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Census Teacher Rides Horse in Jharkhand's Remote Areas, Wins Hearts
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BBC हिंदी5/25/2026World4 min readIndia

Census Teacher Rides Horse in Jharkhand's Remote Areas, Wins Hearts

Quick Look

  • A para-teacher in Jharkhand's Garhwa district is gaining attention for conducting the census on horseback.
  • Munna Prasad Gupta uses his horse to navigate remote villages, citing fuel scarcity and difficult terrain, and has won praise from locals and officials.

AI-generated summary

Why It Matters

A para-teacher in Jharkhand's Garhwa district, Munna Prasad Gupta, has become a social media sensation for using his horse to conduct the census in remote areas. This method addresses challenges like fuel scarcity and difficult terrain.

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Author, मोहम्मद सरताज आलम

पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए गढ़वा, झारखंड से

प्रकाशित 12 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

झारखंड के गढ़वा जिले से जनगणना कर रहे एक शिक्षक सुर्खियों में हैं. ये शिक्षक सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रहे हैं.

ये शिक्षक जनगणना के दौरान गढ़वा के दूरदराज इलाकों में सरपट दौड़ते भूरे रंग के एक वफादार घोड़े पर बैठे दिखाई दे रहे हैं. कंधे पर जनगणना का बस्ता, सिर पर सफेद टोपी और शरीर पर सफेद यूनिफॉर्म पहने ये शिक्षक मुन्ना प्रसाद गुप्ता हैं.

दरअसल गुप्ता जिले के धुरकी ब्लॉक के टाटीदीरी गांव में स्थित एक स्कूल में पैरा शिक्षक हैं.

झारखंड में संविदा या मानदेय पर नियुक्त किए गए शिक्षकों को पैरा टीचर कहते हैं. इन्हें दुर्गम इलाकों या नियमित शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए अस्थायी तौर पर रखा जाता है.

मुन्ना प्रसाद गुप्ता की तरह विद्यालय के बाक़ी शिक्षक भी झारखंड में 16 मई से शुरू हुई जनगणना 2027 की प्रक्रिया का हिस्सा हैं.

14 जून तक चलने वाली जनगणना के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना होगी. ज़िला शिक्षा विभाग ने 43 साल के शिक्षक मुन्ना प्रसाद गुप्ता को इस काम के लिए चुना है. वे पहली बार जनगणना के काम का हिस्सा बने हैं.

जनगणना में घोड़ा

मुन्ना प्रसाद गुप्ता के सामने एक तरफ जनगणना के लिए दूरदराज गांवों में जाने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ पेट्रोल की किल्लत भी है.

इस परिस्थिति को देखते हुए पारा शिक्षक ने जनगणना के काम के लिए एक अनोखा तरीका निकाला है. अब वे इस काम के लिए अपने घोड़े का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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दूरदराज गांवों में कई बस्तियां ऐसी हैं, जहां पहुंचने के लिए सिर्फ संकरे कच्चे रास्ते और पगडंडियां हैं.

ऐसा ही एक गांव पनघटवा है, जो टाटीदीरी से तीन किलोमीटर दूर है. समतल जमीन की कमी के कारण गांव में घर इधर-उधर और ऊंचाई पर बने हैं.

पनघटवा गांव निवासी अनिल कुमार का घर मुख्य सड़क से करीब साढ़े तीन फीट नीचे खेतों के पास है.

घोड़े से अनिल कुमार के घर जनगणना करने पहुंचे शिक्षक मुन्ना प्रसाद गुप्ता को देखकर अनिल कुमार उत्साहित हैं.

वह कहते हैं, "मुख्य सड़क से मोटरसाइकिल लेकर इन इलाकों में आना-जाना काफी मुश्किल है. इसलिए गुरुजी का घोड़े से आना सही कदम है."

क्या घोड़े के इस्तेमाल के पीछे संकरे कच्चे रास्ते और पगडंडियां भी एक वजह हैं?

इस सवाल पर स्थानीय निवासी सलीम अंसारी कहते हैं, "नहीं, इसके कई और भी कारण हैं, जैसे पेट्रोल की किल्लत और बढ़ती कीमतें."

शिक्षक मुन्ना प्रसाद गुप्ता सहमति जताते हुए कहते हैं कि वह घोड़े का इस्तेमाल कर पेट्रोल और डीजल बचाने की छोटी सी कोशिश कर रहे हैं.

वह उत्साह से कहते हैं, "मैंने मोदीजी की उस अपील को अपनाया है, जिसमें उन्होंने पेट्रोल और डीजल का कम इस्तेमाल करने की बात कही थी."

स्थानीय लोगों का क्या कहना है?

शिक्षक मुन्ना प्रसाद गुप्ता के घर में सामाजिक और धार्मिक तौर पर पारंपरिक रूप से घोड़ों का इस्तेमाल कई दशकों से उनके पिता के दौर से होता आ रहा है.

यही वजह है कि बचपन में ही मुन्ना प्रसाद गुप्ता ने अपने पिता से घुड़सवारी सीखी थी.

स्थानीय निवासी सलीम अंसारी कहते हैं, "बचपन में मिली वही सीख आज उनके काम आ रही है."

एक अन्य बुज़ुर्ग जानकी सिंह का मानना है कि जनगणना कार्य के लिए मोबाइल नेटवर्क की लुकाछिपी और घरों में लोगों की अनुपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना अधिकतर शिक्षक कर रहे हैं.

