सिद्धिविनायक मंदिर दान राशि चोरी विवाद और राजनीति
राज ठाकरे के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट की सफ़ाई, महाराष्ट्र सरकार ने दिए जांच के आदेश
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मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में दान राशि में धांधली और चोरी के आरोपों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में विवाद गरमा गया है। एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे के आरोपों पर ट्रस्ट ने सफ़ाई दी है, जबकि राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं।
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सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावा संग्रह में अनियमितता और चोरी के आरोप लगने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं।
प्रकाशित 4 घंटे पहले
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बाद मुंबई के मशहूर सिद्धिविनायक मंदिर में भी दान राशि में धांधली के आरोप का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में तूल पकड़ता जा रहा है।
मंदिर के चढ़ावे से हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये की चोरी के एमएनएस (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) प्रमुख राज ठाकरे के आरोप के बाद मंदिर ट्रस्ट ने सफ़ाई दी है।
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के चीफ़ सदा सर्वणकर ने कहा कि महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, महाराष्ट्र के क़ानून और न्याय विभाग ने ट्रस्ट से विस्तृत वित्तीय रिपोर्ट मांगी है।
ट्रस्ट का कहना है कि विभाग की यह कार्रवाई उसके अनुरोध पर शुरू की गई व्यापक ऑडिट प्रक्रिया का हिस्सा है और यह आरोपों से कई महीने पहले शुरू हुई थी।
सिद्धिविनायक टेंपल बोर्ड के ट्रस्टियों ने सोमवार को स्वीकार किया कि चढ़ावा संग्रह में खामियां थी और उसने एंटी करप्शन ब्यूरो और महाराष्ट्र के क़ानून और न्याय विभाग से जांच के लिए कहा है।
ट्रस्टी राहुल लोंढे ने कहा था, "कानून और न्याय विभाग ने ट्रस्ट प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। उस रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी।"
राज ठाकरे ने बीते एक अगस्त को एमएनएस के स्टूडेंट विंग के 20वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में दावा किया था कि 'उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भेजे गए एक पत्र में कहा गया है कि मंदिर से हर साल 18 करोड़ रुपये चोरी किए जा रहे हैं।'
ट्रस्ट ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई पत्र शिंदे को नहीं भेजा गया था। ट्रस्ट के अनुसार, खुद ट्रस्टियों ने मई 2026 में मंदिर के चढ़ावे की राशि के व्यापक ऑडिट की मांग करते हुए क़ानून एवं न्याय विभाग से संपर्क किया था।
गबन के आरोपों पर ट्रस्ट ने क्या कहा
ट्रस्ट के अध्यक्ष और राज्य मंत्री सदा सर्वणकर ने कहा कि चढ़ावे में गड़बड़ी नज़र आने के बाद सबसे पहले ट्रस्टियों ने ही अधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी।
उन्होंने कहा, "मैंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और उसके प्रमुख विश्वास नांगरे पाटिल से शिकायत की थी, जिसके बाद मंदिर में अधिकारियों की तैनाती की गई।"
ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर के एक कर्मचारी राजेंद्र पेंडुरकर को दान राशि चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मार्च में आठ और अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सर्वणकर ने उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मंगलवार को मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से कहा, "हमने पिछले चार सालों की दान पेटी संग्रह राशि की जांच की। साल 2022-23 में संग्रह 106 करोड़ रुपये था, 2023-24 में 114 करोड़ रुपये, 2024-25 में 135 करोड़ रुपये और 2025-26 में 182 करोड़ रुपये रहा। यानी हमारे कार्यभार संभालने के बाद दान पेटियों से प्राप्त राशि में लगभग 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।"
उन्होंने कहा, "हमारे एक ट्रस्टी ने न्याय विभाग को पत्र लिखकर पूछा है कि यदि पहले तीन सालों में कलेक्शन का स्तर इतना था, तो उससे पहले यह केवल 106 करोड़ रुपये क्यों था? इसकी गहन जांच होनी चाहिए। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।"
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा, "एक ही वर्ष में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उनके (ट्रस्ट) अनुसार वर्तमान ट्रस्टियों के कार्यकाल से पहले के पांच वर्षों में हुई जांच के आधार पर कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, कई को निलंबित किया गया और कुछ को जेल भी भेजा गया। ट्रस्ट की मांग है कि उन सभी मामलों की जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।"
मंगलवार को टेंपल ट्रस्ट चीफ़ सर्वणकर ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की।
इसमें ट्रस्टी राहुल तुकाराम लोंढे ने कहा, "अब तक मंदिर के जिन कर्मचारियों को आरोपों के आधार पर पुलिस ने हिरासत में लिया था, उन्हें पहले पुलिस हिरासत में रखा गया और उसके बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में अदालत ने उन्हें ज़मानत दे दी।"
"पुलिस ने आठ लोगों को हिरासत में लिया था और उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत दी गई थी। पुलिस हिरासत के बाद उन्हें एनसीआर मिला और उसके बाद उन्हें जमानत दे दी गई, जिनमें नरेश खाडे भी शामिल हैं।"
