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رجوعपश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका, सुष्मिता देव ने टीएमसी से दिया इस्तीफा
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका, सुष्मिता देव ने टीएमसी से दिया इस्तीफा
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BBC हिंदी10‏/6‏/2026سياسة3 د قراءةIndia

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका, सुष्मिता देव ने टीएमसी से दिया इस्तीफा

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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है। सुष्मिता देव ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से इस्तीफा दे दिया है और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी है। उन्होंने कहा कि वह दो नावों पर सवार नहीं रहना चाहतीं और असम में काम करना चाहती हैं।

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प्रकाशित 10 जून 2026, 14:37 IST

पढ़ने का समय: 5 मिनट

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है.

सुष्मिता देव ने टीएमसी से इस्तीफ़ा दे दिया है और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी है.

दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा की.

सुष्मिता देव ने कहा, "मैंने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी है. मैंने क्यों टीएमसी छोड़ी, ये लंबी कहानी है. मैं उस स्थिति में नहीं रहना चाहती, जहाँ मैं एक ही समय में दो नावों की सवारी करूँ. मैं ममता दीदी पर कोई टिप्पणी नहीं करूँगी."

राज्यसभा से इस्तीफ़ा

इससे पहले सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर राज्यसभा से इस्तीफ़ा दे दिया था.

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि उनका इस्तीफ़ा तुरंत प्रभाव से स्वीकार किया जाए.

राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने के बाद उनका एक वीडियो भी आया है, जिसमें वो अपने दिल्ली निवास पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से मिलती नज़र आ रही हैं.

सुष्मिता देव ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "मैं बंगाल के लोगों का आभार व्यक्त करती हूं. अब मैं असम में काम करना चाहती हूं, इसको ध्यान में रखते हुए ही मैंने ये फ़ैसला किया है."

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समाप्त

सुष्मिता देव कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे संतोष मोहन देव की बेटी हैं. उनका राजनीतिक करियर भी कांग्रेस से ही शुरू हुआ था. वो असम में राजनीति किया करते थे.

वो कांग्रेस के टिकट पर असम के सिलचर से लोकसभा सांसद भी रहीं और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी बनीं. लेकिन वर्ष 2021 में वो कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हो गईं.

टीएमसी में बग़ावत

पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की थी और शुभेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद से ही टीएमसी में बग़ावत के सुर सुनाई देने लगे.

कई विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई. पार्टी के एक बाग़ी विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के 58 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा.

इन विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुनने की मांग की. विधानसभा अध्यक्ष ने बाद में उनकी मांग मान भी ली.

अभी विधायकों के विद्रोह से टीएमसी निपट भी नहीं पाई थी कि राष्ट्रीय स्तर पर उसके कई सांसद पार्टी के ख़िलाफ़ होने लगे.

तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पिछले दिनों दावा किया कि उनके साथ 20 सांसद हैं और उन्होंने लोकसभा स्पीकर से सदन में अलग बैठाने की मांग की है.

उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने की भी बात कही.

सुष्मिता देव से पहले टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने भी राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था.

लोकसभा में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद थे. लेकिन सुखेंदु शेखर और सुष्मिता देव के इस्तीफ़ा देने के बाद राज्यसभा में टीएमसी के 11 सांसद ही रह गए हैं.

सुष्मिता का करियर

सुष्मिता देव असम के एक राजनीतिक परिवार से आती हैं. उनके दादा सतिन्द्र मोहन देव स्वतंत्रता सेनानी थे. बाद में असम के स्वास्थ मंत्री बने और लंबे समय तक सिलचर म्यूनिसिपैलिटी बोर्ड के चेयरमैन रहे थे.

सुष्मिता देव के पिता एक स्पोर्ट्समैन भी थे. संतोष मोहन देव सिलचर से 6 बार सांसद चुने गए थे. संतोष मोहन देव इस्पात मंत्री थे. सुष्मिता देव की मां भीतिका देव भी राजनीति में रही हैं. वह असम में विधायक चुनी गई थीं.

सुष्मिता ने भी राजनीति को अपना पेशा बनाया. उन्होंने राजनीति की शुरुआत सिलचर म्यूनिसिपैलिटी से की थी. सिलचर म्यूनिसिपैलिटी असम का दूसरा सबसे बड़ा नगर निकाय है.

सुष्मिता ने दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में 1993 में ग्रेजुएशन किया था. इसके बाद उन्होंने लंदन से लॉ की पढ़ाई की. सुष्मिता ने लंदन में थॉमस वैली यूनिवर्सिटी से लॉ में बैचलर की पढ़ाई की. यहां से सुष्मिता ने 1997 में अपना कोर्स पूरा किया था.

इसके बाद उन्होंने लंदन में ही किंग्स कॉलेज से कॉर्पोरेट लॉ में मास्टर्स की डिग्री ली. सुष्मिता दिल्ली बार काउंसिल की सदस्य भी हैं.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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