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बिहार के भोजपुर में एनकाउंटर के बाद पुलिस पर उठे सवाल
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बिहार के भोजपुर में एनकाउंटर के बाद पुलिस पर उठे सवाल

Quick Look

बिहार के भोजपुर में पुलिस ने भरत भूषण तिवारी नाम के व्यक्ति का एनकाउंटर किया, जिसे पहले 'मानसिक अस्वस्थ' बताया गया था. इलाज के दौरान भरत भूषण की मौत हो गई. पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में गोली चलाई गई, लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों ने इसे 'कोल्ड ब्लडेड मर्डर' बताया है.

AI-generated summary

Why It Matters

बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस ने भरत भूषण तिवारी नाम के व्यक्ति का एनकाउंटर किया, जिसे पहले 'मानसिक अस्वस्थ' बताया गया था. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में गोली चलाई गई, जबकि परिजनों ने इसे हत्या बताया है.

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Author, सीटू तिवारी

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित 3 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

बिहार के भोजपुर में एक एनकाउंटर के बाद राज्य पुलिस सवालों के घेरे में है.

दरअसल भोजपुर (आरा) पुलिस ने बुधवार, 17 जून को भरत भूषण तिवारी नाम के व्यक्ति का एनकाउंटर किया था.

भरत भूषण को मंगलवार को पुलिस ने 'मानसिक अस्वस्थ' बताया था, लेकिन एक दिन बाद ही उनका एनकाउंटर कर दिया. इलाज के दौरान भरत भूषण की मृत्यु हो गई.

भोजपुर के एसपी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, "पुलिस टीम द्वारा खुद और लोगों की सुरक्षा के लिए गोली चलाई गई थी जो भरत भूषण के पांव में लगी."

हालांकि, गोली लगने से पहले भरत भूषण ने अपने फ़ेसबुक अकांउट से जो लाइव किया था, उसमें यह दिख रहा है कि उन्होंने अपनी पिस्टल पुलिस की तरफ फेंक दी थी. बीबीसी इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता.

क्या है पूरी घटना

बिहार के भोजपुर ज़िले के शाहपुर थाना क्षेत्र में बिलौटी नाम का गांव है. भरत भूषण तिवारी इसी गांव के रहने वाले थे. कुछ दिन पहले भरत भूषण ने एक फ़ेसबुक पोस्ट करके सरकारी कामकाज के तरीके पर नाराज़गी जताई थी और एक अधिकारी का 'एनकाउंटर' करने की बात कही थी.

भरत भूषण का यह पोस्ट वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस उनके घर गई. पुलिस का कहना है कि उन्होंने भरत भूषण को समझाने की कोशिश भी कि लेकिन उन्होंने (भरत ने) पिस्टल निकाल ली.

एक वीडियो में भरत भूषण की मां भी अपने बेटे को समझाती दिख रही हैं. ये सभी वीडियो भरत भूषण ने अपने फ़ेसबुक पेज पर डाले हैं.

16 जून को भोजपुर पुलिस ने एक बयान जारी किया. इसमें कहा गया, "पुलिस टीम जब संबंधित व्यक्ति (भरत भूषण) के घर पहुंची तो यह तथ्य सामने आया कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है. उन्हें तत्काल उचित इलाज के लिए मानसिक आरोग्यशाला भेजने की आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. संबंधित व्यक्ति के पास मौजूद हथियार और व्यक्ति पर नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके."

स्थानीय पत्रकार नेहा गुप्ता ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "भरत तीन दिन तक पुलिस को चुनौती देते रहे. कई बार उन्होंने फ़ेसबुक लाइव किया, पुलिस पर गोली चलाई. उनकी मांग थी कि जो वादा नेता और अधिकारी लोगों से करते हैं, उन्हें उसे पूरा करना चाहिए. वह पिछले साल बाढ़ के दौरान हुए कटाव का मुद्दा उठा रहे थे और इस पर सरकार की तरफ़ से कदम नहीं उठाए जाने से नाराज़ थे. वह इलाके में सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय थे."

'थाने में बिठा कर रखा और बेटे को गोली मार दी'

बीती 17 जून की सुबह तकरीबन नौ बजे भरत भूषण पर पुलिस ने आत्मसमर्पण का दबाव बनाया.

भोजपुर पुलिस के एसपी कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, "भरत भूषण अपने हाथ में पिस्टल लहराते हुए हवाई फ़ायरिंग कर रहा था. पुलिस और एसटीएफ़ लगातार आत्मसमर्पण करने को कह रही थी लेकिन वह रुक-रुककर फ़ायरिंग करता रहा जिससे पुलिस और आम लोगों की सुरक्षा पर ख़तरा बढ़ा."

"भरत को नियंत्रण में लेने के लिए एसटीएफ़ जवानों ने बुलेट प्रूफ़ जैकेट के साथ क्लोज कॉर्डनिंग की. लेकिन भरत ने फ़ायरिंग करनी जारी रखी जिसके बाद पुलिस को आत्मरक्षार्थ गोली चलानी पड़ी."