इसी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सर्वणकर ने कहा, "हम कह सकते हैं कि यह बहुत बड़ा गिरोह था। वे कर्मचारी ज़रूर थे, लेकिन उनकी गतिविधियां किसी गैंग की तरह थीं। वे अलग-अलग जगहों से दान पेटियां इकट्ठा करके तीसरी मंजिल पर ले जाते थे, जहां वे उनमें से पैसे निकाल लेते थे। हमने सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुराने कर्मचारियों की पहचान की, उन्हें हटाया, नए कर्मचारियों की नियुक्ति की और तुरंत उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई।"
क्या है पूरा मामला
बीते शनिवार को एमएनएस के छात्र संगठन के कार्यक्रम में राज ठाकरे ने कहा था, "आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं है। यहां प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी होती है।"
उन्होंने मंच से एक पत्र पढ़कर सुनाया जो उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को संबोधित था। इसमें सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटी में चोरी के मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई थी।
इस पत्र पर 21 अप्रैल 2026 की तारीख़ दर्ज है। इसमें लिखा गया है, "पिछले डेढ़ साल के दौरान मंदिर में विभिन्न सुधारात्मक और प्रशासनिक उपाय लागू किए गए, जिसके परिणामस्वरूप मंदिर की आय में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि करने में हमें आंशिक सफलता मिली है।"
"ट्रस्टियों की सतर्कता के कारण मंदिर की दानपेटी से धन चोरी करने वाले कर्मचारियों को पकड़ा गया है। इन कर्मचारियों के पकड़े जाने से पहले हर बुधवार को दानपेटी में मिलने वाली राशि की गणना 50 लाख रुपये से कम होती थी।"
"इन कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद पिछले तीन सप्ताह से दानपेटी में मिलने वली राशि बढ़कर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। इससे साफ़ होता है कि इससे पहले प्रत्येक सप्ताह दानपेटी में जमा होने वाली राशि का एक हिस्सा गबन किया जा रहा था। इसके कारण मंदिर को हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा था। हमें दृढ़ संदेह है कि इस मामले के तार वरिष्ठ स्तर तक जुड़े हुए हैं।"
इस पत्र में उच्च अधिकारियों के ख़िलाफ़ निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की गई है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, यह मुद्दा तब उछला जब स्टाफ़ के ख़िलाफ़ वीवीआईपी दर्शन कराने के लिए पैसे लेने की शिकायतें हुईं। शिकायत में कहा गया कि मंदिर के कुछ स्टाफ़ वीवीआईपी कतार में शामिल कराने के लिए पैसे लेते थे।
इसी साल 20 मार्च को मंदिर प्रशासन ने दान पेटी से नकदी ग़ायब होने की जानकारी दी थी।
शुरुआत में दादर पुलिस ने 10,000 रुपये की चोरी का मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने 80,000 रुपये बरामद करने की बात कही।
जांचकर्ताओं के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग लगभग 10 दिनों तक एक छोटी दान पेटी से बार-बार नकदी निकालते दिखाई दिए।
पुलिस ने मामले में आठ लोगों को गिरफ़्तार किया और आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। सभी अभियुक्त फिलहाल ज़मानत पर बाहर हैं।
राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप
राज ठाकरे के आरोप पर बीजेपी नेता राम कदम ने कहा, "अगर राज ठाकरे के पास कोई ठोस सबूत या विश्वसनीय जानकारी है, तो उन्हें इसे पुलिस या सरकार के साथ साझा करना चाहिए। लेकिन सच्चाई सामने आने से पहले इस तरह के दावे करना लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।"
शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरूपम ने कहा, "राज ठाकरे ने इसे एक बड़ा मुद्दा बताया है। जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे तब राज ठाकरे की पार्टी के एक नेता ने पहले भी आरोप लगाया था कि सिद्धिविनायक मंदिर में मिलने वाले दान में बड़े पैमाने पर चोरी और भ्रष्टाचार हो रहा था।"
शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "एक सवाल उठाना चाहती हूँ। वहाँ एकनाथ शिंदे अध्यक्ष के रूप में बैठे हैं। अगर यह सब अध्यक्ष की निगरानी में हो रहा है और किसी को इसकी जानकारी नहीं है, जबकि ट्रस्टी उन्हें पत्र लिख रहे हैं, तो ऐसा लगता है जैसे चोर ही चोरों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हों और इसमें लोगों का एक ग्रुप शामिल हो।"
एनसीपी (एससीपी) विधायक रोहित पवार ने पत्रकारों से कहा, "नासिक में महाकुंभ मेले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में भी भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में देशभर से बड़ी संख्या में लोग दर्शन और आशीर्वाद लेने उज्जैन जाते हैं।"
"वहां बीजेपी के मुख्यमंत्री पर ज़मीन घोटाले के आरोप लगे हैं। ऐसे कई मामले हैं, जहां बीजेपी से जुड़े संगठन और आरएसएस से जुड़े पदाधिकारी ट्रस्टी हैं और वहां बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं।"
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला इस समय विपक्षी दल जोर-शोर से उठा रहे हैं। इस मामले में मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री पद से चंपत राय ने इस्तीफ़ा दे दिया है जबकि जांच के लिए गठित एसआईटी ने आठ लोगों को गिरफ़्तार किया है।
What to Watch
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महाराष्ट्र सरकार द्वारा वित्तीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी
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