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Backकुणाल शाह को व्हाट्सऐप की कमान: भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम से वैश्विक टेक लीडरशिप तक का सफर
कुणाल शाह को व्हाट्सऐप की कमान: भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम से वैश्विक टेक लीडरशिप तक का सफर
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BBC हिंदी6/24/2026Tech5 min readIndia

कुणाल शाह को व्हाट्सऐप की कमान: भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम से वैश्विक टेक लीडरशिप तक का सफर

Quick Look

फ़िनटेक कंपनी 'क्रेड' के संस्थापक कुणाल शाह को मेटा ने व्हाट्सऐप का प्रमुख नियुक्त किया है। यह नियुक्ति मेटा के 'क्रेड' में 90 करोड़ डॉलर के निवेश के बाद हुई है।

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Author, अभिषेक डे

प्रकाशित एक घंटा पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

कुछ समय पहले तक कुणाल शाह का नाम मुख्य रूप से भारत के स्टार्टअप और निवेशक जगत तक ही सीमित था.

फ़िनटेक कंपनी 'क्रेड' के संस्थापक शाह ने अपने कारोबार से आगे बढ़कर भी एक मज़बूत पहचान बनाई है.

अपने पॉडकास्ट में वो अक्सर भरोसे, प्रोत्साहन, संपत्ति निर्माण और इंसानी व्यवहार जैसे विषयों पर बात करते हैं. सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से लेकर दर्शन तक के विषयों तक को छूती है.

अब, मेटा ने उन्हें व्हाट्सऐप की कमान सौंपकर उन्हें वैश्विक सुर्ख़ियों में ला खड़ा किया है. यह नियुक्ति मेटा के 'क्रेड' में 90 करोड़ डॉलर के निवेश के बाद हुई है.

यह फ़ैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब व्हाट्सऐप सिर्फ़ मैसेजिंग तक सीमित न रहकर पेमेंट, बिज़नेस सेवाओं और एआई-आधारित प्रोडक्ट्स की ओर विस्तार करना चाहता है.

हालांकि भारतीय मूल के कई अधिकारियों ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों का नेतृत्व किया है, लेकिन भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में अपना करियर बनाने वाले किसी संस्थापक को इतने बड़े वैश्विक कंज़्यूमर प्लेटफ़ॉर्म की कमान सौंपे जाने के मामले कम ही देखने को मिलते हैं.

दुनिया भर में व्हाट्सऐप के तीन अरब से ज़्यादा यूज़र हैं.

स्टार्ट अप से व्हाट्सऐप प्रमुख तक

मेटा के संपर्क करने से बहुत पहले ही कुणाल शाह भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक जाना-पहचाना चेहरा बन चुके थे.

उन्हें पहली बड़ी कामयाबी 'फ़्रीचार्ज' के साथ मिली. यह एक मोबाइल रिचार्ज प्लेटफ़ॉर्म था, जिसकी उन्होंने 2010 में सह-स्थापना की थी.

उस समय भारत की इंटरनेट अर्थव्यवस्था आकार लेना शुरू ही कर रही थी.

कंपनी तेज़ी से बढ़ी और 2015 में ई-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील ने इसका अधिग्रहण कर लिया. उस समय यह देश के सबसे बड़े स्टार्टअप अधिग्रहणों में से एक था.

लेकिन समय के साथ शाह की पहचान सिर्फ़ उनके बनाए कारोबारों तक सीमित नहीं रही.

'फ़्रीचार्ज' छोड़ने के बाद उन्होंने कई साल नई टेक कंपनियों में निवेश करने और संस्थापकों को सलाह देने में बिताए.

उन्होंने स्टार्टअप एक्सेलरेटर 'वाई कॉम्बिनेटर' और 'सिकोइया कैपिटल' के साथ सलाहकार के तौर पर भी काम किया.

