
कोटद्वार में एक व्यापारी को धमकी देने के आरोप में पुलिस ने दीपक कुमार उर्फ़ 'मोहम्मद दीपक' को हिरासत में लिया है।
उत्तराखंड के कोटद्वार में सोशल मीडिया पर टिप्पणी को लेकर व्यापारी संजीव टोंक को धमकी देने के आरोप में दीपक कुमार उर्फ 'मोहम्मद दीपक' को पुलिस ने गिरफ़्तार किया है। आरोपी के वकील ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए ख़ारिज किया है।
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विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर उज्जैन की शाही मस्जिद से जुड़े वीडियो पर की गई एक टिप्पणी से हुई। आरोपी दीपक कुमार पहले भी 'मोहम्मद दीपक' नाम के उपयोग को लेकर चर्चा में रहे हैं।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले के कोटद्वार में व्यापारी संजीव टोंक की शिकायत पर दीपक कुमार उर्फ़ 'मोहम्मद दीपक' को ज़िला पुलिस ने गिरफ़्तार किया है।
व्यापारी का आरोप है कि सोशल मीडिया पर उनकी एक टिप्पणी से नाराज़ होकर दीपक उनकी दुकान पर आए, उनके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।
वहीं, दीपक के वकील अरविंद कुमार वर्मा का कहना है कि दोनों के बीच सिर्फ़ कहासुनी हुई थी और न तो मारपीट हुई और न ही गाली-गलौज या जान से मारने की धमकी दी गई।
कोटद्वार एएसपी मनोज ठाकुर के मुताबिक़, "व्यापारी के साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की शिकायत मिली थी, जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मामला रजिस्टर्ड किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से अभियुक्त दीपक कुमार को धारा 151 के तहत गिरफ़्तार किया गया है।"
इस विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के उज्जैन की शाही मस्जिद से जुड़े घटनाक्रम को लेकर की गई टिप्पणी को माना जा रहा है।
इसी मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की अलग-अलग धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया है और बाद में दीपक को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 170 के तहत गिरफ़्तार किया।
जनवरी में एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में बजरंग दल के सदस्यों के विरोध के बाद दीपक कुमार चर्चा में आए थे। उस समय उन्होंने अपना नाम 'मोहम्मद दीपक' बताया था। अब व्यापारी की शिकायत पर हुई उनकी गिरफ़्तारी के बाद यह मामला फिर चर्चा में है।
पौड़ी पुलिस के मुताबिक़, व्यापारी संजीव टोंक ने गुरुवार, एक अक्तूबर को कोटद्वार कोतवाली में शिकायत दी थी। पुलिस के मुताबिक़, शिकायत में दीपक कुमार उर्फ़ अक्की उर्फ़ मोहम्मद दीपक पर अभद्रता, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए थे।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) और 352 के तहत मुक़दमा दर्ज किया। पुलिस के प्रेस नोट के मुताबिक़, जांच के दौरान धारा 196 और 115 भी जोड़ी गईं।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज के साथ उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई। पुलिस के मुताबिक़, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज़ और उपलब्ध तस्वीरों से पहली नज़र में यह सामने आया कि मोहम्मद दीपक ने शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज की और धमकी दी।
पुलिस ने यह भी कहा कि दीपक की गतिविधियों और क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई। पुलिस के मुताबिक़, दीपक को बीएनएसएस की धारा 170 के तहत गिरफ़्तार किया गया। धारा 170 किसी संज्ञेय अपराध को होने से रोकने के लिए निवारक (प्रिवेंटिव) कार्रवाई से संबंधित है।
कारोबारी संजीव टोंक का कहना है कि विवाद सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी से शुरू हुआ था। उनके मुताबिक़, दीपक ने घटना से क़रीब चार-पांच दिन पहले सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के उज्जैन की एक मस्जिद से जुड़े घटनाक्रम का वीडियो साझा किया था। टोंक का दावा है कि उस वीडियो में सुरक्षाबलों पर पथराव का दृश्य भी था।
उनके अनुसार, उन्होंने इस वीडियो पर टिप्पणी करते हुए लिखा था, "दीपक भाई, क्या आपको यह पत्थरबाज़ी दिखाई नहीं देती?" टोंक का आरोप है कि इसी टिप्पणी से नाराज़ होकर दीपक एक अक्तूबर की सुबह क़रीब 9 बजकर 45 मिनट पर उनकी दुकान पर पहुंचे।
दीपक के वकील एडवोकेट अरविंद कुमार वर्मा ने इस कारोबारी के आरोपों को ख़ारिज किया है। वर्मा का कहना है कि दीपक का कोटद्वार की 'भाई जी की सेल वाली गली' में पुराना निवास रहा है। वकील के मुताबिक़, एक अक्तूबर को दोनों के बीच किसी बात को लेकर सामान्य बातचीत हुई और इसी दौरान कहासुनी हो गई। उन्होंने कहा कि दीपक ने सिर्फ़ इतना कहा था कि यह उसका व्यक्तिगत मामला है।
वकील का दावा है कि वहां न तो मारपीट हुई और न ही गाली-गलौज या जान से मारने की धमकी दी गई। वर्मा का आरोप है कि इसके बाद व्यापार मंडल ने माहौल बनाकर पुलिस में शिकायत दी। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले में धार्मिक उन्माद फैलाने, गाली-गलौज और धमकी से संबंधित धाराएं जोड़ी गई हैं।
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