रिलायंस और रोल्स-रॉयस की फाइटर जेट के इंजन पर अहम घोषणा
भारत के फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए इंजन विकसित करने और निर्माण में ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस के साथ साझेदारी.
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रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भारत के फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए इंजन विकसित करने और निर्माण हेतु ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस के साथ साझेदारी की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य घरेलू रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है।
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Why It Matters
भारत उन्नत स्टील्थ फाइटर जेट विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है और रक्षा आयातों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत के फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए इंजन विकसित करने और उसके निर्माण में ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस के साथ साझेदारी करेगी.
यह साझेदारी भारत के सबसे उन्नत स्टील्थ फाइटर जेट विकसित करने की योजना का हिस्सा है.
एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के 2028 में तैयार होने की उम्मीद है. यह विमान भविष्य में भारत की हवाई युद्ध क्षमता में अहम भूमिका निभाएगा.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, पिछले साल भारत ने अपना सबसे उन्नत स्टील्थ फ़ाइटर जेट बनाने के लिए एक ढांचे को मंज़ूरी दी थी और डिफ़ेंस कंपनियों से इसमें रुचि जताने को कहा था.
यह क़दम पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के कुछ हफ़्ते बाद उठाया गया था.
अमेरिका से निर्भरता कम करने की रणनीति
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने पिछले साल 25 मई को अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत कम से कम तीन अन्य देशों के निर्माताओं के साथ लड़ाकू विमानों के इंजन संयुक्त रूप से बनाने को लेकर बातचीत कर रहा है.
ब्लूमबर्ग ने लिखा था, 'क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अपनी क्षमताओं की कमियों को दूर करने के लिए भारत अमेरिका से आगे भी अपने रक्षा साझेदारियों का विस्तार कर रहा है. ब्रिटेन, फ्रांस और जापान के इंजनों पर विचार किया जा रहा है और भारत इस परियोजना को जल्द शुरू करना चाहता है. इन प्रस्तावों का मूल्यांकन डीआरडीओ करेगा.'
'अमेरिका के साथ जेट इंजन का संयुक्त निर्माण दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को गहरा करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है. हालांकि, महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए अमेरिका से आगे दूसरे देशों की ओर भारत का रुख़ अमेरिका के साथ संबंधों में तनाव का संकेत नहीं माना जाना चाहिए. बल्कि यह भरोसेमंद सप्लाई चेन सुनिश्चित करने पर भारत के जोर को दर्शाता है.'
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक है. ऐसे में भारत ने हाल के वर्षों में अमेरिका और फ्रांस के रक्षा निर्माताओं से हथियार ख़रीदने पर भी ज़्यादा ज़ोर दिया है.
आयातित रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने घरेलू कंपनियों के लिए दो इंजन वाले स्टील्थ फ़ाइटर के विकास में शामिल होने का रास्ता भी खोला है. इसके तहत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के लिए मॉडल को मंज़ूरी दी गई.
कंपनियों ने एक साझे बयान में कहा, "यह साझेदारी भारत में एएमसीए इंजन के संयुक्त विकास के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करेगी. इसमें विश्वस्तरीय तकनीक और औद्योगिक स्तर पर परियोजनाओं को पूरा करने की क्षमताएं एक साथ आएंगी."
शुक्रवार को घोषित प्रस्तावित साझेदारी में यह भी कहा गया है कि रिलायंस और रोल्स-रॉयस भारत में एक डेडिकेटेड एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स बनाने की संभावनाएं तलाशेंगी. दोनों कंपनियां मिलकर इंजन विकसित करेंगी.
रिलायंस के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने एक बयान में कहा, "भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी में स्वतंत्र क्षमता ज़रूरी है. रोल्स-रॉयस के साथ हमारा इरादा एडवांस प्रोपल्शन में उनकी विश्वस्तरीय विशेषज्ञता को रिलायंस की तकनीक, मैन्युफ़ैक्चरिंग, बड़े पैमाने पर काम करने और परियोजनाओं को पूरा करने की क्षमता के साथ जोड़ना है, ताकि भारत में स्वदेशी एयरो-इंजन का पूरा सिस्टम तैयार किया जा सके."
उन्होंने कहा, "हम साथ मिलकर ऐसी स्थायी राष्ट्रीय क्षमता तैयार करना चाहते हैं, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाए और समय के साथ एडवांस्ड प्रोपल्शन तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद करे. यह माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर विकसित भारत के विज़न में हमारा योगदान है."
रोल्स-रॉयस के सीईओ टोफ़ान एर्गिनबिलगिच ने कहा, "रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के साथ मिलकर काम करने का यह अवसर पाकर मुझे ख़ुशी है. इसमें उन्नत इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हमारी एक सदी पुरानी विरासत और इंजन विशेषज्ञता को भारतीय उद्योग में उनकी घरेलू नेतृत्व क्षमता के साथ जोड़ा जाएगा."
"भारत में हमारी मौजूदा साझेदारियों और क्षमताओं के साथ मिलकर यह देश में मज़बूत और आत्मनिर्भर एयरोस्पेस तंत्र तैयार करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है."