इन भूमिकाओं के ज़रिए वह संस्थापकों की एक पूरी पीढ़ी के साथ क़रीबी तौर पर जुड़े रहे. ख़ासतौर पर उस दौर में, जब भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ी से विस्तार कर रहा था, वह टेक सेक्टर में बेहद सक्रिय रहे.

दर्शनशास्त्र की पढ़ाई और 'फ़्रीचार्ज' की शुरुआत

मुंबई में पले-बढ़े कुणाल शाह ने कॉलेज में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की. उन्होंने देश के कई चर्चित टेक संस्थापकों की तरह प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट संस्थानों का रास्ता नहीं चुना.

एक्स पर की गई एक पोस्ट में भारतीय उद्यमी और निवेशक संजीव बिखचंदानी ने एक बार याद किया था कि शाह ने उनसे कहा था कि उन्होंने दर्शनशास्त्र इसलिए चुना क्योंकि इस विषय की सुबह की कक्षाओं की वजह से वह आर्थिक संकट से जूझ रहे अपने पारिवारिक कारोबार में पूरे समय काम जारी रख सकते थे.

सालों तक दिए गए इंटरव्यू और पॉडकास्ट में शाह ने पढ़ाई के दौरान छोटे-मोटे काम करने की बात भी कही है.

उनके मुताबिक़, इन्हीं शुरुआती अनुभवों के बाद 'फ़्रीचार्ज' की शुरुआत हुई, जिसने उन्हें पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.

2018 में शुरू हुई 'क्रेड' एक अपेक्षाकृत आसान बिज़नेस मॉडल के साथ सामने आई. इसके पीछे की सोच थी - समय पर क्रेडिट कार्ड बिल भरने वाले लोगों को इनाम देना.

सार्वजनिक मंचों पर शाह अक्सर कंपनी की शुरुआत को भरोसे और प्रोत्साहन से जुड़े सवालों से जोड़ते रहे हैं.

बाद में कंपनी ने लोन, बीमा, कॉमर्स और वेल्थ मैनेजमेंट प्रोडक्ट्स में भी विस्तार किया.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, मेटा के ताज़ा निवेश के बाद 'क्रेड' का मूल्यांकन लगभग 4.5 अरब डॉलर आंका गया है.

यह उसके पिछले फ़ंडिंग राउंड के मूल्यांकन से ज़्यादा है, लेकिन 2022 में हासिल किए गए उसके सर्वोच्च मूल्यांकन से कम है.

'क्रेड' एक चर्चित फ़िनटेक ब्रांड भी बन गई, ख़ासतौर पर अपने विज्ञापन अभियानों की वजह से, जिनमें अक्सर हास्य, पुरानी यादों और अप्रत्याशित सेलिब्रिटी मौजूदगी का इस्तेमाल किया जाता था.

लेकिन कंपनी की तेज़ बढ़त के साथ उस पर सवाल भी उठने लगे. कई सालों तक कंपनी को उसके ब्रांड और विकास के लिए सराहा गया, लेकिन मुनाफ़े तक पहुंचने की उसकी राह पर अक्सर सवाल उठे.

आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या निवेशकों का उत्साह और ऊंचा मूल्यांकन कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन के अनुरूप था.

वहीं, समर्थकों का कहना था कि कई सफल टेक कंपनियां भी बड़े पैमाने पर विस्तार करने के दौरान लंबे समय तक घाटे में रही हैं.

पिछले साल यह बहस फिर उभरकर सामने आई, जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सवाल किया गया कि लगातार मुनाफ़ा न होने के बावजूद उद्यमियों का इतना महिमामंडन क्यों किया जाता है.

शाह ने जवाब में माना कि मुनाफ़ा कमाने वाले कारोबारों को पहचान मिलनी चाहिए, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि कारोबारों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए क्योंकि उनसे रोज़गार पैदा होते हैं और उनमें जोखिम उठाना पड़ता है.

