
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश को संबोधित किया और 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने 13वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को दोहराया, 12 साल की उपलब्धियां गिनाईं और 'शक्ति की सप्तधारा' का विजन साझा किया।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली के लाल किले से लगातार 13वां संबोधन दिया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर दिल्ली के लाल क़िले से देश को संबोधित किया. यह उनका लगातार 13वां संबोधन था.
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का भी ज़िक्र किया.
पीएम मोदी ने अपने भाषण में सरदार पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ पंडित नेहरू का भी नाम लिया.
भाषण का अंत करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी, भगवान बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले ने जो सपना देखा था, उन सबसे प्रेरणा लेते हुए हम आगे बढ़ें.
पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान अपने 12 सालों के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए, युवाओं, महिलाओं, किसानों, ग़रीब और मध्य वर्ग के परिवारों का विशेष तौर पर ज़िक्र किया और 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराया.
इस मौक़े पर पीएम मोदी ने वंदे मातरम का ज़िक्र करते हुए कहा, "आज़ादी के बाद, यह वह समय है, जब लाल क़िले की प्राचीर से 'वंदे मातरम' की गूंज सुनाई दी है. आज हम सभी 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं. जब भारत के लोग 'वंदे मातरम' के 150 साल मना रहे हैं, तो इससे बेहतर मौक़ा और क्या हो सकता है?"
उन्होंने अपने भाषण में भारत की मैन्युफ़ैक्चरिंग, टेक्सटाइल उद्योग, रक्षा, रेलवे, कनेक्टिविटी, फ़ार्मा उद्योग से लेकर स्टार्टअप तक की उपल्धियां गिनाईं.
साथ ही उन्होंने कोरोना काल के संकट और हाल के युद्धों के दौरान उपजे एनर्जी संकट का भी ज़िक्र करते हुए अपनी सरकार की नीतियों की सराहना की.
उन्होंने विधानसभा और लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए सभी राजनीतिक दलों का आह्वान किया.
उन्होंने विकसित भारत बनाने के लिए 'शक्ति की सप्तधारा' का विज़न साझा किया.
नक्सलवाद, माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया और हर मां बाप के सपनों को चूर चूर कर दिया.
नक्सलवाद ने चार दशकों तक हिंदुस्तान के बड़े हिस्से और बड़ी आबादी को बंदूक की नोक पर दबाकर रखा था और संविधान की धज्जियां उड़ा दी थीं. साढ़े तीन हज़ार से अधिक हमारे पुलिस और सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए. युद्ध के दौरान जितने मरते हैं उतने पुलिस के जवानों को अपनी जान की बाजीानी पड़ी.
इस नक्सलवाद ने धरती को लहू-लुहान कर दिया था. 2014 में ही हमने संकल्प लिया था कि हम देश को नक्सलवाद से मुक्त करेंगे. आज नक्सल और माओवादी हिंसा अपनी आखिरी सांसें गिन रही है. जहां कभी नक्सलवादियों की गोलियां चलती थीं, जहां कभी धरती रक्तरंजित रहती थी, उन नक्सली क्षेत्रों में विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है.
लेकिन इस चुनौती को कम नहीं आंकना है. हमें और सावधान रहना है. सालों तक देश की सत्ता में माओवादी सोच के लोक गलियारों में जगह बनाकर बैठे थे, सरकारी सलाहकार कमेटियों में भी इस माओवादी सोच ने नीतियों को प्रभावित किया था.
जंगलों में हमें हथियारबंद नक्सलियों का ख़ात्मा करने में सफलता मिली है. हथियारबंद नक्सल तो गए लेकिन ये दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं. हिंसा और अराजकता के रास्ते खोल रहे हैं. समाज को गलत राह पर खींचने के लिए भांति भांति के दांव कर रहे हैं.
इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा, उन्हें अलग थलग करना होगा.
पिछले 12 सालों में देश के कोटि-कोटि नागरिकों ने एक संकल्प के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में पूरा प्रयास किया है.
