सोनिया गांधी की किताब 'बिलॉन्गिंग' के प्रकाशन को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने जारी किया बयान
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पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा कि वह सोनिया गांधी की संस्मरण किताब 'बिलॉन्गिंग' की भारत में प्रकाशक नहीं है और प्रकाशन से पीछे हटने की रिपोर्ट को गलत बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
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Why It Matters
सोनिया गांधी की संस्मरण किताब 'बिलॉन्गिंग' का विमोचन 10 नवंबर 2026 को निर्धारित था और इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने प्रकाशन से पीछे हट गया है क्योंकि लेखिका ने संपादकीय बदलावों को अस्वीकार कर दिया था।
सोनिया गांधी की किताब को न छापने की रिपोर्ट पर पब्लिकेशन कंपनी ने जारी किया बयान
प्रकाशित 28 अगस्त 2026, 16:12 IST
अपडेटेड 4 घंटे पहले
पढ़ने का समय: 5 मिनट
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित संस्मरण किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ़ लव' को लेकर प्रकाशन कंपनी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बयान जारी कर बताया है कि वो भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है.
हालांकि, इससे पहले अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में यह दावा किया था कि पैंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इसके प्रकाशन से पीछे हट गई है.
अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रकाशक ने सोनिया गांधी से किताब के कुछ हिस्सों को संपादित करने और हटाने के लिए कहा था जिससे उन्होंने इनकार कर दिया.
वहीं, एक बयान में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा है कि वह भारत में 'बिलॉन्गिंग' की प्रकाशक नहीं है.
पेंगुइन ने बयान में क्या कहा?
अपने बयान में पेंगुइन ने कहा है, "पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में 'बिलॉन्गिंग' की प्रकाशक नहीं है. ये कहना कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 'बिलॉन्गिंग' को प्रकाशित न करने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि लेखिका ने संपादकीय बदलावों को ख़ारिज कर दिया था, यह परिस्थितियों को सटीक रूप से प्रदर्शित नहीं करता है."
पेंगुइन ने अपने बयान में कहा, "तथ्य की जांच करना और लेखक को ऐसी सिफ़ारिशें देना जो किताब और लेखक दोनों के हित में हो, एक प्रकाशक के रूप में हमारा विशेषाधिकार और ज़िम्मेदारी दोनों है."
किताब पर दिए गए संपादकीय सुझावों को पेंगुइन ने प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताया है और कहा है कि वह इसके प्रकाशन को लेकर तैयार और इच्छुक थी.
पेंगुइन ने कहा, "किताब पर चर्चाओं के दौरान पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का रुख़ यही था कि हम पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए तैयार और बेहद इच्छुक बने रहें."
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पेंगुइन ने यह भी कहा है कि वह आगे लेखिका के साथ हुई गोपनीय चर्चाओं पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी.
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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, सोनिया गांधी की किताब का विमोचन 10 नवंबर को निर्धारित था. पेंगुइन रैंडम हाउस की ही अमेरिका स्थित डिवीज़न अल्फ़्रेड ए नोप ने सबसे पहले इसकी घोषणा की थी.
नोप ने बताया था कि पहले प्रिंट में इस किताब की एक लाख कॉपियां तैयार की जाएंगी.
एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, पेंगुइन के पीछे हटने के बाद कई प्रकाशकों ने इस किताब के प्रकाशन में दिलचस्पी दिखाई है और हार्पर कोलिंस भारत में इस किताब के प्रकाशन और वितरण के लिए समझौते के क़रीब है.
इस किताब को लेकर दिए बयान में नोप ने इसे दुनिया की सबसे ताक़तवर महिला नेताओं में से एक का एक आकर्षक संस्मरण कहा था.
नोप ने कहा था, "यह संस्मरण प्यार, परिवार और एक बेहद दिलचस्प देश भारत की एक समृद्ध और आकर्षक कहानी बयां करता है."