भारत के आधुनिक इंटरनेट अर्थव्यवस्था को आकार दिया

उनके समर्थकों के लिए शाह ऐसे उद्यमियों की पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्होंने पहले डिजिटल पेमेंट और बाद में फ़ाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के ज़रिए भारत की आधुनिक इंटरनेट अर्थव्यवस्था को आकार देने में मदद की.

शाह के साथ कई सालों तक नीतिगत मुद्दों पर काम करने वाली और स्टार्टअप पॉलिसी फ़ोरम की सीईओ श्वेता राजपाल कोहली ने उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया, जिसमें "किसी प्रोडक्ट को रेग्युलेटरी जटिलताओं के नज़रिए से देखने और प्रोडक्ट डिज़ाइन को रेग्युलेटर के नज़रिए से समझने की दुर्लभ क्षमता है."

उन्होंने बीबीसी से कहा, "उनकी रचनात्मकता और समस्याओं को हल करने की क्षमता हमेशा बेहद दिलचस्प रही है."

आलोचकों के लिए वह ऐसी स्टार्टअप संस्कृति का प्रतीक हैं, जिसने कई बार टिकाऊ बिज़नेस मॉडल की बजाय मूल्यांकन, फ़ंड जुटाने और तेज़ विकास को प्राथमिकता दी है.

यह नई नियुक्ति शाह के करियर से जुड़ी कई पुरानी प्रवृत्तियों को भी दर्शाती है.

व्हाट्सऐप अब सिर्फ़ मैसेजिंग तक सीमित नहीं रह गया है और पेमेंट, कॉमर्स व बिज़नेस सेवाओं की तरफ़ बढ़ रहा है.

ये वही क्षेत्र हैं, जिनमें शाह पिछले एक दशक से प्रोडक्ट बनाने, निवेश करने और कंपनियों को सलाह देने में समय बिता चुके हैं.

व्हाट्सऐप का भारत सबसे बड़ा बाज़ार है, जो शाह के उद्यमी सफ़र का भी प्रमुख केंद्र रहा है. इस नियुक्ति के साथ शाह व्हाट्सऐप का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय बनने जा रहे हैं.

हालांकि, कुछ जानकार शाह की नियुक्ति को सिर्फ़ फ़िनटेक या पेमेंट के नज़रिए से देखने के ख़िलाफ़ चेतावनी देते हैं.

टेक न्यूज़ वेबसाइट 'मीडियानामा' के संस्थापक और संपादक निखिल पाहवा ने बीबीसी से कहा, "यह मानने का चलन है कि शाह को यह ज़िम्मेदारी फ़िनटेक और पेमेंट में उनके अनुभव की वजह से दी गई है. मुझे लगता है कि यह बहुत सीमित नज़रिया है."

"वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने सालों तक प्रोडक्ट, कंज़्यूमर व्यवहार, प्रोत्साहनों और विकास के बारे में गहराई से सोचा है. उनके कारोबारों में पेमेंट, उपभोक्ताओं को जोड़ने का एक माध्यम रहा है, ताकि बाद में उन्हें दूसरे प्रोडक्ट्स पेश किए जा सकें."

"यह पेमेंट से जुड़ी नियुक्ति कम लगती है, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि मेटा ने ऐसे संस्थापक को चुना है, जिसे कंज़्यूमर बिज़नेस के व्यावसायिक पक्ष को बड़े स्तर पर बढ़ाने का अनुभव है."

'क्रेड' में वह आर्थिक रूप से सक्रिय यूज़र्स के लिए प्रोडक्ट बना रहे थे. उनका दायरा मुख्य रूप से संस्थापकों, निवेशकों और टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी रखने वाले लोगों तक सीमित था.

लेकिन व्हाट्सऐप में अब वह ऐसी सेवाओं के लिए ज़िम्मेदार होंगे, जिनका इस्तेमाल इन दायरों से कहीं आगे के लोग करते हैं.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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