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Back'अरुणाचल बॉर्डर पर भारत और चीन आमने-सामने बने हुए हैं', आईटीबीपी डीजी के बयान पर सियासत गरमाई
'अरुणाचल बॉर्डर पर भारत और चीन आमने-सामने बने हुए हैं', आईटीबीपी डीजी के बयान पर सियासत गरमाई
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BBC हिंदी2 hours agoPolitics5 min readIndiaView translation

'अरुणाचल बॉर्डर पर भारत और चीन आमने-सामने बने हुए हैं', आईटीबीपी डीजी के बयान पर सियासत गरमाई

आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन के साथ जारी तनाव की पुष्टि की, जिसके बाद कांग्रेस और विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

Quick Look

आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश सीमा पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव की पुष्टि की है। इस खुलासे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर चीन के प्रति नरम रुख अपनाने और राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

AI-generated summary

Why It Matters

जुलाई 2026 से अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव बना हुआ है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानता है और सीमा पर बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है।

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अरुणाचल प्रदेश सीमा पर तनाव की स्थिति को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक के बयान को लेकर कांग्रेस और विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा है.

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक (डीजी) शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को कहा था, "पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी, जब अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर दोनों पक्ष (भारत और चीन) आमने-सामने आ गए. यह स्थिति अब भी जारी है."

इस साल जुलाई में उत्तर-पूर्वी सीमा पर तनाव शुरू होने के बाद यह पहली बार है, जब आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि हुई है.

जुलाई के अंत से अरुणाचल प्रदेश में ऊपरी सुबनसिरी ज़िले के असाफिला और माजा इलाके में तनाव बना हुआ है.

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है, "प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है.

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि मोदी सरकार चीन के आगे झुक गई है.

इस मामले पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए भारत और चीन लगातार बातचीत कर रहे हैं.

रणधीर जायसवाल ने कहा, "जैसा कि हमने पहले भी कहा है, भारत-चीन बॉर्डर पर हालात समय-समय पर तब बिगड़ जाते हैं जब चीनी सैनिक अपने तय रास्ते से अलग गश्त (पेट्रोलिंग) करने लगते हैं. वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बचे हुए मुद्दों को सुलझाने, गलतफ़हमियों को दूर करने और किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए दोनों देश लगातार बातचीत और सैन्य रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "दोनों पक्ष इस बात पर भी राजी हुए हैं कि बॉर्डर के सही मैनेजमेंट के लिए एलएसी की समझ को और बेहतर बनाया जाए. मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूँगा कि दोनों देशों के आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए बॉर्डर पर शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है."

शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि 'देश के गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री को जवाब देना चाहिए.'

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने भी शत्रुजीत कपूर के बयान को साझा करते हुए सरकार पर तंज़ किया है.

आईटीबीपी के जवानों के लिए हर साल आयोजित होने वाले सम्मान समारोह 'हिमवीर सम्मान समारोह' में गुरुवार को आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत कपूर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश सीमा पर जारी टकराव के दौरान आईटीबीपी के कमांडो सक्रिय रहे हैं.

उन्होंने शौर्य कमांडो टीमों के 'असाधारण काम' की सराहना की.

उन्होंने कहा, "हमारी नई गठित शौर्य कमांडो टीमों ने इसमें शानदार भूमिका निभाई. आईटीबीपी का गठन पहाड़ी इलाकों में गुरिल्ला बल के रूप में हुआ था और 2004 में हमें चीन से लगी सीमा की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी दी गई."

राजस्थान के अलवर स्थित सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज (सीटीसी) में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आईटीबीपी जिन हथियारों का इस्तेमाल करती है, वे 50 साल पुराने हैं और उनका आधुनिकीकरण ज़रूरी है.

ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीक में निवेश करने और उसे विकसित करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए आईटीबीपी प्रमुख ने कहा कि पारंपरिक तरीकों से चीन का मुक़ाबला करना शायद संभव न हो, क्योंकि उसने अपने हथियारों और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में काफ़ी निवेश किया है.

उन्होंने कहा, "अब पारंपरिक तरीकों से चीन का मुकाबला करना मुश्किल होगा, क्योंकि चीन ने अपने सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण में भारी निवेश किया है और वह आगे निकल गया है. लेकिन ड्रोन के ज़रिए छोटे देश बड़े देशों से लड़ सकते हैं, जैसा कि हमने रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका संघर्षों में देखा है."

कांग्रेस ने आईटीबीपी प्रमुख के बयान के बाद केंद्र की मोदी सरकार पर तीख़ा हमला बोला है और आरोप लगाया है. कांग्रेस ने कहा है, 'इस साल जुलाई से ही चीनी सैनिकों के साथ झड़प की खबरें आ रही हैं, लेकिन मोदी सरकार इन ख़बरों को दबाने में लगी रही.'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, "जहां एक तरफ़ चीन के सामने घुटने टेकने वाले प्रधानमंत्री की ओर से लगातार रियायतें देने का सिलसिला जारी है, इसी बीच आईटीबीपी के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए के साथ भारतीय सीमा के भीतर हालिया टकरावों में आईटीबीपी के प्रदर्शन की सराहना की है, जो बिल्कुल सही भी है. लेकिन प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है."

चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताता है. भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन मुद्दा सुलझ नहीं पाया है.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • भारत और चीन के बीच एलएसी पर सैन्य कमांडर स्तर की और वार्ताएं होंगी।

    Likely · Within weeks

Open Questions

  • सीमा पर तनाव कम करने के लिए सरकार की ठोस रणनीति क्या है?
  • क्या चीन ने वास्तव में भारतीय सीमा के भीतर तंबू गाड़े हैं?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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