदालत से हटाया गया. उनकी सज़ा का मतलब था कि उन्हें मौत जेल में ही मिलेगी.

जो बहुत से पीड़ित और उनके रिश्तेदार इस मुक़दमे की सुनवाई के दौरान मौजूद थे उनमें से एक फिकरेट एलिक भी थे. 1992 में बोस्नियाई सर्ब यातना शिविर में क़ैद के दौरान उनका एक वीडियो बनाया गया था जिसमें वो कंकाल की तरह दिख रहे थे. ये वीडियो काफ़ी चर्चित हुआ था.

वहां मौजूद बाक़ी लोग फूट-फूट कर रोने लगे थे.

लेकिन फैसलों पर दुनिया भर में हुई ख़ुशी सार्वभौमिक नहीं थी.

कुछ बोस्नियाई इस बात से निराश थे कि म्लादिच को सारायेवो और सेब्रेनित्सा के बाहर के अपराधों के लिए दोषी नहीं ठहराया गया था.

और कई सर्ब वासियों ने इस फैसले पर आक्रोशित प्रतिक्रियाएं दीं.

रिपब्लिका सर्पस्का के एक प्रमुख राजनेता ने इस मुक़दमे की निंदा करते हुए इसे अपने लोगों को बदनाम करने की साज़िश बताया और स्कूलों की इतिहास की किताबों से अदालती कार्यवाही का "हर तरह का ज़िक़्र मिटाने" का आह्वान किया.

म्लादिच ने 2024 में अपनी बाक़ी सज़ा सर्बिया में काटने की याचना की जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया. दिल के दौरे और स्ट्रोक से पीड़ित म्लादिच ने तर्क दिया था कि उनके गृह देश में उनकी सेहत की बेहतर देखभाल होगी.

उनके वकीलों ने इस आधार पर उनकी रिहाई के लिए बार-बार असफल आवेदन किया कि उनके पास जीने के लिए केवल कुछ ही महीने बचे हैं.

सर्बिया और रूस दोनों ने उनकी क़ानूनी अपीलों का समर्थन किया.

वहीं दूसरी तरफ़, बोस्निया में, जनवरी 2026 में एक विपक्षी राजनेता को कराडज़िक और म्लादिच का "महिमामंडन" करने के आरोप में तीन साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

कई लोगों के लिए, "बोस्निया का क़साई" महज़ एक साधारण सैनिक और उनकी जीवनशैली का रक्षक था.

लेकिन बोस्नियाई लोग और अधिकांश अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे एक ऐसे हत्यारे और गुंडे के रूप में याद रखेंगे जिसने यूरोपीय ज़मीन को कलंकित किया.

बोस्निया में मुसलमान और सर्ब एक साथ असहज सहजीवन में रहते हैं.

1990 के दशक में म्लादिच और राडोवन कराडज़िक द्वारा छेड़ा गया हिंसक राष्ट्रवादी युद्ध भले ही ख़त्म हो गया हो, लेकिन तनाव अभी भी मौजूद है.

हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.

Open Questions

  • क्या म्लादिच की मृत्यु से बोस्निया में सर्ब और मुस्लिम समुदायों के बीच संबंधों पर कोई असर पड़ेगा?
  • क्या सर्बिया में उनके समर्थकों द्वारा कोई अंतिम श्रद्धांजलि आयोजित की जाएगी?
  • क्या उनके मृत्यु के बाद कोई नए दस्तावेज या गवाही सामने आएंगे जो उनके अपराधों के बारे में अधिक जानकारी दे सकते हैं?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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