मोहन भागवत ने 'सत्ता परिवर्तन' पर जो कहा उस पर मचा राजनीतिक घमासान, पक्ष-विपक्ष में बंटे नेता
विजयादशमी के मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारत में 'रिजीम चेंज' की कोशिशों से सावधान रहने की बात कही, जिस पर राजनीतिक दलों की ओर से समर्थन और विरोध में तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं।
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विजयादशमी पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारत में बाहरी ताक़तों द्वारा 'रिजीम चेंज' की कोशिशों से आगाह किया। उनके इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत एनडीए नेताओं ने समर्थन जताया, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शनों का अपमान बताया।
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Why It Matters
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी के अपने वार्षिक संबोधन में विभिन्न देशों में हुए राजनीतिक बदलावों का हवाला देते हुए भारत को सतर्क रहने की चेतावनी दी।
विजयादशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में दुनिया के अलग-अलग देशों में हुए राजनीतिक बदलावों का ज़िक्र करते हुए भारत में सत्ता परिवर्तन (रिजीम चेंज) की कोशिशों को लेकर 'आगाह' किया.
नागपुर में अपने भाषण में भागवत ने कहा कि कुछ ताक़तें अलग-अलग देशों में 'रिजीम चेंज' की कोशिश कर रही हैं और भारत को भी ऐसी कोशिशों से सावधान रहने की ज़रूरत है.
भागवत के इस बयान पर राजनीतिक जगत से समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
जहां कुछ नेताओं ने उनके बयान का समर्थन किया है, वहीं विपक्षी नेताओं ने लोकतांत्रिक तरीक़े से विरोध और सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतंत्र का हिस्सा बताया है.
भागवत ने क्या कहा?
मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भारत को 'तोड़ने' की कोशिशें सफल नहीं होंगी.
उन्होंने कहा कि यह सोचना ग़लत है कि सत्ता बदलने से परिस्थितियां बदल जाएंगी. उन्होंने कहा, "ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है और आगे भी ऐसा नहीं होगा."
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) में कथित अपारदर्शिता को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भागवत ने यह भी कहा कि आंदोलनों से बदलाव नहीं आता और समस्याओं का समाधान समाज के भीतर से ही निकलता है.
मोहन भागवत ने अपने विजयादशमी संबोधन में फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि दुनिया में कुछ ताक़तें अपने हितों के लिए दूसरे देशों में 'रिजीम चेंज' की कोशिश करती हैं.
उन्होंने विजयादशमी के वार्षिक संबोधन में कहा, "भारत उनका मुख्य निशाना है, क्योंकि भारत प्रगति कर रहा है. इन ताक़तों को पता है कि पिछले कुछ दशकों में निर्णायक नीतियों के साथ भारत जिस तरह आगे बढ़ा है, उसे वे बाधित नहीं कर सकते... इसलिए वे भारत और संघ को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं."
भागवत ने यह भी आगाह किया कि जब विरोध प्रदर्शन राजनीतिक होते हैं या उन्हें उकसाया जाता है, तो उनका इस्तेमाल तनाव, अराजकता और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए किया जाता है.
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारतीयों को सतर्क रहने की ज़रूरत है, क्योंकि कुछ ताक़तें देश को विकसित राष्ट्र बनने के रास्ते से भटकाना चाहती हैं.
उन्होंने कहा, "यह स्पष्ट है... दुनिया में कई ऐसी ताक़तें हैं जो चाहती हैं कि भारत हार जाए."
उन्होंने कहा, "पश्चिम से एक तूफ़ान आ रहा है, जो संस्कृति, व्यवस्था और सुरक्षा से नफ़रत करता है. यह सब कुछ नष्ट करना चाहता है."
बयान का विरोध
सीपीएम नेता वृंदा करात ने भागवत पर हमला करते हुए पीटीआई से कहा, "भागवत जी, आप समझ लीजिए. ये भारत है, संविधान है. ये आरएसएस की शाखा कतई नहीं है. आप संविधान को ठीक से पढ़िए. यहां वोट देने का अधिकार है, लोकतांत्रिक तरीक़े से विरोध का अधिकार है, प्रोटेस्ट करने का अधिकार है. आपकी शाखा में ये अधिकार नहीं हैं. आपकी शाखा में कोई औरत घुस नहीं सकती. आप हमें जनवाद के बारे में मत समझाइए."
