
डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने 51.8 प्रतिशत वोट हासिल किए, रिपब्लिकन उम्मीदवार को 46.2 प्रतिशत समर्थन मिला
डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को 51.8 प्रतिशत बनाम 46.2 प्रतिशत वोटों से हराया है। वे अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे।
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2026 के मिडटर्म इलेक्शन में मिशिगन की अमेरिकी सीनेट सीट के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद और रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के बीच मुक़ाबला हुआ। अल-सैयद पेशे से डॉक्टर हैं और कभी कोई सियासी पद नहीं संभाला है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोज़र्स पर बढ़त हासिल कर ली है.
2026 के मिडटर्म इलेक्शन के सबसे महंगे और ध्रुवीकरण वाले मुक़ाबलों में से एक में मिली इस बढ़त से देश भर में प्रगतिशील विचारधारा वाले नेताओं को बड़ी मज़बूती मिल सकती है.
पेशे से डॉक्टर अल-सैयद अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे. क़रीब 85 फ़ीसदी मतों की गिनती पूरी होने तक उन्हें 51.8 फीसदी वोट मिले थे, जबकि रोज़र्स को 46.2 फ़ीसदी समर्थन मिला.
उनकी जीत से मिशिगन की अमेरिकी सीनेट सीट डेमोक्रेटिक पार्टी के पास ही बनी रहेगी. इसके साथ ही सीनेट में पार्टी की बढ़त और मज़बूत हुई है.
डॉक्टर अल-सैयद ने कभी कोई सियासी पद नहीं संभाला है. चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई, जब उनकी डेमोक्रेट सहयोगी हेली स्टीवंस, जिन्हें उन्होंने पार्टी नामांकन के लिए मामूली अंतर से हराया था, ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोज़र्स के लिए समर्थन की घोषणा कर दी.
अल-सैयद ने रविवार, एक नवंबर को पत्रकारों से कहा था, "यह एक करोड़ लोगों का राज्य है जो अपनी सरकार से बहुत बेहतर व्यवहार के हक़दार हैं. मेरा ध्यान उन 9,999,998 लोगों पर अधिक केंद्रित है, जिनके बारे में आप लोग बात नहीं कर रहे हैं."
1984 में डेट्रॉइट के सबअर्बन रोचेस्टर हिल्स में जन्मे अल-सैयद के माता-पिता का तलाक़ तब हो गया जब वह तीन साल के थे, और उनका पालन-पोषण उनके पिता और सौतेली माँ जैकलिन जॉनसन ने किया.
उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय और कोलंबिया विश्वविद्यालय में मेडिकल का अध्ययन किया और महामारी विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल की.
2015 में डेट्रॉइट स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं.
तीन साल बाद, अल-सैयद ने मिशिगन के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ा. वे डेमोक्रेट प्राइमरी में दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन ग्रेटचेन व्हिटमर से 20 प्रतिशत से अधिक वोटों से हार गए. आगे चलकर ग्रेटचेन ने दो बार गवर्नर का पद संभाला.
व्हिटमर ने 2026 के सीनेट चुनाव के प्राइमरी में स्टीवंस का समर्थन किया था, लेकिन नामांकन जीतने के बाद से उन्होंने सार्वजनिक रूप से अल-सैयद के अभियान का समर्थन किया था.
उन्हें सीनेटर बर्नी सैंडर्स और कांग्रेसवुमन एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ जैसे प्रगतिशील नेताओं का समर्थन हासिल है.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित कई उदारवादी डेमोक्रेट नेताओं ने भी उनके अभियान का समर्थन किया. मिशिगन में जीत अमेरिकी सीनेट पर नियंत्रण हासिल करने की पार्टी की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है.
अल-सैयद ने वामपंथी मंच पर चुनाव प्रचार किया है, जिसमें इसराइल को अमेरिकी सैन्य सहायता की आलोचना के साथ-साथ अरबपतियों पर टैक्स लगाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के लिए धन जुटाने जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से शामिल थे.