नोप के बयान में सोनिया गांधी के हवाले से कहा गया था, "मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम आख्यान उनकी प्रेरणाओं, उनके कार्यों और यहां तक कि उनकी मानवीय कमियों की सच्चाई तक पहुंच पाए हैं. छह दशकों से मैं जिन सामाजिक और राजनीतिक बदलावों की गवाह रही हूं, मेरी कहानी पाठकों को उनका एक अनूठा नज़रिया भी पेश करेगी."
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस और उससे जुड़े संगठन तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक्स पर लिखा, "हमारी आदरणीय नेता सोनिया गांधी की आत्मकथा के प्रकाशन से प्रकाशक का मना करना अत्यंत चिंता का विषय है."
कमलनाथ ने सवाल किया, "श्रीमती गांधी जैसा वरिष्ठ व्यक्ति क्या लिखेगा और क्या नहीं, यह प्रकाशक तय करेगा? सवाल यह भी है कि प्रकाशक स्वयं यह कह रहा है या उस पर किसी का दबाव है?"
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिखा, "सोनिया गांधी जी की आने वाली किताब को पेंगुइन वर्ल्डवाइड कंपनी मूलस्वरूप में दुनियाभर में छापने को तैयार है पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में इसे लॉन्च करने के लिए बदलाव करवाना चाहता है. आखिर ऐसी कौन सी वजह या कौन सा दबाव है जो दुनिया भर में छापा जा रहा है उसे भारत में नहीं छाप सकते."
केरल कांग्रेस ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मोर का पेंगुइन का रास्ता रोक देना सिर्फ़ किसी एक बुज़ुर्ग की कल्पना है. बिलॉन्गिंग को आप तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता है."
महाराष्ट्र से कांग्रेस के विधायक असलम शेख़ ने एक्स पर लिखा, "अगर विपक्ष की एक वरिष्ठ नेता का संस्मरण बिना बदलावों और संपादन के प्रकाशित नहीं हो सकता है तो हम पेंगुइन इंडिया से पूछना चाहेंगे कि भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी की जगह को क्या हो गया है?"
उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में परेशान कर देने वाले सत्य को सुनने का साहन होना चाहिए ना कि चुपचाप उसे संपादित कर देना चाहिए."
वहीं पत्रकार मुकेश कुमार ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए एक्स पर कहा, "पेंगुइन इंडिया का सोनिया गांधी की आत्मकथा से पीछे हटना सामान्य घटना नहीं है. ये बताता है कि मौजूदा राज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कितनी तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं और प्रकाशन उद्योग कितने दबाव में काम कर रहा है."
पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने किताब के प्रकाशन से पीछे हटने को कायराना बताते हुए एक्स पर पोस्ट किया, "तो पेंगुइन सोनिया गांधी की किताब 'बिलॉन्गिंग' को प्रकाशित करने से इसलिए डरकर पीछे हट गया क्योंकि उसमें समकालीन राजनीतिक घटनाओं का विवरण, मोदी का अप्रिय चित्रण, संस्थानों पर 'आपातकाल जैसे' हमले और विभाजनकारी राजनीति से पोषित सांप्रदायिक विभाजन का ज़िक्र था. यह कायरता क्यों?"
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
हार्पर कोलिंस भारत में सोनिया गांधी की किताब 'बिलॉन्गिंग' का प्रकाशन और वितरण करेगा।
Likely · Within weeks
इस विवाद के कारण किताब की मांग में वृद्धि होगी।
Possible · Within months
Open Questions
- क्या पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के पीछे हटने के पीछे कोई राजनीतिक दबाव था?
- क्या हार्पर कोलिंस वास्तव में इस किताब का प्रकाशन करेगा?
- किताब में कौन से संपादकीय बदलाव सुझाए गए थे?
- क्या इस विवाद का किताब की बिक्री पर क्या प्रभाव पड़ेगा?


