9/11 के हाईजैकर्स की मदद करने वाला उमर अल-बयौमी: हॉली रैचफ़र्ड की गवाही
सैन डिएगो के अपार्टमेंट मैनेजर हॉली रैचफ़र्ड ने पहली बार सार्वजनिक रूप से उन यादों को साझा किया है जो उन्हें 9/11 के संदिग्ध उमर अल-बयौमी से जोड़ती हैं।
Quick Look
सैन डिएगो की प्रॉपर्टी मैनेजर हॉली रैचफ़र्ड ने 9/11 के हाईजैकर्स नवाफ़ अल-हज़मी और ख़ालिद अल-मिहदार को अपार्टमेंट दिलाने में उमर अल-बयौमी की भूमिका का खुलासा किया है। बयौमी पर सऊदी सरकार के सहयोग से हाईजैकर्स की मदद करने का आरोप है।
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Why It Matters
उमर अल-बयौमी पर 9/11 के हाईजैकर्स नवाफ़ अल-हज़मी और ख़ालिद अल-मिहदार की मदद करने का आरोप है। पीड़ित परिवारों ने सऊदी अरब के खिलाफ 1 ट्रिलियन डॉलर का मुकदमा दायर किया है।
हॉली रैचफ़र्ड आज भी इस बात पर यकीन नहीं कर पाती हैं कि जिस व्यक्ति को उन्होंने घर दिलाया था उस पर अमेरिका के सबसे काले दिनों में से एक में शामिल होने का आरोप लगेगा.
रेचफ़र्ड बीबीसी को बताती हैं, "मेरे लिए यह समझ पाना लगभग नामुमकिन है कि वह खुद को क्या बताता था और असल में वह कौन था. आज भी मैं इस बात को लेकर संघर्ष करती हूं."
हम जिस शख़्स का जिक्र कर रहे हैं उसका नाम था - उमर अल-बयौमी. उमर सऊदी अरब का रहने वाला था. उसकी उम्र क़रीब 40 साल थी.
सितंबर 1999 में वह अपने परिवार के साथ कैलिफ़ोर्निया के सैन डिएगो स्थित उस हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में रहने आया था जिसकी देखरेख रैचफ़र्ड करती थीं.
पार्कवुड अपार्टमेंट्स के फ्लैट नंबर 152 में रहने आया यह नया किरायेदार जल्द ही रैचफ़र्ड की पूल पार्टियों का नियमित हिस्सा बन गया.
रैचफ़र्ड याद करते हुए कहती हैं, "वह हमेशा बेहद ख़ुशमिज़ाज रहता था, चेहरे पर मुस्कान रहती थी, और बहुत ही दोस्ताना स्वभाव का था."
कुछ महीनों बाद, बयौमी ने रैचफ़र्ड की मुलाकात दो ऐसे लोगों से कराई, जो देखने में बेहद साधारण लगते थे, और जो बाद में उनके पड़ोसी भी बन गए.
यह दोनों व्यक्ति 9/11 हमलों के दौरान अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 77 का अपहरण कर उसे पेंटागन से टकराने के कारण कुख्यात हो गए.
पिछले 25 वर्षों से रैचफ़र्ड इन तीनों लोगों से अपने संबंधों की यादों से परेशान रही हैं. उनका मानना है कि शुरुआत से ही बयौमी ने उन्हें धोखे में रखा.
वह याद करते हुए कहती हैं, "जब भी मैं कोई पार्टी रखती थी, वह आता था और गतिविधियों का हिस्सा बन जाता था."
वह कहती हैं कि बयौमी का परिवार उन्हें अक्सर खाने पर अपने घर भी बुलाता था. उन्होंने कहा, "मुझे वहां जाना अच्छा लगता था."
लेकिन पार्कवुड के फ्लैट नंबर 152 का यह पूर्व निवासी बयौमी अब उस 1 ट्रिलियन डॉलर (733 अरब पाउंड) के मुकदमे के केंद्र में है, जिसे 9/11 के पीड़ितों के कई हज़ार परिवारों और जीवित बचे हुए लोगों ने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ दायर किया है.
11 सितंबर 2001 को इस्लामी चरमपंथी नेटवर्क अल-क़ायदा के 19 सदस्यों ने चार यात्री विमानों का अपहरण कर लिया था. हमलावरों ने इन विमानों को न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स और वॉशिंगटन में पेंटागन की इमारत से टकरा दिया था.