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद मनोज झा ने कहा, "मोहन भागवत जी बिलकुल परेशान ना हों, ये गांधी का देश है. आप लोग नहीं मानते होंगे ये मैं जानता हूं क्योंकि आप लोगों की विचारधारा गांधी जी के ख़िलाफ़ खड़ी है. फ्रांस के पास गांधी नहीं है. अल्बानिया के पास गांधी नहीं है. गांधी का असहयोग आंदोलन हमारा प्रतिमान है. हम अपने प्रतिमान के आधार पर निरंकुश सत्ता को चैलेंज करते रहेंगे. आप अपने डर को अराजकता का नाम मत दीजिए."
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने मोहन भागवत पर तंज़ कसते हुए कहा, "भागवत साहब, समाधान तलाशने के लिए इस समय एक आंदोलन चल रहा है. आपके मन में जो बात है, हम वही कर रहे हैं. आप भी देश में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं. आप भी मानते हैं कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार बेहतर थी और हमने ग़लत लोगों को सत्ता में बैठा दिया है. आपके मन की भावनाओं को हम अच्छी तरह जानते हैं."
संजय राउत बोले, "आप भी चाहते हैं कि मोदी और शाह जैसे लोग सत्ता से जाएं, क्योंकि उन्होंने देश का बहुत नुक़सान किया है. इसलिए हम जो आंदोलन चला रहे हैं, वह देश और समाज के हित में है."
भागवत के सपोर्ट में उठी आवाज़ें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सत्तारूढ़ एनडीए के घटक दलों के नेताओं ने मोहन भागवत के बयान से सहमति जताई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, "नागपुर में शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव के दौरान परम पूज्य सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत जी का प्रेरणादायक संबोधन. उन्होंने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता की ज़रूरत और समाज के चरित्र को मजबूत करने समेत कई मुद्दों पर विस्तार से बात की."
पीएम मोदी ने लिखा, "उन्होंने (मोहन भागवत) सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता पर ख़ास ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि ये भावनाएं हर आरएसएस स्वयंसेवक के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं."
उत्तर प्रदेश के मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने कहा, "भारत बुद्ध की धरती है, यह युद्ध की जगह नहीं है. लोकतंत्र में असहमति जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसकी आड़ में अराजकता फैलाने की इजाज़त कहीं नहीं है. अगर कोई अराजकता के ज़रिए बदलाव चाहता है, तो उसे लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता. यह व्यवस्था को तोड़ने वाली बात है. मैं मोहन भागवत के इस बयान का समर्थन करता हूं."
वहीं शिवसेना नेता आनंद दुबे ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "कुछ लोगों के मन में निश्चित तौर पर यह दुर्भावना है कि हमारे भारत में आगज़नी हो. यहां भी अल्बानिया, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे हालात बनें. लेकिन यह भारत है. यह वह धरती है जहां भगवान राम और भगवान कृष्ण ने जन्म लिया. यह संतों और ऋषि-मुनियों की धरती है."
"आज मोहन भागवत जी ने भी कहा कि कुछ लोग भारत को तोड़ना चाहते हैं और देश में हिंसा फैलाना चाहते हैं. वह सच कह रहे हैं कि ऐसे लोगों के इरादे भारत में कभी पूरे नहीं होने दिए जाएंगे."
सत्ता परिवर्तन यानी रिजीम चेंज की बात कहां से उठी?
सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने गुरुवार, 15 अक्तूबर को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि वो रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं.
बीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को 'अराजकता' फैलाने और 'रिजीम चेंज' की कोशिशों वाला आंदोलन करार दिया था.
इस पर प्रशांत भूषण ने कहा था, "हां, सभी लोग रिजीम चेंज चाहते हैं."
उन्होंने कहा, "रिजीम चेंज कराना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है. हमारे संविधान में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध करना कोई अपराध नहीं है. और इसलिए अब ये सचमुच रिजीम चेंज की लड़ाई है. इस तरह की तानाशाह की सरकार इस देश में नहीं चल सकती, जोकि हमारे देश में सारे लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल रही हो और जो हमारे चुनावी लोकतंत्र को कुचल रही हो."
उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कॉकरोच जनता पार्टी और कांग्रेस पर और हमलावर हो गई और उसने आरोप लगाया कि 'युवाओं को गुमराह करके देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा रही है.'
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी प्रत्यक्ष रूप से और अपने समर्थक संगठनों के माध्यम से 'अराजकता' फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.
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चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे
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- किन विशिष्ट ताकतों द्वारा भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जा रही है?
- चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलनों का राजनीतिक दलों पर क्या असर होगा?


