इसराइलः नेतन्याहू के विरोधी आइज़नकोट को सरकार बनाने का न्योता, अरब पार्टियां बनीं 'किंगमेकर'
चुनाव में किसी गठबंधन को पूर्ण बहुमत न मिलने के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने आइज़नकोट को नई गठबंधन सरकार बनाने का मौका दिया है।
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इसराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने विपक्षी नेता गादी आइज़नकोट को नई गठबंधन सरकार बनाने का जिम्मा सौंपा है। चुनाव में किसी भी गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। आइज़नकोट के पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन होंगे, जिसमें 14 दिन का विस्तार शामिल है।
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Why It Matters
इसराइल में 2019 से 2022 के बीच पांच बार आम चुनाव हुए क्योंकि नेतन्याहू और उनके प्रतिद्वंद्वी सरकार गठन के लिए आवश्यक सहयोग बनाने में नाकाम रहे। 2020 में नेतन्याहू और बेनी गैंट्ज़ के बीच सत्ता-साझेदारी समझौता हुआ था।
इसराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने कहा है कि वह विपक्षी नेता गादी आइज़नकोट को नई गठबंधन सरकार बनाने का जिम्मा सौंपने का फ़ैसला किया है.
पिछले सप्ताह हुए चुनाव के बाद न तो गादी आइज़नकोट के अगुवाई वाले गठबंधन को और न ही प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की पार्टी के गठबंधन को सरकार बनाने के लिए ज़रूरी बहुमत हासिल हुआ था. इसके बाद राष्ट्रपति कई राजनीतिक पार्टियों से बातचीत कर रहे थे.
गादी आइज़नकोट के पास अब नई सरकार बनाने की कोशिश करने के लिए 28 दिन होंगे, जिसमें 14 दिन का संभावित विस्तार भी शामिल है.
आइज़नकोट ने एक्स पर लिखा, "अब राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय आ गया है. मैं यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा कि हम इसके योग्य हों."
इसराइल में आज तक किसी भी राजनीतिक दल को संसद में पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. यही वजह है कि वहां की सभी सरकारें गठबंधन के आधार पर बनी हैं.
नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी और उसके धुर दक्षिणपंथी और धुर-रूढ़िवादी यहूदी सहयोगियों ने 120 सीटों वाली संसद में 53 सीटें जीतीं, जबकि आइज़ेनकोट की मध्यमार्गी याशर पार्टी और उनके गठबंधन की तीन अन्य यहूदी विपक्षी पार्टियों ने 48 सीटें जीतीं.
अरब मतदाताओं की भारी भागीदारी के बाद, अरब नेतृत्व वाले दो गठबंधनों, यूनाइटेड अरब लिस्ट (रा'म) और जॉइंट लिस्ट ने मिलकर 19 सीटें जीतीं. इससे वे संभावित किंगमेकर के रूप में उभरे.
हालांकि, यहूदी पार्टियों में से एक को छोड़कर बाकी सभी ने चुनाव से पहले अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने के लिए सहयोग न करने का वादा किया था.
राष्ट्रपति हर्ज़ोग के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि सभी पक्षों से बातचीत करने के बाद, आइज़नकोट को सरकार बनाने मौका देने का फ़ैसला किया गया है.
बयान में कहा गया है कि उन्होंने आइज़नकोट और नेतन्याहू दोनों को इस फ़ैसले की जानकारी दे दी है.
बयान के अनुसार, नवनिर्वाचित संसद सदस्यों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत के बाद, आइज़नकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए 67 और नेतन्याहू को 46 सिफारिशें मिलीं.
इसराइल के राष्ट्रपति के पास यह तय करने का व्यापक अधिकार होता है कि किस नेता के पास गठबंधन सरकार बनाने की सबसे बेहतर संभावना है.
इसलिए राष्ट्रपति के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि वह सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी के नेता को ही सरकार गठन का न्योता दें.
चुनाव परिणामों से सरकार के गठन के लिए तीन संभावित विकल्प सामने आए थे: नेतन्याहू और आइज़नकोट दोनों को शामिल करते हुए एक नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट, नेतन्याहू और आइज़नकोट के गुट से अलग हुए सदस्यों को शामिल करते हुए एक दक्षिणपंथी गठबंधन, या अरब पार्टियों द्वारा समर्थित आइज़नकोट के नेतृत्व वाली सरकार.
आइज़नकोट और उनके गठबंधन के एक सदस्य को छोड़कर बाकी सभी सदस्यों ने पहले अरब पार्टियों के साथ सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया था, लेकिन ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि एक समझौता हो सकता है.
वह अति-रूढ़िवादी दलों के साथ समझौता करने का प्रयास भी कर सकते थे, लेकिन वह भी मुश्किल होगा.
यूनिटी गवर्नमेंट के लिए पहले भी उदाहरण मौजूद हैं. 2020 में, लगातार तीन चुनावों के बाद भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने पर बिन्यामिन नेतन्याहू और उनके मध्यमार्गी प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज़ ने सत्ता-साझेदारी समझौते पर सहमति व्यक्त की थी, जिसमें दोनों ही सत्ता का नेतृत्व बारी-बारी करते रहे.
राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श के दौरान हर्ज़ोग ने कहा था कि यदि एक और चुनाव से बचना है और एक स्थिर सरकार बनानी है, तो उन्हें उम्मीद है कि "राजनीतिक दल और उनके प्रतिनिधि यह समझेंगे कि मौजूदा परिस्थितियों में हर वादा और हर प्रतिबद्धता को पूरा करना संभव नहीं है."
वर्ष 2019 से 2022 के बीच का दौर इसराइली राजनीति के सबसे अधिक बिखरे और अस्थिर दौरों में से एक माना जाता है.
इस अवधि में पांच बार आम चुनाव कराए गए, क्योंकि नेतन्याहू और उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बार-बार सरकार गठन के लिए आवश्यक सहयोग और सहमति बनाने में नाकाम रहे.
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
आइज़नकोट 28 दिन के भीतर गठबंधन सरकार बनाने का प्रयास करेंगे
Likely · Within weeks
अगर आइज़नकोट असफल रहते तो नेतन्याहू को सरकार बनाने का मौका मिल सकता है
Possible · Within weeks
Open Questions
- क्या आइज़नकोट 28 दिन के भीतर सरकार बनाने में सफल होंगे?
- क्या अरब पार्टियां सरकार में शामिल होंगी या बाहर से समर्थन देंगी?
- क्या नेतन्याहू की लिकुड पार्टी आइज़नकोट के गठबंधन में शामिल होगी?