बयौमी पर आरोप है कि उन्होंने 9/11 की साज़िश को अंजाम देने में मदद की थी. उन्होंने अमेरिका पहुंचने वाले पहले दो हाईजैकर्स, नवाफ अल-हाज़मी और ख़ालिद अल-मिहदार, को सहायता मुहैया कराई थी.
न्यूयॉर्क में 9/11 पीड़ित परिवारों के दायर मुकदमे की सुनवाई कर रहे फ़ेडरल जज ने एक वर्ष पहले पाया था कि उपलब्ध सबूतों से "यह उचित निष्कर्ष निकलता है" कि बयौमी और अमेरिका में तैनात एक सऊदी राजनयिक "अपहरणकर्ताओं की मदद करते समय सऊदी सरकार के साथ 'लगातार संपर्क' में था.'
जज के इस फैसले ने पीड़ित परिवारों के मुकदमे को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है. सऊदी अरब इस फ़ैसले के खिलाफ अपील कर रहा है और बयौमी के साथ मिलकर हमेशा इन आरोपों से इनकार करता रहा है.
रैचफ़र्ड ने उन्हें अपहरणकर्ताओं के साथ बातचीत करते और उनकी मदद करते देखा था. वह इस बारे में न्यूयॉर्क की अदालत में अपना बयान दे चुकी हैं, जो अभी सीलबंद है.
हॉली रैचफ़र्ड को खोजना आसान नहीं था. वह 9/11 के बाद इंसानी आबादी से उतनी दूर जाकर रहने लगीं. मैंने उनका पता पश्चिमी अमेरिका के ऊंचे रेगिस्तानी इलाके में लगाया, जिसे रैटलस्नेक के इलाके के रूप में जाना जाता है.
उन्होंने मुझसे कहा कि वह न्यूज़ से दूर रहती हैं और पत्रकारों से बात नहीं करतीं. इसके बावजूद उन्होंने मुझसे बातचीत करने के लिए सहमति दे दी.
मुझे दिया गया उनका इंटरव्यू बयौमी द्वारा पुलिस, एफ़बीआई और न्यूयॉर्क की अदालत को बताई गई घटनाओं की कहानी पर सवाल खड़े करता है.
यह बीबीसी रेडियो 4 के पॉडकास्ट इंटरीग: ए 9/11 स्टोरी और बीबीसी पैनोरमा की आगामी डॉक्यूमेंट्री 9/11: द सऊदी कनेक्शन में शामिल है.
साल 1999 की शुरुआत में रैचफ़र्ड की ज़िंदगी पटरी पर आ गई थी. वह सैन डिएगो के उपनगरीय इलाके में स्थित पार्कवुड अपार्टमेंट्स की वह नई प्रॉपर्टी मैनेजर बन गईं.
वह कहती हैं कि उन्होंने अपने काम को ठीक से अंजाम दिया. मकान कभी लंबे समय तक खाली नहीं रहते थे. दरअसल ये उनका ड्रीम जॉब था और इसके पीछे की वजह काग़ज़ी काम या अच्छी सैलरी नहीं थी बल्कि इसकी वजह वहां के लोग थे.
उमर अल-बयौमी पार्कवुड में यह कहते हुए रहने आया था कि वह एक मैच्योर स्टूडेंट है. रैचफोर्ड कहती हैं, "मुझे पता था कि वह पढ़ाई कर रहा था. इसके अलावा वह क्या करता था, मैं निश्चित रूप से नहीं कह सकती."
दो दशक से अधिक समय बाद सार्वजनिक किए गए एफबीआई दस्तावेज़ों और अदालत में दायर कागज़ात से पता चला कि बयौमी की पढ़ाई वास्तव में 1998 में ही लगभग रुक गई थी. वह अपना अधिकतर समय मुस्लिम समुदाय में धार्मिक गतिविधियों के आयोजन में बिताता था.
9/11 के बाद सैन डिएगो में एफबीआई कार्यालय की जांच का नेतृत्व करने वाले रिचर्ड लैम्बर्ट मुझसे कहते हैं, "सैन डिएगो के मुस्लिम समुदाय में आम तौर पर यह धारणा थी कि बयौमी सऊदी ख़ुफ़िया सेवा का एक ऑपरेटिव था."