उसी का परिणाम है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी ग़रीबी से बाहर निकले हैं.
इन्हीं देशवासियों के प्रयास का परिणाम है कि हम एक बड़ी और तेज़ रफ़्तार अर्थव्यवस्था में बदल गए हैं.
देश आज़ाद हुआ लेकिन हम रफ़्तार नहीं पकड़ पाए. 2014 तक आते आते तो विश्व ने हमें फ़्रेजाइल फ़ाइव में डंप कर दिया था. लेकिन 12 सालों में भारत ने एक नई रफ़्तार पकड़ी है.
पिछले 12 सालों में डिफ़ेंस चार गुना, खादी ग्रामोद्योग पांच गुना, मोबाइल फ़ोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा, डिज़िटल इनोवेशन में भी हमने अपना परचम लहराया है, डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 गुना बढ़े और पेटेंट ग्रांट होने की संख्या चार गुना बढ़ी.
हर साल चार गुनी रफ़्तार से ग़रीबों के लिए शौचालय बनाया, घर बनाने का काम किया. हमने मेट्रो का विस्तार किया. जिस स्केल पर काम किया ये रफ़्तार और विस्तार आज़ादी के बाद पहली बार पिछले एक दशक में देखा गया है.
इसे देखते हुए 2047 में विकसित भारत बनने का संकल्प अधूरा नहीं रह सकता है.
भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रह कर नहीं जीना है बल्कि आत्मनिर्भर रहना है. दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, जल्दी मिलता है लेकिन उससे हमारा सामर्थ्य नहीं बढ़ता.
हमें अपने हितों में अत्मनिर्भर बनना है. मेक इन इंडिया, लोकल फ़ॉर वोकल, आत्म निर्भर इंडिया को लेकर आगे बढ़ना है.
भारत ने अपने तीन सेमीकंडक्टर प्लांट लगा चुका है और प्रोडक्शन शुरू हो चुका है. आने वाले सात आठ वर्ष में पांच से आठ सेमीकंडक्टर प्लांट और शुरू हो जाएंगे.
क्रिटिकल मिनिरल्स में भी दुनिया भारत की ओर देख रही है.
हमें चिप, एआई, डेटा सेंटर के लिए एनर्जी की ज़रूरत है. एनर्जी सिक्युरिटी बहुत ज़रूरी है. इसके लिए हमने परमाणु ऊर्जा के लिए शांति बिल पास कराए हैं. परमाणु एनर्जी में आत्मनिर्भर होने की दिशा में हमने क़दम रखा है.
एनर्जी सिक्युरिटी में भी भारत ने क़दम बढ़ाए हैं.
देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ता है. यह हमारी ग़लत सोच के कारण था.
पहले समुद्री तट का 99 प्रतिशत हिस्सा नो गो एरिया घोषित कर रखा था. यह सोच की दारिद्रता थी. हमने इस नो गो एरिया को 'गो अहेड एरिया' बना दिया. हमने उसके अंदर भी नए भंडार खोजने की कोशिश शुरू कर दी है.
इसके लिए हमने 85000 करोड़ रुपये की लागत से समुद्र मंथन योजना की घोषणा करके क़दम बढ़ा दिया है.
2014 से पहले हमारे देश में सिर्फ़ 70 शहरों में पाइप से गैस की व्यवस्था थी. 12 साल में इसे 700 शहरों तक फैला दिया है. ये होती है रफ़्तार.
2014 के पहले 20-22 लाख घरों की बजाय आज पौने दो करोड़ घरों में पाइप से गैस पहुंचाने का काम हो रहा है.
साल 2014 में दो गीगा वाट सोलर एनर्जी थी, आज इसे 160 गीगा वाट तक पहुंचा दिया है.
रेलवे के इलेक्ट्रीफिकेशन का काम 1925 में शुरू हुआ लेकिन 90 साल में सिर्फ 30 प्रतिशत रेल का इलेक्ट्रिफ़िकेशन हो पाया था.
हमारी रफ़्तार देखिए कि हमने एक दशक के अंदर 70 प्रतिशत काम पूरा कर दिया है.