इस घोषणा से ब्रिटिश एयरो-इंजन निर्माता कंपनी रोल्स-रॉयस का मुक़ाबला फ्रांस की सफ्रान से होने की संभावना है. सफ्रान ने अलग से भारत की सरकारी कंपनी जीटीआरई के साथ संयुक्त उपक्रम बनाने का प्रस्ताव दिया है.
इसका मक़सद एएमसीए फ़ाइटर जेट के बाद के संस्करणों के लिए ज़्यादा थ्रस्ट वाला इंजन विकसित करना है.
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स 4.5 पीढ़ी के तेजस फाइटर जेट का निर्माण करती है. हालांकि, अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक की सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं के कारण उसे कंपनी से इंजन की धीमी आपूर्ति का सामना करना पड़ा है.
रोल्स-रॉयस पहले भी भारत के साथ मिलिटरी प्रोपल्शन कार्यक्रमों पर काम कर चुकी है. कंपनी डिफ़ेंस और सिविल एयरोस्पेस के कई तरह के इस्तेमाल के लिए इंजन मुहैया कराती है.
निजी कंपनियों पर दांव
इसी साल मई में भारत ने 27 मई को स्वदेशी फ़ाइटर जेट बनाने को लेकर एक अहम एलान किया है.
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) के पांच प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे.
इसके लिए मंत्रालय ने तीन निजी कंपनियों, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, एलएंडटी- बीईएल-डायनामेटिक कंसोर्टियम और भारत फोर्ज-बीईएमएल-डेटा पैटर्न्स कंसोर्टियम को चुना है.
भारत को अमेरिका और रूस ने एफ़-35 और सुखोई-57 विमान देने का ऑफर दिया था, लेकिन इनके बावजूद उसने घरेलू स्तर पर इसे तैयार करने की ओर क़दम बढ़ाया है.
ख़ास बात ये है कि सरकारी विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इसके लिए नहीं चुना गया है.
भारतीय वायुसेना पहले भी एचएएल पर प्रोग्राम में देरी और समय पर विमान न देने को लेकर नाराज़गी जताती रही है और ये एक बड़ा मुद्दा रहा है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एचएएल के पास बहुत सारे कॉन्ट्रैक्ट हैं और वो उनकी क्षमता से ज़्यादा है और बीते 20-40 साल में उनकी डिलीवरी काफ़ी कमज़ोर हुई है, इसलिए प्राइवेट सेक्टर को तवज्जो दी गई है.
सरकार ने चुनी गई कंपनियों को पहला प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए 30 महीने की समय सीमा दी थी.
इंजन आपूर्ति बनी बड़ी बाधा
तेजस फ़ाइटर जेट के निर्माण के लिए सार्वजनिक कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को ऑर्डर दिए गए थे. लेकिन तेजस विमानों की आपूर्ति समय से बहुत पीछे चल रही है.
कारण है जेट इंजन की आपूर्ति.
फ्रंटलाइन की पिछले महीने प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार, एचएएल को को चौथी पीढ़ी के कुल 180 तेजस एमके-1ए विमानों के निर्माण के लिए दो बड़े कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं. बावजूद पहले कॉन्ट्रैक्ट के तहत डिलीवरी भी अभी शुरू नहीं हो पाई है.
दरसअल इन विमानों में अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस के एफ़404 इंजनों को लगाया जाता है.
विमानों की डिलीवरी में देरी के लिए एचएएल ने जीई एयरोस्पेस को ज़िम्मेदार ठहराया है.
भारत के चौथी पीढ़ी के फ़ाइटर जेट को वायुसेना में शामिल करने की प्रक्रिया पहले ही देरी से जूझ रही है.
अब देश के कहीं अधिक महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फ़ाइटर कार्यक्रम एएमसीए और 4.5 पीढ़ी के फ़ाइटर तेजस एमके2 कार्यक्रम को लेकर भी ऐसी ही चिंताएं सामने आने लगी हैं.
इन दोनों विमानों के लिए भारत ने जीई एयरोस्पेस के एफ़414-जीई-आईएनएस6 टर्बोफैन इंजन को चुना है.
पहले योजना थी इस इंजन की संयुक्त उत्पादन करने की लेकिन क़ीमत, स्थानीय निर्माण और तकनीक हस्तांतरण को लेकर बातचीत अभी भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची पाई है.
फ़्रंटलाइन के अनुसार, नई रिपोर्ट में कहा गया कि जारी बातचीत के दौरान जीई एयरोस्पेस ने क़ीमत में काफी बढ़ोतरी कर दी है. शुरुआत में प्रति इंजन करीब 70-80 करोड़ रुपये क़ीमत का अनुमान था, लेकिन कंपनी ने इंजन के दाम तीन गुना यानी क़रीब 200 करोड़ रुपये की क़ीमत बता रही है.
What to Watch
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एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप का 2028 में तैयार होना
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Open Questions
- रिलायंस और रोल्स-रॉयस के संयुक्त उद्यम का वित्तीय आकार क्या होगा?
- एएमसीए इंजन का उत्पादन कब तक शुरू होगा?