एफबीआई को बाद में पता चला कि उसे सालाना लगभग 90,000 डॉलर का भुगतान किया जा रहा था.
बयौमी खुद को एक साधारण पारिवारिक व्यक्ति के रूप में पेश करता था. रैचफ़र्ड ने जिस बयौमी को देखा था, उसकी झलक उसके ऐसे घरेलू वीडियो में कैद है जिन्हें पहले कभी प्रसारित नहीं किया गया था.
1999 की गर्मियों में बयौमी ने वॉशिंगटन डीसी स्थित अमेरिकी कैपिटॉल भवन को अलग-अलग कोणों से फ़िल्माया था. वीडियो में वह एक "योजना" का ज़िक्र करता है और फिर कैमरा अपनी ओर घुमाकर किसी रिपोर्टर की तरह टिप्पणी करता है.
9/11 पीड़ित परिवारों के वकीलों का आरोप है कि वह हमलों के संभावित लक्ष्य के रूप में इस इमारत की रेकी कर रहा था. सऊदी अरब का कहना है कि यह एक टुरिस्ट वीडियो था.
3 फ़रवरी 2000 को बयौमी दो युवाओं को रैचफ़र्ड के सैन डिएगो स्थित किराये के कार्यालय में लेकर आया. वह स्पष्ट रूप से जल्दबाज़ी में था. उसने बताया कि ये दोनों व्यक्ति उसकी मस्जिद से हैं और किराये पर रहने की जगह तलाशते समय उसके साथ रह रहे हैं.
वह याद करती हैं, "उनमें कुछ भी अजीब नहीं था. वे अच्छे और तमीज़दार थे." वे दोनों आदमी अंग्रेज़ी नहीं बोलते थे, लेकिन उमर अल-बयौमी ने ज़िम्मेदारी संभाली.
रैचफ़र्ड के कुछ नियम थे. उन्होंने तुरंत मना कर दिया. लेकिन उन दोनों आदमियों के पास कई हज़ार डॉलर कैश थे. बैंक रिकॉर्ड बताते हैं कि अगले दिन, बयौमी उन्हें पास के बैंक ले गए और अकाउंट खुलवाने में उनकी मदद की.
तीसरे दिन रैचफ़र्ड के ऑफ़िस में, उन्होंने इनकम की मुश्किल शर्त का एक हल निकाला. वह उनके लीज़ एग्रीमेंट पर को-साइन करने वाले थे, यानी उनके अपार्टमेंट के लिए कानूनी गारंटर बनने वाले थे.
रेंटल एग्रीमेंट पर बयौमी के कई सिग्नेचर हैं. वह उनके गारंटर, उनके दोस्त और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट थे, और उनका पार्कवुड वाला घर ही उनका मौजूदा पता बताया गया था.
जिन दो आदमियों की कानूनी ज़िम्मेदारी बयौमी ले रहे थे, उनके नाम थे - नवाफ़ अल-हज़मी और खालिद अल-मिहदार. ये दोनों आगे चलकर 9/11 के हाईजैकर बनने वाले थे.
अगले कुछ महीनों में हॉली ने उन दोनों को कई बार देखा. वह कहती हैं, "मैं उनके साथ चाय-बिस्कुट लेती थी. वे ऐसे लोग नहीं थे जो बस ऑफिस आए और हमसे जगह किराए पर ले ली."
हज़मी और मिहदार उस साल मई के आखिर तक अपने अपार्टमेंट में रहे और फिर चले गए. रैचफ़र्ड ने इसके बारे में ज़्यादा नहीं सोचा.
जब 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका सदमे और दुख में डूबा हुआ था, तो एक महिला ने उन्हें फ़ोन करके उन दोनों के लिए किराए से जुड़ा रेफ़रेंस मांगा. बिना सोचे-समझे, उन्होंने उनकी जानकारी दे दी. लेकिन वह महिला प्रॉपर्टी एजेंट नहीं थी, वह एक रिपोर्टर थी.
उसके अगले सवाल ने रैचफ़र्ड को हिलाकर रख दिया, "क्या आपको पता था कि वे उन दो आतंकवादियों में से थे जिन्होंने पेंटागन में अपना प्लेन उड़ाया था?"