इसके कारण डीजल की बचत हुई, बिजली के कारण पर्यावरण को फ़ायदा हुआ.
देश ने पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन शुरू कर दी है. यह सबसे लंबी और सबसे ताकतवर ट्रेन है.
पिछले 12 सालों में बहुत सारे संकटों का सामना करना पड़ा. कोरोना माहामारी ने पुरी दुनिया की व्यवस्था चरमारा गई. इससे निकले तो युद्धों का संकट आ गया. एक तरफ़ रूस यूक्रेन में युद्ध तो दूसरी तरफ़ पश्चिम एशिया में युद्ध का संकट.
लेकिन कुछ लोगों ने देश को डराना, चिंतित रखना, वैक्सीन नहीं मिलेगी, कोविड में लोग बचेंगे नहीं, कुछ नहीं होने वाला जैसी बातें करते थे.
वेस्ट एशिया का संकट आया तो कहा गया कि पेट्रोल नहीं मिलेगा, खाद नहीं मिलेगी, गैस नहीं मिलेगा. कुछ लोगों को ये चिंता फैलाकर कर आनंद आ रहा है. लेकिन हम इतने संकट के बावजूद नागरिक देवो भव के विचार से इन संकटों से पार पाया.
आज देश में गैस भी है, पेट्रोल, यूरिया भी है. हम आज खड़े हैं. सब काम हो रहा है.
वैश्विक बाज़ार में यूरिया के दाम 3000 रुपए प्रति बोरी चल रही है. आज हम अपने किसानों को 300 रुपये में दे पा रहे हैं.
डीएपी का बाज़ार दुनिया में पाँच हज़ार पहुँच गया है लेकिन हम इसे कम दाम में किसानों को उपलब्ध करा रहे हैं.
2047 विकसित भारत का लक्ष्य एक मज़बूत नींव पर खड़ा है. सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, अगला एक चौथाई अत्यंत महत्वपूर्ण है. अब हम रुक नहीं सकते, हमारी दिशा तय हो गई है.
अब हमें अपना वर्क कल्चर बदलना होगा, काम की गति भी बदलना होगा. जो काम पांच दशक में नहीं हुए, उसे अगले पांच साल में पूरा करना है.
हमें रिफ़ॉर्म करना होगा. हम रिफ़ार्म एक्सप्रेस की ओर बढ़ गए हैं. हम आने वाले समय में रिफ़ार्म की ओर आगे बढ़ेंगे. हर चीज़ में रिफ़ार्म करना होगा.
विकसित भारत बनाने के लिए एक नई धारा चाहिए. शक्ति की सप्तधारा का आह्वान करता हूं.
अह देश को नई ऊंचाई देंगे. भारत की युवा शक्ति की सामर्थ्य को भारत के विकास में जोड़ा जाएगा.
मैन्युफ़ैक्चरिंग को बहुत आगे बढ़ाना होगा, प्रोडक्शन बढ़ाने के साथ साथ छोटे छोटे पुर्जे बनाने होंगे, और बड़ी मशीनरी भी बनानी होगी.
किसान केमिकल फ्री खेती को बल देंगे.
हम इसी रास्ते विकसित भारत का सपना साकार करेंगे. हमें रिफ़ॉर्म करते रहना होगा. हम रिफ़ॉर्म मजबूरी में नहीं कन्विक्शन से कर रहे हैं.
विकसित भारत में युवाओं की बड़ी भूमिका है, इसका सबसे बड़ा लाभार्थी भी युवा है. विकसित भारत के लक्ष्य को युवा के साथ जोड़ना है.
ढाई लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप हैं. एक लाख करोड़ रुपये इसके लिए रखा गया है, जो युवाओं को सपनों को पंख देगा.
इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का ज़िक्र करते हुए कहा कि मैं सभी राजनीतिक दलों से लाल क़िले से तिरंगे झंडे के नीचे से प्रार्थना करता हूं कि उन महिलाओं के सम्मान में आगे आइए और विधानसभाओं और संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने में अपना योगदान कीजिए.
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