अल-सैयद ने गुरुवार, 29 अक्तूबर को एक चुनावी रैली में समर्थकों से कहा था, "टैक्स चुकाना और यह जानना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए कि वह पैसा आप और आपके बच्चों पर खर्च किया जाएगा, न कि किसी और और उनके बच्चों पर बम गिराने के लिए."
उन्होंने 7 अक्तूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों के बाद ग़ज़ा में इसराइल के अभियान को जनसंहार भी कहा है. एक ऐसा आरोप, जिसे इसराइल दृढ़ता से ख़ारिज करता है. सैयद ने कहा था कि इसराइल क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में रंगभेद कर रहा है.
42 वर्षीय अल-सैयद अक्सर कहते हैं कि वह अमेरिकी टैक्स का इस्तेमाल "किसी पर बम गिराने के लिए विदेशों में भेजने के बजाय स्कूल और अवसर बनाने" के लिए करना चाहते हैं.
अल-सैयद ने बुधवार, 28 अक्तूबर को कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमें आम तौर पर विदेशी सेनाओं को वित्त पोषण करना चाहिए. इसमें इसराइल, मिस्र, सऊदी अरब, क़तर और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं."
इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिस्र के अप्रवासियों के बेटे अल-सैयद पर "आतंकवादियों का साथ देने" का आरोप लगाया.
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 15 अक्तूबर को रोजर्स की चुनावी रैली में कहा था, "आप उस छोटे से धूर्त व्यक्ति से बेहतर के हक़दार हैं, जिसे अपना मुँह बंद रखना चाहिए और उस देश के प्रति थोड़ी कृतज्ञता दिखानी चाहिए जिसने उसे सब कुछ दिया है."
रिपब्लिकन पार्टी ने अल-सैयद पर मिस्र के सबसे बड़े और सबसे पुराने इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध रखने का भी आरोप लगाया है, जिसने 2011 के अरब स्प्रिंग विद्रोह के बाद कुछ समय के लिए अफ्रीकी देश में सत्ता संभाली थी.
हालांकि अब्दुल किसी भी तरह के संबंध से इनकार करते हैं, उनके प्रतिद्वंद्वियों ने 2012 के एक खुले पत्र पर उनके हस्ताक्षर का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने इस्लामी राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी से "जितनी जल्दी हो सके मीडिया और पुलिस को अपना रुख़ स्पष्ट करने" का आग्रह किया था.
अल-सैयद को वामपंथी टिप्पणीकार हसन पीकर से संबंधों के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिन्होंने कहा था कि अमेरिका 9/11 हमलों का हक़दार था.
पिछले साल अगस्त में, अल-सैयद ने डेट्रॉइट के एक यहूदी प्रार्थना स्थल पर एक अरब अमेरिकी के हिंसक हमले पर अपनी टिप्पणियों के लिए मिशिगन के यहूदी समुदाय से माफ़ी मांगी थी.
यहूदी इनसाइडर के अनुमान के अनुसार, उनकी उम्मीदवारी ने मिशिगन में यहूदी वोटों को विभाजित कर दिया है, जो ऐतिहासिक रूप से डेमोक्रेट्स के पक्ष में रहे हैं.
समुदाय के नेताओं का हवाला देते हुए, समाचार वेबसाइट ने रिपब्लिकन उम्मीदवार के पक्ष में रुझान बढ़ने की भविष्यवाणी की थी.
हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान, अल-सैयद ने घोषणा की थी कि उनकी निष्ठा अमेरिकी संविधान के प्रति है और उन्होंने मतदाताओं से कहा है कि वे उनका मूल्यांकन उनकी पृष्ठभूमि के बजाय उनकी नीतियों के आधार पर करें.
उन्होंने कहा, "मेरा नाम और मेरा धर्म इस बात का कारण नहीं है कि लोग पेट्रोल या किराने का सामान नहीं ख़रीद सकते, डॉक्टर को नहीं दिखा सकते या जिस हवा में वे सांस लेते हैं और जिस पानी को वे पीते हैं, उसके बारे में चिंतित हैं."
AI outlook — possibilities, not facts
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Likely · Within months
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