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Backकीनिया के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को देश छोड़ने का आदेश क्यों दिया?
कीनिया के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को देश छोड़ने का आदेश क्यों दिया?
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BBC हिंदी1 hour agoBusiness3 min readIndiaView translation

कीनिया के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को देश छोड़ने का आदेश क्यों दिया?

कीनिया सरकार का कहना है कि कंपनी से देश को उतना फायदा नहीं मिल रहा है, जितना मिलना चाहिए। राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कंपनी से कहा है कि वह अपना सामान समेटकर चली जाए।

Quick Look

कीनिया के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने टाटा केमिकल्स को देश छोड़ने का आदेश दिया है। उनका आरोप है कि कंपनी सोडा ऐश का निर्यात कर रही है, जबकि इसे कीनिया में ही प्रोसेस करके कांच और केमिकल बनाए जा सकते हैं और इससे देश को पर्याप्त फायदा नहीं मिल रहा है।

AI-generated summary

Why It Matters

लेक मगाडी में इस फैक्ट्री का इतिहास 1911 से जुड़ा है और टाटा केमिकल्स ने 2005 में ब्रनर मॉन्ड ग्रुप का अधिग्रहण किया था।

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भारत की बड़ी केमिकल कंपनियों में शामिल टाटा केमिकल्स को कीनिया छोड़ने के लिए कहा गया है. कीनिया सरकार का कहना है कि कंपनी से देश को उतना फायदा नहीं मिल रहा है, जितना मिलना चाहिए.

राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कंपनी से कहा है कि वह "अपना सामान समेटकर चली जाए."

उनका आरोप है कि कंपनी सोडा ऐश का निर्यात कर रही है, जबकि इस खनिज को कीनिया में ही प्रोसेस करके कांच और केमिकल बनाए जा सकते हैं.

राष्ट्रपति रूटो ने कहा कि सरकार ने कंपनी का काम संभालने के लिए नए निवेशकों की पहचान कर ली है. इसका मकसद कीनिया में ज्यादा रोजगार और निवेश लाना है.

टाटा केमिकल्स ने कहा है कि वह सरकार के फै़सले का सम्मान करती है. कंपनी ने कहा कि वह "बचे हुए मामलों को सुलझाने के लिए उचित कानूनी और नियामक प्रक्रियाओं के तहत रचनात्मक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है."

रूटो ने ये बातें काजियाडो काउंटी के दौरे के दौरान कहीं. टाटा केमिकल्स मैगाडी का प्लांट इसी इलाके में है.

टाटा ग्रुप का हिस्सा टाटा केमिकल्स लेक मैगाडी में काम करती है. यह जगह कीनिया की राजधानी नैरोबी से करीब 120 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है.

कंपनी हर साल 3.5 लाख टन से ज्यादा सोडा ऐश का निर्यात करती है. इसे भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य-पूर्व और अफ्रीका के दूसरे देशों में भेजा जाता है.

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक़, कीनिया प्राकृतिक सोडा ऐश का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है. सोडा ऐश को आम तौर पर सोडियम कार्बोनेट कहा जाता है. दुनिया में इसके कुल उत्पादन में कीनिया की हिस्सेदारी करीब 1 फ़ीसदी है.

सोडा ऐश मुख्य रूप से प्राकृतिक खारे पानी या ट्रोना नाम के खनिज से बनाया जाता है. इसका इस्तेमाल कांच, केमिकल, बैटरी और दूसरी औद्योगिक चीज़ें बनाने में होता है.

टाटा केमिकल्स कीनिया की सबसे बड़ी खनिज निर्यातक कंपनियों में से एक है और अफ्रीका की सबसे बड़ी सोडा ऐश उत्पादक कंपनी है.

कंपनी लेक मैगाडी से ट्रोना निकालती है और उसे प्रोसेस करके सोडा ऐश बनाती है. कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक़, सोडा ऐश कांच बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक अहम पदार्थ है. इसका इस्तेमाल डिटर्जेंट, केमिकल, पानी की सफाई, कपड़ा और काग़ज़ बनाने में भी होता है.

कंपनी की 2024 की वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक़, उसने करीब 2.45 लाख टन सोडा ऐश बेचा और उसका कारोबार 7.87 करोड़ डॉलर का रहा.

कंपनी में करीब 500 लोग काम करते हैं. कंपनी का कहना है कि उसके सामुदायिक कार्यक्रमों से मैगाडी के आसपास करीब 30,000 लोगों को फायदा मिलता है. इनमें पानी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और दूसरी तरह की मदद शामिल है.

लेकिन राष्ट्रपति रूटो का कहना है कि कंपनी कीनिया के लिए पर्याप्त काम नहीं कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी देश के प्राकृतिक संसाधनों को बाहर ले जा रही है.

उन्होंने स्वाहिली में कहा, "टाटा केमिकल्स मैगाडी के पास 100 साल से कॉन्ट्रैक्ट है, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया. मैंने उनसे कुछ दिन पहले कहा था कि अपना सामान समेटो और चले जाओ."

उन्होंने कहा, "उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया है. उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री भी नहीं बनाई है."

टाटा केमिकल्स ने क्या कहा?

टाटा केमिकल्स ने एक बयान में कहा कि 2005 में मगाडी प्लांट का अधिग्रहण करने के बाद से उसने "कीनिया की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाई है और यह प्लांट अब भी हमारे कारोबार का अभिन्न हिस्सा है."

रूटो की यह टिप्पणी कीनिया के खनन मंत्री के उस निर्देश के करीब पांच हफ्ते बाद आई है, जिसमें टाटा केमिकल्स मगाडी को अपना काम रोकने के लिए कहा गया था. रिपोर्टों के मुताबिक़, इसकी वजह रॉयल्टी का भुगतान न करना और दूसरी नियामकीय शर्तों को पूरा न करना बताई गई थी.

कंपनी ने कहा कि उसने "मंत्रालय की ओर से उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत जवाब दिया है." इसमें लागू नियामकीय नियमों के पालन से जुड़ी जानकारी भी शामिल है.

कंपनी ने कहा कि अब वह अपने जवाब की समीक्षा और आगे के निर्देश का इंतज़ार कर रही है.

लेक मगाडी में इस फैक्ट्री का इतिहास 1911 से जुड़ा है. 1928 में कीनिया सरकार के साथ एक बड़ा माइनिंग लीज़ समझौता किया गया था.

2005 में टाटा केमिकल्स ने ब्रिटेन की कंपनी ब्रनर मॉन्ड ग्रुप का अधिग्रहण किया था. इसी के साथ उसने इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभाली.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • टाटा केमिकल्स और कीनिया सरकार के बीच कानूनी और नियामक प्रक्रियाओं पर बातचीत होगी।

    Likely · Within weeks

Open Questions

  • क्या टाटा केमिकल्स कानूनी रूप से कीनिया में बनी रहेगी?
  • नए निवेशक कौन होंगे?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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