
ईरान ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाजों के प्रवेश पर प्रतिबंध की चेतावनी दी और संचार केबलों को निशाना बनाने की योजना का संकेत दिया।
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के जवाब में फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाजों के प्रवेश को रोकने की धमकी दी है। साथ ही, ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और इसराइल के खिलाफ समुद्र के नीचे संचार केबलों को निशाना बनाने की योजना का संकेत दिया है।
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ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट में सैन्य तनाव और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर गतिरोध जारी है।
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक और हमले की चेतावनी का जवाब दिया है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार ने अमेरिका के फ़्लोरिडा में कहा कि अमेरिका ईरान के ख़िलाफ़ छोटा 'एपिक फ़्यूरी' चला सकता है.
अमेरिका ने ईरान के ख़िलाफ़ अपने पिछले सैन्य अभियान को 'एपिक फ़्यूरी' नाम दिया था. लेकिन, ईरान ने ट्रंप की इस चेतावनी के ख़िलाफ़ जवाबी चेतावनी दी है.
बीबीसी की फ़ारसी सेवा के मुताबिक़ ईरानी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ़ अली अब्दुल्लाही ने कहा है कि अमेरिकी ज़हाजों को फ़ारस की खाड़ी में दोबारा आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.
अब्दुल्लाही ने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति को यह सपना जरूर देखना चाहिए कि उनकी सेना एक बार फिर फ़ारस की खाड़ी में प्रवेश करेगी लेकिन वो इस सपने को हमेशा के लिए अपने साथ लेकर कब्र में जाएंगे."
उन्होंने कहा, '' हम किसी भी हाल में अमेरिकी सेना के ज़हाजों को फ़ारस की खाड़ी में एंट्री की इजाज़त नहीं देंगे.''
कल, आईआरजीसी नौसेना के कमांडर ने कहा था, "अमेरिकी होर्मुज़ स्ट्रेट से 600 से 700 किलोमीटर दूर चले गए हैं."
ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाया है कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट में बारूदी सुरंग विस्फोटों और जहाजों पर हमलों के बारे में "फर्जी ख़बरें गढ़कर" अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले तेल की कीमतों को बढ़ाने के लिए हरचंद कोशिश कर रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से अब युद्ध से पहले की तुलना में अधिक तेल गुजर रहा है, और यही कारण है कि ईरान तेल की कीमतों को बढ़ाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है.
इस बीच, ईरान ने फ़ारस की खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है.
ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि तेहरान ने फ़ारस की खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछे कम्युनिकेशन केबलों को निशाना बनाने की विस्तृत योजना तैयार की है.
ईरान का कहना है कि इसे अमेरिका और इसराइल पर फिर से हमला करने की स्थिति में इसे अमल में लाया जा सकता है.
नाम न बताने की शर्त पर दो अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी.
लेकिन दोनों ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि हमले कहां और कैसे किए जाएंगे. लेकिन उनमें से एक ने कहा कि ईरान क्षतिग्रस्त केबलों की मरम्मत को रोकने के लिए भी कदम उठा सकता है, जिससे इंटरनेट सहित और भी कम्युनिकेशन में दिक्कत पैदा हो सकती है.
एक अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर दोबारा हमला तो कोई भी हद पार की जा सकती है. इनमें समुद्र के नीचे बिछे केबल से लेकर सैन्य अड्डे ( जिनमें गुप्त अड्डे भी शामिल है) तक निशाना बन सकते हैं.
इससे पहले जब ट्रंप से ये पूछा गया था कि क्या वो इस वीकेंड पर ईरान पर हमला करने जा रहे हैं तो उन्होने कहा था कि उन्हें इस तरह के किसी मामले की जानकारी नहीं है.
दरअसल उनसे ये सवाल तुर्की में अमेरिका के राजदूत टॉम बराक की एक टिप्पणी को लेकर किया गया था.
एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया था कि क्या अमेरिका ईरान फिर हमला करेगा तो उन्होंने कहा था, '' निश्चित रूप से संभव है."
अमेरिकी राजदूत की टिप्पणियों के बारे में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते ट्रंप ने कहा, "वह मेरे राजदूत हैं? जाहिर तौर पर वह बहुत ताक़तवर शख़्स हैं. खैर, अगर ऐसा है तो मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है."
ट्रंप की ये टिप्पणियां शुक्रवार को फ्लोरिडा में दिए गए उनके भाषण के बाद आईं, जिसमें उन्होंने एक बार फिर ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियानों की संभावना जताई थी.
इस बीच, ईरान के केंद्रीय बैंक (सीबीआई) के गवर्नर अब्दुलनासेर हेम्मती ने अपने टेलीग्राम चैनल पर एक पोस्ट में कहा है कि उन्होंने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की सालाना बैठकों के दौरान ब्लूमबर्ग को टेलीविजन पर एक इंटरव्यू दिया था.
तेहरान टाइम्स के मुताबिक़ उन्होंने कहा, '' अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने और उस पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की थी. अमेरिका ने अनुमान लगाया था कि ईरान की अर्थव्यवस्था दो सप्ताह के भीतर ढह जाएगी. लेकिन ईरान के लोगों पर भारी आर्थिक दबाव के बावजूद अमेरिका अपना मुख्य मक़सद हासिल करने में नाकाम रहा. उन्होंने इस अनुमान को एक भ्रम बताया.''
विदेशी मुद्रा से होने वाली आय के बारे में उन्होंने कहा कि ईरान को अब भी तेल निर्यात से कमाई हो रही है और भविष्य में भी इसकी सप्लाई जारी रखने के इंतज़ाम किए गए हैं.
केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार के बारे में पूछे जाने पर हेम्मती ने कहा कि इसकी स्थिति अच्छी है.
उनके मुताबिक, यह भंडार ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अंत तक और उसके बाद भी आयात के वित्तपोषण के लिए पर्याप्त होगा.
हेम्मती ने परिवारों की क्रय शक्ति में आई कमी की भरपाई के उपायों पर भी चर्चा की.
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