जानकी सिंह कहते हैं, "लेकिन मुन्ना गुरुजी के मामले में ज़रा फर्क है, वह जहां पहुंचते हैं लोग घोड़े के आकर्षण की वजह से खुद ही एकत्र होने लगते हैं और जनगणना कार्य में उनको खुल कर सहयोग करते हैं."

गढ़वा ज़िला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रज़ा, शिक्षक मुन्ना प्रसाद के तेज़ी से किए जा रहे जनगणना कार्य से काफी खुश दिखाई दिए.

उनका मानना है कि मोटरसाइकिल छोड़ कर जनगणना कार्य के लिए घोड़े के इस्तेमाल से लोगों तक एक सकारात्मक संदेश पहुंचा है.

एक अन्य 42 वर्षीय महिला शांति देवी भी शिक्षक मुन्ना प्रसाद से खासी प्रभावित हैं.

वह कहती हैं, "मैं जनगणना कार्य करते किसी शिक्षक को लोगों के घरों तक घोड़े से आते-जाते पहली बार देख रही हूँ."

लोगों की अलग-अलग लेकिन उत्साह बढ़ाने वाली प्रतिक्रियाओं से शिक्षक मुन्ना प्रसाद खासे खुश दिखाई दे रहे हैं.

वह कहते हैं, "यह अनुभव बहुत ही अद्भुत है. मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि घोड़े का प्रयोग जनगणना जैसे काम के लिए करूंगा."

उनका मानना है कि घोड़े से जाने की वजह से लोगों ने उनको हाथों हाथ लिया और जनगणना में भरपूर सहयोग किया.

शिक्षक मुन्ना प्रसाद गुप्ता के उत्साह का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस दिन झारखंड में जनगणना शुरू हुई, वह अवकाश का दिन था.

लेकिन जीवन में पहली बार जनगणना का हिस्सा बने मुन्ना गुप्ता ने अवकाश के दिन ही जनगणना कार्य करते हुए इसे अपने लिए यादगार बना लिया.

कमाल तो ये है कि उन्होंने कम समय में भरपूर जोश के साथ जनगणना के तहत मकान सूची का दिया गया करीब सारा काम पूरा कर लिया है.

वह कहते हैं, "अब नज़री नक्शा तैयार करना बाकी है. इसकी हार्ड कॉपी तैयार कर के जल्द जनगणना कार्यालय को सौंप दूंगा."

शिक्षक गुप्ता के बढ़िया काम से उनके स्कूल के प्रधानाचार्य पारसनाथ यादव खासे उत्साहित हैं.

वह कहते हैं, "मुन्ना गुरुजी ने उसी जोश और जुनून से जनगणना का काम किया, जिस तरह वह विद्यार्थियों के बीच एक मोटिवेशनल स्पीकर बनकर उन्हें पढ़ाते हैं."

लेकिन उनके उत्साहपूर्ण व्यवहार में एक दर्द भी छिपा है. गरीबी और आर्थिक तंगी से दो चार मुन्ना गुप्ता अपनी मुस्कान और उत्साह से कतई अपना दुख ज़ाहिर नहीं होने देते.

घर और परिवार का हाल

जिस दर्द को वह अपने उत्साह और मुस्कान में छिपाए हुए हैं, उसको उनके मिट्टी के घर का कोना-कोना साफ बयान करता है. सालों पहले उनके दादा ने इस घर को बनाया था. घर में मिट्टी की दीवारों पर खपड़े की छत से बने तीन कमरों में से सिर्फ एक कमरे में पंखा मौजूद है.

एक हैंडपंप, बिजली के दो बल्ब, एक पंखा और उनके हाथों में मौजूद मोबाइल को न गिना जाए, तो उनका घर वर्षों पुराने गांव के उन घरों की याद दिलाता है जहां आधुनिक युग का कोई सामान नहीं हुआ करता था.

उनके घर में दो खुली लेकिन किताबों से भरी अलमारियां भी हैं.

घर के पिछले हिस्से में मौजूद बड़े से आंगन को उन्होंने खेत में तब्दील कर लिया है. इसमें लगी साग-सब्ज़ियां खुद के खाने के लिए और वहां मौजूद घास घोड़े के लिए है.

मुन्ना गुप्ता के परिवार में कुल सात सदस्य हैं, जिनमें तीन बेटे, दो बेटियों के अलावा वह और उनकी पत्नी कविता देवी हैं.

छत्तीसगढ़ से 1999 में ब्याह कर आईं कविता देवी को इस बात का ग़म है कि उनके पति की नौकरी स्थाई न होने के कारण बहुत ही मामूली वेतन में कम खर्च पर परिवार को गुज़ारा करना पड़ता है.

वह कहते हैं, "अभी टीईटी का फॉर्म भरा है. जुलाई में परीक्षा है. कामयाब हो गया तो घर की सारी स्थिति बदल जाएगी."

पति मुन्ना प्रसाद से सहमत उनकी पत्नी कविता देवी को उनके तीन बेटे और दो बेटियों से बेहतर भविष्य के लिए खासी उम्मीदें हैं.

वह कहती हैं, "सब पढ़ लिख कर कुछ बनेंगे तो घर भी पक्का बन जाएगा. आशा है कि भविष्य में सब कुछ बढ़िया होगा."

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • Munna Prasad Gupta will complete his census mapping work and submit the hard copy to the census office.

    Very likely · Within days

  • Munna Prasad Gupta will pass the TET exam.

    Possible · Within months

Open Questions

  • What is the specific impact of this method on the speed and accuracy of the census data collection?
  • Will other census workers adopt similar methods?
  • What are the long-term implications for the teacher's career and financial situation?
  • How does this situation reflect the broader economic challenges faced by para-teachers in India?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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