14 सितंबर 2001 को, दो स्पेशल एजेंट ने पार्कवुड में रैचफ़ोर्ड के ऑफ़िस में उनसे पूछताछ की. उन्होंने एफ़बीआई को उमर अल-बयौमी का गारंटर फ़ॉर्म दिया.
रिचर्ड लैम्बर्ट कहते हैं, "जैसे-जैसे हमने हाईजैकर्स के साथियों की पहचान करनी शुरू की, यह साफ़ हो गया कि उमर अल-बयौमी के नेतृत्व में एक नेटवर्क काम कर रहा था."
एफ़बीआई को पता चला कि बयौमी के संपर्कों ने हज़मी और मिहदार को कैलिफ़ोर्निया का ड्राइविंग लाइसेंस पाने, फ़्लाइट स्कूलों में अप्लाई करने, मिडिल ईस्ट से पैसे पाने और यहां तक कि दांतों के इलाज का इंतज़ाम करने में भी मदद की थी.
21 सितंबर 2001 को, मेट्रोपॉलिटन पुलिस की एंटी-टेरर ब्रांच ने बयौमी को गिरफ़्तार कर लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी. बिना घबराए और कभी-कभी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए, बयौमी ने शुरू में किसी भी हाईजैकर को जानने से इनकार कर दिया.
एक दिन बाद, उसने कहा कि उसे दो लोगों, 'नवाफ़' और 'ख़ालिद' की मदद करना याद आया. उसने माना कि वे सिर्फ़ दो ऐसे लोग थे जिन्हें उसने इस तरह की मदद दी थी.
बयौमी ने दावा किया कि वह उन दोनों से लॉस एंजेलिस में मिला था, जब उसने उन्हें एक रेस्तरां में अरबी बोलते हुए सुना था.
बयौमी के बयान के मुताबिक, भविष्य के हाईजैकर्स के साथ उनका संपर्क बहुत कम समय के लिए था. लेकिन उसकी कहानी घटनाओं के बारे में रैचफ़र्ड के बयान से मेल नहीं खाती.
रैचफ़र्ड कहती हैं, "मुझे पता है कि उसने यही कहा था, और मुझे पता है कि यह बकवास है."
रैचफ़र्ड बताती हैं कि हाइजैकर्स को उसके ऑफ़िस लाने से पहले, उमर अल-बयौमी ने उससे कई बार दो लोगों के लिए अपार्टमेंट ढूंढने के बारे में पूछा था.
वह बयौमी के इस दावे को भी गलत बताती हैं कि अपार्टमेंट दिलाने के बाद उसने हाइजैकर्स को शायद ही कभी देखा, वह बताती हैं कि बयौमी ने उन्हें उसके बाद के हफ़्तों में साथ देखा था. एक बार तो वे तीनों चाय और कुकीज़ के लिए उसके ऑफ़िस भी आए थे.
ब्रिटेन की पुलिस ने बयौमी को सात दिनों तक हिरासत में रखा. अमेरिकी न्याय विभाग ने बयौमी को आरोपों का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित न करने का फ़ैसला किया. 28 सितंबर 2001 को बयौमी को रिहा कर दिया गया.
सैन डिएगो के एजेंटों को पता चला कि सऊदी रक्षा मंत्रालय से जुड़ी दो कंपनियां बयौमी को 90 हज़ार डॉलर की सैलरी दे रही थीं, लेकिन वह कभी काम पर नहीं गया और उसने "बहुत ज़्यादा" खर्च किए.
एफ़बीआई को सऊदी सरकार से जुड़ी एक चैरिटी को लिखे गए ऐसे पत्र मिले जिनके अल-क़ायदा से सीधे संबंध थे. साथ ही, उन्हें उमर अल-बयौमी के खुद के लिखे कुछ ऐसे दस्तावेज़ भी मिले जिन्हें "जिहादी सोच" वाला माना जा सकता था.
उमर अल-बयौमी, अगस्त 2002 में यूके छोड़कर सऊदी अरब चले गए.
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
सऊदी अरब के खिलाफ मुकदमे में बयौमी की भूमिका पर और अधिक साक्ष्य सामने आएंगे।
Likely · Within months
Open Questions
- बयौमी को सऊदी सरकार से मिलने वाले फंड का वास्तविक उद्देश्य क्या था?
- अमेरिका ने बयौमी के प्रत्यर्पण से इनकार क्यों किया?

