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Backईरान: बेटी को आंखों के सामने गोली मारी गई, अब मां विदेश में रहकर लड़ रही है इंसाफ़ की जंग
ईरान: बेटी को आंखों के सामने गोली मारी गई, अब मां विदेश में रहकर लड़ रही है इंसाफ़ की जंग
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BBC हिंदी2 hours agoWorld6 min readIndiaView translation

ईरान: बेटी को आंखों के सामने गोली मारी गई, अब मां विदेश में रहकर लड़ रही है इंसाफ़ की जंग

ईरानी सुरक्षाबलों द्वारा अपनी बेटी की हत्या के बाद समीरा ने देश छोड़कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

Quick Look

ईरान में 16 वर्षीय सेवदा की सुरक्षाबलों द्वारा हत्या के बाद, उनकी मां समीरा ने न्याय की मांग की है। सरकारी उत्पीड़न और धमकियों के बावजूद, समीरा ने देश छोड़कर ईरानी सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है और जिम्मेदार अधिकारियों को बेनकाब करने का संकल्प लिया है।

AI-generated summary

Why It Matters

ईरान में हिजाब नियमों और आर्थिक स्थिति को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों को सरकार द्वारा बलपूर्वक कुचले जाने की खबरें सामने आई हैं।

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समीरा कहती हैं कि पहले उन्हें राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वह बीबीसी पैनोरमा से कहती हैं, "मैं ईरान में सेल्स का काम करती थी। ब्यूटी प्रोडक्ट्स बेचती थी।"

लेकिन जिस दिन ईरानी सुरक्षाबलों ने उनकी आंखों के सामने उनकी इकलौती बेटी को गोली मार दी, उस दिन सब कुछ बदल गया।

16 साल की सेवदा ईरान की सख़्त सरकार के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों में शामिल थीं। ये प्रदर्शन इस साल पूरे देश में फैल गए थे।

समीरा कहती हैं कि बेटी की मौत का दुख बाद में ग़ुस्से में बदल गया। उनका आरोप है कि ईरानी अधिकारियों ने सेवदा का शव तलाशने में मदद करने के बजाय उनके रास्ते में रुकावटें खड़ी कीं।

वह कहती हैं, "मुझे एहसास हुआ कि सेवदा को तलाश लेना अंत नहीं था। इसके बाद मुझे जिस तरह परेशान किया गया, वह तो बस शुरुआत थी।"

समीरा ख़तरनाक पहाड़ी रास्तों से पैदल चलकर ईरान से बाहर निकल गईं। अब वह विदेश में छिपकर रह रही हैं। वह ख़ुद को "सरकार से लड़ रही अकेली महिला की सेना" बताती हैं।

बेटी की मौत के बाद वह इंसाफ़ चाहती हैं और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग कर रही हैं। वह उन सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों के नाम सामने लाने में जुटी हैं, जिन्हें वह प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों के लिए ज़िम्मेदार मानती हैं।

वह कहती हैं, "मुझे मारने से पहले वे मुझे मौत के क़रीब पहुंचा देंगे, लेकिन मुझे तलाशना आसान नहीं होगा। सामान्य ज़िंदगी में लौटना? अब वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है।"

लंदन स्थित ईरानी दूतावास ने पैनोरमा से कहा कि शांतिपूर्ण और जायज़ प्रदर्शनों को अमेरिका समेत विदेशी ताक़तों ने अपने हाथ में ले लिया था। दूतावास के मुताबिक़, इन ताक़तों ने हिंसा को बढ़ावा दिया, हथियार और उपकरण उपलब्ध कराए और आम लोगों की सुरक्षा को ख़तरे में डाला।

सेवदा की मौत 9 जनवरी को हुई थी। उस दिन वह और समीरा राजधानी तेहरान के बाहरी इलाक़े में हो रहे एक बड़े प्रदर्शन में शामिल थीं।

समीरा कहती हैं, "सेवदा उन्हें अपने ख़यालों में ज़िंदा रखती थी और हमेशा उनके विरोध के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती थी।"

समीरा के मुताबिक़, प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या से ईरान की सरकार घबरा गई थी। अगले दिन देखते ही गोली मारने का आदेश जारी किया गया।

समीरा उस जगह का हाल बताते हुए कहती हैं, "ऐसा लग रहा था कि वहां लोगों से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी थे। मुझे नहीं पता कि उन्होंने एक ही दिन में इतने सारे बसीज और आईआरजीसी के जवान कैसे जमा कर लिए।"

समीरा कहती हैं, "हमारे दाहिनी ओर एक इमारत की छत से स्नाइपर ने गोली चलाई। गोली शायद छत से ही आई थी। वह सेवदा के दिल को चीरते हुए निकल गई।"

वह कहती हैं, "मैं चीख भी नहीं पाई। मैं बस सेवदा को देखती रही। उसका बेजान शरीर ज़मीन पर पड़ा था। उसके मुंह और नाक से ख़ून बह रहा था। मैं यक़ीन नहीं कर पा रही थी कि वह मर रही थी। उसकी आंखें अब भी मेरी ओर देख रही थीं।"

समीरा किसी तरह सेवदा को अस्पताल ले गईं। वहां उन्हें बताया गया कि सेवदा का ऑपरेशन किया जा रहा है। लेकिन तभी दरवाज़ा खुला और उन्होंने देखा कि सेवदा के शव को एक बैग में बंद किया जा चुका था।

समीरा कहती हैं कि सेवदा का शव मिलना अधिकारियों के साथ उनकी लड़ाई की सिर्फ़ शुरुआत थी। उनका कहना है कि सेवदा के शव को दफ़नाने के लिए ले जाने की अनुमति तभी मिली, जब वह यह कहने के लिए तैयार हुईं कि उनकी बेटी की मौत सुरक्षाबलों की गोली से नहीं, बल्कि "आतंकवादियों" की वजह से हुई थी।

समीरा को पूरा भरोसा है कि अधिकारियों ने डर की वजह से उन्हें यह प्रस्ताव दिया था। इस इंटरव्यू के लिए मजबूर किए जाने से बचने के लिए समीरा 40वें दिन की रस्म पूरी होते ही ईरान से भाग गईं।

समीरा कहती हैं कि विदेश पहुंचने के बाद भी उन्होंने विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देना जारी रखा। इसके बाद ईरान में मौजूद न होने के बावजूद उन पर कई आरोप लगाए गए। इनमें "मोहारेबेह" यानी ईश्वर के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने का आरोप भी शामिल है।

इन ख़तरों के बावजूद समीरा चुप रहने को तैयार नहीं हैं। वह कहती हैं, "सेवदा को तलाशते हुए मैंने जितने शव देखे और जितने बैग खोले, उन सबने मुझे अपनी आख़िरी सांस तक इस्लामी गणराज्य के ख़िलाफ़ लड़ने की ताक़त दी।"

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • समीरा के खिलाफ ईरानी अदालतों में कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

    Likely · Within months

Open Questions

  • प्रदर्शनों में मरने वालों की सटीक संख्या क्या है?
  • समीरा के खिलाफ लगाए गए आरोपों का भविष्य क्या होगा?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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