इस मामले में भोजपुर एसपी राज से बीबीसी ने फ़ोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अब तक उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

गोली लगने के बाद भरत भूषण को इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल ले जाया गया.

सदर अस्पताल के चिकित्सक एमएच अंसारी ने बताया, "मरीज को कमर के निचले हिस्से में चार गोलियां लगी थीं. गोली हम लोगों ने निकाल दी थीं लेकिन मरीज़ की हालत ठीक नहीं थी. उसे बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच (पटना) रेफ़र किया गया."

बाद में इलाज के दौरान भरत भूषण की पीएमसीएच में मौत हो गई.

भरत भूषण के पिता कासीनाथ तिवारी ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा, "सुबह (बुधवार) से हमको थाने में बैठा कर रखा गया और गांव में मेरे बेटे को गोली मार दी गई. मेरा बेटा कोई अपराधी नहीं था. उसका सिर्फ़ मानसिक संतुलन ठीक नहीं था. मुझे शाम में थाने से छोड़ा गया. पुलिस वालों ने मुझसे कहा कि उसके पांव में गोली लगी है. इतना पुलिस बल था और निहत्थे को ये लोग नहीं पकड़ सके. पुलिस वालों का प्लान मेरे बेटे को मारने का था."

सरेंडर कर दिया था तो उसे क्यों मारा?

बीते मंगलवार से ही पुलिस और भरत भूषण के बीच तनाव चल रहा था. भरत भूषण कभी अपने फ़ेसबुक पेज से लाइव आकर तो कभी इस तनाव का वीडियो डालकर सभी घटनाओं को सार्वजनिक कर रहे थे.

एनकाउंटर होने से पहले भी उन्होंने लाइव किया था. जिसमें एक मैदान में एक तरफ़ पुलिस खड़ी दिखती है और दूसरी तरफ़ भरत हैं जो अपनी बातें रखते हुए लाइव कर रहे थे. इस लाइव में वो अपनी पिस्टल पुलिस की तरफ फेंकते हुए दिखते हैं. लेकिन इसके बाद ही वीडियो ख़त्म हो जाता है.

हालांकि, पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया है, "भरत भूषण पुलिस पर लगातार रुक-रुककर फ़ायरिंग करता रहा."

भरत भूषण की मां आशा देवी का कहना है, "जवनिया गांव (बीते साल बाढ़ प्रभावित इलाका) से लोग आए थे कि उनके यहां मिट्टी भराव का काम नहीं हो रहा है. मेरा बेटा समाज का मुद्दा उठा रहा था. जब उसने सरेंडर कर दिया था तो पुलिस ने उसे क्यों मारा?"

'पुलिस को चैलेंज करने वाले को जवाब मिलेगा'

मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से ही सम्राट चौधरी का 'एनकाउंटर' को लेकर दिया गया बयान चर्चा में आया. पुलिस विभाग की कई मीटिंग्स के साथ-साथ पब्लिक मीटिंग में भी सम्राट चौधरी कहते रहे हैं, "बिहार में कानून से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता. जो कोई भी पुलिस को चैलेंज करेगा, उसे 48 घंटे में जवाब मिलेगा."

बता दें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा था कि राज्य में जाति को देखकर एनकाउंटर किए जा रहे हैं. 19 मई को तेजस्वी ने एक बयान में कहा था कि सरकार जाति को देखकर एनकाउंटर करवा रही है. उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार महिला सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है.

वहीं, 23 मई को जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने प्रेस कॉफ्रेंस करके कहा, "20 नवंबर 2025 से अब तक राज्य में 22 पुलिस एनकांउटर हुए जिसमें 6 अपराधी मारे गए. कुंदन ठाकुर, प्रियांशु दुबे, अभिजीत कुशवाहा, दयानंद मालाकार, रामधनी यादव और सोनू यादव जो अलग-अलग जातियों के हैं. ऐसे में तेजस्वी यादव का यह कहना कि किसी ख़ास जाति का एनकांउटर हो रहा है बिल्कुल गलत है."

पुलिस एनकाउंटर में 5 साल में 22 की मौत

साल 2022 में लोकसभा में गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए एक जवाब के मुताबिक, साल 2017 से 2022 के बीच बिहार में पुलिस के एनकाउंटर में 22 की मौत हुई. पूरे देश की बात करें तो पुलिस एनकांउटर में 655 मौत हुई थीं.

पब्लिक यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज़ से जुड़े सरफ़राज बीबीसी से कहते हैं, "यह एक कोल्ड ब्लडेड मर्डर है और पीयूसीएल इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग करता है. 80 के दशक में आदिवासियों-दलितों को नक्सली बताकर जिस तरह से अविभाजित बिहार में एनकाउंटर किया जा रहा था, वह दौर लौटता दिख रहा है."

Open Questions

  • क्या भरत भूषण ने वास्तव में पुलिस पर गोली चलाई थी?
  • क्या पुलिस ने आत्मरक्षा में ही गोली चलाई?
  • क्या यह एक सुनियोजित हत्या थी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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